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वेदांत टीवी परिवार की ओर से आप सभी को मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

5 years ago | [YT] | 3

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वेदांत टीवी परिवार की ओर से महाराजजी के प्राकट्य दिवस पर उनके पावन चरणों में कोटि कोटि वंदन सह मंगलमय शुभकामनाएं

5 years ago | [YT] | 2

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शंख के प्रकार ||


भगवान श्रीकृष्ण के शंख का क्या नाम था?
भगवान श्रीकृष्ण के पास पाञ्चजन्य शंख था। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध के बाद अपना पाञ्चजन्य शंख पराशर ऋषि के तीर्थ में रखा था। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि श्रीकृष्ण का यह शंख आदि बद्री में सुरक्षित रखा है।
अर्जुन के शंख का क्या नाम था?
देवदत्त शंख: यह शंख महाभारत में अर्जुन के पास था। वरुणदेव ने उन्हें यह भेंट में दिया था। इसका उपयोग दुर्भाग्यनाशक माना गया है। माना जाता है कि इस शंख का उपयोग न्याय क्षेत्र में विजय दिलवाता है। न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोग इसकी पूजा कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इस शंख को शक्ति का प्रतीक भी माना गया है।
भीमसेन के शंख का क्या नाम था?
पौण्ड्र शंख: पोंड्रिक या पौण्ड्र शंख महाभारत में ‍भीष्म के पास था। जिस व्यक्ति में आत्मविश्वास की कमी हो उन्हें यह पौण्‍ड्र शंख रखना चाहिए। इसके घर में रखे होने से मनोबल बढ़ता है। अधिकतर इसका उपयोग विद्यार्थियों के लिए उत्तम माना गया है। इसे विद्यार्थियों के अध्ययन कक्ष में पूर्व की ओर रखना चाहिए।
युधिष्ठिर के शंख का क्या नाम था?
युधिष्ठिर के शंख का नाम अनन्तविजय था।
नकुल के शंख का क्या नाम था?
नकुल के शंख का नाम सुघोषमणि था।
सहदेव के शंख का क्या नाम था?
सहदेव के शंख का नाम मणिपुष्पक था।
भीष्म के शंख का क्या नाम था?
भीष्म के शंख का नाम गंगनाभ था।
कर्ण के शंख का क्या नाम था?
कर्ण के शंख का नाम हिरण्यगर्भ था।
धर्ष्टद्युमना के शंख का क्या नाम था?
धर्ष्टद्युमना के शंख का नाम यज्ञघोष था।
दुर्योधन के शंख का क्या नाम था?
दुर्योधन के शंख का नाम विदारक था।
शंख की पूजा का मंत्र
विश्व का सबसे बड़ा शंख केरल राज्य के गुरुवयूर के श्रीकृष्ण मंदिर में सुशोभित है, जिसकी लंबाई लगभग आधा मीटर है तथा वजन दो किलोग्राम है।
शंख को समुद्रज, कंबु, सुनाद, पावनध्वनि, कंबु, कंबोज, अब्ज, त्रिरेख, जलज, अर्णोभव, महानाद, मुखर, दीर्घनाद, बहुनाद, हरिप्रिय, सुरचर, जलोद्भव, विष्णुप्रिय, धवल, स्त्रीविभूषण, पाञ्चजन्य, अर्णवभव आदि नामों से भी जाना जाता है।
कामधेनु शंख, गोमुखी शंख, महालक्ष्मी शंख, कौरी शंख, वीणा शंख, देव शंख, चक्र शंख, राक्षस शंख, शनि शंख, राहु शंख, पंचमुखी शंख, वालमपुरी शंख, बुद्ध शंख, केतु शंख, शेषनाग शंख, कच्छप शंख, शेर शंख, कुबार गदा शंख, सुदर्शन शंक, विष्णु शंख, पांचजन्य शंख, अन्नपूर्णा शंख, मोती शंख, हीरा शंख, टाइगर शंख आदि।
उपरोक्त सभी तरह के शंख किसी न किसी विशेष कार्य और लाभ के लिए घर में रखे जाते हैं। इनमें से अधिकतर तो दुर्लभ है जिनके यहां मात्र नाम दिए जा रहे हैं। भगवान शंकर रुद्र शंख को बजाते थे जबकि उन्होंने त्रिपुरासुर के संहार के समय त्रिपुर शंख बजाया था।
द्विधासदक्षिणावर्तिर्वामावत्तिर्स्तुभेदत:
दक्षिणावर्तशंकरवस्तु पुण्ययोगादवाप्यते
यद्गृहे तिष्ठति सोवै लक्ष्म्याभाजनं भवेत्
शंख कई प्रकार के होसकते हैं, परंतु मुख्य रूप से इनके 3 प्रमुख प्रकार हैं: वामावर्ती, दक्षिणावर्ती तथा गणेश शंख या मध्यवर्ती शंख।
1. गणेश शंख: समुद्र मंथन के दौरान रत्न के रूप में सर्वप्रथम गणेश शंख की ही उत्पत्ति हुई थी। इसे गणेश शंख इसलिए कहते हैं क्योंकि इसकी आकृति गणेशजी जैसी पिरामिडनुमा होती है, शंख में निहित सूंड का रंग अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्ययुक्त होता है। प्रकृति के रहस्य की अनोखी झलक गणेश शंख के दर्शन से मिलती है। यह शंख दरिद्रतानाशक और धन प्राप्ति का कारक है।
2. दक्षिणावर्ती शंख: इस शंख को दक्षिणावर्ती इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसका पेट दाईं और खुलता है। इस शंख को देवस्वरूप माना गया है। दक्षिणावर्ती शंख के पूजन से खुशहाली आती है और लक्ष्मी प्राप्ति के साथ-साथ संपत्ति भी बढ़ती है। दक्षिणावर्ती शंख 2 प्रकार के होते हैं नर और मादा। जिसकी परत मोटी हो और भारी हो वह नर और जिसकी परत पतली हो और हल्का हो, वह मादा शंख होता है।
3. वामवर्ती शंख: वामवर्ती शंख का पेट बाईं ओर खुला होता है। इसकी ध्वनि से रोगोत्पादक कीटाणु कमजोर पड़ जाते हैं। यह शंख आसानी से मिल जाता है, क्योंकि यह बहुतायत में पैदा होता है।

5 years ago | [YT] | 6

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श्री जगन्नाथ के बीमार होने का राज जानकर आप अपने आंसू रोक नहीं पाओगे ||
माना जाता है कि देव स्नान पूर्णिमा के बाद, देवता बीमार पड़ जाते हैं। देवताओं के स्नान के लिए कुल 108 औषधिक एवं सुगंधित पानी के बर्तन का उपयोग किया जाता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के इस शाही स्नान समारोह के 15 दिन बाद तक तीनों देवता सार्वजनिक दर्शन से दूर रहते हैं। इस अवधि को अनासार अवधि के रूप में जाना जाता है। इस अवधि के दौरान, भक्त जगन्नाथ मंदिर में भगवान की एक झलक के दर्शन भी नहीं कर पाते।
अनासार के दौरान जब भगवान जगन्नाथ बीमार हो जाते हैं, तब अलारनाथ मंदिर परिसर मे भगवान को खीर का भोग लगाया जाता है तथा साथ ही साथ भक्तों को भी यही भोग भेंट किया जाता है। इस मंदिर में भगवान विष्णु को भगवान अलारनाथ के रूप में पूजा जाता है। मंदिर मे प्रतिष्ठित भगवान विष्णु अपने विग्रह रूप के साथ-साथ, प्रार्थना मुद्रा मे अपने वाहन गरुड़ के साथ विराजमान हैं। भगवान विष्णु की चार भुजाएँ हैं, उनके ऊपरी दाहिने हाथ में चक्र, निचले दाहिने हाथ में कमल, ऊपरी बाएँ हाथ में शंख तथा निचले बाएँ हाथ में क्लब. भगवान कृष्ण की पत्नी रानी रुक्मिणी एवं सत्यभामा भी मंदिर मे विराजमान हैं।
श्री जगन्नाथ के बीमार होने का राज जानकर आप अपने आंसू रोक नहीं पाओगे
ऐसा माना जाता है कि प्रसाद के रूप में खीर खाने के बाद अस्वस्थ लोग स्वस्थ हो जाते हैं। अतः यह खीर अस्वस्थ लोगों के लिए एक दवा के रूप में काम करती है। इस मंदिर को मुख्य रूप से प्रमुखता तब मिली, जब सोलहवीं शताब्दी में श्री चैतन्य महाप्रभु ने भगवान जगन्नाथ के रूप में यहाँ भगवान अलारनाथ के दर्शन किए। तब से यह स्थान भगवान जगन्नाथ के अस्थायी निवास स्थान के रूप में लोकप्रिय हो गया है। इन दिनों मंदिर में भगवान अलारनाथ को रोजाना उतनी ही मात्रा में प्रसाद चढ़ाया जाता है, जितनी मात्रा से सामान्य दिनो मे, पुरी के भगवान जगन्नाथ को चढ़ाया जाता है।
स्नाना यात्रा के बाद आषाढ़ के कृष्णपक्ष के दौरान अलारनाथ मंदिर मे भक्तों की संख्या अत्यधिक बढ़ जाती है। लोगों का मानना है कि ब्रह्मागिरि के अलारनाथ मंदिर में, जो कि पुरी से लगभग 18 किमी दूर है, और भगवान विष्णु को समर्पित है, अलारनाथ भगवान जगन्नाथ रूप में प्रकट होते हैं।

5 years ago | [YT] | 4

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शकुनि से जुड़ी कुछ जानकारियाँ..

शकुनि के पिता का क्या नाम था?
शकुनि के पिता का नाम राजा सुबल था।

शकुनी की माता का क्या नाम था?
शकुनि की माता का नाम सुदर्मा था।

शकुनि किस देश का राजा था?
शकुनि गांधार का राजा था जो वर्तमान मे अफगानिस्तान मैं है।

शकुनि की पत्नी का क्या नाम था?
शकुनि की पत्नी का नाम आरशी था।

शकुनि के बेटे का क्या नाम था?
शकुनि के पुत्र का नाम उलूक था।

शकुनि का वध किसने किया था?
शकुनि का वध पांडु पुत्र सहदेव ने किया था।

महाभारत के युद्ध मे शकुनी के पुत्र का वध किसने किया था?
शकुनि एवं उनके पुत्र का वध पांडु पुत्र सहदेव ने ही किया था।

युद्ध में सहदेव ने वीरतापूर्वक युद्ध करते हुए शकुनि और उलूक को घायल कर दिया और देखते ही देखते उलूक का वध दिया। अपने पुत्र का शव देखकर शकुनि को बहुत दु:ख हुआ और वह युद्ध छोड़कर भागने लगा। सहदेव ने शकुनि का वध युद्ध के 18वे दिन किया था। शकुनि के अन्य भाइयों ने भी युद्ध में हिस्सा लिया था। उनका वध अर्जुन ने किया था।

5 years ago | [YT] | 2

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वेदांत टीवी परिवार की तरफ से सभी देशवासियों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें
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5 years ago | [YT] | 1

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Money Problem Solutions : जानिये लक्ष्मी प्राप्ति के उपाय : आचार्य सरिता मिश्रा से
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5 years ago | [YT] | 0

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Karj Mukti Ke Upay: बड़े से बड़ा कर्ज खत्म करने के सरल उपाय | Karz Nivaran Upay
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5 years ago | [YT] | 0

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Lakshmi Ko Kaise Prasann Karen: माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए करे ये 5 उपाय : 5 Tips For money
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5 years ago | [YT] | 0