चंद्र ग्रहण 2026 (3 मार्च): सूतक काल, नियम और उपाय
साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगने वाला है। यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र पर लगेगा। चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक रहेगा। कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट होगी। भारत देश में यह ग्रहण सिर्फ 20 मिनट 28 सेकंड के लिए दिखाई देगा।
ये ग्रहण भारत में दिख रहा है इसलिए इसका सूतक भी माना जाएगा। ग्रहण काल में किया गया जप-ध्यान और भगवान का स्मरण अनंत गुना फलदायी होता है।
सूतक काल का समय
चन्द्र ग्रहण से 9 घंटे पूर्व सूतक प्रारंभ हो जाता है।
सूतक आरंभ : 3 मार्च 2026 (मंगलवार), सुबह 6:20 बजे
सूतक समाप्त : ग्रहण समाप्ति के साथ शाम 6:47 बजे
सूतक में क्या न करें?
1. पूजा, हवन, शुभ कार्य, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य न करें।
2. भोजन बनाना/खाना नहीं चाहिए।
3. बाल/नाखून काटना, दाढ़ी बनाना नहीं चाहिए।
4. यात्रा व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।
5. तामसिक भोजन, मांस-मदिरा का उपयोग नहीं करना चाहिए।
6. गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान सुई, चाकू व नुकीली 0 वस्तुओं से बचना चाहिए।
संजय ने कहाः हे राजन्! पाण्डवों की सेना की व्यूहरचना का अवलोकन कर राजा दुर्योधन ने अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास जाकर इस प्रकार के शब्द कहे।
धृतराष्ट्र इस बात की पुष्टि करना चाहता था कि क्या उसके पुत्र अब भी युद्ध करने के उत्तरदायित्व का निर्वहन करेंगे? संजय धृतराष्ट्र के इस प्रश्न के तात्पर्य को समझ गया और उसने ऐसा कहकर कि पाण्डवों की सेना व्यूह रचना कर युद्ध करने को तैयार है, यह पुष्टि की कि युद्ध अवश्य होगा। फिर उसके पश्चात उसने वार्ता का विषय बदलते हुए यह बताया कि दुर्योधन क्या कर रहा था। धृतराष्ट्र का ज्येष्ठ पुत्र दुर्योधन निर्दयी और दुष्ट प्रवृत्ति का था। धृतराष्ट्र के जन्म से अंधा होने के कारण व्यावहारिक रूप से हस्तिनापुर के शासन की बागडोर दुर्योधन के हाथों में थी। वह पाण्डवों के साथ अत्यधिक ईर्ष्या करता था और कठोरता से उनका दमन करना चाहता था ताकि वह हस्तिनापुर पर निर्विरोध शासन कर सके। उसने यह कल्पना की थी कि पाण्डव कभी भी इतनी विशाल सेना एकत्रित नही कर सकते जो उसकी सेना का सामना कर सके। किन्तु अपने आंकलन के विपरीत पाण्डवों की विशाल सेना को देखकर दुर्योधन व्याकुल और हतोत्साहित हो गया। ऐसे में दुर्योधन का अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास जाना यह दर्शाता है कि वह युद्ध के परिणाम के संबंध में भयभीत था। वह द्रोणाचार्य के प्रति अपना आदर प्रकट करने का ढोंग करते हुए, उनके पास गया किन्तु वास्तव में वह अपनी चिन्ता को कम करना चाहता था। इसलिए उसने अगले श्लोक से आरंभ होने वाले नौ श्लोकों में इस प्रकार से कहा।
सञ्जय उवाच।दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा।आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत् ॥2॥
संजय ने कहाः हे राजन्! पाण्डवों की सेना की व्यूहरचना का अवलोकन कर राजा दुर्योधन ने अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास जाकर इस प्रकार के शब्द कहे।
धृतराष्ट्र इस बात की पुष्टि करना चाहता था कि क्या उसके पुत्र अब भी युद्ध करने के उत्तरदायित्व का निर्वहन करेंगे? संजय धृतराष्ट्र के इस प्रश्न के तात्पर्य को समझ गया और उसने ऐसा कहकर कि पाण्डवों की सेना व्यूह रचना कर युद्ध करने को तैयार है, यह पुष्टि की कि युद्ध अवश्य होगा। फिर उसके पश्चात उसने वार्ता का विषय बदलते हुए यह बताया कि दुर्योधन क्या कर रहा था। धृतराष्ट्र का ज्येष्ठ पुत्र दुर्योधन निर्दयी और दुष्ट प्रवृत्ति का था। धृतराष्ट्र के जन्म से अंधा होने के कारण व्यावहारिक रूप से हस्तिनापुर के शासन की बागडोर दुर्योधन के हाथों में थी। वह पाण्डवों के साथ अत्यधिक ईर्ष्या करता था और कठोरता से उनका दमन करना चाहता था ताकि वह हस्तिनापुर पर निर्विरोध शासन कर सके। उसने यह कल्पना की थी कि पाण्डव कभी भी इतनी विशाल सेना एकत्रित नही कर सकते जो उसकी सेना का सामना कर सके। किन्तु अपने आंकलन के विपरीत पाण्डवों की विशाल सेना को देखकर दुर्योधन व्याकुल और हतोत्साहित हो गया। ऐसे में दुर्योधन का अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास जाना यह दर्शाता है कि वह युद्ध के परिणाम के संबंध में भयभीत था। वह द्रोणाचार्य के प्रति अपना आदर प्रकट करने का ढोंग करते हुए, उनके पास गया किन्तु वास्तव में वह अपनी चिन्ता को कम करना चाहता था। इसलिए उसने अगले श्लोक से आरंभ होने वाले नौ श्लोकों में इस प्रकार से कहा।
सञ्जय उवाच।दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा।आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत् ॥2॥
संजय ने कहाः हे राजन्! पाण्डवों की सेना की व्यूहरचना का अवलोकन कर राजा दुर्योधन ने अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास जाकर इस प्रकार के शब्द कहे।
धृतराष्ट्र इस बात की पुष्टि करना चाहता था कि क्या उसके पुत्र अब भी युद्ध करने के उत्तरदायित्व का निर्वहन करेंगे? संजय धृतराष्ट्र के इस प्रश्न के तात्पर्य को समझ गया और उसने ऐसा कहकर कि पाण्डवों की सेना व्यूह रचना कर युद्ध करने को तैयार है, यह पुष्टि की कि युद्ध अवश्य होगा। फिर उसके पश्चात उसने वार्ता का विषय बदलते हुए यह बताया कि दुर्योधन क्या कर रहा था। धृतराष्ट्र का ज्येष्ठ पुत्र दुर्योधन निर्दयी और दुष्ट प्रवृत्ति का था। धृतराष्ट्र के जन्म से अंधा होने के कारण व्यावहारिक रूप से हस्तिनापुर के शासन की बागडोर दुर्योधन के हाथों में थी। वह पाण्डवों के साथ अत्यधिक ईर्ष्या करता था और कठोरता से उनका दमन करना चाहता था ताकि वह हस्तिनापुर पर निर्विरोध शासन कर सके। उसने यह कल्पना की थी कि पाण्डव कभी भी इतनी विशाल सेना एकत्रित नही कर सकते जो उसकी सेना का सामना कर सके। किन्तु अपने आंकलन के विपरीत पाण्डवों की विशाल सेना को देखकर दुर्योधन व्याकुल और हतोत्साहित हो गया। ऐसे में दुर्योधन का अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास जाना यह दर्शाता है कि वह युद्ध के परिणाम के संबंध में भयभीत था। वह द्रोणाचार्य के प्रति अपना आदर प्रकट करने का ढोंग करते हुए, उनके पास गया किन्तु वास्तव में वह अपनी चिन्ता को कम करना चाहता था। इसलिए उसने अगले श्लोक से आरंभ होने वाले नौ श्लोकों में इस प्रकार से कहा।कर सके। उसने यह कल्पना की थी कि पाण्डव कभी भी इतनी विशाल सेना एकत्रित नही कर सकते जो उसकी सेना का सामना कर सके। किन्तु अपने आंकलन के विपरीत पाण्डवों की विशाल सेना को देखकर दुर्योधन व्याकुल और हतोत्साहित हो गया। ऐसे में दुर्योधन का अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास जाना यह दर्शाता है कि वह युद्ध के परिणाम के संबंध में भयभीत था। वह द्रोणाचार्य के प्रति अपना आदर प्रकट करने का ढोंग करते हुए, उनके पास गया किन्तु वास्तव में वह अपनी चिन्ता को कम करना चाहता था। इसलिए उसने अगले श्लोक से आरंभ होने वाले नौ श्लोकों में इस प्रकार से कहा।
धृतराष्ट्र ने कहाः हे संजय! कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि पर युद्ध करने की इच्छा से एकत्रित होने के पश्चात, मेरे और पाण्डु पुत्रों ने क्या किया?
राजा धृतराष्ट्र जन्म से नेत्रहीन होने के अतिरिक्त आध्यात्मिक ज्ञान से भी वंचित था। अपने पुत्रों के प्रति अथाह मोह के कारण वह सत्यपथ से च्युत हो गया था और पाण्डवों के न्यायोचित राज्याधिकार को हड़पना चाहता था। अपने भतीजों पाण्डव पुत्रों के प्रति उसने जो अन्याय किया था, उसका उसे भलीभांति बोध था। इसी अपराध बोध के कारण वह युद्ध के परिणाम के संबंध में चिन्तित था। इसलिए धृतराष्ट्र संजय से कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि जहाँ युद्ध होने वाला था-की घटनाओं के संबंध में जानकारी ले रहा था।इस श्लोक में धृतराष्ट्र ने संजय से यह प्रश्न पूछा कि उसके और पाण्डव पुत्रों ने युद्धभूमि में एकत्रित होने के पश्चात क्या किया? अब यह एकदम स्पष्ट था कि वे युद्धभूमि में केवल युद्ध करने के उद्देश्य के लिए एकत्रित हुए थे। इसलिए यह स्वाभाविक ही था कि वे युद्ध करेंगे। धृतराष्ट्र को ऐसा प्रश्न करने की आवश्यकता क्यों पड़ी कि उन्होंने युद्धभूमि में क्या किया? धृतराष्ट्र द्वारा 'धर्म क्षेत्रे', धर्मभूमि शब्द का प्रयोग करने से उसकी आशंका का पता चलता है। कुरुक्षेत्र पवित्र भूमि थी। शतपथ ब्राह्मण में इसका वर्णन 'कुरुक्षेत्र देव यजनम्' के रूप में किया गया है अर्थात 'कुरुक्षेत्र स्वर्ग की देवताओं की तपोभूमि है।' इसलिए इस भूमि पर धर्म फलीभूत होता है। धृतराष्ट्र आशंकित था कि कुरुक्षेत्र की पावन धर्म भूमि के प्रभाव के परिणामस्वरूप उसके पुत्रों में कहीं उचित और अनुचित में भेद करने का ऐसा विवेक जागृत न हो जाए कि वे यह सोचने लगें कि अपने स्वजन पाण्डवों का संहार करना अनुचित और धर्म विरूद्ध होगा और कहीं ऐसा विचार कर वे शांति के लिए समझौता करने को तैयार न हो जाएं। इस प्रकार की संभावित आशंकाओं के कारण धृतराष्ट्र के मन में अत्यंत निराशा उत्पन्न हुई। वह सोचने लगा कि यदि उसके पुत्रों ने युद्ध विराम या संधि का प्रस्ताव स्वीकार किया तो पाण्डव निरन्तर उनकी उन्नति के मार्ग में बाधा उत्पन्न करेंगे। साथ ही साथ वह युद्ध के परिणामों के प्रति भी संदिग्ध था और अपने पुत्रों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति सुनिश्चित होना चाहता था। इसलिए उसने संजय से कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में हो रही गतिविधियों के संबंध में पूछा। जहाँ दोनों पक्षों की सेनाएं एकत्रित हुई थीं। इसलिए यह स्वाभाविक ही था कि वे युद्ध करेंगे। धृतराष्ट्र को ऐसा प्रश्न करने की आवश्यकता क्यों पड़ी कि उन्होंने युद्धभूमि में क्या किया? धृतराष्ट्र द्वारा 'धर्म क्षेत्रे', धर्मभूमि शब्द का प्रयोग करने से उसकी आशंका का पता चलता है। कुरुक्षेत्र पवित्र भूमि थी। शतपथ ब्राह्मण में इसका वर्णन 'कुरुक्षेत्र देव यजनम्' के रूप में किया गया है अर्थात 'कुरुक्षेत्र स्वर्ग की देवताओं की तपोभूमि है।' इसलिए इस भूमि पर धर्म फलीभूत होता है। धृतराष्ट्र आशंकित था कि कुरुक्षेत्र की पावन धर्म भूमि के प्रभाव के परिणामस्वरूप उसके पुत्रों में कहीं उचित और अनुचित में भेद करने का ऐसा विवेक जागृत न हो जाए कि वे यह सोचने लगें कि अपने स्वजन पाण्डवों का संहार करना अनुचित और धर्म विरूद्ध होगा और कहीं ऐसा विचार कर वे शांति के लिए समझौता करने को तैयार न हो जाएं इस प्रकार की संभावित आशंकाओं के कारण धृतराष्ट्र के मन में अत्यंत निराशा उत्पन्न हुई। वह सोचने लगा कि यदि उसके पुत्रों ने युद्ध विराम या संधि का प्रस्ताव स्वीकार किया तो पाण्डव निरन्तर उनकी उन्नति के मार्ग में बाधा उत्पन्न करेंगे। साथ ही साथ वह युद्ध के परिणामों के प्रति भी संदिग्ध था और अपने पुत्रों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति सुनिश्चित होना चाहता था। इसलिए उसने संजय से कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में हो रही गतिविधियों के संबंध में पूछा। जहाँ दोनों पक्षों की सेनाएं एकत्रित हुई थीं।
भाजपा + शिवसेना + रिपाई महायुती द्वारा वार्ड ४४ से श्रीमती संगीता ज्ञानमूर्ति शर्मा जी को एक बार फिर अधिकृत उम्मीदवार बनाया जाना, उनके उत्कृष्ट कार्य, सशक्त नेतृत्व और जनता से जुड़े गहरे विश्वास का प्रमाण है। यह निर्णय उनके निरंतर सेवा भाव, ईमानदार प्रयासों और विकासोन्मुख सोच के प्रति महायुती के अटूट विश्वास को दर्शाता है। इस गौरवपूर्ण अवसर पर श्रीमती संगीता शर्मा जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। 💐 हमें पूर्ण विश्वास है कि उनके नेतृत्व में वार्ड 44 निरंतर प्रगति और समृद्धि के पथ पर अग्रसर रहेगा। #Bjp#bjp4mumbai#BMCElection2026#BMC#victory#mumbai#Ward44
भदोही में हत्या की साजिश का पर्दाफाश, ग्राम प्रधान गिरफ्तार
भदोही। थाना भदोही क्षेत्र के घसकरी गांव में वाहन से टक्कर मारकर की गई हत्या के मामले में पुलिस ने प्रमुख आरोपी ग्राम प्रधान मनीष कुमार यादव को गिरफ्तार कर लिया है। यह वही मामला है जिसमें मृतक कमलाकांत दुबे ने गांव के प्रधान के खिलाफ जिला प्रशासन से जांच की मांग की थी, जिसके बाद जिलाधिकारी द्वारा प्रधान की वित्तीय शक्तियों पर रोक लगा दी गई थी।
10 दिसंबर की रात करीब 10 बजे कमलाकांत दुबे को एक तेज रफ्तार वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट हुआ कि यह दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या की नियत से की गई टक्कर थी।
मृतक के परिजनों की तहरीर पर मेहीलाल यादव, मुन्ना लाल यादव, सुजीत यादव और मनीष कुमार यादव के खिलाफ थाना भदोही में मुकदमा दर्ज किया गया। सभी आरोपी ग्राम प्रधान के परिवार से जुड़े बताए जा रहे हैं।
कमलाकांत दुबे ने हाल ही में ग्राम प्रधान के विरुद्ध वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों के पास शिकायत दी थी। शिकायत के आधार पर डीएम ने प्रधान की वित्तीय शक्तियों पर रोक लगा दी थी। इसी प्रकरण को लेकर विवाद बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
एसपी अभिमन्यु मांगलिक के निर्देश पर पुलिस टीम ने सघन चेकिंग अभियान चलाया। मुखबिर की सूचना पर जयरामपुर मोड़ से हत्या की साजिश में शामिल आरोपी मनीष कुमार यादव (उम्र 35 वर्ष) को गिरफ्तार कर न्यायालय भेज दिया गया।
अब भी 3 आरोपी फरार
फरार आरोपी—
मेहीलाल यादव,
मुन्ना लाल यादव,
सुजीत यादव
पुलिस इनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस टीम
इस कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक सच्चिदानंद पांडेय, हेड कांस्टेबल अजय सिंह, कांस्टेबल अभिषेक पाल, अनूप कुशवाहा, शाहरूख खान एवं चालक अजीत यादव शामिल रहे।
पुलिस का कहना है कि शेष आरोपियों को भी जल्द ही गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।
आज से, पूरे देश में नए लेबर कोड लागू हो गए हैं, जो यह पक्का करते हैं:
✅ सभी वर्कर के लिए समय पर मिनिमम वेज की गारंटी ✅ युवाओं के लिए अपॉइंटमेंट लेटर की गारंटी ✅ महिलाओं के लिए बराबर वेतन और सम्मान की गारंटी ✅ 40 करोड़ वर्कर के लिए सोशल सिक्योरिटी ✅ फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉई को एक साल बाद ग्रेच्युटी की गारंटी ✅ 40 साल से ज़्यादा उम्र के वर्कर के लिए सालाना फ्री हेल्थ चेक-अप ✅ ओवरटाइम के लिए डबल सैलरी ✅ हाई-रिस्क सेक्टर में वर्कर के लिए 100% हेल्थ सिक्योरिटी ✅ इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के हिसाब से वर्कर के लिए सोशल जस्टिस की गारंटी
ये रिफॉर्म सिर्फ बदलाव नहीं हैं—ये मेहनती मजदूरों की भलाई के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का लिया गया एक ऐतिहासिक फैसला है। ये नए लेबर रिफॉर्म आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक अहम कदम हैं और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को तेज़ी देंगे।
Kuldeep Shukla
एनकाउंटर में इनामी *"शहजाद"* मारा गया-
यूपी सहारनपुर के बदमाश शहजाद पर 44 से अधिक मुकदमे दर्ज थे, गौतस्करी में वांछित चल रहा था।
UP +YOGI = UPYOGI 🔥🔥
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Kuldeep Shukla
जय श्री राम
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Kuldeep Shukla
चंद्र ग्रहण 2026 (3 मार्च): सूतक काल, नियम और उपाय
साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगने वाला है। यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र पर लगेगा। चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक रहेगा। कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट होगी। भारत देश में यह ग्रहण सिर्फ 20 मिनट 28 सेकंड के लिए दिखाई देगा।
ये ग्रहण भारत में दिख रहा है इसलिए इसका सूतक भी माना जाएगा। ग्रहण काल में किया गया जप-ध्यान और भगवान का स्मरण अनंत गुना फलदायी होता है।
सूतक काल का समय
चन्द्र ग्रहण से 9 घंटे पूर्व सूतक प्रारंभ हो जाता है।
सूतक आरंभ : 3 मार्च 2026 (मंगलवार), सुबह 6:20 बजे
सूतक समाप्त : ग्रहण समाप्ति के साथ शाम 6:47 बजे
सूतक में क्या न करें?
1. पूजा, हवन, शुभ कार्य, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य न करें।
2. भोजन बनाना/खाना नहीं चाहिए।
3. बाल/नाखून काटना, दाढ़ी बनाना नहीं चाहिए।
4. यात्रा व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।
5. तामसिक भोजन, मांस-मदिरा का उपयोग नहीं करना चाहिए।
6. गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान सुई, चाकू व नुकीली 0 वस्तुओं से बचना चाहिए।
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Kuldeep Shukla
सञ्जय उवाच ।दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा ।आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत् ।। 2।।
संजय ने कहाः हे राजन्! पाण्डवों की सेना की व्यूहरचना का अवलोकन कर राजा दुर्योधन ने अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास जाकर इस प्रकार के शब्द कहे।
धृतराष्ट्र इस बात की पुष्टि करना चाहता था कि क्या उसके पुत्र अब भी युद्ध करने के उत्तरदायित्व का निर्वहन करेंगे? संजय धृतराष्ट्र के इस प्रश्न के तात्पर्य को समझ गया और उसने ऐसा कहकर कि पाण्डवों की सेना व्यूह रचना कर युद्ध करने को तैयार है, यह पुष्टि की कि युद्ध अवश्य होगा। फिर उसके पश्चात उसने वार्ता का विषय बदलते हुए यह बताया कि दुर्योधन क्या कर रहा था। धृतराष्ट्र का ज्येष्ठ पुत्र दुर्योधन निर्दयी और दुष्ट प्रवृत्ति का था। धृतराष्ट्र के जन्म से अंधा होने के कारण व्यावहारिक रूप से हस्तिनापुर के शासन की बागडोर दुर्योधन के हाथों में थी। वह पाण्डवों के साथ अत्यधिक ईर्ष्या करता था और कठोरता से उनका दमन करना चाहता था ताकि वह हस्तिनापुर पर निर्विरोध शासन कर सके। उसने यह कल्पना की थी कि पाण्डव कभी भी इतनी विशाल सेना एकत्रित नही कर सकते जो उसकी सेना का सामना कर सके। किन्तु अपने आंकलन के विपरीत पाण्डवों की विशाल सेना को देखकर दुर्योधन व्याकुल और हतोत्साहित हो गया। ऐसे में दुर्योधन का अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास जाना यह दर्शाता है कि वह युद्ध के परिणाम के संबंध में भयभीत था। वह द्रोणाचार्य के प्रति अपना आदर प्रकट करने का ढोंग करते हुए, उनके पास गया किन्तु वास्तव में वह अपनी चिन्ता को कम करना चाहता था। इसलिए उसने अगले श्लोक से आरंभ होने वाले नौ श्लोकों में इस प्रकार से कहा।
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Kuldeep Shukla
सञ्जय उवाच।दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा।आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत् ॥2॥
संजय ने कहाः हे राजन्! पाण्डवों की सेना की व्यूहरचना का अवलोकन कर राजा दुर्योधन ने अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास जाकर इस प्रकार के शब्द कहे।
धृतराष्ट्र इस बात की पुष्टि करना चाहता था कि क्या उसके पुत्र अब भी युद्ध करने के उत्तरदायित्व का निर्वहन करेंगे? संजय धृतराष्ट्र के इस प्रश्न के तात्पर्य को समझ गया और उसने ऐसा कहकर कि पाण्डवों की सेना व्यूह रचना कर युद्ध करने को तैयार है, यह पुष्टि की कि युद्ध अवश्य होगा। फिर उसके पश्चात उसने वार्ता का विषय बदलते हुए यह बताया कि दुर्योधन क्या कर रहा था। धृतराष्ट्र का ज्येष्ठ पुत्र दुर्योधन निर्दयी और दुष्ट प्रवृत्ति का था। धृतराष्ट्र के जन्म से अंधा होने के कारण व्यावहारिक रूप से हस्तिनापुर के शासन की बागडोर दुर्योधन के हाथों में थी। वह पाण्डवों के साथ अत्यधिक ईर्ष्या करता था और कठोरता से उनका दमन करना चाहता था ताकि वह हस्तिनापुर पर निर्विरोध शासन कर सके। उसने यह कल्पना की थी कि पाण्डव कभी भी इतनी विशाल सेना एकत्रित नही कर सकते जो उसकी सेना का सामना कर सके। किन्तु अपने आंकलन के विपरीत पाण्डवों की विशाल सेना को देखकर दुर्योधन व्याकुल और हतोत्साहित हो गया। ऐसे में दुर्योधन का अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास जाना यह दर्शाता है कि वह युद्ध के परिणाम के संबंध में भयभीत था। वह द्रोणाचार्य के प्रति अपना आदर प्रकट करने का ढोंग करते हुए, उनके पास गया किन्तु वास्तव में वह अपनी चिन्ता को कम करना चाहता था। इसलिए उसने अगले श्लोक से आरंभ होने वाले नौ श्लोकों में इस प्रकार से कहा।
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Kuldeep Shukla
सञ्जय उवाच।दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा।आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत् ॥2॥
संजय ने कहाः हे राजन्! पाण्डवों की सेना की व्यूहरचना का अवलोकन कर राजा दुर्योधन ने अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास जाकर इस प्रकार के शब्द कहे।
धृतराष्ट्र इस बात की पुष्टि करना चाहता था कि क्या उसके पुत्र अब भी युद्ध करने के उत्तरदायित्व का निर्वहन करेंगे? संजय धृतराष्ट्र के इस प्रश्न के तात्पर्य को समझ गया और उसने ऐसा कहकर कि पाण्डवों की सेना व्यूह रचना कर युद्ध करने को तैयार है, यह पुष्टि की कि युद्ध अवश्य होगा। फिर उसके पश्चात उसने वार्ता का विषय बदलते हुए यह बताया कि दुर्योधन क्या कर रहा था। धृतराष्ट्र का ज्येष्ठ पुत्र दुर्योधन निर्दयी और दुष्ट प्रवृत्ति का था। धृतराष्ट्र के जन्म से अंधा होने के कारण व्यावहारिक रूप से हस्तिनापुर के शासन की बागडोर दुर्योधन के हाथों में थी। वह पाण्डवों के साथ अत्यधिक ईर्ष्या करता था और कठोरता से उनका दमन करना चाहता था ताकि वह हस्तिनापुर पर निर्विरोध शासन कर सके। उसने यह कल्पना की थी कि पाण्डव कभी भी इतनी विशाल सेना एकत्रित नही कर सकते जो उसकी सेना का सामना कर सके। किन्तु अपने आंकलन के विपरीत पाण्डवों की विशाल सेना को देखकर दुर्योधन व्याकुल और हतोत्साहित हो गया। ऐसे में दुर्योधन का अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास जाना यह दर्शाता है कि वह युद्ध के परिणाम के संबंध में भयभीत था। वह द्रोणाचार्य के प्रति अपना आदर प्रकट करने का ढोंग करते हुए, उनके पास गया किन्तु वास्तव में वह अपनी चिन्ता को कम करना चाहता था। इसलिए उसने अगले श्लोक से आरंभ होने वाले नौ श्लोकों में इस प्रकार से कहा।कर सके। उसने यह कल्पना की थी कि पाण्डव कभी भी इतनी विशाल सेना एकत्रित नही कर सकते जो उसकी सेना का सामना कर सके। किन्तु अपने आंकलन के विपरीत पाण्डवों की विशाल सेना को देखकर दुर्योधन व्याकुल और हतोत्साहित हो गया। ऐसे में दुर्योधन का अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास जाना यह दर्शाता है कि वह युद्ध के परिणाम के संबंध में भयभीत था। वह द्रोणाचार्य के प्रति अपना आदर प्रकट करने का ढोंग करते हुए, उनके पास गया किन्तु वास्तव में वह अपनी चिन्ता को कम करना चाहता था। इसलिए उसने अगले श्लोक से आरंभ होने वाले नौ श्लोकों में इस प्रकार से कहा।
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Kuldeep Shukla
धृतराष्ट्र उवाच।धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ॥1॥
धृतराष्ट्र ने कहाः हे संजय! कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि पर युद्ध करने की इच्छा से एकत्रित होने के पश्चात, मेरे और पाण्डु पुत्रों ने क्या किया?
राजा धृतराष्ट्र जन्म से नेत्रहीन होने के अतिरिक्त आध्यात्मिक ज्ञान से भी वंचित था। अपने पुत्रों के प्रति अथाह मोह के कारण वह सत्यपथ से च्युत हो गया था और पाण्डवों के न्यायोचित राज्याधिकार को हड़पना चाहता था। अपने भतीजों पाण्डव पुत्रों के प्रति उसने जो अन्याय किया था, उसका उसे भलीभांति बोध था। इसी अपराध बोध के कारण वह युद्ध के परिणाम के संबंध में चिन्तित था। इसलिए धृतराष्ट्र संजय से कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि जहाँ युद्ध होने वाला था-की घटनाओं के संबंध में जानकारी ले रहा था।इस श्लोक में धृतराष्ट्र ने संजय से यह प्रश्न पूछा कि उसके और पाण्डव पुत्रों ने युद्धभूमि में एकत्रित होने के पश्चात क्या किया? अब यह एकदम स्पष्ट था कि वे युद्धभूमि में केवल युद्ध करने के उद्देश्य के लिए एकत्रित हुए थे। इसलिए यह स्वाभाविक ही था कि वे युद्ध करेंगे। धृतराष्ट्र को ऐसा प्रश्न करने की आवश्यकता क्यों पड़ी कि उन्होंने युद्धभूमि में क्या किया? धृतराष्ट्र द्वारा 'धर्म क्षेत्रे', धर्मभूमि शब्द का प्रयोग करने से उसकी आशंका का पता चलता है। कुरुक्षेत्र पवित्र भूमि थी। शतपथ ब्राह्मण में इसका वर्णन 'कुरुक्षेत्र देव यजनम्' के रूप में किया गया है अर्थात 'कुरुक्षेत्र स्वर्ग की देवताओं की तपोभूमि है।' इसलिए इस भूमि पर धर्म फलीभूत होता है। धृतराष्ट्र आशंकित था कि कुरुक्षेत्र की पावन धर्म भूमि के प्रभाव के परिणामस्वरूप उसके पुत्रों में कहीं उचित और अनुचित में भेद करने का ऐसा विवेक जागृत न हो जाए कि वे यह सोचने लगें कि अपने स्वजन पाण्डवों का संहार करना अनुचित और धर्म विरूद्ध होगा और कहीं ऐसा विचार कर वे शांति के लिए समझौता करने को तैयार न हो जाएं। इस प्रकार की संभावित आशंकाओं के कारण धृतराष्ट्र के मन में अत्यंत निराशा उत्पन्न हुई। वह सोचने लगा कि यदि उसके पुत्रों ने युद्ध विराम या संधि का प्रस्ताव स्वीकार किया तो पाण्डव निरन्तर उनकी उन्नति के मार्ग में बाधा उत्पन्न करेंगे। साथ ही साथ वह युद्ध के परिणामों के प्रति भी संदिग्ध था और अपने पुत्रों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति सुनिश्चित होना चाहता था। इसलिए उसने संजय से कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में हो रही गतिविधियों के संबंध में पूछा। जहाँ दोनों पक्षों की सेनाएं एकत्रित हुई थीं।
इसलिए यह स्वाभाविक ही था कि वे युद्ध करेंगे। धृतराष्ट्र को ऐसा प्रश्न करने की आवश्यकता क्यों पड़ी कि उन्होंने युद्धभूमि में क्या किया? धृतराष्ट्र द्वारा 'धर्म क्षेत्रे', धर्मभूमि शब्द का प्रयोग करने से उसकी आशंका का पता चलता है। कुरुक्षेत्र पवित्र भूमि थी। शतपथ ब्राह्मण में इसका वर्णन 'कुरुक्षेत्र देव यजनम्' के रूप में किया गया है अर्थात 'कुरुक्षेत्र स्वर्ग की देवताओं की तपोभूमि है।' इसलिए इस भूमि पर धर्म फलीभूत होता है। धृतराष्ट्र आशंकित था कि कुरुक्षेत्र की पावन धर्म भूमि के प्रभाव के परिणामस्वरूप उसके पुत्रों में कहीं उचित और अनुचित में भेद करने का ऐसा विवेक जागृत न हो जाए कि वे यह सोचने लगें कि अपने स्वजन पाण्डवों का संहार करना अनुचित और धर्म विरूद्ध होगा और कहीं ऐसा विचार कर वे शांति के लिए समझौता करने को तैयार न हो जाएं
इस प्रकार की संभावित आशंकाओं के कारण धृतराष्ट्र के मन में अत्यंत निराशा उत्पन्न हुई। वह सोचने लगा कि यदि उसके पुत्रों ने युद्ध विराम या संधि का प्रस्ताव स्वीकार किया तो पाण्डव निरन्तर उनकी उन्नति के मार्ग में बाधा उत्पन्न करेंगे। साथ ही साथ वह युद्ध के परिणामों के प्रति भी संदिग्ध था और अपने पुत्रों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति सुनिश्चित होना चाहता था। इसलिए उसने संजय से कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में हो रही गतिविधियों के संबंध में पूछा। जहाँ दोनों पक्षों की सेनाएं एकत्रित हुई थीं।
3 months ago | [YT] | 3
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Kuldeep Shukla
भाजपा + शिवसेना + रिपाई महायुती द्वारा वार्ड ४४ से श्रीमती संगीता ज्ञानमूर्ति शर्मा जी को एक बार फिर अधिकृत उम्मीदवार बनाया जाना, उनके उत्कृष्ट कार्य, सशक्त नेतृत्व और जनता से जुड़े गहरे विश्वास का प्रमाण है।
यह निर्णय उनके निरंतर सेवा भाव, ईमानदार प्रयासों और विकासोन्मुख सोच के प्रति महायुती के अटूट विश्वास को दर्शाता है।
इस गौरवपूर्ण अवसर पर श्रीमती संगीता शर्मा जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। 💐
हमें पूर्ण विश्वास है कि उनके नेतृत्व में वार्ड 44 निरंतर प्रगति और समृद्धि के पथ पर अग्रसर रहेगा।
#Bjp #bjp4mumbai #BMCElection2026 #BMC #victory #mumbai #Ward44
3 months ago | [YT] | 4
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Kuldeep Shukla
भदोही में हत्या की साजिश का पर्दाफाश, ग्राम प्रधान गिरफ्तार
भदोही। थाना भदोही क्षेत्र के घसकरी गांव में वाहन से टक्कर मारकर की गई हत्या के मामले में पुलिस ने प्रमुख आरोपी ग्राम प्रधान मनीष कुमार यादव को गिरफ्तार कर लिया है। यह वही मामला है जिसमें मृतक कमलाकांत दुबे ने गांव के प्रधान के खिलाफ जिला प्रशासन से जांच की मांग की थी, जिसके बाद जिलाधिकारी द्वारा प्रधान की वित्तीय शक्तियों पर रोक लगा दी गई थी।
10 दिसंबर की रात करीब 10 बजे कमलाकांत दुबे को एक तेज रफ्तार वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट हुआ कि यह दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या की नियत से की गई टक्कर थी।
मृतक के परिजनों की तहरीर पर मेहीलाल यादव, मुन्ना लाल यादव, सुजीत यादव और मनीष कुमार यादव के खिलाफ थाना भदोही में मुकदमा दर्ज किया गया। सभी आरोपी ग्राम प्रधान के परिवार से जुड़े बताए जा रहे हैं।
कमलाकांत दुबे ने हाल ही में ग्राम प्रधान के विरुद्ध वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों के पास शिकायत दी थी। शिकायत के आधार पर डीएम ने प्रधान की वित्तीय शक्तियों पर रोक लगा दी थी। इसी प्रकरण को लेकर विवाद बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
एसपी अभिमन्यु मांगलिक के निर्देश पर पुलिस टीम ने सघन चेकिंग अभियान चलाया। मुखबिर की सूचना पर जयरामपुर मोड़ से हत्या की साजिश में शामिल आरोपी मनीष कुमार यादव (उम्र 35 वर्ष) को गिरफ्तार कर न्यायालय भेज दिया गया।
अब भी 3 आरोपी फरार
फरार आरोपी—
मेहीलाल यादव,
मुन्ना लाल यादव,
सुजीत यादव
पुलिस इनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस टीम
इस कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक सच्चिदानंद पांडेय, हेड कांस्टेबल अजय सिंह, कांस्टेबल अभिषेक पाल, अनूप कुशवाहा, शाहरूख खान एवं चालक अजीत यादव शामिल रहे।
पुलिस का कहना है कि शेष आरोपियों को भी जल्द ही गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।
3 months ago | [YT] | 0
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Kuldeep Shukla
मोदी सरकार की गारंटी: हर वर्कर का सम्मान!
आज से, पूरे देश में नए लेबर कोड लागू हो गए हैं, जो यह पक्का करते हैं:
✅ सभी वर्कर के लिए समय पर मिनिमम वेज की गारंटी
✅ युवाओं के लिए अपॉइंटमेंट लेटर की गारंटी
✅ महिलाओं के लिए बराबर वेतन और सम्मान की गारंटी
✅ 40 करोड़ वर्कर के लिए सोशल सिक्योरिटी
✅ फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉई को एक साल बाद ग्रेच्युटी की गारंटी
✅ 40 साल से ज़्यादा उम्र के वर्कर के लिए सालाना फ्री हेल्थ चेक-अप
✅ ओवरटाइम के लिए डबल सैलरी
✅ हाई-रिस्क सेक्टर में वर्कर के लिए 100% हेल्थ सिक्योरिटी
✅ इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के हिसाब से वर्कर के लिए सोशल जस्टिस की गारंटी
ये रिफॉर्म सिर्फ बदलाव नहीं हैं—ये मेहनती मजदूरों की भलाई के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का लिया गया एक ऐतिहासिक फैसला है। ये नए लेबर रिफॉर्म आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक अहम कदम हैं और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को तेज़ी देंगे।
#श्रमेव_जयते
#श्रमेवजयते
4 months ago | [YT] | 2
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