सभी महानुभावों को जय श्रीराम, यह चैनल हमने मनुष्य के एकमात्र धर्म सनातन के प्रति हो रहे अन्यायपूर्ण कृत्यों के प्रतिकार स्वरूप बनाया है ।
सनातन धर्म के प्रमाणिक शास्त्र-सम्मत एवं सार्वभौम सिद्धान्तों द्वारा समाज में व्याप्त विभिन्न मत-मतान्तर तथा भ्रॉंतियों को समाप्त करते हुए हिन्दुओं को सङ्गठित कर सुसंस्कृत, सुशिक्षित, सुरक्षित, संपन्न, सेवापरायण, स्वस्थ, सर्वहितप्रद व्यक्ति व समाज की संरचना, तदानुसार सबके हित का ध्यान रखते हुए हिन्दुओं के अस्तित्व और आदर्श की रक्षा ही हमारा उद्देश्य है ।
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॥धर्मेण हीना: पशुभि: समाना:॥
AHVAAN - Call Of Dharma
इस वीडियो में हिन्दू धर्म, परंपरा, ईश्वर की सर्वशक्तिमानता, कर्म, जन्म और भगवान जाप पूजा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर चर्चा की जाएगी।
जिसे भी इन विषयों से जुड़े प्रश्नों के उत्तर चाहिए, वह इस लाइव को जरूर देखे।
कमेंट के माध्यम से आपके प्रश्न भी लिए जाएंगे।
23 hours ago | [YT] | 20
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AHVAAN - Call Of Dharma
देख रहे हैं ना सब ! चोरी-चोरी चुपके-चुपके
यह अप्रमाणिक तो हो ही साथ ही साथ झूठा भी है एक नंबर का
पुरी के शंकराचार्य जी ने यह कब बोला की ईसा ने उनके मठ में शिक्षा ली? उन्होंने कहा कि पुरी में आकर किसी वैष्णवाचार्यों के यहां पर ईसा ने शिक्षा ली
पुरी के शंकराचार्य ने बाइबल द्वारा वेद विरोध करने वाले ईशा को वैष्णव नहीं बताया है, उन्होंने जिस ईसा को वैष्णव कहा है उसने कभी वेद विरोधी बाइबल नहीं दी अर्थात यदि आप ईशा को बाइबल मत द्वारा वैदिक विरोध करने के रूप में जानते हो तो उसे ईसा को कभी भी पुरी शंकराचार्य जी ने वैष्णव नहीं कहा है
निगमानंद की प्रशंशा पुरी शंकराचार्य जी ने कब की?
गुरुदेव ने जो बाद भागवत्पाद रामानुजाचार्य भगवान के सम्मान में कही उसमें भी अपने अनुसार व्याख्या करके दो पक्षों को लड़वाना चाह रहा है यह धूर्त क्योंकि जब तक यह दो पक्ष लड़ेंगे नहीं तब तक इसको बचने के लिए आश्रय नहीं प्राप्त होगा
छोटी बच्चियों से राखी बंधवाना उनके मत को मनाना हो गया इस हिसाब से हम पूरे दिन में न जाने कितने ऐसे लोगों से मिलते हैं जो अभी धर्म को ठीक तरह से प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं तो क्या हम उन सब के समर्थक हो गए
किसका विरोध कैसे करना है और किस आधार पर करना है यह सब तुम तय करोगे क्या? चलो मान लिया कि जिस शैली में तुम चाहते हो जिस तरीके से तुम चाहते हो इस आधार पर हम विरोध करेंगे तो तुम सिंगल चेचिस वाले लड़ोगे रामपाल से जो भगवती को गाली दे रहा है। इससे यही सिद्ध होता तुम्हारे जैसे दोहरे चरित्र वाले के लिए भगवती को अश्लील शब्द कह दिया जाना उतनी समस्या नहीं है जितना अधिक व्यक्तिगत रूप से तुम्हें कुछ कहे जाने पर आपत्ति है वरना बता दो कितनी बात समष्टी के लिए तुम कोर्ट गए हो?
स्वयं विद्या भास्कर जी महाराज से जब हमने रामपाल विषय में वक्तव्य निर्गत करने को कहा तो उन्होंने कहा की हमारे बहुत सारे प्रकल्प चल रहे हैं इसलिए हम ऐसे विवादित विषयों में कुछ नहीं बोलना चाहते उनके लिए लेख कब लिखने वाले हो?
ज्योतिष पीठ वाले महाराज के पास यदि हम जाते हैं तो वह चापलूसी है और यह जो पत्तेचाटी कर करके श्री संप्रदाय के पीछे छिपता है वह सब स्वीकार्य है
चलो तुम्हारी भाषा में ही पूछते हैं जब कोई स्त्री विद्या भास्कर जी महाराज को स्पर्शपूर्वक माल्यार्पण करती है तब निग्रह क्यों नहीं करते वहां तो कोई समष्टी की लड़ाई भी नहीं है?
पुरी के शंकराचार्य तो राजेंद्र दास जी महाराज की भी प्रशंसा करते हैं पर तुम उनके लिए तू थोड़ा करने से नहीं रुकते तो तू तड़ाक द्वारा निगमानंद का निग्रह कब करने वाले हो?
विद्या भास्कर जी महाराज का शिष्य कत्थक करता हुआ व्यास गद्दी पर जाता है वहां पर नठ की भांति अभिनय करता हुआ व्यास गद्दी को दूषित करता है तब तुम मौन क्यों रहते हो?
स्वयं से तो यह व्यक्ति किसी ऐसी जगह मिलने से बचता फिरता है जहां पर दोनों पक्षों के लिए एक समान वातावरण प्राप्त हो सके, यूं तो आमना सामना करने से भयभीत न होने का दावा करता है परंतु जब कभी इसके सामने पहुंच भी जाओ तो सामने आने पर यह व्यक्ति भीगी बिल्ली बन जाता है घबराहट के चलते उंगली में चद्दर से निकला हुआ धागा लपेटने लगता है। इसको ज्ञात है कि इसके द्वारा उठाए जाने वाले सभी प्रश्नों का निराकरण सामने वाले के पास है और यदि इसने उससे निष्पक्ष वातावरण में आमना सामना कर लिया तो इसकी मिट्टी कुट जाएगी इन्हीं विषयों के चलते पूज्य विद्या भास्कर जी महाराज के शिष्य को इन दिनों आगे किया है। क्यों यदि यह हमारे साथ चर्चा उचित नहीं समझता है तो इसके पक्ष से विद्या भास्कर जी के शिष्य का आगे आना यह स्वीकार क्यों कर रहा है? और यदि उचित समझता है तो यह स्वयं क्यों नहीं आता है?
धर्म युद्ध में धर्म की ओर से लड़ने वाले की एक बाध्यता होती है की कुछ भी हो जाए उसे धर्म की सीमा का उल्लंघन नहीं करना है जैसे कई फिल्मों में भी ऐसे दृश्य आए हैं जब इंस्पेक्टर का रोल करने वाले किसी नायक यह चिंता व्यक्त करता है कि हमें गिनती की गोलियां मिलती हैं जिनका जबकी अपराधी अपनी इच्छानुसार हम पर कितनी भी गोलियां चला सकते हैं।
बचपन में जब हम खेलने जाते थे तब साथ में एक लड़का ऐसा जाता था जो नाली में गेंद जाने पर निकाल लाता था, उसके लिए नाली में हाथ डालना और गंगा में हाथ डालना एक ही बात थी क्योंकि वह लड़का सिद्धांत विहीन था भागवतानंद भी ठीक उसी लड़के की भांति है सिद्धांत विहीन होने के कारण इसको कुछ भी करने में कोई लज्जा अथवा कोई संकोच नहीं है।
इसी कारण इस धर्म युद्ध में हमारी बाध्यता और उन्हीं विषयों में स्वयं की स्वतंत्रता का यह व्यक्ति सदैव लाभ लेने का प्रयास करता रहा है।
इसके पास सदैव बचने का एक ही शस्त्र होता है; विषयांतर, जिस वीडियो में जिस जगह जो भी प्रश्न किया जाएगा यह उसका जवाब देने की बजाय नए प्रश्न खड़े कर देगा जब उनका जवाब दिया जाएगा तो यह और नए प्रश्न खड़े कर देगा
10-10 बार स्वयं से पोस्ट करेगा और अपने चेले चापड़ों से भी करवाएगा पर यह नहीं बताया कि इसकी गुरु परंपरा क्या है यदि है तो यह अपने आचार्यों निग्रह करेगा या नहीं यदि करेगा तो वह इसके गुरु अथवा शब्द प्रमाण कैसे सिद्ध होंगे इत्यादि इत्यादि।
खैर; यदि धर्म की यह बाध्यता न होती तो महाभारत और रामायण के युद्ध में कुछ भी विषेश न होता क्योंकि युद्ध में बल का प्रदर्शन कर सामने वाले को चित्त करना उतना कठिन नहीं होता जितना कठिन धर्म और अधर्म का निर्णय करना होता है, हमें भी ऐसा ही युद्ध मिला है यह भगवान की कृपा नहीं तो और क्या है?
इसीलिए ऐसी स्थिति में यह कहावत ठीक बैठती है
झुंड में वार करने वाला शेर नहीं ठग होता है,
और दुश्मन अगर कायदे का हो तो उसे मारने का मजा ही अलग होता है
जय श्रीराम 🙏
3 days ago | [YT] | 136
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AHVAAN - Call Of Dharma
@-Saralsanskritvyakaran अरुण पांडे नामक एक मूर्ख रट्टू तोते ने लगभग २ घंटे का वीडियो इस संबंध में बनाया है कि भागवतानंद और मेरी चर्चा में किस तरह से भागवतानंद का पक्ष मजबूत सिद्ध होता है। उस पूरे वीडियो में उसने यह बताने का प्रयास किया है कि शिवांश नारायण द्विवेदी किस-किस प्रकार से गलत हैं। यदि दुर्जनतोष न्याय से उसके सभी आरोपों को स्वीकार कर भी लिया जाए, तो इसे उसकी अंधभक्ति व चाटुकारिता ही कहेंगे कि वह यह न बताने पर भी कि भागवतानंद की गुरु परंपरा क्या है, भागवतानंद का पक्ष प्रस्तुत करने के संबंध में आनंदित हो रहा है; जबकि वीडियो के प्रारंभ में ही उसने भी यह बात स्वीकार की है कि चर्चा भागवतानंद की प्रमाणिकता के संबंध में थी।
अरुण पांडे को हमारा संदेश है कि जब तुम इसमें कूद ही पड़े हो, तो माघ मेले वाली चर्चा को आधार बनाते हुए एक लाइव स्ट्रीम में तुम हमारे साथ प्रत्यक्ष चर्चा करके भागवतानंद के उसी पक्ष को प्रस्तुत कर दो, जिसे तुम बंद कमरे में बैठकर प्रस्तुत कर रहे हो।
इस व्यक्ति ने वीडियो के अंत में एक और आरोप लगाया कि जब इसने हमारे वीडियो पर कमेंट किया और हमने इसे लाइव आने के लिए कहा, तो इसके प्रस्ताव स्वीकार करने के बाद हमने इसका कमेंट डिलीट कर दिया। इस मूर्ख को यह ज्ञात होना चाहिए कि यूट्यूब पर तकनीकी त्रुटियों के कारण कई बार कमेंट्स किसी को दिखाई देते हैं और किसी को नहीं। हमने कभी किसी का कमेंट डिलीट नहीं किया है—जब तक कि वह गाली-गलौज न हो या चर्चा समाप्त होने के बाद भी कोई निरंतर कमेंट सेक्शन में आकर 'विधवा विलाप' न करने लगा हो।
हाँ, यह संभव है कि कमेंट्स की अधिकता के कारण हम इसकी स्वीकृति पर प्रतिक्रिया न दे पाए हों, परंतु लाइव चर्चा के विषय में हमने अपना पक्ष पूरी तरह सार्वजनिक कर रखा है और अपना फोन नंबर भी उपलब्ध कराया है। ऐसे में, यदि कोई भी हमारे प्रस्ताव पर लाइव चर्चा के लिए तैयार है, तो उसे स्वयं हमारे सार्वजनिक नंबर पर संपर्क करना चाहिए था। भागवतानंद की चाटुकारिता करते समय जब इसे उसके पक्ष की इतनी सारी बातें ज्ञात थीं, तो क्या भागवतानंद से हमारा संपर्क सूत्र लेना इसके लिए कठिन था? या फिर इसे अपनी कायरता को पोषित करने का बहाना चाहिए था?
खैर, यद्यपि तुमने वीडियो में लाइव आने की स्वीकृति दी है, परंतु चर्चा सुनिश्चित करने हेतु कोई माध्यम नहीं दिया है। अतः, चर्चा का समय और स्वरूप निश्चित करने के लिए हमारे वीडियो में दिए गए नंबर पर व्हाट्सएप करो, अथवा यह बताओ कि तुमसे व्यक्तिगत संपर्क किस प्रकार किया जाए? क्या हवा में चर्चा कर लें?
चर्चा के विषय में हम अभी स्पष्ट कर देते हैं कि यदि तुम इसे अपने चैनल पर रखना चाहते हो, तो हमें कोई आपत्ति नहीं है—बशर्ते तुम चर्चा को डिलीट न करने और हमें भी उसे प्रसारित करने का अधिकार देने की शर्त स्वीकार करो।
जय श्रीराम 🙏
1 week ago (edited) | [YT] | 34
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AHVAAN - Call Of Dharma
परमानन्दसमुद्रोल्लासनिवासैकपूर्णिमाज्योत्स्ने।
श्रीमत्करपात्रचरणसरसीरुहपादुके वन्दे॥
परमानन्दरूप समुद्रके उल्लासके उद्गमस्थान पूर्णचन्द्रज्योतिःस्वरूप श्रीमत्करपात्रस्वामीके चरणकमलकी दोनों पादुकाओंकी वन्दना करता हूँ॥
संसृतिसागरनिपतल्लोकसमुद्धारकारणीभूते।
श्रीमत्करपात्रचरणसरसीरुहपादुके वन्दे॥
जन्म-मृत्यु, सुख-दुःखादिकी अनादि और अजस्र परम्परारूपसंसृतिसागरमें निमग्न प्राणियोंके समुद्धारमें हेतुस्वरूप श्रीमत्करपात्रस्वामीके चरणकमलकी दोनों पादुकाओंकी वन्दना करता हूँ॥
1 week ago | [YT] | 270
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AHVAAN - Call Of Dharma
इस्कॉन ब्रह्मचारी ने कहा वीडियो डिलीट करो #maghmelaprayagraj
1 week ago | [YT] | 21
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AHVAAN - Call Of Dharma
ब्रह्माकुमारी क्या छुपा रही हैं | क्यों कराया कैमरा बंद @brahmakumaris
1 week ago | [YT] | 12
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AHVAAN - Call Of Dharma
आमने-सामने प्रश्नों का उत्तर देने में असमर्थ भागवतानंद, फेसबुक पोस्ट के टिप्पणी-खंड में भी मौन साधे रहा। अब प्रश्नों से बचते हुए वह दृश्य-पटल से ही लुप्त होता प्रतीत हो रहा है
पोस्ट
कट्टर विरोधी के प्रांगण में व्यवस्था विषयक अभाव के चलते बृजेश पांडे द्वारा दी गई अश्लील गाली 'भोस...के' सहित इस चर्चा के कई महत्वपूर्ण अंश हमारे पास नहीं थे, यद्यपि अभी भी गाली का दृश्य तो हमें प्राप्त नहीं हो सका है परंतु भागवतानंद द्वारा निर्गत किए गए वीडियो के कारण मुख्य विषय से जुड़े शेष अन्य महत्वपूर्ण अंश हमें प्राप्त हो गए हैं। वीडियो के इस अंश में स्पष्ट दिख रहा है की किस प्रकार भागवतानंद का पालतू मेरे और भागवतानंद के बीच में बोल रहा है मेरे लिए अपमानजनक शब्दों का उपयोग कर रहा है और मैं तब भी प्रभु श्री राम द्वारा बताई गई मर्यादित भाषा का ही आलंबन लेकर उसका प्रतिकार कर रहा हूं, बस इसी क्रम में आगे बृजेश पांडे ने हमें उपरोक्त अश्लील शब्द द्वारा संबोधित किया था जिसके जवाब में हमने उसे दो-दो हाथ के लिए ललकारा और कहा कि "बाहर आ जाओ तुम्हें उठाकर पटक दुंगा" यद्यपि गाली देने की बात भले ही भागवतानंद स्वीकार न करे परंतु हमारे द्वारा की गई इस उठा पटक वाली बात को उसने अवश्य स्वीकार किया है ऐसे में बृजेश पांडे के हस्तक्षेप व दुर्व्यवहार प्रारंभ करने के बाद से हमारे बाहर आ जाने तक का वीडियो भागवतानंद ने भी क्यों जारी नहीं किया है, यह विचारणीय है; जबकि भागवतानंद के अनुसार वहां हमें गाली नहीं दी गई थी। इसके साथ ही साथ विचारणीय यह भी है कि इस गुलाम को बीच में बोलने की आवश्यकता क्या थी? क्या इसके बाबाजी निरुत्तर हो रहे थे? क्या इसके अनुसार वह स्वयं समर्थवान नहीं हैं?
खैर यदि कोई सच्चा सनातनी एसा हुआ जिसके फोन में वह दृश्य भी रिकॉर्ड हुआ हो एवं जिसकी आत्मा ने उसे सत्य को छुपाने के विषय में धिक्कारा तो हो सकता है भविष्य में हमें उन अंतिम क्षणों की वीडियो क्लिप भी मिल जाएगी तब इन धूर्तों को मुंह छुपाने की जगह भी नहीं मिलेगी
क्योंकि वहां केवल भागवतानंद की टटपुंजिया स्वरचित परंपरा के लोग नहीं थे वहां भगवत्पाद रामानुजाचार्य भगवान के परंपरा प्राप्त अनुगामी भी थे
जय श्रीराम
भागवतानंद का पोस्ट पर कमेंट #1
नकली स्क्रीनशॉट फैलाने वाले, नकली यौनरोगी और वेश्यागामी सिद्ध करने हेतु प्रायोजित इंटरव्यू लेने वाले, रोहिंग्या मिशनरी के विरुद्ध बने धर्मरक्षक वीडियो के विरुद्ध कोर्ट जाने वाले सच्चे सनातनी की आत्मा की दुहाई देकर गाली वाला वीडियो मांग रहे हैं !
भागवतानंद के पोस्ट पर किए गए कमेंट का शिवांश जी का रिप्लाई – #1
पूछे गए प्रश्न का उत्तर तो तुमसे दिया नहीं गया, हमारा परिचय देते समय फिर से न्यूनतम अधर्म कर बैठे - दुर्गा मां के लिए अश्लील बातें लिखने वालों के विरुद्ध लड़ने वाले, परंपराओं पर सवाल उठाकर सनातन धर्म के लिए ही खतरा बन जाने वाले के विरुद्ध लड़ने वाले, इस्कॉन आर्य समाज ब्रह्माकुमारी जैसे पाखंडियों के घर में घुसकर उनका चेहरा समाज के समक्ष लाने वाले श्रीमद जगद्गुरु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर के अल्पज्ञ शिष्य और श्री राम के साधारण भक्त, शेष जो तुम्हारे साथ हो रहा है जिसके लिए तुम विधवा विलाप कर रहे हो वह तुम्हारे अपने कर्मों का फल है अन्यथा सिद्ध करो कि हम तुम्हारे कोर्ट के विरुद्ध दिए गए वक्तव्यों के लिए कोर्ट कब गए? वैसे भी उन वीडियोज़ से तुमने कौन सी तोप चला ली थी किसका क्या भला हो गया था केवल तुम्हारे चैनल पर कोर्ट के विरोध के नाम पर एक और अमर्यादित वीडियो मात्र थे वो और कुछ नहीं।
मुझे इस बात का पूरा अंदेशा था कि जब तुम इस संदेश को पढ़ोगे तो तुम्हें इस बात का भय अवश्य होगा कि किसी धर्म परायण परंपरा प्राप्त रामानुजी की आत्मा जाग ना जाए और वह वीडियो क्लिप प्रसारित कर के तुम्हें नग्न न कर दे
क्योंकि वहां केवल तुम्हारी टटपुंजिया स्वरचित परंपरा के लोग नहीं थे वहां परंपरा प्राप्त भगवत्पाद रामानुजाचार्य भगवान के अनुगामी भी थे
भागवतानंद का फिर से कमेंट #2
हमने तुम्हें उत्तर भो दिया और भरपूर दिया किन्तु जिसका जनेऊ आधी उम्र बीतने के बाद हुआ हो, ऐसा अभक्ष्यभोजी, जो अनन्यता के नाटक में शास्त्रवाक्यद्रोही बना हो, उसे समझ में नहीं आयेगा। और तुम जैसों को उत्तर देने हेतु हम बाध्य भी नहीं है क्योंकि तुम्हारी योग्यता नहीं है। तुम्हें न ग्रंथ की माननी है, न अपने ही पूर्वाचार्यों की माननी है। नकली शांकर पीठों का समर्थन करना है क्योंकि तुम्हारे गुरु ने जाकर अभिषेक कर दिया। तुम्हारे ही कुतर्क के अनुसार आर्य समाजी का खंडन करने हेतु तुम्हें पहले उनके गुरु से उनका पक्ष पढ़ना पड़ेगा और चूंकि पढ़ लिया तो उस गुरु के विरुद्ध जा नहीं सकोगे। जितने ग्रंथ का दावा करते हो, सब तुम्हारे अनुसार निश्चलानंद जी ने ही बैठकर पढ़ाया होगा तुम्हें, है कि नहीं ? तुम्हारे जैसे लबार यूट्यूबर रोज पैदा होते एवं मरते हैं।
शिवांश जी का रिप्लाई – #2
Part 1
वाह, क्या उत्तर थे! #१ हम तुम्हें क्यों बताएं: तो फिर चर्चा शुरू क्यों की थी? #२ शास्त्र हमें आचार्य परंपरा से प्राप्त हुए: कौन सी परंपरा, नहीं पता। #३ हमने स्वाध्याय से शास्त्र प्राप्त किए: वाह भाई वाह! शास्त्र का स्वाध्याय नहीं होता है या स्वाध्याय से शस्त्र प्राप्त होते हैं? #४ भगवती ने कान में दिए, अतीत जन्मांतर से प्राप्त हैं: परंतु मोबाइल में देख-देख कर बताना पड़ता है। #५ वरदान - अधर्म नहीं हो सकता: वाक्-स्खलन अधर्म है ही नहीं; न्यून अधर्म हो सकता है। न्यून और अधिक के संबंध में कोई लिस्ट प्राप्त हुई है भगवती से? यह हम तुम्हें क्यों बताएं: अरे, तो बताने बैठे क्यों थे?
अपने वक्तव्य को जरा गौर से देख लेना, तुम्हें खुद नहीं पता है कि तुम्हें शास्त्र, सिद्धांत अथवा मंत्र कहां से प्राप्त हुए हैं। ऐसे में तुम्हें इंटरनेट या फिर ग्रंथ छापने वाले पब्लिकेशंस पर आश्रित नहीं माना जाए तो क्या माना जाए? यदि ऐसा है, तो तुम्हारे धर्म का निर्णायक वह पब्लिकेशन है जिसका छापा हुआ शास्त्र तुम पढ़ रहे हो।
तुम फिर सपने में दीक्षा लेने चले गए लगता है। नकली शंकर पीठ का समर्थन हमने कब कर दिया? तुमने पूछा सुमेरु पीठ के बारे में, हमने बता दिया। गोवर्धन पीठ के अंतर्गत आने वाली वह उप-पीठ थी, स्वतंत्र रूप से उसका अपना कोई अस्तित्व नहीं था। लोकाचार की दृष्टि से उसका माहात्म्य बताया गया है। एक तरफ तुम पी.एन. मिश्र का विरोध इसलिए करने का दिखावा करते हो क्योंकि वह करपात्री जी को 'नकली शंकराचार्य बनाने वाला' कहते हैं, फिर विषयांतर करने के चक्कर में खुद ही करपात्री जी को नकली शंकराचार्य बनाने वाला घोषित करते हो, वाह क्या कहना है!
विषय यह नहीं था कि सुमेरु पीठ असली है या नकली, विषय यह था कि जब करपात्री जी महाराज ने किसी पीठ को शंकराचार्य की पीठ माना है, तो गुरुदेव ने उसे ज्यों का त्यों क्यों नहीं माना? तो उत्तर यह है कि करपात्री जी महाराज ने उसे स्वतंत्र रूप से शंकराचार्य की पंचम पीठ कभी नहीं माना था और उनके प्रामाणिक शिष्य ने, करपात्री जी क्या सोचते थे, इससे हमें अवगत कराया है।
आदि शंकराचार्य जी के प्राकट्य को लेकर अपने गुरु में आस्थान्वित रहना इस अनन्यता से शास्त्र के किस वाक्य का विरोध हो रहा है बाबा जी क्योंकि हमने तो इसी इसी विषय में अनन्यता शब्द का उपयोग किया था।
तुम खुद माया मोह स्वरूप को सच्चिदानंद स्वरुप भगवान बता रहे हो
बाकी यदि तुम्हारी भाषा में हम कहें कि तुम अनाधिकारी हो और हम तुम्हें क्यों बताएं तो वह भी गलत नहीं होगा, क्यों बाबा जी
शिवांश जी का रिप्लाई – #3
part 2 जबकि वास्तविक विषय तो यह था कि तुम्हारे पास शास्त्र कैसे आए, सिद्धांत कैसे आया, वेद मंत्र कैसे आए? यदि किसी आचार्य परंपरा से आए हैं, तो तुम उसका निग्रह नहीं कर पाओगे, क्योंकि जो व्यक्ति एक जगह भी गलत बोल सकता है, तो वह तुम्हें वेद के नाम पर मंत्र भी झूठे दे सकता है, शास्त्र भी झूठे दे सकता है। यदि तुम किसी से प्राप्त शास्त्रों पर भरोसा करते हो एवं उसके अर्थ पर नहीं, तो इसे 'अर्धकुक्कुट न्याय' कहते हैं। निग्रह न कर पाने की स्थिति में निग्रह संप्रदाय का अस्तित्व कैसा?
'दुर्जनतोष न्याय' से मान भी लिया जाए कि मैं स्वयं को सही सिद्ध नहीं कर पाया, तो मेरे गलत होने से तुम्हारा सही होना सिद्ध नहीं होता। भूल गए?
drive.google.com/.../12bojwpj5qNQT84oOTZw.../view.….
बुद्ध और आर्य समाज का विरोध करते समय हम बुद्ध और आर्य समाज को जानने के विषय में उनका प्रतिनिधित्व करने वाले के समक्ष स्वयं को प्रामाणिक माने जाने का दावा नहीं करते, न ही उनकी ग्रंथावली अथवा सिद्धांत का सहारा लेकर उनके सिद्धांत को गलत सिद्ध करते हैं; अपितु हम तो स्वतंत्र रूप से परंपरा प्राप्त वैदिक मत (जिनके लिए हम बौद्धों और आर्य समाज पर निर्भर नहीं करते) उनके द्वारा बौद्धों अथवा समाजियों का खंडन करते हैं। हां, यह बात अवश्य है कि चूंकि आर्य समाज वेदों को मानने वाला होने का दावा करता है, इसलिए समाजियों से भी उनकी परंपरा पूछी जाती है।
जो व्यक्ति बाबा का भेष धारण करने के बाद भी मातृशक्तियों के लिए अश्लील गालियां बकता फिरता हो, जो अपनी फैंटेसीज के चक्कर में इलाज करवाता फिरता हो, मनोरोगी हो, जिसके शरीर में धातु कितनी बची हुई है यह उसकी गलती हुई हड्डियों से प्रकट होता हो; वह व्यक्ति सैद्धांतिक तौर पर हार जाने के बाद सामने वाले के व्यक्तिगत जीवन पर उंगली उठाने के अलावा और कर भी क्या सकता है भला? खैर जो भी हो, विलंब से यज्ञोपवीत धारण करने वाला मुझ जैसा शंकराचार्य का अल्पज्ञ शिष्य भी पर्याप्त है तुम जैसों के लिए। जब कहोगे, उठा के पटक देंगे तुम्हें युक्ति और प्रमाण से अथवा बाहुबल से। 'The Choice is Yours'.
और मूर्खता तो इस बात की है कि तुमने फिर बात को पूरी तरह समझे बिना ही अकल के घोड़े दौड़ा दिए, फिर कहोगे 'न्यूनतम अधर्म'। इस पोस्ट में उपरोक्त सभी विषयों से अलग एक प्रश्न रखा गया है, जिसका उत्तर देने की बात मैंने न कमेंट में कही थी; उस पर तुमने कमेंट तो किया था परंतु पोस्ट में पूछे गए प्रश्न का उत्तर फिर भी नहीं दिया और तुम पूरी की पूरी दूसरी चर्चा को ले आए। अब हमने तो तुम्हारे प्रांगण में आकर तुम्हें 10 से 12 बार निरुत्तर कर दिया है। यदि कुछ बाकी रह गया है और अब भी लगता है कि तुम सामना कर सकते हो हमारा, तो आ जाना। यदि समर्थ हो तो, हम तुम्हें अपने से नीचे नहीं बिठाएंगे और न ही कोई माई का लाल तुम्हें अपशब्द कह पाएगा, यह वचन देते हैं। बोलो कब आ रहे हो?
वैसे तुम जैसे कायर का उत्तर क्या होगा, यह ज्ञात है हमें और हां फिलहाल हमारे मरने की प्रार्थना करने वाले तुम अकेले नहीं हो रामपाल इत्यादि भी हैं अपनी परी साधना और बढ़ाओ फिर भी मन ना भरे तो रामपाल की खीर पी लेना शायद काम हो जाए, हमारा क्या है हमारे साथ श्रीरघुनाथ तो किस बात की चिंता हमें
1 week ago | [YT] | 137
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AHVAAN - Call Of Dharma
राम कृष्ण ही मोहम्मद और जीसस हैं?
क्रिया योग के नाम पर षडयंत्र
माघ मेला प्रयागराज
👉 अपने परिवार, मित्रों एवं परिचितों को भी अवश्य सूचित करें।
👉 Facebook, Instagram, WhatsApp, FB Page और Groups — सभी स्थानों पर पोस्ट करें।
2 weeks ago (edited) | [YT] | 29
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AHVAAN - Call Of Dharma
माघ-महोत्सव
3 weeks ago | [YT] | 165
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AHVAAN - Call Of Dharma
(Image-1)
यह बात बह्मकुमारी से संबंधित नहीं है। इस वीडियो में कई लोग स्वयं कह रहे हैं। यह बात समझी जा सकती है कि जब कोई व्यक्ति चर्चा के दौरान प्रश्नों के उत्तर नहीं दे पाता, तो ऐसा ही प्रतीत होता है। उसके अंध अनुयायी भी वही बोलते हैं।
(Image-2-3)
यह व्यक्ति पिछले एक वर्ष से लगातार वीडियो बना रहा है, सैकड़ों लोग उसे सुन रहे हैं। तब किसी भी बह्मकुमारी से जुड़े व्यक्ति ने यह नहीं कहा कि यह बह्मकुमारी से नहीं है। लेकिन जब इसके अज्ञान को सबके सामने उजागर कर दिया गया, तब सब कहने लगे कि यह बह्मकुमारी से नहीं है।
यह व्यक्ति स्वयं कमेंट भी कर रहा है, परंतु किसी भी बह्मकुमारी से जुड़े व्यक्ति ने उसके कमेंट में यह नहीं पूछा कि तुम बह्मकुमारी से कैसे हो। चैनल का नाम दिया गया है, कमेंट स्पष्ट रूप से दिख रहे हैं — जाकर पूछो न।
लेकिन कोई पूछता क्यों नहीं?
डर किस बात का है?
अरे मूर्खो! मैंने स्वयं कई बड़े-बड़े बह्मकुमारी से जुड़े लोगों से बातचीत की है। जाकर मेरी प्लेलिस्ट देखो।
और जो लोग कह रहे हैं कि “इससे बात करो, उससे बात करो” — यदि बातचीत करवा सकते हो तो करवा दो। नंबर दिया हुआ है। फिर मैं देता हूँ, लो भेजो, जिसे भेजना है चर्चा में।
एक बात स्पष्ट बता देता हूँ — ऐसे ही कमेंट आगे भी आते रहेंगे कि “यह बह्मकुमारी से नहीं है।”
ये लोग रुकने वाले नहीं हैं।
सब वीडियों जरुर देखे-
सीधी बात - भाग 1 ब्रह्माकुमार ने माना कि #brahmakumaries संस्था भ्रम फैलाती है
https://youtu.be/W1k9P9Ohmy8?si=KQq8_...
सीधी बात - भाग २ ब्रेनवाश का परिणाम : ब्रह्माकुमार या पगलाकुमार
https://youtu.be/haIFOu80c-M?si=DgutZ...
3 weeks ago (edited) | [YT] | 69
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