सभी महानुभावों को जय श्रीराम, यह चैनल हमने मनुष्य के एकमात्र धर्म सनातन के प्रति हो रहे अन्यायपूर्ण कृत्यों के प्रतिकार स्वरूप बनाया है ।
सनातन धर्म के प्रमाणिक शास्त्र-सम्मत एवं सार्वभौम सिद्धान्तों द्वारा समाज में व्याप्त विभिन्न मत-मतान्तर तथा भ्रॉंतियों को समाप्त करते हुए हिन्दुओं को सङ्गठित कर सुसंस्कृत, सुशिक्षित, सुरक्षित, संपन्न, सेवापरायण, स्वस्थ, सर्वहितप्रद व्यक्ति व समाज की संरचना, तदानुसार सबके हित का ध्यान रखते हुए हिन्दुओं के अस्तित्व और आदर्श की रक्षा ही हमारा उद्देश्य है ।
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॥धर्मेण हीना: पशुभि: समाना:॥
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ईश्वर के अस्तित्व का प्रमाण क्या है? Discussion with Atheist Harshit
2 days ago | [YT] | 15
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होलीका उत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ
5 days ago | [YT] | 119
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❗चन्द्रग्रहण ❗
मुख्य रूप से 6 बजे स्नानादि कर जप-सङ्कीर्तन आरंभ कर दें तथा 7 बजे पुनः सवस्त्र स्नान करें तथा आसन को भी धो लें। उससे पहले किसी भी अन्य वस्तु का स्पर्श न करें। ग्रहणकाल में अन्न-जल ग्रहण न करें, न ही मल-मूत्र त्याग करें (ग्रहण स्पर्श दोपहर 03:20 से हो रहा है परन्तु वह मान्य तभी होगा जब वह दृश्य हो अर्थात चन्द्रोदय के पश्चात - जिसका समय पृथक-पृथक स्थानों के अनुसार पृथक-पृथक रहेगा, परन्तु लगभग 6 बजे से आरंभ मानकर ग्रहणानुष्ठान प्रारंभ किये जाऍं।)
सूतक आज प्रातःकाल 6 से लग गया है, उत्तम पक्ष है कि सायं 06:47 तक कुछ भी ग्रहण न करें परन्तु अपने-अपने सामर्थ्यानुसार जल-अन्न का त्याग करें(कुछ भी नहीं तो फलाहार-दुग्धाहार तक सीमित रहें)। कम-से-कम 3 बजे के पश्चात से भोजन का पूर्ण त्याग कर दें एवं ग्रहण समाप्ति पर्यन्त तक न करें। पहले से पका भोजन-खाद्य पदार्थों में तुलसीदल/कुशा डाल दें।
सादर,
आह्वान धर्म रक्षार्थ सेवा समिति
6 days ago | [YT] | 125
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भागवतानंद प्रलाप भंजन : भाग १
🔎 मुख्य प्रश्न जिनका समाधान इस वीडियो में मिलेगा:
* “उच्छिष्ट” शब्द का वास्तविक अर्थ क्या है — जूठा या अवशिष्ट?
* क्या शबरी को “तपस्विनी”, “धर्माचारिणी”, “तपोधना”, “सिद्धा” कहे जाने का विशेष अर्थ है?
* कृष्णमृगचर्म और जटा धारण का शास्त्रीय किस वर्ण के लिए निर्देशित है?
* क्या श्रीराम ने कभी शास्त्रीय मर्यादा को लांघकर कोई आचरण किया?
* क्या श्रीराम द्वारा ब्रह्मभाव के आधार पर मर्यादा का उल्लंघन संभव है?
* क्या भुशुण्डि रामायण और वाल्मीकि रामायण के राम एक ही चरित्र दृष्टि से देखे जाने चाहिए?
* यदि श्रीराम सत्यप्रतिज्ञ हैं, तो क्या वे अपनी ही प्रतिज्ञा के विपरीत आचरण कर सकते हैं?
1 week ago (edited) | [YT] | 18
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वैचारिक कायरता: एडिटिंग का छद्म युद्ध और व्यक्तिगत आक्षेपों का सहारा
आजकल विचारों की लड़ाई तर्क और प्रमाण से कम, और क्लिपिंग व एडिटिंग से अधिक लड़ी जा रही है। जब किसी व्यक्ति में विमर्श की खुली रणभूमि में उतरने का साहस नहीं होता, तब वह ऐसे हथकंडों का सहारा लेता है। प्रत्यक्ष संवाद का साहस न जुटा पाने वाले लोग कट-पेस्ट और आंशिक वीडियो के माध्यम से तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने में अपनी ऊर्जा लगा रहे हैं। यह प्रवृत्ति वैचारिक दुर्बलता और नपुंसकता का स्पष्ट परिचायक है।
व्यक्तिगत आरोपों का आलंबन और कायरता
इस कायरता का एक नया रूप यह भी है कि जब लोग वैचारिक युद्ध में परास्त हो जाते हैं, तो वे व्यक्तिगत आक्षेपों, अपुष्ट आरोपों या राजनीतिक छींटाकशी का सहारा लेकर सामने वाले को गलत सिद्ध करने का प्रयास करते हैं। यह जानते हुए भी कि आज के लोकतांत्रिक समय में किसी पर झूठा आरोप लग जाना या कोई षड्यंत्रकारी वारदात घटित हो जाना कितना सरल है, यह जानते हुए भी कि इस प्रकार के आरोप प्रत्यारोपों से उनका भी पक्ष कभी अछूता नहीं रहा जबकि सर्वविदित है कि इस्लाम विरोध का सहारा लेकर प्रसिद्धि पाने वाले यह लोग स्वयं लव जिहाद का अड्डा संचालित करते हैं। ₹ 2100- 5100 लेकर हिंदू बेटियों को म्लेच्छों के हाथ में देते हैं और हां इसमें किसी भी प्रकार की पुष्टि की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह सब तो यह स्वयं सहर्ष स्वीकार करते हैं। यह ठीक ऐसे ही है जैसे म्लेच्छ देश में अंतर्जातीय संयोग से उत्पन्न होने वाला कोई पालतू कुत्ता किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा फेके गए टुकड़ों के लिए अपने मालिक को ही काटने लगे।
परंतु प्रश्न यह है कि क्या किसी व्यक्ति पर लगे असिद्ध आरोप या किसी आकस्मिक घटना से उस व्यक्ति द्वारा दिया जाने वाला "ज्ञान" गलत सिद्ध हो जाता है? कदापि नहीं। जो लोग वैचारिक मोर्चे पर टिक नहीं पाते, वे ही असिद्ध आरोपों के पीछे छिपकर स्वयं को विजयी घोषित करने का प्रयास करते हैं। यह ‘कलंक-कथा’ को ‘विजय-गाथा’ मान लेने जैसा भ्रम है तथा ऐसी ही कलंक कथा को विजय गाथा मान लेने पर यह स्वयं को आनंदित भी अनुभव करते हैं।
आनंद बनाम आनंदाभास
वास्तविकता में यह आनंद नहीं, बल्कि ‘आनंदाभास’ है। जिसने कभी वास्तविक बौद्धिक संघर्ष का स्वाद ही न चखा हो, अनुभव ही न किया हो, वह कायरतापूर्वक किए गए कार्यों से प्राप्त क्षणिक तुष्टि को ही अंतिम विजय मान बैठता है। उसे वास्तविक आनंद को जानने वाला भला किस प्रकार हो सकती है।
यह आनंदाभास ठीक उन्हीं समलैंगिक हिजड़ों के समान है, जिन्हें लगता है कि वे पुरुष के साथ संग करके वही सुख प्राप्त कर रहे हैं जो प्राकृतिक भोग से मिलता है। चूँकि उन्होंने कभी वास्तविक संभोग का सुख प्राप्त ही नहीं किया, इसलिए वे परस्पर रगड़न जैसी कृत्रिम क्रियाओं द्वारा प्राप्त होने वाली सूचनाओं को ही चरम सुख मान बैठते हैं।
जिसने वास्तविक वैचारिक जीत नहीं देखी, विजय का अनुभव नहीं किया, वह ऐसे ही प्रतीकात्मक और कृत्रिम क्रियाओं के प्रभाव से स्वयं को विजयी समझने लगता है।
वैचारिक रणभूमि के द्वंद में हार जाने वालों का अगला जन्म ही 'एडिटिंग और गाली' है। हमने कभी भी किसी के वीडियो का भाव बदलकर प्रस्तुत नहीं किया है। यदि किसी 'माई के लाल' में इस विषय पर भी आमने-सामने चर्चा करने का साहस है, तो उसका स्वागत है। विचार करने योग्य यह है कि जब हमने कभी खुली चर्चा के द्वार बंद ही नहीं किए, तो फिर नपुंसकता दर्शाते हुए भारी एडिटिंग करने की आवश्यकता क्या पड़ गई? इस प्रकार कृत्रिम प्रयासों द्वारा प्राप्त होने वाली विजय में सबसे बड़ा अभाव तो इस बात का होता है कि इस प्रकार हम केवल यह बताने में सक्षम सिद्ध होते हैं कि सामने वाला गलत किस प्रकार से है परंतु अपने पक्ष को पुष्ट करने के संबंध में हमारे पास कोई सामग्री नहीं है।
सत्य को संदर्भ से काट कर प्रस्तुत करना या किसी के व्यक्तिगत जीवन के संघर्षों का उपहास उड़ाना सरल है, परंतु संपूर्ण तर्क और प्रमाण के साथ डटकर खड़ा होना ही वास्तविक विजय है। बुद्धिमानों के बीच संवाद आमने-सामने, संदर्भ सहित और प्रमाणों के आधार पर होता है। कटे-फटे क्लिप और अपुष्ट आरोपों पर आधारित मनगढ़ंत निष्कर्ष कभी सत्य का स्थान नहीं ले सकते।
इसीलिए हम सदैव कहते हैं की यदि हमारा कोई विरोधी स्वयं को सत्य का पक्षधर समझता है तो वह प्रत्यक्ष सामना करने का साहस प्रकट करे अन्यथा मुंगेरीलाल के हसीन सपनों की दुनिया में डूबे रहने के लिए वह स्वतंत्र हैं प्रत्यक्ष वार्ता होगी तो दृश्य बदल जाएगा।
खैर नपुंसक मानसिकता वालों से एडिटिंग से बढ़कर कोई उम्मीद भी क्या की जा सकती है, हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि इस पोस्ट के बाद भी इस प्रकार के नपुंसक सामने आने का निर्णय लेने की बजाय अगली एडिटेड वीडियो अथवा कमेंटबाजी की तैयारी करेंगे, क्योंकि संभवत इन लोगों के यहां की माताओं ने पुरुषों को जन्म देना ही बंद कर दिया है। कोई बात नहीं , विरोधीयों के आक्रमण के समय उनके घर की स्त्रियों रक्षा भी हम ही कर लेंगे। क्योंकि यह एडिटिंग वॉरियर्स तो उस समय भी अपने घर की मातृशक्तियों के साथ हो रहे दुराचार का वीडियो बनाकर एडिटिंग करने की फिराक में ही बैठे मिलेंगे।
जय श्रीराम 🙏
1 week ago | [YT] | 65
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आर्य समाज के विद्वान के साथ हुई यह चर्चा आपको कैसी लगी? कृपया टिप्पणी करके अवश्य बताइए तथा इस वीडियो को अधिक से अधिक शेयर करें
1 week ago | [YT] | 12
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शास्त्रों में मिलावट करने वालों को प्रेमानंद जी का कठोर संदेश
2 weeks ago | [YT] | 15
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भागवतानंद का समर्थक आया समझाने -उत्तर ना होने पर इधर उधर भागने लगा
2 weeks ago | [YT] | 24
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महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
🚩🙏🏻
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जय श्री राम !!हर हर महादेव
3 weeks ago | [YT] | 161
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इस वीडियो में हिन्दू धर्म, परंपरा, ईश्वर की सर्वशक्तिमानता, कर्म, जन्म और भगवान जाप पूजा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर चर्चा की जाएगी।
जिसे भी इन विषयों से जुड़े प्रश्नों के उत्तर चाहिए, वह इस लाइव को जरूर देखे।
कमेंट के माध्यम से आपके प्रश्न भी लिए जाएंगे।
3 weeks ago | [YT] | 36
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