संत-महात्मा राम नाम जपाने के लिए इस दुनिया में आते हैं और उनका उद्देश्य ही समाज में फैली बुराइयों को खत्म करना होता है। अब तो वैज्ञानिकों ने भी मान लिया है कि मालिक के नाम का सुमिरन करने से ही आत्मबल आएगा जोकि सफलता की कुंजी है।
संत-महात्मा मनुष्य के आत्मबल को बढ़ाते हैं क्योंकि आत्मबल किसी दवा के खाने से नही बढ़ता।
सेवा-सुमिरन ही एक ऐसा तरीका है जिससे भावना शुद्ध हो सकती है। सुमिरन से ही विचारों को कंट्रोल किया जा सकता है। अगर मन सुमिरन में समय नही लगाने देता तो सेवा करनी चाहिए। सेवा में मन नही लगे तो सत्संग सुनना चाहिए। सत्संग में मन नही लगे तो पीर-फकीर के दर्शन कर लेने चाहिए क्योंकि ये सब एक-दूसरे की कड़ी है।
संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां।
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