कभी कभी अशांत मन , कितना अस्थिर कर देता है हमें, चिड़चिड़ापन,गुस्सैल रवैया, शांत, एकांत,बातों को अनसुना करना, आस पास की घटनाओं पर ध्यान न देना, खुद को सबसे किनारे कर लेना, बातों में हिस्सेदारों से बचना, शांत बैठ एक कोना पकड़, न जाने क्या कुछ सोचना, कभी कभी भर आना पलकों पर, कुछ मोतियों का , जिन्हें गालों पर लुढ़कते से पहले ही , अंगुलियों की पैरों से साफ कर देना, मन तो होता हैं कभी जोर जोर से चीखने का, पर सवालों के जवाब कौन दे सबको..? ये सोचकर पीड़ा को पी जाना, सबसे सरल लगता है तब, बहुत कठिन है न ये सब..? मगर कई बार जिंदगी के थपेड़ों से तंग आकर, ऐसी परिस्थिति सामने आ ही जाती है, जिसे न चाहते हुए भी सहना भी पड़ता है, ओर उससे पार उतरना भी पड़ता ही, अपनो के लिए...!
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कभी कभी अशांत मन ,
कितना अस्थिर कर देता है हमें,
चिड़चिड़ापन,गुस्सैल रवैया,
शांत, एकांत,बातों को अनसुना करना,
आस पास की घटनाओं पर ध्यान न देना,
खुद को सबसे किनारे कर लेना,
बातों में हिस्सेदारों से बचना,
शांत बैठ एक कोना पकड़,
न जाने क्या कुछ सोचना,
कभी कभी भर आना पलकों पर,
कुछ मोतियों का ,
जिन्हें गालों पर लुढ़कते से पहले ही ,
अंगुलियों की पैरों से साफ कर देना,
मन तो होता हैं कभी जोर जोर से चीखने का,
पर सवालों के जवाब कौन दे सबको..?
ये सोचकर पीड़ा को पी जाना,
सबसे सरल लगता है तब,
बहुत कठिन है न ये सब..?
मगर कई बार जिंदगी के थपेड़ों से तंग आकर,
ऐसी परिस्थिति सामने आ ही जाती है,
जिसे न चाहते हुए भी सहना भी पड़ता है,
ओर उससे पार उतरना भी पड़ता ही,
अपनो के लिए...!
9 months ago | [YT] | 5
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