एक कदम अध्यात्म की ओर...

"मानव मूल की असली कीमत उसकी नैतिकता, व्यवहार, मेलजोल का तरीका, सहानुभूति और भाईचारा है, ना कि उसकी मौजुदा शक्ल और सूरत, सूर्यास्त के समय एक बार सूर्य ने सबसे पूछा, मेरी अनुपस्थिति में मेरी जगह कौन कार्य करेगा ?

समस्त विश्व मे सन्नाटा छा गया। किसी के पास कोई उत्तर नहीं था। तभी कोने से एक आवाज आई।

दीये ने कहा - "मै हूं  ना" मैं अपना पूरा प्रयास करुंगा"

आपकी सोच में ताकत और चमक होनी चाहिए
छोटा-बड़ा होने से फर्क नहीं पड़ता, सोच बड़ी होनी चाहिए,
मन के भीतर एक दीप जलाएं और सदा मुस्कुराते रहिए"

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