Paarrul Makeover



Paarrul Makeover

श्रद्धांजलि पिता को
जिन मुस्‍कुराते चेहरे को, देखकर, मैंनें, पहली बार, दुनिया में, सरकना देखा।
जिन हाथों की, उगंलियों को पकड़ कर, मैंने, खुद को, पहली बार चलना देखा।
जिन कॉंधो पर, बैठकर, मैंनें, गली गली, चौराहे पर, अपने कद का, बढ़ना देखा।
जिन सासों का, मेरे, कुछ होने पर, उन सासों का, रुकना देखा।
वही पिता का, मेरे गोद में, मैंनें, उनकी सासों का, थमना देखा।
सुकुन था, उनके चेहरे पर, पर मैनें, अपनी गलितियों से, उनका दम तोड़ना देखा।
पिता पुत्र का, रिश्‍ता, कैसा होता है, उनके, न होने पर, मैनें, अपने वजुद को, पल पल में, खोना देखा।
पिता कभी भी, अपने बेटे के, दुख में, न अपना, सोना और जगना देखा।
वही पिता का, उनके दुख में, उनकी आखो में, मैने रोना देखा।
मैं कुछ न कर सका, उम्र भर का, दोष, मैंनें, खुद पर मढ़ना देखा।
माना, आना जाना, सत्‍य है, पर, कैसे मान लूँ, इस बात में, मैनें, खुद का, ठगना देखा।
जो बेटा, अपने, मॉं बाप के लिए, कुछ न कर सके, उस सवाल में, मैंने खुद को, उलझना देखा।
दुनिया, झुठ से, खुद को, सही साबित करे, पर, मैंनें, खुद को, झुठ से परे, रहना देखा।
बहुत रुलाया , कड़वा बोला , इस बात से, शायद, पिता का, अंदर से, टूटना देखा।
पर, शायद, यह सौभाग्‍य मेरा, कि, उनके आखिरी पलों में, मैनें, उनके जीवन का, सिमटना देखा, मैनें, उनके जीवन का, सिमटना देखा।
दुख के इस पल में, कुछ अपनों का, ठहरना तो, कुछ का, बदलना देखा।
एक उमर, जो गुजार दिया, जिस पिता के संग, अंत समय में, उनका जीवन से, मुख मोड़ना देखा।
दुख तो, अबयान है, फिर भी, इतनी जल्‍दी, अपनो का, संभलना देखा।
आना, रुकना, ठहरना, और जाना, फिर सांसरिक मोह में, लोगों का, रमना देखा।
आखों से, थमते नहीं आसू, एक छत को, अपने सर से, ढहना देखा।
इस दुख में भी, सनातन धर्म, या कुछ भी के लिए, लोगों का, लडना देखा।
बहुत श्रदा था, ऊपर वाले पर, दुआओं में, घर परिवार के लिए, दुआ खुद का, करना देखा।
गिला नहीं, फिर भी, ऊपर वाले पर, शायद, कुछ तो, अच्‍छा होगा, ऐसा, सुना है, तो अपना, ऐसा, भावना देखा।
पर अफसोस रहेगा, मेरी शिद्त कम थी, पिता मेरा था, अपनी दुआओं का बेअसर होना देखा, अपनी दुआओं का, बेअसर होना देखा।
जाते जाते भी पिता, बड़प्‍पन सिखा गये, पूरे परिवार का, एक दूसरे से, मिलना जुलना देखा, एक दूसरे से मिलना जुलना देखा।



ऊँ शान्ति:

5 months ago | [YT] | 1