विश्वाला समनतेची हाक देनारे माहामानव बोधिसत्व विश्व रत्न भारतरत्न भारतीय घटनेचे शिल्पकार डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर जी को वंदन 🙏🙏🙏 क्रतीकारी जय भिम #जय संविधान #जय भारत
विश्वाला समानतेची हाक देनारे माहामानव बोधिसत्व विश्व रत्न भारतरत्न भारतीय घटनेचे शिल्पकार डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर जी को वंदन 🙏🙏🙏 जय भिम जय संविधान #जय भारत
ई. वी. रामासामी 'पेरियार' (1879–1973) का जीवन सामाजिक न्याय, समानता और अंधविश्वास विरोधी संघर्ष का प्रतीक रहा है। उन्होंने समाज में व्याप्त जातिवाद, ऊंच-नीच और पितृसत्तात्मक कुरीतियों के खिलाफ आजीवन लड़ाई लड़ी। मुख्य संघर्ष और जीवन के पड़ाव शुरुआती जीवन और वैचारिक परिवर्तन: तमिलनाडु के इरोड में एक समृद्ध परिवार में जन्मे पेरियार ने छोटी उम्र में ही समाज में फैले जातीय भेदभाव और ढोंग को देखा। वर्ष 1904 में काशी (वाराणसी) यात्रा के दौरान ब्राह्मणवादी वर्चस्व और क्षुद्र भेदभाव का प्रत्यक्ष अनुभव होने पर उनके जीवन को एक नया मोड़ मिला। सत्याग्रह और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस: 1919 में वे कांग्रेस में शामिल हुए। उन्होंने 1924 में केरल के वायकोम (Vaikom) मंदिर मार्ग सत्याग्रह का सफल नेतृत्व किया, जिसके तहत अस्पृश्य समझे जाने वाले लोगों को मंदिर के रास्तों पर चलने का अधिकार दिलाया गया। इसी कारण उन्हें 'वायकोम वीर' भी कहा जाता है। आत्मसम्मान आंदोलन (Self-Respect Movement): कांग्रेस में आंतरिक जातिगत भेदभाव महसूस होने पर उन्होंने 1925 में कांग्रेस छोड़ दी और 'आत्मसम्मान आंदोलन' की शुरुआत की। इसका उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों में स्वाभिमान जगाना, बिना पुरोहितों के 'आत्मसम्मान विवाह' (Self-Respect Marriages) कराना और तर्कवाद को बढ़ावा देना था। द्रविड़ कड़गम (Dravidar Kazhagam): 1938 में उन्होंने दक्षिण भारत में हिंदी थोपे जाने के खिलाफ उग्र विरोध प्रदर्शन किया। बाद में 1944 में उन्होंने 'जस्टिस पार्टी' को पुनर्गठित करके 'द्रविड़ कड़गम' (DK) की स्थापना की, जो दक्षिण भारत की भावी राजनीति और सामाजिक क्रांति का आधार बनी। सामाजिक सुधार और तर्कवाद: पेरियार ने ईश्वर, धर्मशास्त्रों और सामाजिक रूढ़ियों पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों, संपत्ति में समानता, शिक्षा और जन्म नियंत्रण (परिवार नियोजन) की पुरजोर वकालत की। पेरियार का मानना था कि आत्मसम्मान और इंसानियत किसी भी धार्मिक या सामाजिक व्यवस्था से ऊपर है। उनका संघर्ष आज भी सामाजिक न्याय और तर्कवादी सोच की प्रेरणा बना हुआ है।
क्रांतीसुर्य विश्वाला समानतेची हाक देनारे माहामानव बोधिसत्व विश्व रत्न भारतरत्न भारतीय घटनेचे शिल्पकार डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर जी को वंदन 🙏🙏🙏 सभी आंबेडकरवादी विचार धारा मनणे वाले को हमारी तरफ से क्रांतीकारी जय भिम नमो बुद्धाय संविधान 🙏🙏🙏
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B R Ambedkar ji
#Jay bhim
#jay savidhan
1 day ago | [YT] | 252
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विश्वाला समनतेची हाक देनारे माहामानव बोधिसत्व विश्व रत्न भारतरत्न भारतीय घटनेचे शिल्पकार डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर जी को वंदन 🙏🙏🙏
क्रतीकारी जय भिम
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3 days ago | [YT] | 144
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विश्वाला समानतेची हाक देनारे माहामानव बोधिसत्व विश्व रत्न भारतरत्न भारतीय घटनेचे शिल्पकार डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर जी #आंबेडकर #जय भारत #जय #जय_संविधान
4 days ago | [YT] | 154
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5 days ago | [YT] | 187
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विश्वाला समानतेची हाक देनारे माहामानव बोधिसत्व विश्व रत्न भारतरत्न भारतीय घटनेचे शिल्पकार
डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर जी को वंदन 🙏🙏🙏
जय भिम जय संविधान #जय भारत
2 weeks ago | [YT] | 300
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ई. वी. रामासामी 'पेरियार' (1879–1973) का जीवन सामाजिक न्याय, समानता और अंधविश्वास विरोधी संघर्ष का प्रतीक रहा है। उन्होंने समाज में व्याप्त जातिवाद, ऊंच-नीच और पितृसत्तात्मक कुरीतियों के खिलाफ आजीवन लड़ाई लड़ी।
मुख्य संघर्ष और जीवन के पड़ाव
शुरुआती जीवन और वैचारिक परिवर्तन:
तमिलनाडु के इरोड में एक समृद्ध परिवार में जन्मे पेरियार ने छोटी उम्र में ही समाज में फैले जातीय भेदभाव और ढोंग को देखा। वर्ष 1904 में काशी (वाराणसी) यात्रा के दौरान ब्राह्मणवादी वर्चस्व और क्षुद्र भेदभाव का प्रत्यक्ष अनुभव होने पर उनके जीवन को एक नया मोड़ मिला।
सत्याग्रह और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस:
1919 में वे कांग्रेस में शामिल हुए। उन्होंने 1924 में केरल के वायकोम (Vaikom) मंदिर मार्ग सत्याग्रह का सफल नेतृत्व किया, जिसके तहत अस्पृश्य समझे जाने वाले लोगों को मंदिर के रास्तों पर चलने का अधिकार दिलाया गया। इसी कारण उन्हें 'वायकोम वीर' भी कहा जाता है।
आत्मसम्मान आंदोलन (Self-Respect Movement):
कांग्रेस में आंतरिक जातिगत भेदभाव महसूस होने पर उन्होंने 1925 में कांग्रेस छोड़ दी और 'आत्मसम्मान आंदोलन' की शुरुआत की। इसका उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों में स्वाभिमान जगाना, बिना पुरोहितों के 'आत्मसम्मान विवाह' (Self-Respect Marriages) कराना और तर्कवाद को बढ़ावा देना था।
द्रविड़ कड़गम (Dravidar Kazhagam):
1938 में उन्होंने दक्षिण भारत में हिंदी थोपे जाने के खिलाफ उग्र विरोध प्रदर्शन किया। बाद में 1944 में उन्होंने 'जस्टिस पार्टी' को पुनर्गठित करके 'द्रविड़ कड़गम' (DK) की स्थापना की, जो दक्षिण भारत की भावी राजनीति और सामाजिक क्रांति का आधार बनी।
सामाजिक सुधार और तर्कवाद:
पेरियार ने ईश्वर, धर्मशास्त्रों और सामाजिक रूढ़ियों पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों, संपत्ति में समानता, शिक्षा और जन्म नियंत्रण (परिवार नियोजन) की पुरजोर वकालत की।
पेरियार का मानना था कि आत्मसम्मान और इंसानियत किसी भी धार्मिक या सामाजिक व्यवस्था से ऊपर है। उनका संघर्ष आज भी सामाजिक न्याय और तर्कवादी सोच की प्रेरणा बना हुआ है।
2 weeks ago | [YT] | 110
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विश्वाला समनतेची हाक देनारे माहामानव बोधिसत्व विश्व रत्न भारतरत्न भारतीय घटनेचे शिल्पकार डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर जी को वंदन 🙏🙏🙏
2 weeks ago | [YT] | 377
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3 weeks ago | [YT] | 425
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विश्वाला समानतेची हाक देनारे माहामानव बोधिसत्व विश्व रत्न भारतरत्न भारतीय घटनेचे शिल्पकार डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर जी को वंदन 🙏🙏🙏
सभी आंबेडकरवादी विचार धारा मनणे वाले को हमारी तरफ से क्रांतीकारी जय भिम नमो बुद्धाय
संविधान 🙏🙏🙏
3 weeks ago | [YT] | 361
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विश्वरत्न भारतरत्न 🙏🙏🙏
3 weeks ago | [YT] | 220
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