Shivom automobile
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आख़िरी ख़त"1931 की सुबह, लाहौर जेल में भगत सिंह आख़िरी ख़त लिख रहे थे—"माँ, मैं मर नहीं रहा, मेरा सपना जिंदा रहेगा।जिस दिन भारत आज़ाद होगा, वही मेरा असली जन्मदिन होगा।"फाँसी के तख़्ते पर जाते हुए भी होंठों पर मुस्कान थी—"इंक़लाब ज़िंदाबाद!"
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आख़िरी ख़त"
1931 की सुबह, लाहौर जेल में भगत सिंह आख़िरी ख़त लिख रहे थे—
"माँ, मैं मर नहीं रहा, मेरा सपना जिंदा रहेगा।
जिस दिन भारत आज़ाद होगा, वही मेरा असली जन्मदिन होगा।"
फाँसी के तख़्ते पर जाते हुए भी होंठों पर मुस्कान थी—
"इंक़लाब ज़िंदाबाद!"
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