प्राचीन शास्त्रों में भक्ति के 9 प्रकार बताए गए हैं जिसे नवधा भक्ति कहते हैं -

श्रवणं कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पादसेवनम्।
अर्चनं वन्दनं दास्यं सख्यमात्मनिवेदनम् ॥


श्रवण (परीक्षित), कीर्तन (शुकदेव), स्मरण (प्रह्लाद), पादसेवन (लक्ष्मी), अर्चन (पृथुराजा), वंदन (अक्रूर), दास्य (हनुमान), सख्य (अर्जुन) और आत्मनिवेदन (बलि राजा) - इन्हें नवधा भक्ति कहते हैं।




Akhand Bhakti

पितृ पक्ष 2025 तिथियाँ और समय
पितृ पक्ष 2025 की तिथियाँ
शुरुआत: 7 सितंबर 2025 (रविवार) - पूर्णिमा श्राद्ध
समाप्ति: 21 सितंबर 2025 (रविवार) - सर्व पितृ अमावस्या

श्राद्ध तिथि अनुसूची
-7 सितंबर: पूर्णिमा श्राद्ध
- 8 सितंबर: प्रतिपदा श्राद्ध
- 9 सितंबर: द्वितीया श्राद्ध
- 10 सितंबर: तृतीया और चतुर्थी श्राद्ध
- 11 सितंबर: पंचमी और महाभरणी श्राद्ध
- 12 सितंबर: षष्ठी श्राद्ध
- 13 सितंबर: सप्तमी श्राद्ध
- 14 सितंबर: अष्टमी श्राद्ध
- 15 सितंबर: नवमी श्राद्ध (माता का श्राद्ध भी)
- 16 सितंबर: दशमी श्राद्ध
- 17 सितंबर: एकादशी श्राद्ध
- 18 सितंबर: द्वादशी श्राद्ध
- 19 सितंबर: त्रयोदशी और मघा श्राद्ध
- 20 सितंबर: चतुर्दशी श्राद्ध
- 21 सितंबर: सर्व पितृ अमावस्या

अनुष्ठान समय
- श्राद्ध अनुष्ठान सूर्योदय और 12:24 दोपहर के बीच करें।
- दोपहर का समय श्राद्ध के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, खासकर 12:00 बजे के बाद।
- कुतुप और रोहिणी मुहूर्त श्राद्ध अनुष्ठानों के लिए शुभ माने जाते हैं। ¹

7 months ago | [YT] | 1

Akhand Bhakti

आज यानी 7 सितंबर 2025 को लगने वाले
चंद्र ग्रहण का समय (भारत – IST)

सूतक काल यानी ग्रहण का अशुभ पूर्वाभास दोपहर 12:57 बजे से शुरू होता है।

ग्रहण रात 9:58 बजे शुरू होगा और रात 1:26–1:27 बजे तक चलेगा।

ग्रहण का चरम (पीक) रात 11:41 बजे होगा।

कुल अवधि लगभग 3 ½ घंटे (3:28) है।



अध्ययन करने योग्य बातें (क्या करें और क्या न करें)

सूतक काल (दोपहर 12:57 से रात तक)

क्या न करें:

इस बीच भोजन, खाना पकाना, और शुभ या मांगलिक कार्य नहीं करें।

पूजा-पाठ, मंदिर जाना, देवी-देवता की मूर्ति को छूना ये सब निषिद्ध माने गए हैं।


विशेष छूट (बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं के लिए):

इनके लिए सूतक केवल शाम 6:35–6:36 बजे से माना जाएगा—यानी उससे पहले वो रोजमर्रा के कार्य कर सकते हैं।



ग्रहण समय (रात 9:58 – 1:26 बजे)

क्या करें:

ध्यान, मंत्र जप (जैसे शिव-मंत्र), पूजा–अर्चना करना शुभ माना जाता है।

इस समय प्रार्थना, चंद्र देव का जाप, दान, ध्यान, मेडिटेशन जैसे आध्यात्मिक कार्य किए जा सकते हैं।


विशेष उपाय:

ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करें, घर या मंदिर की सफाई करें, गंगाजल छिड़काव, श्रद्धा से पूजा और दान– जैसे चावल, दूध, दही, गुड़ आदि राशियों के अनुसार दें।




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राशियों (ज्योतिष अनुसार) पर प्रभाव और सलाह

ज्योतिषीय दृष्टि से यह ग्रहण कुंभ राशि व पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में लग रहा है, जिसमें राहु और चंद्रमा की युति है—यह अशुभ योग माना जाता है।

राशियों पर प्रभाव:

मेष, वृषभ, मिथुन, कन्या, सिंह, धनु, मीन—कुछ राशियों के लिए वित्तीय लाभ, यात्रा, आत्मविश्वास के योग बन रहे हैं।

वृषभ, मिथुन, सिंह, तुला, कुंभ—कुछ राशियों को सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई है।


कुछ लेखों में परावैदिक सलाह (जैसे दान की रंग-बिरंगी वस्तुएँ राशि अनुसार) भी बताए गए हैं:

उदाहरण: मेष–लाल, वृषभ और तुला–सफेद, मिथुन/कन्या–हरी, सिंह/धनु/मीन–पीली, मकर/कुंभ–काली वस्तुएँ दान




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संक्षेप सारांश तालिका

समय/अवस्था क्या करना/नहीं करना

दोपहर 12:57 onwards भोजन, पूजा, शुभ कार्य टालें
शाम 6:35 से पहले बच्चों, बुजुर्ग, गर्भवती कर सकते हैं कुछ गतिविधियाँ
रात 9:58 – 1:26 मंत्र-जप, ध्यान, पूजा करें
रात 11:41 (पीक) सर्वोच्च प्रभावकाल
शास्त्रानुसार उपाय स्नान, गंगाजल, सफाई, दान

7 months ago (edited) | [YT] | 1

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श्रीमद्भगवद्गीता में कितने श्लोक हैं. 

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jai mata di 🚩

3 years ago | [YT] | 45

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🚩❤️jai shree ram ❤️🚩

3 years ago | [YT] | 20

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हर हर महादेव। ‪@Akhandbhaktii‬

3 years ago | [YT] | 27