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Our aim is to connect youth with their history, culture, and responsibility.

THE_LAND_OF_JATS मुख्य रूप से जाट युवाओं के लिए काम करता है।
खाप व्यवस्था, खेड़ा, खेत और जमीनी सच्चाई इस मंच की पहचान है।
उद्देश्य — जागरूकता, एकता और स्वाभिमान, बिना दिखावे के।

THE_LAND_OF_JATS بنیادی طور پر جٹ نوجوانوں کے لیے کام کرتا ہے۔
کھاپ، کھیڑا، کھیت اور زمینی حقیقت اس پلیٹ فارم کی بنیاد ہیں۔
مقصد — شعور، اتحاد اور خودداری۔

THE_LAND_OF_JATS ਮੁੱਖ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਜੱਟ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਲਈ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ।
ਖਾਪ ਪ੍ਰਣਾਲੀ, ਖੇੜਾ ਅਤੇ ਖੇਤ ਇਸ ਚੈਨਲ ਦੀ ਜੜ ਹਨ।
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1 hour ago | [YT] | 3

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#कबड्डी के सुपर स्टार खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय कब्बडी प्लेयर
#मोहित_दलाल_नन्दगढ़ जींद हरियाणा से 19 अगस्त को सुबह हार्ट अटैक से हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन की खबर से पूरा कबड्डी जगत और उनके चाहने वाले बेहद दुखी हैं। उन्होंने अपने शानदार खेल और मेहनत से कबड्डी के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई थी। उनका यूँ अचानक चले जाना खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पहलवान की आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके परिवार व चाहने वालों को इस दुःख की घड़ी में हिम्मत और शक्ति दें।

मोहित कई दिनों से खेलते टाइम लगी चोट से रिकवरी करके ग्राउंड पर वापसी करने वाले थे पर प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था 🙏🙏

अगस्त में पता नि किसकी नजर लगी है कबड्डी जगत को पहले शीलू बल्हारा जी की पत्नी फिर गुरजीत Toot फिर अब मोहित दलाल भाई जी रहम करो इस कौम ओर कबड्डी जगत पर
🙏🙏

1 day ago | [YT] | 132

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"मुल्क जट्टा दा वण्डिया, शाहा विच बैह के दिल्ली असी छितरो छित्तर होए, शातर मल बैह गये दिल्ली"

ये आज़ादी नहीं बर्बादी थी दोनों तरफ की किसान कौम की,,,

आज़ादी की लड़ाई नहीं थी बस सता से किसान को हटाकर मंडी फंड्डी को बैठना था,,,

इस आज़ादी से बहुत फायदे में थे हम जब अंग्रेजों के साथ राज करते थे,,,

असली गुलाम अब हैं,,,

किसान और अंग्रेज पार्टनर थे राज म,,,

बस किसान को हटाना था मंडी फंड्डी को बैठाना था,,,

एक घर के दो घर बनने प कौन नाचता है कौन खुशी मनाता है आपणे नाश की,,,

मनाओ भेड़ो मनाओ

हमारे चौधरी सर छोटू राम ओल्हान जी जब तक जिंदा रहे हमारी कौम के लिए जब तक उन्होंने हमारे जाटलैंड पर किसी को नजर नहीं डालने दी वो चाहते थे कि पंजाब प्रांत पूरा ही भारत में जाए या पाकिस्तान में दिल्ली तक सब पर अगर इसको अलग अलग करके बंटवारा किया जाएगा तो हम अपने अलग जाटलैंड की घोषणा कर देंगे और उस टाइम अंग्रेजी सरकार में हिम्मत नहीं थी कि वो पंजाब की तरफ देख सके चौधरी साहब ने जो बोल दिया वही माना जाएगा कौन कहता है कि पंजाब भी गुलाम था पंजाब में चौधरी साहब की यूनियनिस्ट पार्टी सत्ता में थी चौधरी साहब जी की ही चलती थी इन सब का जिक्र फैले वाली पोस्टों में किया है वहां से सब समझ जाओगे |
जाट कौम के पास बहुत ज्यादा जमीन थी आज के मुकाबले दूर दूर तक सब जाट कौम का था पर शायद प्रकृति को भी जाट कौम की एकता मंजूर नहीं थी कि हमारे चौधरी साहब गए उसके बाद DELHI की कलमों में खोट आया और हमारी जमीने गई कौम का बंटवारा कर दिया गया चौधरी साहब बंटवारा नहीं होने देते इसे अच्छा हमारा अलग देश हमारा अपना जाटलैंड होता बहुत खुशहाल और बड़ा प्रांत जाट कौम का होता पर प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था चौधरी साहब के जाने के बाद जाटों की तो कमर ही टूट गई जो आजतक टूटी हुई है जब तो शायद पंजाब गुलाम था या नहीं पर अब जरूर है दिन भर दिन यूनाइटेड पंजाब (हरियाणा-पंजाब) के हाल बेहाल होते जा रहे है किसानों पर लाठियां बरसाई जा रही है जबकि अंग्रेजों ने कभी बड़े बुजुर्ग और औरतों बच्चों पर हमला नहीं किया इसे अच्छा तो वो लोग थे BJP जब से है तब से शायद हम ज्यादा गुलाम है रोज विशेष वर्ग को टारगेट कर रही है पर विशेष वर्ग भी आजकल RSS जैसी नीतियों का शिकार हो रहा है जिनसे चौधरी साहब ने हमारी कौम को बचाया हमें धर्मवादी लोगो से बचाया उसी के साथ आज कुछ खड़े है सरकारों को ये समझना चाहिए कि ये कौम शांत ही अच्छी है वरना सरकार देख चुकी है तब ये दिल्ली भी घुटनों पर आ जाती है पर फिर ये भूल जाती है तो सरकार भी समझे जे जट्ट बिगड़ गया तो सरकार को ले मरेगा ये बाते अकेल पंजाब की नहीं है जाट जहां भी है उत्तर भारत में हर जगह यही टारगेट पर है जाटों बचालो इस कौम को आपस में मत लड़ा करो दुश्मन पहचानो अब भी जीवन कुंडू की हत्या हुई तो वहां जाट के अलावा कोई ओर था तो बता दो जबकि तुम हनुमान बन जाते हो ध्यान दो भाइयों

कौन सी आज़ादी-किस की आज़ादी?

जिस आज़ादी का नाम लेकर आज देश में जो जशन मनाया जा रहा है क्या वो जशन एक दिखावा नहीं है।

भगत सिंह, फौजी मेहरसिंह ने जिन सपनों को संजोकर अपनी जान की कीमत लगाई क्या वो हमें मिल सकी।

गोरे अंग्रेज़ो के राज में न्याय होता था ! किसी ने किसी का कत्ल कर दिया तो उस की सज़ा फांसी थी आज की तरह इन मंडी-फंडि के राज की तरह इंसान बुढ़ापे तक पैसे के बल पर जेल जाने से ही बच जाता है या फिर मंत्रियों से हाथ मिलाकर विदेश भाग जाता है।

देश की सेना को कानून के दायरे में बांधकर एक मजबूत सुरक्षा, रेलवे के रूप में इस देश को एक अदभुत कला, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन के रूप में दी गयी भव्य इमारतें गोरे अंग्रेजों की देन थी।

आरएसएस, हिंदू महासभा, जिन्ना, नेहरू,मंमदोत, मास्टर तारा सिंह (बणिया सरदार) ये लोग समझ चुके थे कि इनके दिन यूनाइटेड पंजाब से लद चुके है और जल्द ही बाकी देश से भी मुगलों के राज में मंडी-फंडिं ने जो जगह बनाई थी वो खत्म होने वाली है। क्योंकि पंजाब में यूनाइटेड पार्टी सर छोटूराम की सरकार थी। जहां पर इनका पर्दाफाश हो चुका था।

फिर सुरु हुआ हुआ नफरत-सत्ता प्राप्ति का दौर और देश के टुकड़े कर दिए हिन्दू मुसलमान के नाम पर। पहली बार दुनिया मे भेदभाव आधार पर इंसानो को बदला गया। सर् छोटूराम के यूनाइटेड पंजाब को टारगेट किया गया। और इस देश को धर्म की अफीम सुंघाकर बांट दिया गया और उस धर्म के विभाजन के नतीजेआज सब के सामने है।

10 लाख लोगों की मौत, 1 करोड़ लोगों की बर्बादी, 47,65,71 कारगिल वार और आये दिन सहीद होने वाले जवानों की लाशों, जाटो और किसान जातियों का धर्म के नाम पर विभाजन करने वाली ब्राह्मणवादी ताकतों और उनके गलाम प्यादों को आज़ादी मुबारक।

""ज़मीर जाग ही जाता है अगर जिंदा हो इकबाल, कभी मौत से पहले कभी मौत के बाद""

हम मरने से नहीं डरते पर इस तरह जीने से डरते है

जय योद्धेय जय जट्ट कौम लड़ते लोग जिंदाबाद

हा म बागी हु मेरे पंजाब के लिए मेरी जट्ट कौम के लिए
म बगावत करता हु

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1 week ago (edited) | [YT] | 225

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गर्व से कहो हम जाट है, पर क्यों??
Post number 5

86. विद्वान् लेनेन पूले - "गजनी ने अपने कमांडर नियालटगेन को पंजाब में तैनात किया तो जाट उसका सिर काट ले गए और वही सिर उन्होंने गजनी को चांदी के सैकड़ों-हजारों सिक्कों के बदले वापिस किया ।"

87. विद्वान् ब्री० सर साईक्स - "आठवीं सदी के आरम्भ में बसरा-बगदाद की लड़ाई में जाटों ने खलीफा को हराया तो वहां के प्रसिद्ध जाट कवि टाबारी ने पर्सियन भाषा में इस प्रकार गाया-

(अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद)

ओह ! बगदाद के लोग मर गए,

तुम्हारा साहस भी हमेशा के लिए ।

हम जाटों ने तुम्हें हराया,

तुम्हारा साहस भी हमेशा के लिए ।

हम जाटों ने तुम्हें हराया,

हम तुम्हें लड़ने के लिए मैदान में घसीट लाए ।

हम जाट तुम्हें ऐसे खींच लाए,

जैसे पशुओं के झुंड से कमजोर पशु को ।

88. विद्वान् मेजर बरस्टो - "जाटों की विशेषता है कि वे अपने गोत्र में शादी नहीं करते चाहे वह हिन्दू जाट हो या पंजाबी । क्योंकि जाट इसे व्यभिचार मानते हैं।”

89. डॉ० रिस्ले - "When Jat runs wild it needs God to hold him back अर्थात् यदि जाट बिगड़ जाए तो उसे भगवान ही काबू कर सकता है।"

90. रूसी इतिहासकार के. एम. सेफकुदरात ने अगस्त 1964 में मास्को में एक भाषण दिया जो भारतीय समाचार पत्रों में भी छपा था और उसने कहा "I studied the histories of various sects before I visited India in 1957. It was found that Jats live in an area extending from India to Central Asia and Central Europe. They are known by different names in different countries and they speak different languages but they are all one as regards their origin."

अर्थात् "मैंने 1967 से पहले भारत की यात्रा करने से पहले इतिहास के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया और पाया कि जाट भारत से मध्य एशिया और मध्य यूरोप तक रहते हैं वे अलग-अलग देशों में अलग-अलग नामों से जाने जाते हैं और वे भाषाएं
भी अलग बोलते हैं। लेकिन उन सभी का निकास एक ही है।" इसलिए जाट कौम एक ग्लोबल नस्ल है ।

91. इतिहासकार डॉ० सुखीराम रावत (पलवल) - "राजा गज ने गजनी के पास वर्तमान में अफगानिस्तान में बामियान के पास बुद्ध का विश्वप्रसिद्ध स्तूप बनवाया जिसे तालिबानियों ने सन् 2001 में संसार के सभी देशों की परवाह न करते हुए डाइनामाइट से उड़वा दिया ।"

92. इतिहासकार महीपाल आर्य (मतलौडा) - "चित्तौड़, उदयपुर, नेपाल तथा महाराष्ट्र में गहलौत जाटों का राज था । बप्पारावल, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी तथा नेपाल के राणावंश नरेश सभी जाट योद्धा थे ।”

93. चौ० ओमप्रकाश पत्रकार (रोहतक) - "मकौड़ा, घोड़ा और जठोड़ा पकड़ने पर कभी छोड़ते नहीं ।"

94. चौ० ईश्वरसिंह गहलोत (विख्यात जाट गायक) - “आज भी काबुल चिल्ला रहा है, बंद करो फाटक रणजीत आ रहा है।"

95. पंजाब केसरी पत्र ने अपने धारावाहिक सम्पादकीय दिनांक 25.09.2002 को झूठा इतिहास - झूठे लोग में लिखा - "जाटों का इतिहास देख लें ! बड़ा ही गौरवपूर्ण इतिहास है ! इतना गौरवपूर्ण कि वैसा इतिहास खोजना मुश्किल हो जाए । इतिहासकारों

ने इसे इतना तरोड़-मरोड़ कर लिखा है कि जिसे शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। क्या यह सब महज इत्तिफाक है ?"
(यह इतिफाक नहीं था, जाटों के इतिहास के साथ इसलिए हुआ कि पहले जाट बौद्धधर्मी थे और भारत का ब्राह्मणवाद बौद्ध धर्म का दुश्मन रहा जो स्वयं इतिहासकार थे, इसलिए ऐसा करना ही था । क्योंकि यदि भारत का सच्चा इतिहास सामने आयेगा तो ऐसे लोगों का गर्व-खर्व होना निश्चित है लेखक) ।

96. बी.बी.सी. लंदन (जयपुर संवाददाता) “जाट जब अपने असली रूप में आ जाये तो वह हिमालय को भी चीर सकता है। हिन्दमहासागर को भी पार कर सकता है। थार के रेगिस्तान में बसे करोड़ों धरतीपुत्रों ने रैली को रैला बनाकर हिन्दुस्तान की सत्ता को थर्रा दिया था और आज 20 अक्तूबर 1999 को राजस्थान सरकार को जाटों को ओ. बी. सी. का आरक्षण देना ही पड़ा ।" (क्या शेष भारत के जाट, जाट नहीं हैं? रोजाना रैलियों में दौड़ते भागते रहते हैं अपने हक के लिए (आरक्षण के लिए) नहीं लड़ सकते हैं ? - लेखक)

97. राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुधंरा राजे सिधिंया ने दिनांक 07.05.2004 को हांसी में संसद चुनाव में वोट मांगते हुए कहा-"मैं बहादुर जाटों की बहू हूँ इसलिए उनसे वोट मांगने का मेरा अधिकार है ।"

98. गुर्जर इतिहास (पेज नं० 3, लेखक राणा अली हसन चौहान, पाकिस्तान) - "जाट शुद्ध आर्यों की जाति है।"

99. विख्यात फिल्म अभिनेता धर्मेन्द्र ने सन् 2005 में बिजनौर (उत्तर प्रदेश) की एक जनसभा में कहा- "मैं जाट जाति में पैदा होकर गौरव का अनुभव करता हूँ।"

100. लेखक - "जाट इतिहास कोई भंगेड़ियों, भगोड़ों व भाड़े का इतिहास नहीं, यह सच्चे वीरों का इतिहास है।" इन टिप्पणियों से यह स्पष्ट हो जाता है कि जाट जाति का चरित्र कैसा रहा है तथा यह कितनी महान् जाति रही ।

गर्व से कहो हम जाट है एक महान कौम में जन्म हुआ है ☝️

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1 week ago | [YT] | 222

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गर्व से कहो हम जाट है, पर क्यों??
Post Number 4

61. प्राचीन इतिहासकार मनूची - जाटनियां राजनैतिक रंगमंच पर समान रूप से उत्तरदायित्व निभाती हैं। खेत में व रणक्षेत्र में अपने पति का साथ देती हैं और आपातकाल के समय अपने धर्म की रक्षा में प्रोणोर्सग (प्राणत्याग) करना अपना पवित्र धर्म समझती हैं।

62. जैक्मो फ्रांसी इतिहासकार व यात्री लिखता है- महाराजा रणजीतसिंह पहला भारतीय है जो जिज्ञासावृत्ति में सम्पूर्ण राजाओं से बढ़ाचढ़ा है। वह इतना बड़ा जिज्ञासु कहा जाना चाहिए कि मानो अपनी सम्पूर्ण जाति की उदासीनता को वह पूरा करता है। वह असीम साहसी शूरवीर है। उसकी बातचीत से सदा भय सा लगता है। उन्होंने अपनी किसी विजययात्रा में कहीं भी निर्दयता का व्यवहार नहीं किया ।

63. यूरोपीय यात्री प्रिन्सेप एक अकले आदमी द्वारा इतना विशाल राज्य इतने कम अत्याचारों से कभी स्थापित नहीं किया गया । अद्भुत वीरता, धीरता, शूरता में समकालीन सभी भारतीय नरेशों के शिरमौर थे । दूसरे शब्दों में पंजाबकेसरी महाराजा रणजीतसिंह भारत का नैपोलियन था।

64. महान् इतिहासकार उपेन्द्रनाथ शर्मा - जाट जाति करोड़ों की संख्या में प्रगितिशील उत्पादक और राष्ट्ररक्षक सैनिक के रूप में विशाल भूखण्ड पर बसी हुई है। इनकी उत्पदाक भूमि स्वयं एक विशाल राष्ट्र का प्रतीक है।
65. 65. विद्वान् सर डारलिंग - "सारे भारत में जाटों से अच्छी ऐसी कोई जाति नहीं है जिसके सदस्य एक साथ कर्मठ किसान और जीवंत जवान हों।"

66. महान् इतिहासकार सर हर्बट रिसले - जाट और राजपूत ही वैदिक आर्यों के वास्तविक उत्तराधिकारी हैं।

67. फील्ड मार्शल माउंट गुमरी - "Jat is true soldier. I will be happy to die with dignity amongst Jats Regt. My soul will be bless with peace." अर्थात् "जाट एक सच्चा सैनिक है। मुझे खुशी होगी यदि मैं जाटों के बीच रहकर इज्जत से मर जांऊ ताकि मेरी आत्मा को शान्ति मिल सके ।"

68. अंग्रेज प्रमुख जनरल ओचिनलैक (बाद में फील्ड मार्शल) -"If things looked back and danger threatened I would ask nothing better than to have Jats beside me in the face of the enemy" अर्थात "हालात बिगड़ते हैं और खतरा आता है तो जाटों को साथ रखने से बेहतर और कुछ नहीं होगा ताकि मैं दुश्मन से लड़ सकूं ।”

69. क्रान्तिदर्शी राजा महेन्द्रप्रताप - "हमारी जाति बहादुर है । देश के लिए समर्पित कौम है। चाहे खेत हो या सीमा । धरतीपुत्र जाटों पर मुझे नाज़ है।"

70. पं. जवाहरलाल नेहरू- "दिल्ली के आसपास चारों ओर जाट एक ऐसी महान् बहादुर कौम बसती है, वह यदि आपस में मिल जाये और चाहे तो दिल्ली पर कब्जा कर सकती है।"

(यह पंडित नेहरू ने सन् 1947 से पहले कहा था, लेकिन पंडित जी देश आजाद होने के बाद जाटों को भूल गये और उन्होंने अपने जीते जी कभी किसी हिन्दू जाट को केन्द्रीय सरकार में किसी भी मंत्री पद पर फटकने नहीं दिया - लेखक)
71. स्वामी ओमानन्द सरस्वती तथा वेदव्रत्त शास्त्री - (देशभक्तों के बलिदान ग्रंथ में) - "ईरान से लेकर इलाहाबाद तक जाटों के वीरत्व व बलिदानों का इतिहास चप्पे-चप्पे पर बिखरा पड़ा है। क्या कभी कोई माई का लाल इनका संग्रह कर पाएगा ? काश ! जाट तलवार की तरह कलम का भी धनी होता।"

72. डॉ० बी.एस. दहिया ने अपनी पुस्तक Jats- The Ancient Rulers अर्थात्- "जाट प्राचीन शासक हैं" में लिखा है -"There is no battle worth its name in The World History where the Jat Blood did not irrigate The Mother Earth" अर्थात्- “विश्व में ऐसी कोई भी लड़ाई नहीं हुई, जिसमें जाटों ने अपनी मातृभूमि के लिए खून न बहाया हो ।”

(काश ! यह देश और इस देश के इतिहासकार इसे समझ पाते-लेखक)

73. विद्वान् इतिहासकार डॉ० धर्मकीर्ति -

(i) आगरा के ताजमहल और लाल किले को लूट ले जाना, सिकन्दरा में अकबर की कब्र के भवन और एत्माद्दौला की कब्र के ऐतिहासिक भवन में भूसा भरकर आग लगा देना, जिसके परिणामस्वरूप इन भवनों के काले पड़े हुए पत्थर आज भी (बौद्ध) जाटों के शौर्य की वीरगाथा गा रहे हैं।

(ii) "वर्तमान जाट जाति को इस बात का गर्व से अनुभव करना चाहिए कि उनके पूर्वज बौद्ध नरेश असुवर्मा नेपाल के प्रसिद्ध राजा हो चुके हैं।" (इन्हीं विद्वान् ने सम्राट् कनिष्क से लेकर सम्राट् विजयनाग तक 17 बौद्ध जाट राजाओं का उनके काल तथा संसार में उनके राज्य क्षेत्र का वर्णन किया है - लेखक)
74. विद्वान् मोरेरीसन - "The Jats and Rajputs of the Doab are descendents of the late Aryans" अर्थात् दोआबा के जाट और राजपूत आर्यों के वंशज हैं।

75. विद्वान् नेशफिल्ड - "जाटों से राजपूत हो सकते हैं परन्तु राजपूतों से जाट कभी नहीं हो सकते हैं।"

76. प्रो० मैक्समूलर - "सारे भूमण्डल पर जाट रहते हैं और जर्मनी इन्हीं आर्य वीरों की भूमि है।"

77. इतिहासकार बलिदबिन अब्दुल मलिक - "अरब की हिफाजत के लिए हमने जाटों का सहारा लिया ।"

78. सुल्तान मोहम्मद - "जाट कौम का डर मेरे ख्वाब में भी रहता है। इन्होंने मुझे कभी खिराज नहीं दिया ।”

79. प्रो० बी. एस. ढिल्लों - "मोहम्मद गजनी ने जाटों को खुश करने के लिए साहू जाटों से अपनी बहिन का विवाह किया था ।" (पुस्तक - 'हिस्ट्री एण्ड स्टडी ऑफ दी जाट'- मूलस्रोत - सर ए. कनिंघम) ।

80. कैप्टन फॉलकॉन - (i) "The Jats are throughly independent in character and assert personal and indivisual freedom as against communal or tribal control more strongly than other people." अर्थात् जाट चारित्रिक रूप से पूर्णतया आजाद होते हैं जो निजी तौर पर दूसरों की तुलना में साम्प्रदायिक विरोधी होते हैं। (ii) गोत्र प्रथा को कैनेडा, अमरीका व इंग्लैण्ड में बसने वाले जाट भी मानते हैं।

81. प्रो० पी.टी. ग्रीव "जाट केवल भगवान के सामने ही अपने घुटनों को झुकाता है क्योंकि वह नेता होता है, अनुयायी नहीं ।"
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82. विद्वान् टॉलबोट राईस - "याद रहे चीन ने 1500 मील लम्बी और 35 फिट ऊंची दीवार जाटों से बचने के लिए ही बनाई थी।”

83. इतिहासकार जे.सी. मोर - "जाट वास्तव में हिन्दुओं की जाति नहीं है, यह एक नस्ल है।"

84. विद्वान् डॉ० वाडिल - "गुट, गोट, गुट्टी, गुट्टा, गोटी और गोथ आदि जाटों के नाम के ही शाब्दिक उच्चारण के विभिन्न रूप हैं, जो मध्यपूर्व में महान् शासक हुए हैं।"

85. विद्वान् जनरल सर मैकमन (i) जाट बहुत ताकतवर और कठिन परिश्रमी किसान हैं जो हाथ में हल लेकर पैदा होता है। (ii) जाटों ने हमेशा अपनी लड़ने की योग्यता को कायम रखा, इसी कारण प्रथम विश्वयुद में केवल जाटों की छटी रेजिमेंट को रॉयल की उपाधि मिली |

86 से 100 तक अलग अगली पोस्ट में डाले जाएंगे ताकि पोस्ट लंबी ना हो तो कृपया सब पोस्ट जरूर पढ़े और शेयर करे

1 week ago (edited) | [YT] | 192

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गर्व से कहो हम जाट है, पर क्यों?
Post number 3

41. कर्नल अल्कोट - हमें यह कहने का अधिकार है कि 4000 ईसा पूर्व भारत से आने वाले जाटों ने ही मिश्र (इजिप्ट) का निर्माण किया ।

42. यूरोपीय इतिहासकार मि० टसीटस ने लिखा है - जर्मन लोगों को प्रातः उठकर स्नान करने की आदत जाटों ने डाली । घोड़ों की पूजा भी जाटों ने स्थानीय जर्मन लोगों को सिखलाई । घोड़ों की सवारी जाटों की मनपसंद सवारी है ।

43. तैमूर लंग - घोड़े के बगैर जाट, बगैर शक्ति का हो जाता है । (हमें याद है आज से लगभग 50 वर्ष पहले तक हर गाँव में अनेक घोडे, घोडियाँ जाटों के घरों में होती थीं । अब भी पंजाब व हरियाणा में जाटों के अपने घोड़े पालने के फार्म हैं - लेखक)

44. भारतीय सेना के ले० जनरल के. पी. कैण्डेय ने सन् 1971 के युद्ध के बाद कहा था - अगर जाट न होते तो फाजिल्का का भारत के मानचित्र में नामोनिशान न रहता ।

45. इसी लड़ाई (सन् 1971) के बाद एक पाकिस्तानी मेजर जनरल ने कहा था - चौथी जाट बटालियन का आक्रमण भयंकर था जिसे रोकना उसकी सेना के बस की बात नहीं रही । (पूर्व कप्तान हवासिंह डागर गांव कमोद जिला भिवानी (हरियाणा) जो 4 बटालियन की इस लड़ाई में थे, ने बतलाया कि लड़ाई से पहले बटालियन कमान्डर ने भरतपुर के जाटों का इतिहास दोहराया था जिसमें जाट मुगलों का सिहांसन और लाल किले के किवाड़ तक उखाड़ ले गये थे । पाकिस्तानी अफसर मेजर जनरल मुकीम खान पाकिस्तानी दसवें डिवीजन के कमांडर थे ।)

46. भूतपूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन ने जाट सेन्टर बरेली में भाषण दिया - जाटों का इतिहास भारत का इतिहास है और जाट रेजिमेंट का इतिहास भारतीय सेना का इतिहास है । पश्चिम में फ्रांस से पूर्व में चीन तक ‘जाट बलवान्-जय भगवान्’ का रणघोष गूंजता रहा है ।

47. विख्यात पत्रकार खुशवन्तसिंह ने लिखा है -
(i) "The Jat was born worker and warrior. He tilled his land with his sword girded round his waist. He fought more battles for the defence for his homestead than other Khashtriyas" अर्थात् जाट जन्म से ही कर्मयोगी तथा लड़ाकू रहा है जो हल चलाते समय अपनी कमर से तलवार बांध कर रखता था। किसी भी अन्य क्षत्रिय से उसने मातृभूमि की ज्यादा रक्षा की है ।

(ii) पंचायती संस्था जाटों की देन है और हर जाटों का गांव एक छोटा गणतन्त्र है ।

48. जब 25 दिसम्बर 1763 को जाट प्रतापी राजा सूरजमल शाहदरा में धोखे से मारे गये तो मुगलों को विश्वास ही नहीं हुआ और बादशाह शाहआलम द्वितीय ने कहा - जाट मरा तब जानिये जब तेरहवीं हो जाये । (यह बात विद्वान् कुर्क ने भी कही थी ।)

49. टी.वी History Channel ने एक दिन द्वितीय विश्वयुद्ध के इतिहास को दोहराते हुए दिखलाया था कि जब सन् 1943 में फ्रांस पर जर्मनी का कब्जा था तो जुलाई 1943 में सहयोगी सेनाओं ने फ्रांस में जर्मन सेना पर जबरदस्त हमला बोल दिया तो जर्मन सेना के पैर उखड़ने लगे । एक जर्मन एरिया कमांडर ने अपने सेट से अपने बड़े अधिकारी को यह संदेश भेजा कि ज्यादा से ज्यादा गुट्टा सैनिकों की टुकड़ियाँ भेजो । जब उसे यह मदद नहीं मिली तो वह अपनी गिरफ्तारी के डर में स्वास्तिक निशानवाले झण्डे को सैल्यूट करके स्वयं को गोली मार लेता है । याद रहे जर्मनी में जाटों को गुट्टा के उच्चारण से ही बोला जाता है । - (लेखक)

50. एक बार अलाउद्दीन ने देहली के कोतवाल से कहा था - इन जाटों को नहीं छेड़ना चाहिए। ये बहादुर लोग ततैये के छत्ते की तरह हैं, एक बार छिड़ने पर पीछा नहीं छोड़ते हैं।

51. इतिहासकार मो० इलियट ने लिखा है- जाट वीर जाति सदैव से एकतंत्री शासन सत्ता की विरोधी रही है तथा ये प्रजातंत्री हैं।

52. संत कवि गरीबदास जाट सोई पांचों झटकै, खासी मन ज्यों निशदिन अटकै । (जो पाँचों इन्द्रियों का दमन करके, बुरे संकल्पों से दूर रहकर भक्ति करे, वास्तव में जाट है।

53. महान् इतिहासकार कालिकारंजन कानूनगो -

(क) एक जाट वही करता है जो वह ठीक समझता है। (इसी कारण जाट अधिकारियों को अपने उच्च अधिकारियों से अनबन का सामना करना पड़ता है- लेखक) (ख) जाट एक ऐसी जाति है

जो इतनी अधिक व्यापक और संख्या की दृष्टि से इतनी अधिक है कि उसे एक राष्ट्र की संज्ञा प्रदान की जा सकती है। (ग) ऐतिहासिक काल से जाट बिरादरी हिन्दू समाज के अत्याचारों से भागकर निकलने वाले लोगों को शरण देती आई, उसने दलितों और अछूतों को ऊपर उठाया है। उनको समाज में सम्मानित स्थान प्रदान कराया है। (लेकिन ब्राह्मणवाद तो यह प्रचार करता रहा कि शूद्र वर्ग का शोषण जाटों ने किया - लेखक) (घ) हिन्दुओं की तीनों बड़ी जातियों में जाट कौम वर्तमान में सबसे बेहतर पुराने आर्य हैं।

54. महान् इतिहासकार ठाकुर देशराज जाटों को मुगलों ने परखा, पठानों ने इनकी चासनी ली, अंग्रेजों ने पैंतरे देखे और इन्होंने फ्रांस एवं जर्मनी की भूमि पर बाहदुरी दिखाकर सिद्ध किया कि जाट महान् क्षत्रिय हैं।

55. पं० इन्द्र विद्यावाचस्पति- जाटों को प्रेम से वश में करना जैसा सरल है, आँख दिखाकर दबाना उतना ही कठिन है।

56. कवि शिवकुमार प्रेमी -

जाट जाट को मारता यही है भारी खोट ||

ये सारे मिल जायें तो अजेय इनका कोट ||

(कोट का अर्थ किला)

इसीलिए तो कहा जाता है जाटड़ा और काटड़ा अपने को मारता है। (लेखक)

57. विद्वान् विलियम क्रूक -

(i) जाट विभिन्न धार्मिक संगठनों व मतों के अनुयायी होने पर भी जातीय अभिमान से ओतप्रोत हैं। भूमि के सफल जोता, क्रान्तिकारी, मेहनती जमीदार तथा युद्ध योद्धा हैं।

(इसीलिए तो जाटों या जट्टों के लड़के अपनी गाड़ियों के पीछे लिखवाते हैं - 'जट्ट दी गड्डी', 'जाट की सवारी' 'जहाँ जाट वहाँ ठाठ', 'जाट के ठाठ' तथा 'Jat Boy' आदि-आदि - लेखक ।

(ii) स्पेन, गाल, जटलैण्ड, स्काटलैण्ड और रोम पर जाटों ने फतेह कर बस्तियां बसाई ।

58. विद्वान् ए.एच. बिगले- जाट शब्द की व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं है। यह ऋग्वेद, पुराण और मनुस्मृति आदि अत्यन्त प्राचीन ग्रन्थों से स्वतः सिद्ध है। यह तो वह वृक्ष है जिससे समय-समय पर जातियों की उत्पनि हुई ।

59. विद्वान् कनिंघम - प्रायः देखा गया है कि जाट के मुकाबले राजपूत विलासप्रिय, भूस्वामी गुजर और मीणा सुस्त अथवा गरीब, कास्तकार तथा पशुपालन के स्वाभाविक शोकीन, पशु चराने में सिद्धहस्त हैं. जबकि जाट मेहनती जमीदार तथा पशुपालक हैं |


60. विख्यात इतिहासकार यदुनाथ सरकार - जाट समाज में जाटनियां परिश्रम करना अपना राष्ट्रीय धर्म समझती हैं, इसलिए वे सदैव जाटों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर कार्य करती हैं। वे आलसी जीवन के प्रति मोह नहीं रखती ।


61 से आगे अगली पोस्ट में डाले जाएंगे ताकि पोस्ट लंबी ना हो तो
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1 week ago | [YT] | 244

THE_LAND_OF_JATS

गर्व से कहो हम जाट है, पर क्यों?
Post number 2
21 से 40 तक

21. हमलावर अहमदशाह अब्दाली ने कहा - जितनी बार मैंने भारत पर आक्रमण किया, पंजाब में खतरनाक जाटों ने मेरा मुकाबला किया । आगरा, मथुरा व भरतपुर के जाट तो नुकीले कांटों की तरह हैं ।

22. एक प्रसिद्ध अंग्रेज मि. नेशफील्ड ने कहा - जाट एक बुद्धिमान् और ईमानदार जाति है ।

23. इतिहासकार सी.वी. वैद ने लिखा है - जाट जाति ने अपनी लड़ाकू प्रवृत्ति को अभी तक कायम रखा है । (जाटों को इस प्रवृत्ति को छोड़ना भी नहीं चाहिए, यही भविष्य में बुरे वक्त में काम भी आयेगी - लेखक)

24. भारतीय इतिहासकार शिवदास गुप्ता - जाटों ने तिब्बत,यूनान, अरब, ईरान, तुर्कीस्तान, जर्मनी, साईबेरिया, स्कैण्डिनोविया, इंग्लैंड, ग्रीक, रोम व मिश्र आदि में कुशलता, दृढ़ता और साहस के साथ राज किया । और वहाँ की भूमि को विकासवादी उत्पादन के योग्य बनाया था । (प्राचीन भारत के उपनिवेश पत्रिका अंक 4.5 1976)

25. महर्षि पाणिनि के धातुपाठ (अष्टाध्यायी) में - जट झट संघाते - अर्थात् जाट जल्दी से संघ बनाते हैं । (प्राचीनकाल में खेती व लड़ाई का कार्य अकेले व्यक्ति का कार्य नहीं था इसलिए यह जाटों का एक स्वाभाविक गुण बन गया - लेखक)

26. चान्द्र व्याकरण में - अजयज्जट्टो हूणाम् अर्थात् जाटों ने हूणों पर विजय पाई ।

27. महर्षि यास्क - निरुक्त में - जागर्ति इति जाट्यम् - जो जागरूक होते हैं वे जाट कहलाते हैं ।
जटायते इति जाट्यम् - जो जटांए रखते हैं वे जाट कहलाते हैं ।

28. अंग्रेजी पुस्तक Rise of Islam - गणित में शून्य का प्रयोग जाट ही अरब से यूरोप लाये थे । यूरोप के स्पेन तथा इटली की संस्कृति मोर जाटों की देन थी ।

29. अंग्रेजी पुस्तक Rise of Christianity - यूरोप के चर्च नियमों में जितने भी सुधार हुए वे सभी मोर जाटों के कथोलिक धर्म अपनाये जाने के बाद हुए, जैसे कि पहले विधवा को पुनः विवाह करने की अनुमति नहीं थी आदि-आदि । मोर जाटों को आज यूरोप में 'मूर बोला जाता है - लेखक ।

30. दूसरे विश्वयुद्ध में जर्मनी की हार पर जर्मन जनरल रोमेल ने कहा- काश, जाट सेना मेरे साथ होती । (वैसे जाट उनके साथ भी थे, लेकिन सहयोगी देशों की सेना की तुलना में बहुत कम थे - लेखक)

31. सुप्रसिद्ध अंग्रेज योद्धा जनरल एफ.एस. यांग - जाट सच्चे क्षत्रिय हैं । ये बहादुरी के साथ-साथ सच्चे, ईमानदार और बात के धनी हैं ।

32. महाराजा कृष्णसिंह भरतपुर नरेश ने सन् 1925 में पुष्कर में कहा - मुझे इस बात पर अभिमान है कि मेरा जन्म संसार की एक महान् और बहादुर जाति में हुआ ।

33. महाराजा उदयभानुसिंह धौलपुर नरेश ने सन् 1930 में कहा- मुझे पूरा अभिमान है कि मेरा जन्म उस महान् जाट जाति में हुआ जो सदा बहादुर, उन्नत एवं उदार विचारों वाली है । मैं अपनी प्यारी जाति की जितनी भी सेवा करूँगा उतना ही मुझे सच्चा आनन्द आयेगा ।

34. डॉ. विटरेशन ने कहा - जाटों में चालाकी और धूर्तता,योग्यता की अपेक्षा बहुत कम होती है ।

35. मेजर जनरल सर जॉन स्टॉन (मणिपुर रेजिडेंट) ने अपने एक जाट रक्षक के बारे में कहा था - ये जाट लोग पता नहीं किस मिट्टी से बने हैं, थकना तो जानते ही नहीं ।

36. अंग्रेज हर प्रकार की कोशिशों के बावजूद चार महीने लड़ाई लड़कर भी भरतपुर को विजय नहीं कर पाये तो लार्ड लेकेक ने लिखा है - हमारी स्थिति यह है कि मार करने वाली सभी तोपें बेकार हो गई हैं और भारी गोलियाँ पूर्णतः समाप्त हो गई हैं । हमारे एक तिहाई अधिकारी व सैनिक मारे जा चुके हैं । जाटों को जीतना असम्भव लगता है ।
उस समय वहाँ की जनता में यह दोहा गाया जाता था-
यही भरतपुर दुर्ग है, दूसह दीह भयंकार ।
जहाँ जटन के छोकरे, दीह सुभट पछार ॥

37. बूंदी रियासत के महाकवि ने महाराजा सूरजमल के बारे में एक बार यह दोहा गाया था -
सहयो भले ही जटनी जाय अरिष्ट अरिष्ट ।
जापर तस रविमल्ल हुवे आमेरन को इष्ट ॥
अर्थात् जाटनी की प्रसव पीड़ा बेकार नहीं गई, उसने ऐसे प्रतापी राजा तक को जन्म दिया जिसने आमेर व जयपुर वालों की भी रक्षा की (यह बात महाराजा सूरजमल के बारे में कही गई थी जब उन्होंने आमेर व जयपुर राजपूत राजाओं की रक्षा की) ।

38. इतिहासकार डॉ० जे. एन. सरकार ने सूरजमल के बारे में लिखा है - यह जाटवंश का अफलातून राजा था ।
39. इतिहासकार डी.सी. वर्मा:- महाराजा सूरजमल जाटों के प्लेटो थे।

40. बादशाह आलमगीर द्वितीय ने महाराजा सूरजमल के बारे में अब्दाली को लिखा था - जाट जाति जो भारत में रहती है, वह और उसका राजा इतना शक्तिशाली हो गया है कि उसकी खुली खुलती है और बंधी बंधती है ।

ये 100 तक है 41 से आगे अगली पोस्ट में
और इसे 21 से पीछे है इसे पिछली पोस्ट में जरूर पढ़े और आगे भी शेयर करे ताकि जाट होने पर क्यों गर्व करे ये पता चले
अपनी राय और पोस्ट कैसी लगी कमेंट्स में जरूर बताएं

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1 week ago | [YT] | 244

THE_LAND_OF_JATS

अगर जाट हो तो पूरा पढ़ना
गर्व से कहो हम जाट हैं, मगर क्यों ?
स्वयं को महान् कहने से कोई महान् नहीं बनता । महान् किसी भी व्यक्ति व कौम को उसके महान् कारनामे बनाते हैं और उन कारनामों को दूसरे लोगों को देर-सवेर स्वीकार करना ही पड़ता है। देव-संहिता को लिखने वाला कोई जाट नहीं था, बल्कि एक ब्राह्मणवादी था जिसके हृदय में इन्सानियत थी उसने इस सच्चाई को अपने हृदय की गहराई से शंकर और पार्वती के संवाद के रूप में बयान किया कि जब पार्वती ने शंकर जी से पूछा कि ये जाट कौन हैं, तो शंकर जी ने इसका उत्तर इस प्रकार दिया -
महाबला महावीर्या महासत्यपराक्रमा: ।
सर्वांगे क्षत्रिया जट्टा देवकल्पा दृढ़व्रता: ॥15॥
(देव संहिता)
अर्थात् - जाट महाबली, अत्यन्त वीर्यवान् और प्रचण्ड पराक्रमी हैं । सभी क्षत्रियों में यही जाति सबसे पहले पृथ्वी पर शासक हुई । ये देवताओं की भांति दृढ़ निश्चयवाले हैं । इसके अतिरिक्त विदेशी व स्वदेशी विद्वानों व महान् कहलाए जाने वाले महापुरुषों की जाट कौम के प्रति समय-समय पर दी गई अपनी राय और टिप्पणियां हैं जिन्हें कई पुस्तकों से संग्रह किया गया है लेकिन अधिकतर टिप्पणियां अंग्रेजी की पुस्तक हिस्ट्री एण्ड स्टडी ऑफ दी जाट्स से ली गई है जो कनाडावासी प्रो० बी.एस. ढिल्लों ने विदेशी पुस्तकालयों की सहायता लेकर लिखी है -
1 से 100 तक है पर पोस्ट लंबी ना जाए तो 20 इस पोस्ट में और बाकी अलग अगली पोस्ट में डाले जाएंगे

1. इतिहासकार मिस्टर स्मिथ - राजा जयपाल एक महान् जाट राजा थे । इन्हीं का बेटा आनन्दपाल हुआ जिनके बेटे सुखपाल राजा हुए जिन्होंने मुस्लिम धर्म अपनाया और 'नवासशाह' कहलाये । (यही शाह मुस्लिम जाटों में एक पदवी प्रचलित हुई । भटिण्डा व अफगानिस्तान का शाह राज घराना इन्हीं के वंशज हैं - लेखक) ।
2. बंगला विश्वकोष - पूर्व सिंध देश में जाट गणेर प्रभुत्व थी । अर्थात् सिंध देश में जाटों का राज था ।
3. अरबी ग्रंथ सलासीलातुत तवारिख - भारत के नरेशों में जाट बल्हारा नरेश सर्वोच्च था । इसी सम्राट से जाटों में बल्हारा गोत्र प्रचलित हुआ - लेखक ।
4. स्कैंडनेविया की धार्मिक पुस्तक एड्डा - यहां के आदि निवासी जाट (जिट्स) पहले आर्य कहे जाते थे जो असीगढ़ के निवासी थे ।
5. यात्री अल बीरूनी - इतिहासकार - मथुरा में वासुदेव से कंस की बहन से कृष्ण का जन्म हुआ । यह परिवार जाट था और गाय पालने का कार्य करता था ।
6. लेखक राजा लक्ष्मणसिंह - यह प्रमाणित सत्य है कि भरतपुर के जाट कृष्ण के वंशज हैं ।
इतिहास के संक्षिप्त अध्ययन से मेरा मानना है कि कालान्तर में यादव अपने को जाट कहलाये जिनमें एकजुट होकर लड़ने और काम करने की प्रवृत्ति थी और अहीर जाति का एक बड़ा भाग अपने को यादव कहने लगा । आज भी भारत में बहुत अहीर हैं जो अपने को यादव नहीं मानते और गवालावंशी मानते हैं ।
7. मिस्टर नैसफील्ड - The Word Jat is nothing more than modern Hindi Pronunciation of Yadu or Jadu the tribe in which Krishna was born. अर्थात् जाट कुछ और नहीं है बल्कि आधुनिक हिन्दी जादू-जादु शब्द का उच्चारण है, जिस कबीले में श्रीकृष्ण पैदा हुए।
दूसरा बड़ा प्रमाण है कि कृष्ण जी के गांव नन्दगांव व वृन्दावन आज भी जाटों के गांव हैं । ये सबसे बड़ा भौगोलिक और सामाजिक प्रमाण है । (इस सच्चाई को लेखक ने स्वयं वहां जाकर ज्ञात किया ।)
8. इतिहासकार डॉ० रणजीतसिंह - जाट तो उन योद्धाओं के वंशज हैं जो एक हाथ में रोटी और दूसरे हाथ में शत्रु का खून से सना हुआ मुण्ड थामते रहे ।
9. इतिहासकार डॉ० धर्मचन्द्र विद्यालंकार - आज जाटों का दुर्भाग्य है कि सारे संसार की संस्कृति को झकझोर कर देने वाले जाट आज अपनी ही संस्कृति को भूल रहे हैं ।
10. इतिहासकार डॉ० गिरीशचन्द्र द्विवेदी - मेरा निष्कर्ष है कि जाट संभवतः प्राचीन सिंध तथा पंजाब के वैदिक वंशज प्रसिद्ध लोकतान्त्रिक लोगों की संतान हैं । ये लोग महाभारत के युद्ध में भी विख्यात थे और आज भी हैं ।
11. स्वामी दयानन्द महाराज आर्यसमाज के संस्थापक ने जाट को जाट देवता कहकर अपने प्रसिद्ध ग्रंथ सत्यार्थप्रकाश में सम्बोधन किया है । देवता का अर्थ है देनेवाला । उन्होंने कहा कि संसार में जाट जैसे पुरुष हों तो ठग रोने लग जाएं ।
12. प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ तथा हिन्दू विश्वविद्यालय बनारस के संस्थापक महामहिम मदन मोहन मालवीय ने कहा - जाट जाति हमारे राष्ट्र की रीढ़ है । भारत माता को इस वीरजाति से बड़ी आशाएँ हैं । भारत का भविष्य जाट जाति पर निर्भर है ।
13. दीनबन्धु सर छोटूराम ने कहा - हे ईश्वर, जब भी कभी मुझे दोबारा से इंसान जाति में जन्म दे तो मुझे इसी महान् जाट जाति के जाट के घर जन्म देना ।
14. मुस्लिमों के पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब ने कहा - ये बहादुर जाट हवा का रुख देख लड़ाई का रुख पलट देते हैं । (सलमान सेनापतियों ने भी इनकी खूब प्रतिष्ठा की इसका वर्णन मुसलमानों की धर्मपुस्तक हदीस में भी है - लेखक)।
15. हिटलर (जो स्वयं एक जाट थे), ने कहा - मेरे शरीर में शुद्ध आर्य नस्ल का खून बहता है । (ये वही जाट थे जो वैदिक संस्कृति के स्वस्तिक चिन्ह (卐) को जर्मनी ले गये थे - लेखक)।
16. कर्नल जेम्स टॉड राजस्थान इतिहास के रचयिता ।
(i): उत्तरी भारत में आज जो जाट किसान खेती करते पाये जाते हैं ये उन्हीं जाटों के वंशज हैं जिन्होंने एक समय मध्य एशिया और यूरोप को हिलाकर रख दिया था ।
(ii): राजस्थान में राजपूतों का राज आने से पहले जाटों का राज था ।
(iii): युद्ध के मैदान में जाटों को अंग्रेज पराजित नहीं कर सके ।
(iv): ईसा से 500 वर्ष पूर्व जाटों के नेता ओडिन ने स्कैण्डेनेविया में प्रवेश किया।
(v): एक समय राजपूत जाटों को खिराज (टैक्स) देते थे ।
17. यूनानी इतिहासकार हैरोडोटस ने लिखा है
(i) There was no nation in the world equal to the jats in bravery provided they had unity अर्थात्- संसार में जाटों जैसा बहादुर कोई नहीं बशर्ते इनमें एकता हो । (यह इस प्रसिद्ध यूनानी इतिहासकार ने लगभग 2500 वर्ष पूर्व में कहा था । इन दो लाइनों में बहुत कुछ है । पाठक कृपया इसे फिर एक बार पढ़ें । यह जाटों के लिए मूलमंत्र भी है - लेखक )
(ii) जाट बहादुर रानी तोमरिश ने प्रशिया के महान राजा सायरस को धूल चटाई थी ।
(iii) जाटों ने कभी निहत्थों पर वार नहीं किया ।
18. महान् सम्राट् सिकन्दर जब जाटों के बार-बार आक्रमणों से तंग आकर वापिस लौटने लगे तो कहा- इन खतरनाक जाटों से बचो ।
19. एक पम्पोनियस नाम के प्राचीन इतिहासकार ने कहा - जाट युद्ध तथा शत्रु की हत्या से प्यार करते हैं ।
20. हमलावर तैमूरलांग ने कहा - जाट एक बहुत ही ताकतवर जाति है, शत्रु पर टिड्डियों की तरह टूट पड़ती है, इन्होंने मुसलमानों के हृदय में भय उत्पन्न कर दिया।

ये 100 तक है ☝️ बाकी 21 से आगे अगली पोस्ट में डाले जाएंगे ताकि पोस्ट लंबी ना जाए और आप सब पढ़ सके जाट है तो अगली पोस्ट जरूर पढ़े ताकि आपको जाट होने का पता चले कि जाट होने पर गर्व कैसे है ☝️

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1 week ago | [YT] | 248

THE_LAND_OF_JATS

92 साल पहले 8 अगस्त 1935 को सिंघानी में नवाबी गोलियों का सामना करते हुए 23 लौहपुरुषों में शहादत दी थी। ये लोग नवाब द्वारा लगाए गए ऊंट टैक्स का विरोध करने के लिए एक जगह एकत्रित हुए थे।

नवाबी हुकूमत से तंग जनता समानांतर सरकार का भी गठन करना चाहती थी। लोगों के दिलों में आजादी की ज्वाला धधक चुकी थी। लोगों ने डटकर हुकूमत से टक्कर ली थी।

लोहारू की रियासत के तत्कालीन नवाब अमीनुद्दीन अहमद खान ने किसानों पर अनाप-शनाप कर लगा दिए थे। लोहारू क्षेत्र के लोगों को आजादी से पूर्व अंग्रेजी और नवाब शासन के रूप में दोहरी गुलामी की मार झेलनी पड़ी थी। लोहारू रियासत में लगभग 52 गांव थे और यह बावनी के नाम से जानी जाती थी। नवाबी हुकूमत द्वारा अपना खजाना भरने के लिए जनता पर तरह -तरह के नाजायज कर थोप दिए जाते थे। ताकत के बल पर जनता से कर की वसूली की जाती थी।

इस बालू रेत और बंजर क्षेत्र के किसानों के लिए इतना कर अदा करना संभव नहीं था। लोहारू की जनता ने सामूहिक रुप से कर देना बंद कर दिया था। इस लगान के चलते किसान भूखे मरने को मजबूर हो गए थे, लेकिन जिद्दी नवाब ने जनता की गरीबी की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। तानाशाही रवैया तथा ऊंट कर की उगाही नवाब ने तेज कर दी थी। इसी के विरोध की आग किसानों में धधक रही थी।

8 अगस्त 1935 को सिंघानी में सियासत के तहत पड़ने वाले गांवों के हजारों किसान एकत्रित हो गए तथा नवाब के खिलाफ बगावत का बिगुल बजाने की तैयारी हो रही थी। इसकी जानकारी जब नवाब को मिली तो उन्होंने अपने सेना के जवानों को किसानों पर गोली चलाने के आदेश दे दिए। निहत्थे किसानों पर हुए गोलीकांड में 23 किसान शहीद हो गए वहीं सैकड़ों घायल हुए थे।

नवाब इतना क्रूर था कि घायल हुए किसानों को इलाज के लिए भिवानी तथा हिसार भी नहीं ले जाने दिया। बताया जाता है कि भिवानी और हिसार को जाने वाले सभी रास्ते बंद करवा दिए गए थे। लोगों ने गांवों को खाली कर जोहड़ों में शरण ली थी। 8 अगस्त का दिन सिंघानी में शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। नवाब लोहारू ने जनता पर लगाए थे ये टैक्स

लगान टैक्स, आबियाना, ऊंटो पर टेक्स, आल्हा मिल्कियत व बिस्वेदारी टैक्स, खान टैक्स, बैल व भेड़-बकरी टैक्स, करेपा विवाह टैक्स, नजराना टैक्स, वसीयत टैक्स, चुंगी टैक्स, नंबरदारी व बेलदारी टैक्स, विरासत का टैक्स, नवाब का कर्ज, चबूतरा टैक्स, बेगार व पेड़ कटाई का टैक्स, शामलात व बणी की भूमि पर कब्जा, लगान वसूली सहित अनेक प्रकार के टैक्स जनता पर लगाए गए थे।

घटनाक्रम :- 1935 में नवाब द्वारा लगाए गए विभिन्न टैक्सों को

सिंघानी के ग्रामीणों ने देने से मना कर दिया जिसके बाद बाकी के गांवों ने कहा कि सिंघानी गांव से टैक्स ले आए हम सभी टैक्स दे देंगे इस पर नवाब लोहारू ने सिंघानी गांव के लोगों से अपील की कि आप मुट्ठी बंद कर जो भी टैक्स दोगे मुझे मंजूर है ताकि बावनी के बाकी गांव भी टैक्स दे दें, जिस पर ग्रामीणों ने यह कहते हुए टैक्स देने से मना कर दिया कि हम बावनी के सभी गांवों के साथ हैं इसलिए कोई टैक्स नहीं देंगे।

जब नवाब के टैक्स अधिकारी मण्डोली में टैक्स लेनें गए तो बद्दाराम जाट ने टैक्स अधिकारी को मारकर घोड़े पर डालकर नवाब को भिजवा दिया जिससे बाद कार्रवाई करते हुए नवाब ने बुद्दाराम जाट को ढूंढने के लिए मंडोली में आगजनी करवाई व उसके बाद चैहड़ में आगजनी व लाठीचार्ज किया गया । इन घटनाओं के विरोध में 8 अगस्त 1935 को सिंघानी में बावनी की पंचायत बुलाई गई।

जिसमें मौजूद ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए अपना बल दिखाने व भय का माहौल पैदा करने के लिए लोगों पर गोलियां चलाईं जिसमें सिंघानी व आसपास के गांवों के 23 लोग शहीद हो गए। गांव के लोगों ने लाठी, जेली व कुल्हाड़ियां उठाकर नवाब सेना का सामना किया जिससे नवाब सेना को पिछे हटना पड़ा। क्रूर नवाब के आदेश पर घायलों को भिवानी अस्पताल में नहीं ले जाने दिया गया तथा गांव वाले चोरी छुपे घायलों को हिसार अस्पताल में इलाज के लिए लेकर गए |

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1 week ago | [YT] | 185

THE_LAND_OF_JATS

जाट समाज का नाम पूरी दुनिया में रोशन करने के लिए हमारी कौम का एक और नन्हा हीरा मैदान में चमक उठा है! हरियाणा के झज्जर जिले के गांव अकेहड़ी मदनपुर निवासी बलराज जाखड़ के 9 वर्षीय बेटे मयंक जाखड़ ने अपनी अद्भुत खेल प्रतिभा, जूनून और लोहे जैसी इच्छाशक्ति से एक नया इतिहास रच दिया है। चंडीगढ़ में आयोजित मैराथन प्रतियोगिता में इस नन्हें धावक ने 10 किलोमीटर की लंबी दौड़ महज 52 मिनट 15 सेकंड में पूरी करके पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

ये होता है मेहनत और DNA 🧬 का फर्क जेनेटिक्स बोलते है आपको परखने की समझ होनी चाहिए हर जाट में कुछ ना कुछ QUALITY होती थी बड़े बुजुर्गों में सिंगल सिंगल जाट में कोई न कोई खूबी के लिए मशहूर होते है जाट तो आज की पीढ़ी भी जाटों की अपने QUALITY पर काम करे जेनेटिक्स को पहचानो अच्छे जेनेटिक्स है आपके एक जाटों की थोड़ी महनत ही बहुत ज्यादा RESULT देती है ये जेनेटिक्स का नस्ल का फर्क है नी मेहनत तो बहुत करते है इनसे भी ज्यादा पर जेनेटिक्स का फर्क इसी को बोलते है अपने नस्ल को बचाओ अपने जेनेटिक्स को बचाओ तुम्हारे पास जो है वो लोगों के पास नहीं है इसलिए जो पा नहीं सकते वो उसको खराब करने के लिए जाटों के अंदर ये कह रहे है कि INTERCASTE से कुछ नी होता बल्कि ओर अच्छी बात है दो GENES आ जाते है पर ऐसा नहीं है ये कमजोर कौम के लिए सही है पर एक मजबूत जेनेटिक्स कौम के लिए नहीं है वो लोग आपके जेनेटिक्स से अपने जेनेटिक्स मजबूत करना चाहते है पर बचाओ अपने जेनेटिक्स और INTERCASTE MARRIAGE से बचो हमें जरूरत ही नहीं है हमारे जेनेटिक्स वैसे ही मजबूत है जो इस कौम के पास है वो सब गुण है हमारे पास और जो कहते है कि 99 परसेंट सबके सेम होते है तो किसी का बच्चा किसी का भी हो जाएगा और अलग अलग देश के लोगों को देख सकते है वो है एनवायरमेंट का फर्क और अगर 1 परसेंट की चेंज को देखोगे तो 30 मिलियन से ज्यादा जेनेटिक्स कोड और SNPs अलग होते है और अगर एक भी अलग हो तो बहुत फर्क पड़ जाता है और यहां तो 30 मिलियन से ज्यादा का फर्क है तो ये सब तर्क किसी भी कंपनी की एड्स की तरह होते है जहां मैन चीज़ें नीचे कोने में लिखी होती है ☝️ वैसे ही आप अधूरी जानकारियों का शिकार ना बने

मयंक की इस ऐतिहासिक टाइमिंग ने 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' (1 घंटा 3 मिनट) और 'इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' (59 मिनट) दोनों के रिकॉर्ड समय को बहुत बड़े अंतर से पछाड़ दिया है। अपनी कोच नेहा के मार्गदर्शन में दिन-रात पसीना बहा रहे मयंक का सपना भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। इतनी छोटी सी उम्र में ऐसी धाक जमाने वाले इस जाट वीर के हौसले और जज्बे को सलाम!

बहुत सारी शुभकामनाएं आगे के लिए अपने समाज का नाम रोशन करे 🙌❤️

1 week ago (edited) | [YT] | 291