नागालैंड : गोरखा यूथ क्लब दीमापुर (GYCD) ने बलिदान दिवस के अवसर पर आजाद हिन्द फौज के अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल और कैप्टन एन केंगुरुसे के सम्मान में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया। जिसमें संस्था के सदस्यों के द्वारा जिला अस्पताल में जाकर बड़ी संख्या में रक्तदान किया गया।
भारतीय गोर्खा परिसंघद्वारा संसद भवन परिसरमा आयोजित बलिदान दिवसमा सहभागी हुन पाउँदा म अत्यन्तै कृतज्ञ छु।
भारत माताका लागि सर्वोच्च बलिदान दिनुहुने वीर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल ज्यू र सम्पूर्ण वीर गोर्खाहरूको सम्मानमा समर्पित यो दिन, हाम्रो गोर्खा समुदायको अटुट देशभक्ति, अद्वितीय साहस र गौरवशाली विरासतलाई झल्काउने एक निकै महत्त्वपूर्ण दिन हो। 🇮🇳
जय गोर्खा, जय हिन्द ! 🙏
- हर्ष वर्धन श्रृंगला, सांसद
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Deeply humbled to join the Balidan Diwas honouring Veer Shaheed Major Durga Malla and the brave Gorkhas who made the supreme sacrifice for Mother India, at the Parliament Complex, organised by the Bharatiya Gorkha Parisangh.
A very significant day reflecting the unwavering patriotism, unparalleled courage, and the proud, enduring legacy of our Gorkha community. 🇮🇳
असम : बिश्वनाथ जिले के असम गोरखा सम्मेलन द्वारा 'बलिदान दिवस' का आयोजन
दीपक राई, वीर गोरखा न्यूज नेटवर्क बिश्वनाथ : भारत के वीर सपूत और अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल की स्मृति में असम राज्य के बिश्वनाथ जिले के असम गोरखा सम्मेलन द्वारा 'बलिदान दिवस' का आयोजन किया गया। जिसमें क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व मंत्री पल्लब लोचन दास शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मुझे इस पवित्र कार्यक्रम में शामिल होने का सम्मान मिला है और मैं अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल के सर्वोच्च बलिदान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने आगे कहा कि शहीद मेजर दुर्गा मल्ल का असाधारण साहस और अटूट देशभक्ति हमेशा हमारे लिए प्रेरणा का एक स्थायी स्रोत बनी रहेगी। इस कार्यक्रम में जो गर्मजोशी दिखाई, जो स्नेह दिया, जो आशीर्वाद दिया, मैं आयोजकों का हृदय से धन्यवाद करता हूं।
कंगलातोंगबी : भारतीय गोरखा परिसंघ, मणिपुर राज्य शाखा द्वारा अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल के 82वें बलिदान दिवस का पालन
दीपक राई, वीर गोरखा न्यूज नेटवर्क भारतीय गोरखा परिसंघ, मणिपुर राज्य शाखा द्वारा 25 अगस्त के दिन कंगलातोंगबी में अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल के 82वें बलिदान दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें बतौर मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री हेकम डिंगो सिंह शामिल हुए। मंत्री सिंह ने कहा कि अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल जी के बलूदान दिवस में भाग लेना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है। हमारी मातृभूमि की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले आजाद हिंद फौज के भारत के पहले गोरखा शहीद के सर्वोच्च बलिदान को याद करने का दिन। उनका साहस, देशभक्ति और आदर्श पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।
असम : कारबी आंगलोंग में अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल के 82वें बलिदान दिवस का आयोजन
आज असम के स्वायत्त क्षेत्र कारबी आंगलोंग स्थित हवाईपुर में आजाद हिन्द फौज के अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल के 82वें बलिदान दिवस का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि रांगखांग के विधायक तुलीराम रांगहांग शामिल हुए। उन्होंने कहा कि हमारे गोरखा शहीदों का शौर्य, उनका त्याग, उनकी देशभक्ति आज भी हर भारतीय को प्रेरित करती है। मातृभूमि के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले वीर आत्माओं को मेरी हार्दिक श्रद्धांजलि।
दीपक राई वीर गोरखा न्यूज नेटवर्क अमर शहीद गोरखा सैनिक राइफलमैन नेहल गुरुंग जम्मू और कश्मीर के कठुआ जिले के रहने वाले थे और भारतीय सेना के 9 गोरखा राइफल्स रेजिमेंट में सेवारत थे। एलओसी पर जम्मू-कश्मीर में ही सेवा करते हुए, उन्होंने आज ही दिन 25 अगस्त 2018 को राज्य में घुसपैठ विरोधी अभियान के दौरान महज 22 वर्ष की आयु में भारत माता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
साल 2018 में, राइफलमैन नेहल गुरुंग केरन सेक्टर, कुपवाड़ा, जम्मू-कश्मीर में एलओसी के समीप ड्यूटी कर रहे थे, जो लगातार संघर्ष विराम उल्लंघन और आतंकवादी घुसपैठ के लिए संवेदनशील क्षेत्र है। 25 अगस्त 2018 को, जब वह एक काउंटर-घुसपैठ ग्रिड के हिस्से के रूप में सशस्त्र गश्त पर थे, तो वह एक बारूदी सुरंग विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। श्रीनगर के 92 बेस अस्पताल ले जाए जाने के बावजूद, उन्होंने अपनी चोटों के कारण दम तोड़ दिया और कर्तव्य का पालन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
दलवीर सिंह लोहार : असम के गोर्खा स्वतंत्रता सेनानी, श्रमिक नेता और जनप्रतिनिधि, स्वतंत्र भारत के प्रथम गोरखा विधायक
दीपक राई वीर गोरखा न्यूज नेटवर्क भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अनेक ऐसे वीर सेनानी हुए, जिनका योगदान राष्ट्रीय इतिहास के मुख्य पन्नों में अपेक्षित स्थान नहीं पा सका। असम के गोर्खा समाज से आने वाले दलवीर सिंह लोहार भी ऐसे ही संघर्षशील व्यक्तित्व थे। वे स्वतंत्रता सेनानी, श्रमिक नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनेता के रूप में सक्रिय रहे। स्वतंत्र भारत के प्रथम आम चुनाव में असम के डिगबोई विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल कर उन्होंने भारतीय गोर्खा राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा। उपलब्ध चुनावी अभिलेखों में 1952 के असम विधानसभा चुनाव में डिगबोई से Lohar, Dalbir Singh का नाम निर्वाचित सदस्य के रूप में दर्ज है।
{{ डिब्रूगढ़ की धरती पर जन्म }}
दलवीर सिंह लोहार का जन्म 26 जनवरी 1915 को असम के डिब्रूगढ़ जिले के खलीहामारी में हुआ था। उनके पिता का नाम अनंतराम लोहार बताया जाता है। कम उम्र से ही उनके भीतर देश और समाज के प्रति जागरूकता विकसित हो गई थी।
1921 में जब महात्मा गांधी डिब्रूगढ़ पहुंचे, तब युवा दलवीर सिंह उनके नेतृत्व में निकले कांग्रेस के जुलूस में शामिल हुए। यही उनके स्वतंत्रता आंदोलन से सक्रिय जुड़ाव की शुरुआत मानी जाती है। आगे चलकर उन्होंने सत्याग्रह और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विभिन्न आंदोलनों में भाग लिया।
{{किशोरावस्था से स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय }}
दलवीर सिंह का संघर्ष केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित नहीं था। वे ब्रिटिश शासन की नीतियों के विरोध में प्रत्यक्ष आंदोलनों में शामिल हुए। 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान डिब्रूगढ़ में उनकी सक्रिय भूमिका रही और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। उपलब्ध विवरणों के अनुसार वे 1930-31 के दौरान लगभग तीन महीने जेल में रहे।
उनका नाम असम के उन गोर्खा स्वतंत्रता सेनानियों में आता है जिन्होंने ब्रिटिश शासन का सामना किया। उनके साथ भक्त बहादुर प्रधान और अनंतलाल शर्मा जैसे अन्य गोर्खा स्वतंत्रता सेनानी भी आंदोलन में सक्रिय थे।
1941 में गांधीजी के सत्याग्रह अभियान के दौरान भी दलवीर सिंह सक्रिय रहे। उनके आंदोलन में भाग लेने के कारण ब्रिटिश प्रशासन ने उन्हें असम से बाहर कर दिया था। इस प्रकार उनके संघर्ष में गिरफ्तारी, प्रतिबंध और निर्वासन जैसी कठिन परिस्थितियां भी शामिल रहीं।
{{ डिगबोई तेल रिफाइनरी श्रमिक आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका }}
दलवीर सिंह लोहार का व्यक्तित्व केवल स्वतंत्रता सेनानी तक सीमित नहीं था। वे श्रमिकों के अधिकारों के प्रखर नेता भी बने। 1939 में डिगबोई की तेल रिफाइनरी के श्रमिकों के बीच हुए ऐतिहासिक आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है। उस समय डिगबोई भारत के तेल उद्योग का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। श्रमिकों की समस्याओं और अधिकारों को लेकर आंदोलन तेज हुआ और ब्रिटिश प्रशासन ने इसे दबाने के लिए कठोर कदम उठाए। दलवीर सिंह लोहार इस श्रमिक संघर्ष के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं।
यह आंदोलन उनके राजनीतिक विचारों की एक महत्वपूर्ण विशेषता को सामने लाता है—उनके लिए स्वतंत्रता केवल अंग्रेजी शासन से मुक्ति नहीं थी, बल्कि मजदूरों को सम्मान, अधिकार और सामाजिक न्याय दिलाना भी था।
{{ स्वतंत्रता के बाद राजनीतिक यात्रा }}
15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। स्वतंत्रता के बाद भी दलवीर सिंह लोहार सार्वजनिक जीवन से अलग नहीं हुए। वे श्रमिक संगठन और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। उनका संबंध इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) से रहा और वे असम के श्रमिक आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे। वे Assam Chah Mazdoor Sangha के केंद्रीय अध्यक्ष भी रहे और उपलब्ध विवरणों के अनुसार 1964 से 1968 तक इस पद पर रहे।
इस प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष करने वाला यह युवा नेता स्वतंत्रता के बाद मजदूरों के अधिकारों की आवाज बन गया।
{{ स्वतंत्र भारत के पहले गोर्खा विधायक होने का गौरव }}
दलवीर सिंह लोहार के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक थी स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनाव में विधानसभा चुनाव जीतना। 1951-52 के प्रथम आम चुनावों में उन्होंने असम के डिगबोई विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता। 1952 के असम विधानसभा चुनाव के रिकॉर्ड में डिगबोई से उनका नाम स्पष्ट रूप से दर्ज है।
गोरखा समुदाय के इतिहास में यह उपलब्धि अत्यंत महत्वपूर्ण है। कई ऐतिहासिक स्रोत उन्हें स्वतंत्र भारत में विधानसभा चुनाव जीतने वाले पहले भारतीय गोर्खा के रूप में उल्लेखित करते हैं। उनकी चुनावी जीत यह प्रमाणित करती है कि असम के गोर्खा समुदाय ने स्वतंत्र भारत के लोकतांत्रिक राजनीतिक जीवन में शुरुआती दौर से ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
{{ क्या वे असम के उपमंत्री थे ? }}
दलवीर सिंह लोहार को लेकर एक प्रश्न अक्सर सामने आता है कि क्या वे असम सरकार में उपमंत्री (Deputy Minister) भी रहे थे। उपलब्ध विश्वसनीय चुनावी और विधानसभा संबंधी स्रोत उनके विधायक, स्वतंत्रता सेनानी और श्रमिक नेता होने की पुष्टि करते हैं। लेकिन उपलब्ध प्राथमिक स्रोतों में उन्हें असम सरकार के उपमंत्री के रूप में नियुक्त किए जाने की स्पष्ट पुष्टि अभी नहीं मिलती। इसलिए उनके जीवन का यह हिस्सा प्रमाणित सरकारी रिकॉर्ड के बिना निश्चित रूप से लिखना उचित नहीं होगा।
{{ गोर्खा समाज के लिए प्रेरणा }}
दलवीर सिंह लोहार की विशेषता यह थी कि उन्होंने अपने जीवन के अलग-अलग चरणों में तीन महत्वपूर्ण मोर्चों पर संघर्ष किया—देश की स्वतंत्रता, श्रमिक अधिकार और गोर्खा समाज का सम्मान। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि असम का गोर्खा समुदाय केवल सेना या चाय-बागानों तक सीमित समुदाय नहीं रहा, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन, श्रमिक राजनीति और लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के निर्माण में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
आज उनके नाम पर असम में सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। अखिल असम गोर्खा छात्र संघ (AAGSU) द्वारा 2026 में उनकी स्मृति में 11वीं दलवीर सिंह लोहार ट्रॉफी क्रिकेट प्रतियोगिता आयोजित की गई। आयोजकों ने इसे स्वतंत्रता सेनानी दलवीर सिंह लोहार के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बताया।
उनके नाम पर असम में “Freedom Fighter Late Dalbir Singh Lohar Samanvay Khetra” जैसे स्मृति-स्थल/परियोजनाओं का सरकारी दस्तावेजों में उल्लेख भी मिलता है।
{{ एक भूला हुआ लेकिन गौरवशाली अध्याय }}
दलवीर सिंह लोहार का जीवन भारतीय गोर्खा इतिहास का एक महत्वपूर्ण, किंतु लंबे समय तक अपेक्षाकृत कम चर्चित अध्याय है। 1921 में गांधीजी के डिब्रूगढ़ आगमन से प्रेरित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में कदम रखने वाला यह युवा आगे चलकर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सत्याग्रह करता है, जेल जाता है, डिगबोई के श्रमिक आंदोलन का नेतृत्व करता है और स्वतंत्र भारत में लोकतांत्रिक चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचता है।
उनकी कहानी केवल एक व्यक्ति की जीवनी नहीं है। यह असम के गोर्खाओं की राष्ट्र निर्माण में भागीदारी, श्रमिक संघर्ष और लोकतांत्रिक राजनीति में शुरुआती योगदान की कहानी भी है।
इसीलिए दलवीर सिंह लोहार को केवल एक पूर्व विधायक या श्रमिक नेता के रूप में नहीं, बल्कि असम और भारतीय गोर्खा समाज के स्वतंत्रता सेनानी और लोकतांत्रिक अग्रदूत के रूप में याद किया जाना चाहिए। आज उनके नाम पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम और स्मृति आयोजन इस बात का संकेत हैं कि उनकी विरासत नई पीढ़ी तक धीरे-धीरे फिर पहुंच रही है।
हिमाचल प्रदेश : सिरमौर के नाहन में साल 1810 में निर्मित ऐतिहासिक गोरखा स्थल 'जैतक किला'
दीपक राई वीर गोरखा न्यूज नेटवर्क हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की तहसील नाहन से लगभग 22 किलोमीटर दूर जैतक पहाड़ियों पर समुन्द्र तल से 4849 फीट ऊँचाई पर स्थित है। इसका निर्माण साल 1810 में गोरखा नेता रणजोर सिंह थापा (अमर सिंह थापा के पुत्र) द्वारा किया गया था। यह एंग्लो-गोरखा युद्ध (1814–1816) का एक प्रमुख गवाह रहा है। वर्तमान स्थिति में यह ऐतिहासिक किला खंडहर के रूप में मौजूद है, जिसके प्रांगण में एक प्राचीन शिवलिंग भी स्थापित है।
हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक स्थानों की सूची में जो बात इसे जगह देती है, वह है इसका ऐतिहासिक महत्व। इसका निर्माण नाहन किले से खरीदी गई सामग्री से किया गया था और एक समय इसे तोड़-फोड़ कर नष्ट कर दिया गया था। हालाँकि, ऊपर से मनोरम दृश्य आश्चर्यजनक हैं। साफ दिनों में, आप पर्वत श्रृंखलाओं को देख सकते हैं। अन्य दिनों में, आप दुनिया के शीर्ष पर रहने का आनंद ले सकते हैं। यह नाहन से केवल 25 किमी दूर है।
{{ जैतक किले का इतिहास }}
जैतक किला भारत के औपनिवेशिक इतिहास में प्रमुख महत्व रखता है। इसका निर्माण रंजोर सिंह थापा ने नाहन किले के मलबे का उपयोग करके किया था, जिस पर गोरखाओं ने हमला किया था और नष्ट कर दिया था। यह पहाड़ी की चोटी वाला किला एंग्लो-गोरखा युद्ध के दौरान एक प्रमुख आधार बन गया।
काजी अमर सिंह थापा के नेतृत्व में, गोरखा सेना ने इस क्षेत्र में कई बार ब्रिटिश और सिरमौर सेनाओं को सफलतापूर्वक हराया। किले में भयंकर लड़ाइयाँ हुईं जो गोरखा योद्धाओं की बहादुरी और रणनीतिक उत्कृष्टता को प्रदर्शित करती थीं। भले ही बाद में किले का अधिकांश हिस्सा नष्ट हो गया था, पत्थर की दीवारों, प्रवेश द्वार और महल के खंडहरों के अवशेष अभी भी इसके स्मारकीय अतीत की बात करते हैं।
{{ जैतक किले की वास्तुकला }}
रणनीतिक रूप से एक ऊंचे रिज पर निर्मित, किले ने आसपास की घाटियों पर स्पष्ट निगरानी प्रदान की - जिससे दुश्मनों के लिए किसी का ध्यान नहीं जाना लगभग असंभव हो गया।
मुख्य वास्तुशिल्प मुख्य बातें:
- मुख्य रूप से नष्ट हुए नाहन किले के पत्थरों का उपयोग करके बनाया गया था।
- कॉम्पैक्ट अभी तक मजबूत रक्षात्मक संरचना।
- हिलटॉप प्लेसमेंट क्षेत्र का विहंगम दृश्य देता है।
- परिसर के अंदर एक प्राचीन महल के खंडहर संकरे रास्ते और खड़ी चढ़ाई किले की सुरक्षा को बढ़ाती है।
दार्जीलिङ भारतकै सबैभन्दा भ्रष्टाचार प्रभावित क्षेत्रमध्ये एक मुख्यमन्त्रीसँग भेटमा गम्भीर विषय उठान
आज नवान्नस्थित कार्यालयमा माननीय मुख्यमन्त्री श्री सुवेन्दु अधिकारीसँग भेट गरि दारर्जीलिङ पहाडमा दशकौँ देखि व्याप्त भ्रष्टाचार तथा अनियमितताका विषयमा विस्तृत छलफल गरियो। भेटका क्रममा गृह सचिव सुश्री संघमित्रा घोष पनि उपस्थित हुनुहुन्थ्यो।
भेटमा जीटीए तथा दार्जिलिङ नगरपालिकामा विपक्षीको भूमिकामा रहँदै हालसम्म उठाइएका तथा दर्ता गरिएका भ्रष्टाचार र अनियमितता सम्बन्धी विभिन्न मामिलाबारे मुख्यमन्त्रीलाई विस्तृत जानकारी गराएँ।
मैले स्पष्ट रूपमा आफ्नो धारणा राख्दै भनेँ कि हाम्रा जनताका लागि जस्तो सुकै राजनीतिक समाधान प्राप्त भए पनि भ्रष्टाचारको अन्त्य हुन नसकेसम्म त्यसको वास्तविक लाभ आम नागरिक सम्म पुग्न सक्दैन। दार्जीलिङ पहाड,भारतकै सबैभन्दा भ्रष्टाचार प्रभावित क्षेत्रहरू मध्ये एक बन्दै गएको मेरो दृढ धारणा पनि उहाँसमक्ष राखेँ।
मुख्यमन्त्रीले भ्रष्टाचारमा संलग्न दोषी नेताहरू तथा सम्बन्धित व्यक्तिहरू माथि कानुन अनुसार कारवाही हुनुपर्ने र यस विषयमा कडा उदाहरण प्रस्तुत गर्नुपर्ने कुरामा सहमति जनाउनुभयो। स्वच्छ,पारदर्शी र जवाफदेही शासन प्रणाली मार्फत मात्र दार्जीलिङ पहाडको समग्र विकास सुनिश्चित गर्न तथा गरिब,विपन्न र सीमान्तकृत नागरिकलाई न्याय दिलाउन सकिने विषयमा पनि छलफल भयो।
भेटका क्रममा विशेष रूपमा उठाइएका विषयहरू:
1.जीटीए अन्तर्गत शिक्षकको योग्यता,भर्ती प्रक्रिया तथा नियुक्तिसम्बन्धी विषय। 2.खाद्यान्न सामग्री,विशेषगरी कच्चा मुसुर दालको खरिद प्रक्रियामा भएका भनिएका अनियमितता। 3.विपद् राहत तथा राज्य विपद् प्रतिक्रिया कोषको रकमको कथित दुरुपयोग। 4.जल जीवन मिशन अन्तर्गत योजना कार्यान्वयन तथा ठेक्का प्रक्रियासम्बन्धी विषय। 5.दार्जीलिङमा अग्ला भवन निर्माणका लागि दिइएका अनधिकृत वा अनियमित अनुमतिसम्बन्धी विषय। 6.जीटीएको बहुमूल्य सम्पत्तिको गैरकानुनी वा न्यून मूल्याङ्कन गरि गरिएको भनिएको लिज। 7.सन् २०२३ को टिस्टा बाढी पछि वितरण गरिएको राहत तथा सहयोगसम्बन्धी विषय। 8.अम्रुत योजनाअन्तर्गत सञ्चालन गरिएका कार्यहरू। 9.दार्जीलिङ तथा खरसाङ नगरपालिकामा हाउसिङ फर अल तथा प्रधानमन्त्री आवश योजनाको कार्यान्वयन। 10.दार्जीलिङ,कालेबुङ,खरसाङ तथा मिरिक नगरपालिकाका सम्पत्तिको लिज,विकास,निर्माण,परिवर्तन तथा प्रयोगसँग सम्बन्धित विषयहरू,जसमा स्वीकृति,मूल्याङ्कन,टेन्डर प्रक्रिया,लिजका सर्तहरू तथा प्रचलित कानुनको अनुपालनसम्बन्धी प्रश्नहरू समावेश छन्। दार्जीलिङ पहाडका विभिन्न क्षेत्रमा प्रधानमन्त्री ग्राम सडक योजना अन्तर्गत भएका सडक निर्माण तथा अन्य कार्यको कमजोर गुणस्तर र कथित अनियमितता।
मुख्यमन्त्रीले यी सबै विषयमा आवश्यक कारवाही अघि बढाउन जीटीएका प्रधान सचिव तथा सम्बन्धित अधिकारीहरूलाई आवश्यक प्रक्रिया अगाडि बढाउन निर्देशन दिनुभएको छ। मुख्यमन्त्री आगामी सेप्टेम्बरको पहिलो सातामा सिलिगुडी आउनुहुने कार्यक्रम रहेको छ। सो अवसरमा दार्जीलिङ तथा यहाँका जनतासँग सम्बन्धित यी मामिलाहरूका साथै अन्य महत्वपूर्ण विषयमा थप छलफल गरिनेछ।
दार्जीलिङ पहाडलाई भ्रष्टाचारमुक्त,पारदर्शी र जवाफदेही शासनतर्फ अघि बढाउने प्रतिबद्धताका लागि माननीय मुख्यमन्त्रीप्रति हार्दिक आभार व्यक्त गर्दछु। भ्रष्टाचारको अन्त्य बिना विकास सम्भव छैन। स्वच्छ शासन,पारदर्शिता र जवाफदेहिता मार्फत मात्र दार्जीलिङ पहाडको वास्तविक विकास सम्भव छ।
सिक्किम मूल की और पटना उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राई को सिक्किम राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
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नागालैंड : गोरखा यूथ क्लब दीमापुर (GYCD) ने बलिदान दिवस के अवसर पर आजाद हिन्द फौज के अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल और कैप्टन एन केंगुरुसे के सम्मान में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया। जिसमें संस्था के सदस्यों के द्वारा जिला अस्पताल में जाकर बड़ी संख्या में रक्तदान किया गया।
1 day ago | [YT] | 122
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भारतीय गोर्खा परिसंघद्वारा संसद भवन परिसरमा आयोजित बलिदान दिवसमा सहभागी हुन पाउँदा म अत्यन्तै कृतज्ञ छु।
भारत माताका लागि सर्वोच्च बलिदान दिनुहुने वीर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल ज्यू र सम्पूर्ण वीर गोर्खाहरूको सम्मानमा समर्पित यो दिन, हाम्रो गोर्खा समुदायको अटुट देशभक्ति, अद्वितीय साहस र गौरवशाली विरासतलाई झल्काउने एक निकै महत्त्वपूर्ण दिन हो। 🇮🇳
जय गोर्खा, जय हिन्द ! 🙏
- हर्ष वर्धन श्रृंगला, सांसद
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Deeply humbled to join the Balidan Diwas honouring Veer Shaheed Major Durga Malla and the brave Gorkhas who made the supreme sacrifice for Mother India, at the Parliament Complex, organised by the Bharatiya Gorkha Parisangh.
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Jai Gorkha, Jai Hind! 🙏
- Harsh Vardhan Shringla , MP
1 day ago | [YT] | 79
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असम : बिश्वनाथ जिले के असम गोरखा सम्मेलन द्वारा 'बलिदान दिवस' का आयोजन
दीपक राई, वीर गोरखा न्यूज नेटवर्क
बिश्वनाथ : भारत के वीर सपूत और अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल की स्मृति में असम राज्य के बिश्वनाथ जिले के असम गोरखा सम्मेलन द्वारा 'बलिदान दिवस' का आयोजन किया गया। जिसमें क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व मंत्री पल्लब लोचन दास शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मुझे इस पवित्र कार्यक्रम में शामिल होने का सम्मान मिला है और मैं अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल के सर्वोच्च बलिदान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने आगे कहा कि शहीद मेजर दुर्गा मल्ल का असाधारण साहस और अटूट देशभक्ति हमेशा हमारे लिए प्रेरणा का एक स्थायी स्रोत बनी रहेगी। इस कार्यक्रम में जो गर्मजोशी दिखाई, जो स्नेह दिया, जो आशीर्वाद दिया, मैं आयोजकों का हृदय से धन्यवाद करता हूं।
1 day ago | [YT] | 114
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कंगलातोंगबी : भारतीय गोरखा परिसंघ, मणिपुर राज्य शाखा द्वारा अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल के 82वें बलिदान दिवस का पालन
दीपक राई, वीर गोरखा न्यूज नेटवर्क
भारतीय गोरखा परिसंघ, मणिपुर राज्य शाखा द्वारा 25 अगस्त के दिन कंगलातोंगबी में अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल के 82वें बलिदान दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें बतौर मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री हेकम डिंगो सिंह शामिल हुए। मंत्री सिंह ने कहा कि अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल जी के बलूदान दिवस में भाग लेना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है। हमारी मातृभूमि की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले आजाद हिंद फौज के भारत के पहले गोरखा शहीद के सर्वोच्च बलिदान को याद करने का दिन। उनका साहस, देशभक्ति और आदर्श पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।
1 day ago | [YT] | 106
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असम : कारबी आंगलोंग में अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल के 82वें बलिदान दिवस का आयोजन
आज असम के स्वायत्त क्षेत्र कारबी आंगलोंग स्थित हवाईपुर में आजाद हिन्द फौज के अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल के 82वें बलिदान दिवस का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि रांगखांग के विधायक तुलीराम रांगहांग शामिल हुए। उन्होंने कहा कि हमारे गोरखा शहीदों का शौर्य, उनका त्याग, उनकी देशभक्ति आज भी हर भारतीय को प्रेरित करती है। मातृभूमि के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले वीर आत्माओं को मेरी हार्दिक श्रद्धांजलि।
2 days ago | [YT] | 178
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अमर शहीद राइफलमैन नेहल गुरुंग का 8वां बलिदान दिवस
दीपक राई
वीर गोरखा न्यूज नेटवर्क
अमर शहीद गोरखा सैनिक राइफलमैन नेहल गुरुंग जम्मू और कश्मीर के कठुआ जिले के रहने वाले थे और भारतीय सेना के 9 गोरखा राइफल्स रेजिमेंट में सेवारत थे। एलओसी पर जम्मू-कश्मीर में ही सेवा करते हुए, उन्होंने आज ही दिन 25 अगस्त 2018 को राज्य में घुसपैठ विरोधी अभियान के दौरान महज 22 वर्ष की आयु में भारत माता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
साल 2018 में, राइफलमैन नेहल गुरुंग केरन सेक्टर, कुपवाड़ा, जम्मू-कश्मीर में एलओसी के समीप ड्यूटी कर रहे थे, जो लगातार संघर्ष विराम उल्लंघन और आतंकवादी घुसपैठ के लिए संवेदनशील क्षेत्र है। 25 अगस्त 2018 को, जब वह एक काउंटर-घुसपैठ ग्रिड के हिस्से के रूप में सशस्त्र गश्त पर थे, तो वह एक बारूदी सुरंग विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। श्रीनगर के 92 बेस अस्पताल ले जाए जाने के बावजूद, उन्होंने अपनी चोटों के कारण दम तोड़ दिया और कर्तव्य का पालन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
जय हिंद! जय गोर्खा!
2 days ago | [YT] | 226
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दलवीर सिंह लोहार : असम के गोर्खा स्वतंत्रता सेनानी, श्रमिक नेता और जनप्रतिनिधि, स्वतंत्र भारत के प्रथम गोरखा विधायक
दीपक राई
वीर गोरखा न्यूज नेटवर्क
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अनेक ऐसे वीर सेनानी हुए, जिनका योगदान राष्ट्रीय इतिहास के मुख्य पन्नों में अपेक्षित स्थान नहीं पा सका। असम के गोर्खा समाज से आने वाले दलवीर सिंह लोहार भी ऐसे ही संघर्षशील व्यक्तित्व थे। वे स्वतंत्रता सेनानी, श्रमिक नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनेता के रूप में सक्रिय रहे। स्वतंत्र भारत के प्रथम आम चुनाव में असम के डिगबोई विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल कर उन्होंने भारतीय गोर्खा राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा। उपलब्ध चुनावी अभिलेखों में 1952 के असम विधानसभा चुनाव में डिगबोई से Lohar, Dalbir Singh का नाम निर्वाचित सदस्य के रूप में दर्ज है।
{{ डिब्रूगढ़ की धरती पर जन्म }}
दलवीर सिंह लोहार का जन्म 26 जनवरी 1915 को असम के डिब्रूगढ़ जिले के खलीहामारी में हुआ था। उनके पिता का नाम अनंतराम लोहार बताया जाता है। कम उम्र से ही उनके भीतर देश और समाज के प्रति जागरूकता विकसित हो गई थी।
1921 में जब महात्मा गांधी डिब्रूगढ़ पहुंचे, तब युवा दलवीर सिंह उनके नेतृत्व में निकले कांग्रेस के जुलूस में शामिल हुए। यही उनके स्वतंत्रता आंदोलन से सक्रिय जुड़ाव की शुरुआत मानी जाती है। आगे चलकर उन्होंने सत्याग्रह और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विभिन्न आंदोलनों में भाग लिया।
{{किशोरावस्था से स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय }}
दलवीर सिंह का संघर्ष केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित नहीं था। वे ब्रिटिश शासन की नीतियों के विरोध में प्रत्यक्ष आंदोलनों में शामिल हुए। 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान डिब्रूगढ़ में उनकी सक्रिय भूमिका रही और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। उपलब्ध विवरणों के अनुसार वे 1930-31 के दौरान लगभग तीन महीने जेल में रहे।
उनका नाम असम के उन गोर्खा स्वतंत्रता सेनानियों में आता है जिन्होंने ब्रिटिश शासन का सामना किया। उनके साथ भक्त बहादुर प्रधान और अनंतलाल शर्मा जैसे अन्य गोर्खा स्वतंत्रता सेनानी भी आंदोलन में सक्रिय थे।
1941 में गांधीजी के सत्याग्रह अभियान के दौरान भी दलवीर सिंह सक्रिय रहे। उनके आंदोलन में भाग लेने के कारण ब्रिटिश प्रशासन ने उन्हें असम से बाहर कर दिया था। इस प्रकार उनके संघर्ष में गिरफ्तारी, प्रतिबंध और निर्वासन जैसी कठिन परिस्थितियां भी शामिल रहीं।
{{ डिगबोई तेल रिफाइनरी श्रमिक आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका }}
दलवीर सिंह लोहार का व्यक्तित्व केवल स्वतंत्रता सेनानी तक सीमित नहीं था। वे श्रमिकों के अधिकारों के प्रखर नेता भी बने। 1939 में डिगबोई की तेल रिफाइनरी के श्रमिकों के बीच हुए ऐतिहासिक आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है। उस समय डिगबोई भारत के तेल उद्योग का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। श्रमिकों की समस्याओं और अधिकारों को लेकर आंदोलन तेज हुआ और ब्रिटिश प्रशासन ने इसे दबाने के लिए कठोर कदम उठाए। दलवीर सिंह लोहार इस श्रमिक संघर्ष के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं।
यह आंदोलन उनके राजनीतिक विचारों की एक महत्वपूर्ण विशेषता को सामने लाता है—उनके लिए स्वतंत्रता केवल अंग्रेजी शासन से मुक्ति नहीं थी, बल्कि मजदूरों को सम्मान, अधिकार और सामाजिक न्याय दिलाना भी था।
{{ स्वतंत्रता के बाद राजनीतिक यात्रा }}
15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। स्वतंत्रता के बाद भी दलवीर सिंह लोहार सार्वजनिक जीवन से अलग नहीं हुए। वे श्रमिक संगठन और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। उनका संबंध इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) से रहा और वे असम के श्रमिक आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे। वे Assam Chah Mazdoor Sangha के केंद्रीय अध्यक्ष भी रहे और उपलब्ध विवरणों के अनुसार 1964 से 1968 तक इस पद पर रहे।
इस प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष करने वाला यह युवा नेता स्वतंत्रता के बाद मजदूरों के अधिकारों की आवाज बन गया।
{{ स्वतंत्र भारत के पहले गोर्खा विधायक होने का गौरव }}
दलवीर सिंह लोहार के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक थी स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनाव में विधानसभा चुनाव जीतना। 1951-52 के प्रथम आम चुनावों में उन्होंने असम के डिगबोई विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता। 1952 के असम विधानसभा चुनाव के रिकॉर्ड में डिगबोई से उनका नाम स्पष्ट रूप से दर्ज है।
गोरखा समुदाय के इतिहास में यह उपलब्धि अत्यंत महत्वपूर्ण है। कई ऐतिहासिक स्रोत उन्हें स्वतंत्र भारत में विधानसभा चुनाव जीतने वाले पहले भारतीय गोर्खा के रूप में उल्लेखित करते हैं। उनकी चुनावी जीत यह प्रमाणित करती है कि असम के गोर्खा समुदाय ने स्वतंत्र भारत के लोकतांत्रिक राजनीतिक जीवन में शुरुआती दौर से ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
{{ क्या वे असम के उपमंत्री थे ? }}
दलवीर सिंह लोहार को लेकर एक प्रश्न अक्सर सामने आता है कि क्या वे असम सरकार में उपमंत्री (Deputy Minister) भी रहे थे। उपलब्ध विश्वसनीय चुनावी और विधानसभा संबंधी स्रोत उनके विधायक, स्वतंत्रता सेनानी और श्रमिक नेता होने की पुष्टि करते हैं। लेकिन उपलब्ध प्राथमिक स्रोतों में उन्हें असम सरकार के उपमंत्री के रूप में नियुक्त किए जाने की स्पष्ट पुष्टि अभी नहीं मिलती। इसलिए उनके जीवन का यह हिस्सा प्रमाणित सरकारी रिकॉर्ड के बिना निश्चित रूप से लिखना उचित नहीं होगा।
{{ गोर्खा समाज के लिए प्रेरणा }}
दलवीर सिंह लोहार की विशेषता यह थी कि उन्होंने अपने जीवन के अलग-अलग चरणों में तीन महत्वपूर्ण मोर्चों पर संघर्ष किया—देश की स्वतंत्रता, श्रमिक अधिकार और गोर्खा समाज का सम्मान। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि असम का गोर्खा समुदाय केवल सेना या चाय-बागानों तक सीमित समुदाय नहीं रहा, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन, श्रमिक राजनीति और लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के निर्माण में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
आज उनके नाम पर असम में सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। अखिल असम गोर्खा छात्र संघ (AAGSU) द्वारा 2026 में उनकी स्मृति में 11वीं दलवीर सिंह लोहार ट्रॉफी क्रिकेट प्रतियोगिता आयोजित की गई। आयोजकों ने इसे स्वतंत्रता सेनानी दलवीर सिंह लोहार के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बताया।
उनके नाम पर असम में “Freedom Fighter Late Dalbir Singh Lohar Samanvay Khetra” जैसे स्मृति-स्थल/परियोजनाओं का सरकारी दस्तावेजों में उल्लेख भी मिलता है।
{{ एक भूला हुआ लेकिन गौरवशाली अध्याय }}
दलवीर सिंह लोहार का जीवन भारतीय गोर्खा इतिहास का एक महत्वपूर्ण, किंतु लंबे समय तक अपेक्षाकृत कम चर्चित अध्याय है। 1921 में गांधीजी के डिब्रूगढ़ आगमन से प्रेरित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में कदम रखने वाला यह युवा आगे चलकर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सत्याग्रह करता है, जेल जाता है, डिगबोई के श्रमिक आंदोलन का नेतृत्व करता है और स्वतंत्र भारत में लोकतांत्रिक चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचता है।
उनकी कहानी केवल एक व्यक्ति की जीवनी नहीं है। यह असम के गोर्खाओं की राष्ट्र निर्माण में भागीदारी, श्रमिक संघर्ष और लोकतांत्रिक राजनीति में शुरुआती योगदान की कहानी भी है।
इसीलिए दलवीर सिंह लोहार को केवल एक पूर्व विधायक या श्रमिक नेता के रूप में नहीं, बल्कि असम और भारतीय गोर्खा समाज के स्वतंत्रता सेनानी और लोकतांत्रिक अग्रदूत के रूप में याद किया जाना चाहिए। आज उनके नाम पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम और स्मृति आयोजन इस बात का संकेत हैं कि उनकी विरासत नई पीढ़ी तक धीरे-धीरे फिर पहुंच रही है।
2 days ago | [YT] | 100
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हिमाचल प्रदेश : सिरमौर के नाहन में साल 1810 में निर्मित ऐतिहासिक गोरखा स्थल 'जैतक किला'
दीपक राई
वीर गोरखा न्यूज नेटवर्क
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की तहसील नाहन से लगभग 22 किलोमीटर दूर जैतक पहाड़ियों पर समुन्द्र तल से 4849 फीट ऊँचाई पर स्थित है। इसका निर्माण साल 1810 में गोरखा नेता रणजोर सिंह थापा (अमर सिंह थापा के पुत्र) द्वारा किया गया था। यह एंग्लो-गोरखा युद्ध (1814–1816) का एक प्रमुख गवाह रहा है। वर्तमान स्थिति में यह ऐतिहासिक किला खंडहर के रूप में मौजूद है, जिसके प्रांगण में एक प्राचीन शिवलिंग भी स्थापित है।
हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक स्थानों की सूची में जो बात इसे जगह देती है, वह है इसका ऐतिहासिक महत्व। इसका निर्माण नाहन किले से खरीदी गई सामग्री से किया गया था और एक समय इसे तोड़-फोड़ कर नष्ट कर दिया गया था। हालाँकि, ऊपर से मनोरम दृश्य आश्चर्यजनक हैं। साफ दिनों में, आप पर्वत श्रृंखलाओं को देख सकते हैं। अन्य दिनों में, आप दुनिया के शीर्ष पर रहने का आनंद ले सकते हैं। यह नाहन से केवल 25 किमी दूर है।
{{ जैतक किले का इतिहास }}
जैतक किला भारत के औपनिवेशिक इतिहास में प्रमुख महत्व रखता है। इसका निर्माण रंजोर सिंह थापा ने नाहन किले के मलबे का उपयोग करके किया था, जिस पर गोरखाओं ने हमला किया था और नष्ट कर दिया था। यह पहाड़ी की चोटी वाला किला एंग्लो-गोरखा युद्ध के दौरान एक प्रमुख आधार बन गया।
काजी अमर सिंह थापा के नेतृत्व में, गोरखा सेना ने इस क्षेत्र में कई बार ब्रिटिश और सिरमौर सेनाओं को सफलतापूर्वक हराया। किले में भयंकर लड़ाइयाँ हुईं जो गोरखा योद्धाओं की बहादुरी और रणनीतिक उत्कृष्टता को प्रदर्शित करती थीं। भले ही बाद में किले का अधिकांश हिस्सा नष्ट हो गया था, पत्थर की दीवारों, प्रवेश द्वार और महल के खंडहरों के अवशेष अभी भी इसके स्मारकीय अतीत की बात करते हैं।
{{ जैतक किले की वास्तुकला }}
रणनीतिक रूप से एक ऊंचे रिज पर निर्मित, किले ने आसपास की घाटियों पर स्पष्ट निगरानी प्रदान की - जिससे दुश्मनों के लिए किसी का ध्यान नहीं जाना लगभग असंभव हो गया।
मुख्य वास्तुशिल्प मुख्य बातें:
- मुख्य रूप से नष्ट हुए नाहन किले के पत्थरों का उपयोग करके बनाया गया था।
- कॉम्पैक्ट अभी तक मजबूत रक्षात्मक संरचना।
- हिलटॉप प्लेसमेंट क्षेत्र का विहंगम दृश्य देता है।
- परिसर के अंदर एक प्राचीन महल के खंडहर
संकरे रास्ते और खड़ी चढ़ाई किले की सुरक्षा को बढ़ाती है।
3 days ago | [YT] | 119
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दार्जीलिङ भारतकै सबैभन्दा भ्रष्टाचार प्रभावित क्षेत्रमध्ये एक मुख्यमन्त्रीसँग भेटमा गम्भीर विषय उठान
आज नवान्नस्थित कार्यालयमा माननीय मुख्यमन्त्री श्री सुवेन्दु अधिकारीसँग भेट गरि दारर्जीलिङ पहाडमा दशकौँ देखि व्याप्त भ्रष्टाचार तथा अनियमितताका विषयमा विस्तृत छलफल गरियो। भेटका क्रममा गृह सचिव सुश्री संघमित्रा घोष पनि उपस्थित हुनुहुन्थ्यो।
भेटमा जीटीए तथा दार्जिलिङ नगरपालिकामा विपक्षीको भूमिकामा रहँदै हालसम्म उठाइएका तथा दर्ता गरिएका भ्रष्टाचार र अनियमितता सम्बन्धी विभिन्न मामिलाबारे मुख्यमन्त्रीलाई विस्तृत जानकारी गराएँ।
मैले स्पष्ट रूपमा आफ्नो धारणा राख्दै भनेँ कि हाम्रा जनताका लागि जस्तो सुकै राजनीतिक समाधान प्राप्त भए पनि भ्रष्टाचारको अन्त्य हुन नसकेसम्म त्यसको वास्तविक लाभ आम नागरिक सम्म पुग्न सक्दैन। दार्जीलिङ पहाड,भारतकै सबैभन्दा भ्रष्टाचार प्रभावित क्षेत्रहरू मध्ये एक बन्दै गएको मेरो दृढ धारणा पनि उहाँसमक्ष राखेँ।
मुख्यमन्त्रीले भ्रष्टाचारमा संलग्न दोषी नेताहरू तथा सम्बन्धित व्यक्तिहरू माथि कानुन अनुसार कारवाही हुनुपर्ने र यस विषयमा कडा उदाहरण प्रस्तुत गर्नुपर्ने कुरामा सहमति जनाउनुभयो। स्वच्छ,पारदर्शी र जवाफदेही शासन प्रणाली मार्फत मात्र दार्जीलिङ पहाडको समग्र विकास सुनिश्चित गर्न तथा गरिब,विपन्न र सीमान्तकृत नागरिकलाई न्याय दिलाउन सकिने विषयमा पनि छलफल भयो।
भेटका क्रममा विशेष रूपमा उठाइएका विषयहरू:
1.जीटीए अन्तर्गत शिक्षकको योग्यता,भर्ती प्रक्रिया तथा नियुक्तिसम्बन्धी विषय।
2.खाद्यान्न सामग्री,विशेषगरी कच्चा मुसुर दालको खरिद प्रक्रियामा भएका भनिएका अनियमितता।
3.विपद् राहत तथा राज्य विपद् प्रतिक्रिया कोषको रकमको कथित दुरुपयोग।
4.जल जीवन मिशन अन्तर्गत योजना कार्यान्वयन तथा ठेक्का प्रक्रियासम्बन्धी विषय।
5.दार्जीलिङमा अग्ला भवन निर्माणका लागि दिइएका अनधिकृत वा अनियमित अनुमतिसम्बन्धी विषय।
6.जीटीएको बहुमूल्य सम्पत्तिको गैरकानुनी वा न्यून मूल्याङ्कन गरि गरिएको भनिएको लिज।
7.सन् २०२३ को टिस्टा बाढी पछि वितरण गरिएको राहत तथा सहयोगसम्बन्धी विषय।
8.अम्रुत योजनाअन्तर्गत सञ्चालन गरिएका कार्यहरू।
9.दार्जीलिङ तथा खरसाङ नगरपालिकामा हाउसिङ फर अल तथा प्रधानमन्त्री आवश योजनाको कार्यान्वयन।
10.दार्जीलिङ,कालेबुङ,खरसाङ तथा मिरिक नगरपालिकाका सम्पत्तिको लिज,विकास,निर्माण,परिवर्तन तथा प्रयोगसँग सम्बन्धित विषयहरू,जसमा स्वीकृति,मूल्याङ्कन,टेन्डर प्रक्रिया,लिजका सर्तहरू तथा प्रचलित कानुनको अनुपालनसम्बन्धी प्रश्नहरू समावेश छन्।
दार्जीलिङ पहाडका विभिन्न क्षेत्रमा प्रधानमन्त्री ग्राम सडक योजना अन्तर्गत भएका सडक निर्माण तथा अन्य कार्यको कमजोर गुणस्तर र कथित अनियमितता।
मुख्यमन्त्रीले यी सबै विषयमा आवश्यक कारवाही अघि बढाउन जीटीएका प्रधान सचिव तथा सम्बन्धित अधिकारीहरूलाई आवश्यक प्रक्रिया अगाडि बढाउन निर्देशन दिनुभएको छ। मुख्यमन्त्री आगामी सेप्टेम्बरको पहिलो सातामा सिलिगुडी आउनुहुने कार्यक्रम रहेको छ। सो अवसरमा दार्जीलिङ तथा यहाँका जनतासँग सम्बन्धित यी मामिलाहरूका साथै अन्य महत्वपूर्ण विषयमा थप छलफल गरिनेछ।
दार्जीलिङ पहाडलाई भ्रष्टाचारमुक्त,पारदर्शी र जवाफदेही शासनतर्फ अघि बढाउने प्रतिबद्धताका लागि माननीय मुख्यमन्त्रीप्रति हार्दिक आभार व्यक्त गर्दछु।
भ्रष्टाचारको अन्त्य बिना विकास सम्भव छैन।
स्वच्छ शासन,पारदर्शिता र जवाफदेहिता मार्फत मात्र दार्जीलिङ पहाडको वास्तविक विकास सम्भव छ।
- अजय एडवार्ड्स, प्रमुख, IGJF
3 days ago | [YT] | 51
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Veer Gorkha Web TV
सिक्किम मूल की और पटना उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राई को सिक्किम राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
3 days ago | [YT] | 117
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