अगर आपकी कुंडली में राहु अच्छा होगा तो आपमें इनमे से कुछ qualities तो अवश्य होंगी।
१ - सबसे पहले तो आपका बॉडी फ्रेम बकियों से थोड़ा बड़ा होगा।
२ - दूसरा, आप competitive होंगे और ऐसे कार्यों में आपकी रुचि होगी जो risky या challenging हों।
३ - तीसरा, आपके अंदर वह क्षमता होगी कि आप लोगों को किसी भी बात पर कन्विन्स करके अपने favour में कर लें। या तो आप बहुत अच्छे manipulator होंगे या आप बातों में loopholes सरलता से ढूंढ लेते होंगे।
४ - चौथा, आपके अंदर वह महत्वाकांक्षा वह drive होगी कि आपको सारे सांसारिक सुख भोगने हैं और इस कारण आपके अंदर वह discipline भी होगा कि आप अपने काम में लगे रहें और सफलता प्राप्त करें।
५ - पाँचवाँ, राहु आपको street smart बनाता है। आजकल नौकरी मिलने के लिए डिग्री होना आवश्यक है लेकिन जिसके पास व्यवहारिक ज्ञान होता है वह जीवन में अधिक आगे बढ़ता है।
[Effects of strong Rahu in astrology, Rahu in birth chart and personality traits, How Rahu influences success and ambition, Rahu’s impact on career and material success, Astrological signs of a strong Rahu, strong rahu traits, rahu influence, rahu mahadasha]
अगर आपकी कुंडली में केतु का बल कम है तो आपने इनमें से कुछ चीजें अवश्य नोटिस की होंगी।
1- सबसे पहले तो केतु के कारण ऐसा रोग होता है जो जल्दी पकड़ा न जा सके या फिर बहुत समय के बाद उसका diagnosis हो।
2- दूसरा, केतु आपके मन और बुद्धि को विचलित करता है जिसके कारण आप सही और गलत की पहचान ठीक से नहीं कर पाते होंगे।
3- तीसरा, आप अनावश्यक चीजों के लिए हठ कर जाते होंगे, जिसमें आपको तो sense दिखता होगा लेकिन आपके आस पास के लोग यह नहीं समझ पाते होंगे कि आप किस कारण एक ही चीज पर अड़ गए हैं।
4- चौथा, कुंडली में केतु का बल कम है तो केतु की दशा अंतर्दशा में मैंने यह होते हुए देखा है कि कई बार व्यक्ति ऐसा कोई risk ले लेता है जो उसके जीवन को पलट करके रख देता है।
5- पाँचवाँ, दुर्बल केतु वाले व्यक्ति दूसरों पर बहुत संदेह करते हैं और अगर कोई इनके opinion से agree नहीं करता तो यह उससे लड़ाई भी कर लेते हैं।
ज्येष्ठ महीने में पड़ने वाले हर मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। इस दिन बजरंगबली की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। सामान्यतः ज्येष्ठ माह में 4 से 5 बड़े मंगल पड़ते हैं, लेकिन इस बार अधिकमास के दुर्लभ संयोग के कारण ज्येष्ठ महीने में 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं, जो 5 मई 2026 से आरंभ होकर 23 जून 2026 तक चलेंगे।
पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण के साथ माता सीता की खोज में वन-वन भटक रहे थे, तभी उनकी पहली भेंट हनुमान जी से हुई थी। मान्यता है कि यह पावन मिलन ज्येष्ठ मास के मंगलवार को हुआ था।
बुढ़वा मंगल पर क्या करें?
-हनुमान जी को लाल पुष्प, सिंदूर और भोग अर्पित करें।
-संभव हो तो हनुमान मंदिर जाएं और भगवान को चमेली का तेल और चोला अर्पित करें।
-हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें।
बुढ़वा मंगल के दिन हनुमान जी की आराधना करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, स्वास्थ्य उत्तम होता है और आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है। विशेष रूप से कर्ज, भय और शत्रु बाधा से मुक्ति के लिए यह दिन अत्यंत प्रभावी माना गया है।
[Bada Mangal 2026, Budhwa Mangal significance, Jyeshtha month Hanuman puja, Adhik Maas 2026 Bada Mangal, Bada Mangal vrat and rituals, Hanuman ji blessings for obstacles]
एकदंत संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के एकदंत स्वरूप की पूजा करने का विशेष महत्व है। इस दिन मन से पूजा व व्रत करने से जीवन में चल रही समस्याएं, आर्थिक संकट और मानसिक तनाव कम होने की मान्यता है।
इस व्रत में सवेरे गणेश जी की पूजा करने के बाद रात्रि में चंद्रमा की पूजा की जाती है और अर्घ्य दिया जाता है। उसके बाद, या तो उसी रात या अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करके व्रत पूरा किया जाता है।
इस वर्ष यह पर्व 5 मई, मंगलवार को मनाया जाएगा।
पूजा विधिः
पूजा घर को स्वच्छ करें।
गंगाजल से भगवान गणेश का अभिषेक करें।
घी का दीपक और धूप जलाएँ।
गणेश जी को सिंदूर का तिलक लगाएँ, फिर अक्षत, पुष्प और दूर्वा तथा भोग भी अर्पित करें।
गणेश चालीसा और संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा का पाठ करें।
अंत में कपूर से गणेश जी की आरती उतारें।
क्षमा याचना करें।
पूरे दिन व्रत का पालन करें।
शाम को पुनः गणेश जी की आरती करें।
फिर चंद्रदेव को अर्घ्य दें।
चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करें।
[Ekadanta Sankashti Chaturthi 2026, Sankashti Chaturthi May 2026 date and time, Ekadanta Ganesh puja vidhi, Sankashti Chaturthi vrat rituals, Sankashti Chaturthi puja steps at home, Ganesh ji puja vidhi]
[Raag Chikitsa, Ragas for healing, Indian classical music therapy, Ragas for sleep and relaxation, Ragas for stress relief, Ayurveda and music healing, Raag Bageshri benefits, Raag Bhairavi healing, Sound healing with ragas, Meditation music Indian classical]
नवग्रहों का संबंध भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों से माना जाता है। उनमें से कूर्म अवतार का संबंध शनि ग्रह से है।
कूर्म अवतार की कथा हमें बताती है कि जब संसार के कल्याण हेतु समुद्र मंथन किया जा रहा था, तब मंदराचल पर्वत को डूबने से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार धारण किया। इसी मंथन से माता लक्ष्मी, ऐरावत हाथी, अमृत, आदि की प्राप्ति हुई।
कूर्म अवतार तब प्रकट होते हैं जब ऐसा भार उत्पन्न होता है, जिसे कोई और संभाल नहीं सकता। वे बिना किसी स्वार्थ के उस दायित्व को अपने ऊपर ले लेते हैं, ताकि सृष्टि का संतुलन बना रहे।
इसी प्रकार शनि ग्रह कर्म, कर्तव्य और धैर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। कूर्म अवतार की ही भांति, शनि व्यक्ति को जीवन में ऐसे दायित्व सौंपते हैं जो सरल नहीं होते। कई बार व्यक्ति को प्रारंभ से ही कर्तव्यों का भार उठाना पड़ता है, और निरंतर प्रयास के बाद ही उसे "अमृत" अर्थात सफलता और स्थिरता की प्राप्ति होती है।
जिनकी कुंडली में शनि प्रमुख स्थिति में होते हैं, उनके जीवन में भी ऐसी परीक्षाएँ आती हैं, जो उन्हें भीतर से दृढ़ और स्थिर बनाती हैं।
कूर्म अवतार और शनि ग्रह का यह संबंध हमें सिखाता है कि सर्वश्रेष्ठ कर्म वह है, जो निःस्वार्थ होकर दूसरों के कल्याण के लिए किया जाए।
वास्तविक शक्ति केवल आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर स्थिर रहकर, निस्वार्थ भाव से कर्तव्यों का भार संभालने में है।
नवग्रहों का संबंध भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों से माना जाता है। उनमें से नरसिंह अवतार का संबंध मंगल ग्रह से है।
नरसिंह भगवान उन क्षणों में प्रकट होते हैं जब धर्म संकट में होता है और कोई सामान्य उपाय संतुलन को पुनः स्थापित नहीं कर पाता। वे केवल पुकारने पर ही नहीं, बल्कि तब प्रकट होते हैं जब संरक्षण बिल्कुल आवश्यक हो जाता है।
भगवान नरसिंह, भगवान विष्णु के सबसे उग्र रूप हैं, फिर भी वे अपने भक्तों के प्रति अत्यंत सौम्य हैं।
इसी प्रकार मंगल साहस, इच्छाशक्ति और संरक्षण की भावना का प्रतिनिधित्व करता है। एक शुभ अवस्था में स्थित मंगल आवेग में आकर कार्य नहीं करता। उसमें यह समझ होती है कि कब आवाज़ उठानी है, अपनी ऊर्जा को कहाँ निर्देशित करना है और कब पीछे हटना है।
भगवान नरसिंह और मंगल ग्रह का यह संबंध हमें सिखाता है कि आक्रामकता स्वभाव से नकारात्मक नहीं होती। जब यह धर्म से जुड़ी होती है, तो यह संरक्षण और परिवर्तन का माध्यम बन जाती है।
वास्तविक शक्ति केवल बल में नहीं, बल्कि इस समझ में है कि उसे सही समय पर और सही प्रकार से कैसे उपयोग किया जाए।
[Narasimha Avatar astrology, Mars in Vedic astrology meaning, Narasimha Jayanti significance, Narasimha and Mars connection, Mangal grah personality traits, Vedic astrology Mars energy, Narasimha Avatar story and symbolism]
अगर आपकी कुंडली में बुध का बल कम है तो आपने इनमें से कुछ चीजें नोटिस की होंगी।
1- पहले तो, आपको वाणी या त्वचा से जुड़ी समस्याएं बनी रहती होंगी।
2- दूसरा, आप स्कूल, कॉलेज या अपने workplace में लोगों को अपने ideas सही से व्यक्त नहीं कर पाते होंगे इसलिए आपको public speaking में रुचि नहीं होगी या आपको उससे डर भी लगता होगा।
3- तीसरा, आपको आपके सोशल सर्कल या मित्रों का सहयोग उतना नहीं मिलता होगा।
4- चौथा, आपको कुछ भी सीखने में बहुत समय लगता होगा या स्कूल कॉलेज में आपका performance उतना अच्छा नहीं होगा।
5- पाँचवाँ, क्योंकि बुध मौज-मस्ती का ग्रह है तो अगर यह कुंडली में पीढ़ित होगा तो आपके जीवन में भी मौज-मस्ती की कमी होगी।
बुध ग्रह हेतु कुछ सरल उपाय:
-प्रतिदिन थोड़ा समय कुछ नया सीखने में व्यतीत करें।
-public speaking करें अथवा अपने कौशल को सुधारें।
-झूठ या नकारात्मक बोलने से बचें।
-उन्हीं लोगों से मित्रता रखें जो आपके लिए सही हों।
-internet का प्रयोग अपने ज्ञान की वृद्धि हेतु करें। व्यर्थ में doom scrolling में समय न बिताएं।
-अनावश्यक विषयों में बाल की खाल न निकालें।
-journaling करना आरंभ करें।
-गणपति अथर्वशीर्ष, देवी सूक्तं व श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ या श्रवण करें।
अगर आपकी कुंडली में केतु अच्छा होगा तो आपमें इनमे से कुछ qualities तो अवश्य होंगी।
१- सबसे पहले तो, आप लंबे, पतले और कुछ साँवले होंगे।
२- दूसरा, आपको अध्यात्म, इतिहास या इस संसार के बाहर की चीजों में बहुत रुचि होगी जैसे कि astronomy, astrology, aadi।
३- तीसरा, आपका अंतर्ज्ञान या intuition बहुत प्रबल होगा।
४- चौथा, या तो आपकी इच्छाएं कम होंगी या फिर आप अपनी इच्छाओं से उतने attached नहीं होंगे। इच्छा पूर्ण हुई तो ठीक है नहीं हुई तो भी ठीक है।
५- पाँचवाँ, एक प्रबल केतु आपको साहसी बनाता है। हो सकता है कि हर समय यह साहस न दिखे लेकिन जब आर या पार की स्थिति आएगी तब अपने आप आपको वह साहस मिल जाएगा कि आप परिस्थिति को पलट करके रख दें।
यदि आप:
अपने comfort zone से बाहर निकलकर प्रगति करना चाहते हैं,
अपनी महत्वाकांक्षाओं को साकार करना चाहते हैं,
कुंडली के जिस भाव में राहु स्थित है, उस भाव में साहस के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं,
तो कुछ सरल उपाय हैं, जिनका पालन आप कहीं भी कर सकते हैं 👉🏻
देवी दुर्गा की आराधना करें।
देवी सूक्त, दुर्गा चालीसा अथवा देवी दुर्गा के किसी भी मंत्र व स्तोत्र का पाठ करें।
आवश्यकता से अधिक समय इंटरनेट पर न बिताएँ।
घर में बेकार के बिजली के यंत्र न रखें। साथ ही, यदि कोई यंत्र बिगड़ गया हो, तो उसे शीघ्र ही ठीक करवाएँ।
घर में सदैव साफ-सफाई बनाए रखें।
लोहा, तिल, कंबल, तेल, उड़द, नीले वस्त्र का दान करें।
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Dharmo Rakshati Rakshitaha
अगर आपकी कुंडली में राहु अच्छा होगा तो आपमें इनमे से कुछ qualities तो अवश्य होंगी।
१ - सबसे पहले तो आपका बॉडी फ्रेम बकियों से थोड़ा बड़ा होगा।
२ - दूसरा, आप competitive होंगे और ऐसे कार्यों में आपकी रुचि होगी जो risky या challenging हों।
३ - तीसरा, आपके अंदर वह क्षमता होगी कि आप लोगों को किसी भी बात पर कन्विन्स करके अपने favour में कर लें। या तो आप बहुत अच्छे manipulator होंगे या आप बातों में loopholes सरलता से ढूंढ लेते होंगे।
४ - चौथा, आपके अंदर वह महत्वाकांक्षा वह drive होगी कि आपको सारे सांसारिक सुख भोगने हैं और इस कारण आपके अंदर वह discipline भी होगा कि आप अपने काम में लगे रहें और सफलता प्राप्त करें।
५ - पाँचवाँ, राहु आपको street smart बनाता है। आजकल नौकरी मिलने के लिए डिग्री होना आवश्यक है लेकिन जिसके पास व्यवहारिक ज्ञान होता है वह जीवन में अधिक आगे बढ़ता है।
जय श्री राम।
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1 day ago | [YT] | 39
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Dharmo Rakshati Rakshitaha
अगर आपकी कुंडली में केतु का बल कम है तो आपने इनमें से कुछ चीजें अवश्य नोटिस की होंगी।
1- सबसे पहले तो केतु के कारण ऐसा रोग होता है जो जल्दी पकड़ा न जा सके या फिर बहुत समय के बाद उसका diagnosis हो।
2- दूसरा, केतु आपके मन और बुद्धि को विचलित करता है जिसके कारण आप सही और गलत की पहचान ठीक से नहीं कर पाते होंगे।
3- तीसरा, आप अनावश्यक चीजों के लिए हठ कर जाते होंगे, जिसमें आपको तो sense दिखता होगा लेकिन आपके आस पास के लोग यह नहीं समझ पाते होंगे कि आप किस कारण एक ही चीज पर अड़ गए हैं।
4- चौथा, कुंडली में केतु का बल कम है तो केतु की दशा अंतर्दशा में मैंने यह होते हुए देखा है कि कई बार व्यक्ति ऐसा कोई risk ले लेता है जो उसके जीवन को पलट करके रख देता है।
5- पाँचवाँ, दुर्बल केतु वाले व्यक्ति दूसरों पर बहुत संदेह करते हैं और अगर कोई इनके opinion से agree नहीं करता तो यह उससे लड़ाई भी कर लेते हैं।
जय श्री राम।
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[vedic astrology, ketu in astrology, weak ketu effects, ketu dasha, ketu remedies, ketu antardasha]
2 days ago | [YT] | 20
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Dharmo Rakshati Rakshitaha
ज्येष्ठ महीने में पड़ने वाले हर मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। इस दिन बजरंगबली की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। सामान्यतः ज्येष्ठ माह में 4 से 5 बड़े मंगल पड़ते हैं, लेकिन इस बार अधिकमास के दुर्लभ संयोग के कारण ज्येष्ठ महीने में 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं, जो 5 मई 2026 से आरंभ होकर 23 जून 2026 तक चलेंगे।
पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण के साथ माता सीता की खोज में वन-वन भटक रहे थे, तभी उनकी पहली भेंट हनुमान जी से हुई थी। मान्यता है कि यह पावन मिलन ज्येष्ठ मास के मंगलवार को हुआ था।
बुढ़वा मंगल पर क्या करें?
-हनुमान जी को लाल पुष्प, सिंदूर और भोग अर्पित करें।
-संभव हो तो हनुमान मंदिर जाएं और भगवान को चमेली का तेल और चोला अर्पित करें।
-हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें।
बुढ़वा मंगल के दिन हनुमान जी की आराधना करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, स्वास्थ्य उत्तम होता है और आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है। विशेष रूप से कर्ज, भय और शत्रु बाधा से मुक्ति के लिए यह दिन अत्यंत प्रभावी माना गया है।
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[Bada Mangal 2026, Budhwa Mangal significance, Jyeshtha month Hanuman puja, Adhik Maas 2026 Bada Mangal, Bada Mangal vrat and rituals, Hanuman ji blessings for obstacles]
3 days ago | [YT] | 38
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Dharmo Rakshati Rakshitaha
एकदंत संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के एकदंत स्वरूप की पूजा करने का विशेष महत्व है। इस दिन मन से पूजा व व्रत करने से जीवन में चल रही समस्याएं, आर्थिक संकट और मानसिक तनाव कम होने की मान्यता है।
इस व्रत में सवेरे गणेश जी की पूजा करने के बाद रात्रि में चंद्रमा की पूजा की जाती है और अर्घ्य दिया जाता है। उसके बाद, या तो उसी रात या अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करके व्रत पूरा किया जाता है।
इस वर्ष यह पर्व 5 मई, मंगलवार को मनाया जाएगा।
पूजा विधिः
पूजा घर को स्वच्छ करें।
गंगाजल से भगवान गणेश का अभिषेक करें।
घी का दीपक और धूप जलाएँ।
गणेश जी को सिंदूर का तिलक लगाएँ, फिर अक्षत, पुष्प और दूर्वा तथा भोग भी अर्पित करें।
गणेश चालीसा और संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा का पाठ करें।
अंत में कपूर से गणेश जी की आरती उतारें।
क्षमा याचना करें।
पूरे दिन व्रत का पालन करें।
शाम को पुनः गणेश जी की आरती करें।
फिर चंद्रदेव को अर्घ्य दें।
चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करें।
ॐ श्री गणेशाय नमः 🙏🏻
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[Ekadanta Sankashti Chaturthi 2026, Sankashti Chaturthi May 2026 date and time, Ekadanta Ganesh puja vidhi, Sankashti Chaturthi vrat rituals, Sankashti Chaturthi puja steps at home, Ganesh ji puja vidhi]
4 days ago | [YT] | 57
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Dharmo Rakshati Rakshitaha
Raag Chikitsa is an ancient approach that uses specific ragas to support emotional and physical well-being through Bharatiya Classical Music.
Raag Sohni: Helpful for chronic headaches
https://youtu.be/197RTHAEheI
Raag Bageshri: Helpful for insomnia and deeper sleep
https://youtu.be/c-zO_ZsJaDw
Raag Bhairavi: Helpful for emotional strength and high blood pressure
https://youtu.be/tLXNNejKhJs
Raag Megh: Invokes courage and valour
https://youtu.be/eA2_S9Pyds4
Sources:
• Autobiography of a Yogi by Paramhansa Yogananda (page 169)
• Everyday Ayurveda by Dr. Bhaswati Bhattacharya (page 137)
• jaims.in/jaims/article/download/5586/10326?inline=…
• icmacy.org/ragachikitsa/
[Raag Chikitsa, Ragas for healing, Indian classical music therapy, Ragas for sleep and relaxation, Ragas for stress relief, Ayurveda and music healing, Raag Bageshri benefits, Raag Bhairavi healing, Sound healing with ragas, Meditation music Indian classical]
6 days ago | [YT] | 25
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Dharmo Rakshati Rakshitaha
नवग्रहों का संबंध भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों से माना जाता है। उनमें से कूर्म अवतार का संबंध शनि ग्रह से है।
कूर्म अवतार की कथा हमें बताती है कि जब संसार के कल्याण हेतु समुद्र मंथन किया जा रहा था, तब मंदराचल पर्वत को डूबने से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार धारण किया। इसी मंथन से माता लक्ष्मी, ऐरावत हाथी, अमृत, आदि की प्राप्ति हुई।
कूर्म अवतार तब प्रकट होते हैं जब ऐसा भार उत्पन्न होता है, जिसे कोई और संभाल नहीं सकता। वे बिना किसी स्वार्थ के उस दायित्व को अपने ऊपर ले लेते हैं, ताकि सृष्टि का संतुलन बना रहे।
इसी प्रकार शनि ग्रह कर्म, कर्तव्य और धैर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। कूर्म अवतार की ही भांति, शनि व्यक्ति को जीवन में ऐसे दायित्व सौंपते हैं जो सरल नहीं होते। कई बार व्यक्ति को प्रारंभ से ही कर्तव्यों का भार उठाना पड़ता है, और निरंतर प्रयास के बाद ही उसे "अमृत" अर्थात सफलता और स्थिरता की प्राप्ति होती है।
जिनकी कुंडली में शनि प्रमुख स्थिति में होते हैं, उनके जीवन में भी ऐसी परीक्षाएँ आती हैं, जो उन्हें भीतर से दृढ़ और स्थिर बनाती हैं।
कूर्म अवतार और शनि ग्रह का यह संबंध हमें सिखाता है कि सर्वश्रेष्ठ कर्म वह है, जो निःस्वार्थ होकर दूसरों के कल्याण के लिए किया जाए।
वास्तविक शक्ति केवल आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर स्थिर रहकर, निस्वार्थ भाव से कर्तव्यों का भार संभालने में है।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🙏🏻
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[Kurma Avatar meaning, Kurma Jayanti significance, Samudra Manthan story meaning, Shani karma lessons, Vishnu avatars explanation, Shani influence in horoscope]
1 week ago | [YT] | 35
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Dharmo Rakshati Rakshitaha
नवग्रहों का संबंध भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों से माना जाता है। उनमें से नरसिंह अवतार का संबंध मंगल ग्रह से है।
नरसिंह भगवान उन क्षणों में प्रकट होते हैं जब धर्म संकट में होता है और कोई सामान्य उपाय संतुलन को पुनः स्थापित नहीं कर पाता। वे केवल पुकारने पर ही नहीं, बल्कि तब प्रकट होते हैं जब संरक्षण बिल्कुल आवश्यक हो जाता है।
भगवान नरसिंह, भगवान विष्णु के सबसे उग्र रूप हैं, फिर भी वे अपने भक्तों के प्रति अत्यंत सौम्य हैं।
इसी प्रकार मंगल साहस, इच्छाशक्ति और संरक्षण की भावना का प्रतिनिधित्व करता है। एक शुभ अवस्था में स्थित मंगल आवेग में आकर कार्य नहीं करता। उसमें यह समझ होती है कि कब आवाज़ उठानी है, अपनी ऊर्जा को कहाँ निर्देशित करना है और कब पीछे हटना है।
भगवान नरसिंह और मंगल ग्रह का यह संबंध हमें सिखाता है कि आक्रामकता स्वभाव से नकारात्मक नहीं होती। जब यह धर्म से जुड़ी होती है, तो यह संरक्षण और परिवर्तन का माध्यम बन जाती है।
वास्तविक शक्ति केवल बल में नहीं, बल्कि इस समझ में है कि उसे सही समय पर और सही प्रकार से कैसे उपयोग किया जाए।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🙏🏻
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1 week ago | [YT] | 54
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Dharmo Rakshati Rakshitaha
अगर आपकी कुंडली में बुध का बल कम है तो आपने इनमें से कुछ चीजें नोटिस की होंगी।
1- पहले तो, आपको वाणी या त्वचा से जुड़ी समस्याएं बनी रहती होंगी।
2- दूसरा, आप स्कूल, कॉलेज या अपने workplace में लोगों को अपने ideas सही से व्यक्त नहीं कर पाते होंगे इसलिए आपको public speaking में रुचि नहीं होगी या आपको उससे डर भी लगता होगा।
3- तीसरा, आपको आपके सोशल सर्कल या मित्रों का सहयोग उतना नहीं मिलता होगा।
4- चौथा, आपको कुछ भी सीखने में बहुत समय लगता होगा या स्कूल कॉलेज में आपका performance उतना अच्छा नहीं होगा।
5- पाँचवाँ, क्योंकि बुध मौज-मस्ती का ग्रह है तो अगर यह कुंडली में पीढ़ित होगा तो आपके जीवन में भी मौज-मस्ती की कमी होगी।
बुध ग्रह हेतु कुछ सरल उपाय:
-प्रतिदिन थोड़ा समय कुछ नया सीखने में व्यतीत करें।
-public speaking करें अथवा अपने कौशल को सुधारें।
-झूठ या नकारात्मक बोलने से बचें।
-उन्हीं लोगों से मित्रता रखें जो आपके लिए सही हों।
-internet का प्रयोग अपने ज्ञान की वृद्धि हेतु करें। व्यर्थ में doom scrolling में समय न बिताएं।
-अनावश्यक विषयों में बाल की खाल न निकालें।
-journaling करना आरंभ करें।
-गणपति अथर्वशीर्ष, देवी सूक्तं व श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ या श्रवण करें।
जय श्री राम।
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1 week ago | [YT] | 34
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Dharmo Rakshati Rakshitaha
अगर आपकी कुंडली में केतु अच्छा होगा तो आपमें इनमे से कुछ qualities तो अवश्य होंगी।
१- सबसे पहले तो, आप लंबे, पतले और कुछ साँवले होंगे।
२- दूसरा, आपको अध्यात्म, इतिहास या इस संसार के बाहर की चीजों में बहुत रुचि होगी जैसे कि astronomy, astrology, aadi।
३- तीसरा, आपका अंतर्ज्ञान या intuition बहुत प्रबल होगा।
४- चौथा, या तो आपकी इच्छाएं कम होंगी या फिर आप अपनी इच्छाओं से उतने attached नहीं होंगे। इच्छा पूर्ण हुई तो ठीक है नहीं हुई तो भी ठीक है।
५- पाँचवाँ, एक प्रबल केतु आपको साहसी बनाता है। हो सकता है कि हर समय यह साहस न दिखे लेकिन जब आर या पार की स्थिति आएगी तब अपने आप आपको वह साहस मिल जाएगा कि आप परिस्थिति को पलट करके रख दें।
जय श्री राम!
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[strong ketu effects, ketu in astrology, ketu qualities, ketu characteristics, ketu and intuition]
1 week ago | [YT] | 22
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Dharmo Rakshati Rakshitaha
यदि आप:
अपने comfort zone से बाहर निकलकर प्रगति करना चाहते हैं,
अपनी महत्वाकांक्षाओं को साकार करना चाहते हैं,
कुंडली के जिस भाव में राहु स्थित है, उस भाव में साहस के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं,
तो कुछ सरल उपाय हैं, जिनका पालन आप कहीं भी कर सकते हैं 👉🏻
देवी दुर्गा की आराधना करें।
देवी सूक्त, दुर्गा चालीसा अथवा देवी दुर्गा के किसी भी मंत्र व स्तोत्र का पाठ करें।
आवश्यकता से अधिक समय इंटरनेट पर न बिताएँ।
घर में बेकार के बिजली के यंत्र न रखें। साथ ही, यदि कोई यंत्र बिगड़ गया हो, तो उसे शीघ्र ही ठीक करवाएँ।
घर में सदैव साफ-सफाई बनाए रखें।
लोहा, तिल, कंबल, तेल, उड़द, नीले वस्त्र का दान करें।
ॐ रां राहवे नमः 🙏🏻
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[Rahu remedies in Vedic astrology, How to strengthen Rahu, Rahu placement in birth chart remedies, Durga worship for Rahu, Rahu dosh remedies at home, Vedic astrology Rahu effects and solutions, Spiritual remedies for Rahu planet, How to overcome Rahu negative effects, Astrology tips for career growth Rahu]
1 week ago | [YT] | 30
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