ATUL BANSAL MEDIA

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ATUL BANSAL MEDIA

सेवा में,
माननीय प्रधानमंत्री जी
Prime Minister's Office
भारत सरकार, नई दिल्ली

विषय: कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में स्कैनिंग/ऑन-स्क्रीन प्रणाली को परीक्षा सत्र के मध्य लागू किए जाने की उच्चस्तरीय जांच एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के संबंध में शिकायत।

महोदय,

सादर निवेदन है कि देशभर में आयोजित कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली लागू किए जाने का मामला अत्यंत गंभीर चिंता का विषय बन गया है। यह जानकारी प्राप्त हुई है कि इस प्रकार की नई मूल्यांकन प्रणाली को परीक्षा प्रक्रिया के दौरान लागू किया गया है, जिससे देश के लाखों विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा शिक्षकों के बीच असमंजस और चिंता की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा, करियर तथा भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया के दौरान मूल्यांकन पद्धति में अचानक परिवर्तन करना प्रशासनिक विवेक, पारदर्शिता तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप प्रतीत नहीं होता।

माननीय Supreme Court of India द्वारा विभिन्न मामलों में यह सिद्धांत स्पष्ट किया गया है कि किसी भी परीक्षा अथवा चयन प्रक्रिया के नियमों को प्रक्रिया प्रारंभ होने के पश्चात बदलना न्यायसंगत नहीं माना जाता। “Rules of the game cannot be changed after the game has begun” का सिद्धांत शिक्षा एवं भर्ती से जुड़े मामलों में बार-बार दोहराया गया है।

इस संदर्भ में निम्नलिखित महत्वपूर्ण प्रश्न उठते हैं—

क्या इस नई मूल्यांकन प्रणाली को लागू करने से पूर्व देशव्यापी स्तर पर पर्याप्त तकनीकी परीक्षण या पायलट प्रोजेक्ट संचालित किया गया था?

क्या इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सक्षम प्राधिकारी की विधिवत प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्राप्त की गई थी?

क्या देशभर के परीक्षकों को ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली के लिए पर्याप्त तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया?

क्या विद्यार्थियों एवं विद्यालयों को इस महत्वपूर्ण परिवर्तन के बारे में परीक्षा से पूर्व स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए थे?

क्या इस प्रणाली को लागू करने के लिए किसी निजी तकनीकी एजेंसी को अनुबंध दिया गया है, और यदि हाँ तो उसका चयन किस प्रक्रिया के माध्यम से किया गया?

देश के शिक्षा तंत्र में पिछले कुछ वर्षों में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी सुधारों की बात की जाती रही है। किंतु यदि इस प्रकार के महत्वपूर्ण निर्णय बिना पर्याप्त तैयारी और पारदर्शिता के लागू किए जाते हैं तो इससे विद्यार्थियों और समाज का विश्वास कमजोर हो सकता है।

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि इस विषय को गंभीरता से लेते हुए निम्नलिखित कार्यवाही सुनिश्चित करने की कृपा करें—

इस पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

यह सुनिश्चित किया जाए कि परीक्षा प्रक्रिया के दौरान नियमों अथवा मूल्यांकन प्रणाली में अचानक परिवर्तन न किया जाए।

यदि आवश्यक हो तो शिक्षा विशेषज्ञों, तकनीकी विशेषज्ञों तथा प्रशासनिक अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कराई जाए।

इस निर्णय से संबंधित समस्त प्रशासनिक प्रक्रिया, फाइल नोटिंग तथा एजेंसी चयन प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

यदि इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही अथवा अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

देश के करोड़ों विद्यार्थियों और अभिभावकों की अपेक्षा है कि शिक्षा से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण मामलों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विधिक प्रक्रिया का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

आशा है कि आप इस गंभीर विषय पर शीघ्र संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्यवाही करेंगे।

कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में स्कैनिंग/ऑन-स्क्रीन प्रणाली को परीक्षा सत्र के मध्य लागू किए जाने की उच्चस्तरीय जांच एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के संबंध में शिकायत।
#CBSEExamJustice
#CBSEAnswerSheetScanning
#StopChangingRulesCBSE
#StudentsDeserveJustice
#CBSETransparency
📢
#SaveStudentsFuture
#FairEvaluationCBSE
#StudentsVoiceMatters
#JusticeForStudents
#EducationSystemReform

#CBSEControversy
#CBSEAccountability
#EducationJustice
#ExamSystemReform
#StudentsFirst

5 months ago | [YT] | 3

ATUL BANSAL MEDIA

सेवा में,
माननीय प्रधानमंत्री जी
Prime Minister's Office
भारत सरकार, नई दिल्ली

विषय: कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में स्कैनिंग/ऑन-स्क्रीन प्रणाली को परीक्षा सत्र के मध्य लागू किए जाने की उच्चस्तरीय जांच एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के संबंध में शिकायत।

महोदय,

सादर निवेदन है कि देशभर में आयोजित कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली लागू किए जाने का मामला अत्यंत गंभीर चिंता का विषय बन गया है। यह जानकारी प्राप्त हुई है कि इस प्रकार की नई मूल्यांकन प्रणाली को परीक्षा प्रक्रिया के दौरान लागू किया गया है, जिससे देश के लाखों विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा शिक्षकों के बीच असमंजस और चिंता की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा, करियर तथा भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया के दौरान मूल्यांकन पद्धति में अचानक परिवर्तन करना प्रशासनिक विवेक, पारदर्शिता तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप प्रतीत नहीं होता।

माननीय Supreme Court of India द्वारा विभिन्न मामलों में यह सिद्धांत स्पष्ट किया गया है कि किसी भी परीक्षा अथवा चयन प्रक्रिया के नियमों को प्रक्रिया प्रारंभ होने के पश्चात बदलना न्यायसंगत नहीं माना जाता। “Rules of the game cannot be changed after the game has begun” का सिद्धांत शिक्षा एवं भर्ती से जुड़े मामलों में बार-बार दोहराया गया है।

इस संदर्भ में निम्नलिखित महत्वपूर्ण प्रश्न उठते हैं—

क्या इस नई मूल्यांकन प्रणाली को लागू करने से पूर्व देशव्यापी स्तर पर पर्याप्त तकनीकी परीक्षण या पायलट प्रोजेक्ट संचालित किया गया था?

क्या इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सक्षम प्राधिकारी की विधिवत प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्राप्त की गई थी?

क्या देशभर के परीक्षकों को ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली के लिए पर्याप्त तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया?

क्या विद्यार्थियों एवं विद्यालयों को इस महत्वपूर्ण परिवर्तन के बारे में परीक्षा से पूर्व स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए थे?

क्या इस प्रणाली को लागू करने के लिए किसी निजी तकनीकी एजेंसी को अनुबंध दिया गया है, और यदि हाँ तो उसका चयन किस प्रक्रिया के माध्यम से किया गया?

देश के शिक्षा तंत्र में पिछले कुछ वर्षों में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी सुधारों की बात की जाती रही है। किंतु यदि इस प्रकार के महत्वपूर्ण निर्णय बिना पर्याप्त तैयारी और पारदर्शिता के लागू किए जाते हैं तो इससे विद्यार्थियों और समाज का विश्वास कमजोर हो सकता है।

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि इस विषय को गंभीरता से लेते हुए निम्नलिखित कार्यवाही सुनिश्चित करने की कृपा करें—

इस पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

यह सुनिश्चित किया जाए कि परीक्षा प्रक्रिया के दौरान नियमों अथवा मूल्यांकन प्रणाली में अचानक परिवर्तन न किया जाए।

यदि आवश्यक हो तो शिक्षा विशेषज्ञों, तकनीकी विशेषज्ञों तथा प्रशासनिक अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कराई जाए।

इस निर्णय से संबंधित समस्त प्रशासनिक प्रक्रिया, फाइल नोटिंग तथा एजेंसी चयन प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

यदि इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही अथवा अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

देश के करोड़ों विद्यार्थियों और अभिभावकों की अपेक्षा है कि शिक्षा से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण मामलों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विधिक प्रक्रिया का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

आशा है कि आप इस गंभीर विषय पर शीघ्र संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्यवाही करेंगे।

कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में स्कैनिंग/ऑन-स्क्रीन प्रणाली को परीक्षा सत्र के मध्य लागू किए जाने की उच्चस्तरीय जांच एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के संबंध में शिकायत।
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5 months ago | [YT] | 2

ATUL BANSAL MEDIA

सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री जी,
बिहार राज्य सरकार, पटना
बिहार।
विषय:- बिहार राज्य में समग्र शिक्षा अभियान (फेस–2) के अंतर्गत संचालित कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय (KGBV) सामाजिक न्याय और बालिका शिक्षा की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। इन विद्यालयों के माध्यम से समाज के वंचित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की बालिकाओं को आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है, जिससे वे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ सकें। किंतु अत्यंत खेदजनक तथ्य यह है कि इन विद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों के अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है, विशेषकर शीतकालीन अवकाश (विंटर वेकेशन) के संदर्भ में।
बिहार में KGBV की वर्तमान स्थिति
वर्तमान में बिहार राज्य में कुल
• 390 KGBV Type-I,
• 145 KGBV Type-III, तथा
• 139 KGBV Type-IV
कुल मिलाकर 674 से अधिक कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय / छात्रावास संचालित हैं। इन सभी विद्यालयों में हजारों की संख्या में प्रधानाचार्य, वार्डन, पूर्णकालिक शिक्षक, अंशकालिक शिक्षक, अनुदेशक, रसोइया, लेखाकार, चौकीदार एवं अन्य कर्मचारी कार्यरत हैं।
ये सभी कर्मचारी 24×7 आवासीय व्यवस्था के अंतर्गत कार्य करते हैं और बालिकाओं की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य, भोजन और अनुशासन की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
भीषण ठंड और अवकाश का अभाव
बिहार राज्य में हर वर्ष दिसंबर–जनवरी के महीनों में भीषण शीतलहर पड़ती है। कई जिलों में तापमान 4–5 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। ऐसी परिस्थितियों में सामान्य विद्यालयों, निजी स्कूलों तथा अन्य शैक्षणिक संस्थानों में ठंड का अवकाश घोषित किया जाता है।
यहां तक कि राज्य सरकार के अन्य शिक्षा विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को भी शीतकालीन अवकाश दिया जाता है। परंतु कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए आज तक शीतकालीन अवकाश का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है, जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अन्यायपूर्ण है।
अन्य राज्यों से तुलना : स्पष्ट भेदभाव
देश के अन्य राज्यों जैसे—
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश आदि में KGBV कर्मचारियों को 15 से 20 दिनों तक का शीतकालीन अवकाश दिया जाता है। यह अवकाश राज्य सरकार के आदेश पर राज्य परियोजना निदेशक (समग्र शिक्षा) अथवा प्राथमिक / माध्यमिक शिक्षा विभाग के सचिव द्वारा नियमित रूप से जारी किया जाता है। जब एक ही केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत देशभर में संचालित KGBV में अन्य राज्यों के कर्मचारियों को अवकाश का लाभ मिल रहा है, तो बिहार राज्य के कर्मचारियों को इससे वंचित रखना सीधा-सीधा भेदभाव है।
संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन
यह स्थिति भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार) का स्पष्ट उल्लंघन है। समान कार्य, समान परिस्थितियों में कार्य करने वाले कर्मचारियों को अलग-अलग व्यवहार देना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि अमानवीय भी है।
भीषण ठंड में लगातार ड्यूटी कराने से कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है—
• सर्दी, बुखार, निमोनिया
• मानसिक तनाव
• कार्य क्षमता में कमी
• पारिवारिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव
कर्मचारियों में असंतोष और मानसिक दबाव
लगातार अवकाश न मिलने के कारण KGBV कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। वे पूरी निष्ठा से बालिकाओं की सेवा में लगे हुए हैं, परंतु बदले में उन्हें न तो नियमित सेवा लाभ मिलते हैं और न ही मानवीय दृष्टिकोण।
यह स्थिति आगे चलकर
• कार्य की गुणवत्ता में गिरावट
• कर्मचारियों का मनोबल टूटना
• योजना की मूल भावना पर प्रतिकूल असर
जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती है।
मुख्यमंत्री से न्यायोचित हस्तक्षेप की अपेक्षा
कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय यूनियन (ऑल इंडिया) ने माननीय मुख्यमंत्री बिहार सरकार से विनम्र किंतु दृढ़ अपील की है कि—
“बिहार राज्य के सभी KGBV में कार्यरत समस्त श्रेणी वर्ग के कर्मचारियों के लिए शीतकालीन अवकाश (विंटर वेकेशन) तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए, ताकि उन्हें भी अन्य राज्यों की तरह समान अधिकार और मानवीय सुविधा मिल सके।”
माँगें स्पष्ट और न्यायसंगत
1. बिहार के सभी KGBV (Type-I, III, IV) में शीतकालीन अवकाश घोषित किया जाए
2. अवकाश की अवधि न्यूनतम 15–20 दिन निर्धारित की जाए
3. राज्य परियोजना निदेशक (समग्र शिक्षा) को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ
4. भविष्य में हर वर्ष नियमित रूप से ठंड का अवकाश लागू किया जाए
कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालयों के कर्मचारी केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि बेटियों के भविष्य के संरक्षक हैं। उनके अधिकारों की रक्षा करना सरकार की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है।
यदि समय रहते शीतकालीन अवकाश का निर्णय नहीं लिया गया, तो यह न केवल कर्मचारियों के स्वास्थ्य और मनोबल को प्रभावित करेगा, बल्कि पूरी योजना की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा।
अब समय आ गया है कि बिहार सरकार समानता, न्याय और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए KGBV कर्मचारियों के लिए शीतकालीन अवकाश का आदेश जारी करे।


दिनांक:- 03/01/2026 भवदीय
अतुल कुमार बंसल (राष्ट्रीय अध्यक्ष)
कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय यूनियन आल इन्डिया
फोन:-09415676455
Email- nationalkgbvassociation@gmail.com

प्रतिलिपि:-
1. श्रीमान मुख्य सचिव बिहार
2. मुख्यमंत्री सचिवालय बिहार
3. शिक्षा मंत्री बिहार सरकार विकास भवन नया सचिवालय पटना बिहार
4. अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग बिहार
5. सचिव शिक्षा विभाग बिहार
6. श्रीमान राज्य परियोजना निदेशक बिहार शिक्षा परियोजना परिषद्
शिक्षा भवन राष्ट्रभाषा परिषद् परिसर सैदपुर, राजेन्द्र नगर, पटना बिहार
7. जिला शिक्षा पदाधिकारी / जिला कार्यक्रम पदाधिकारी
बिहार शिक्षा परियोजना, सभी जिले (बिहार)
8. राज्याध्यक्ष बिहार केजीबीवी यूनियन पटना बिहार

#BiharKGBV_WinterVacation #NitishKumar #JusticeForKGBV_Bihar #AtulBansal_KGBV #EducationMinisterBihar #KGBV_Union_India #SamagraShikshaAbhiyan #StopDiscrimination #BiharEducation #KGBV_Employees_Rights

8 months ago | [YT] | 3

ATUL BANSAL MEDIA

आयोग को मिले हैं, दमदार अध्यक्ष🔥
DGP साहब काफी उम्मीदें हैं आपसे युवाओं को

नए वर्ष में युवाओं के वर्षों की उम्मीद की किरण पर
मुहर लगा दीजिए

यही निवेदन है आपसे🙏

#UP_मांगे_नईशिक्षकभर्ती

8 months ago | [YT] | 4

ATUL BANSAL MEDIA

On behalf of Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya Union, All India, we extend our heartfelt New Year 2026 greetings to all the thousands of employees working in Kasturba Gandhi Balika Vidyalayas across 27 States and 3 Union Territories of India.
Our warm wishes go to all Principals, Wardens, Full-Time Teachers, Part-Time Teachers, Urdu Teachers, PGTs, TGTs, Accountants, Head Cooks, Assistant Cooks, Peons, Chowkidars, and all other staff members. May the New Year bring new hope, immense happiness, stability, and progress into your lives, and may it lead you towards regularisation and a secure future.
The entire Union leadership, along with all State Presidents, prays that the coming year fills your lives with endless joy, success, and dignity.
We also extend our love, blessings, and best wishes to the thousands of girls studying in Kasturba Gandhi Balika Vidyalayas. May they excel in every field, move forward with confidence, and lead happy and successful lives.
With warm regards and sincere greetings from
Atul Kumar Bansal
National President
#KGBV #KGBVUnion #KGBVAllIndia #NewYear2026 #KGBVStaff #EmpoweringGirls #KGBVTeachers #EducationForAll #AtulKumarBansal #KGBVRegularisation

8 months ago | [YT] | 2

ATUL BANSAL MEDIA

सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री जी,
उत्तर प्रदेश सरकार,
5, कालिदास मार्ग,
लखनऊ – 226001
विषय : कड़ाके की ठंड एवं शीत लहर के दृष्टिगत माननीय मुख्यमंत्री जी के स्पष्ट निर्देश तथा शिक्षा निदेशक (बेसिक) के आदेश के बावजूद प्रदेश में संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अवकाश घोषित न किए जाने के संबंध में सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि दिनांक 28 दिसंबर को प्रदेश में पड़ रही भीषण ठंड एवं शीत लहर को दृष्टिगत रखते हुए माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा प्रदेश के समस्त बोर्डों के कक्षा 12वीं तक के सभी विद्यालयों को 1 जनवरी 2026 तक बंद रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इसके अनुपालन में प्रदेश के लगभग सभी जनपदों में सरकारी, सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों को पूर्णतया बंद कर दिया गया।
किन्तु अत्यंत खेद एवं आश्चर्य का विषय है कि उक्त स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रदेश के अनेक जनपदों में संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) को संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा बंद नहीं किया गया, जबकि अन्य सभी विद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया गया था।
उल्लेखनीय है कि यह स्थिति केवल एक-दो जिलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि रामपुर, सीतापुर, गाजियाबाद, बलरामपुर, जौनपुर, कासगंज, मथुरा, अलीगढ़ (जो कि स्वयं माननीय शिक्षा मंत्री जी का गृह जनपद है), गोरखपुर, आज़मगढ़, बलिया, अमेठी, अम्बेडकरनगर, रायबरेली, बरेली, मिर्ज़ापुर, गोंडा, बिजनौर, सहारनपुर, मुज़फ्फरनगर, सिद्धार्थनगर, संतकबीर नगर, सोनभद्र, चंदौली, शाहजहांपुर, देवरिया, ललितपुर सहित अनेक जनपदों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को संचालित किया गया।
यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है क्योंकि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अध्ययनरत छात्राएँ आवासीय, ग्रामीण, वंचित एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आती हैं। कड़ाके की ठंड में उन्हें विद्यालय आने-जाने एवं आवासीय परिसर में रहने के लिए बाध्य करना उनके स्वास्थ्य, जीवन एवं मौलिक अधिकारों के साथ सीधा खिलवाड़ है।
महोदय, यह कृत्य न केवल माननीय मुख्यमंत्री जी के आदेशों की अवहेलना है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन एवं स्वास्थ्य का अधिकार) तथा बाल अधिकारों का भी स्पष्ट उल्लंघन है। इससे यह भी प्रतीत होता है कि संबंधित जिलों के अधिकारियों द्वारा या तो आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया गया या फिर जानबूझकर उनकी अनदेखी की गई।


प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं:
• कपड़ों का सूखना असंभव: बालिकाओं के कपड़े एवं यूनिफॉर्म सूख नहीं पा रहे, जिससे स्वच्छता एवं आराम प्रभावित हो रहा है। अतिरिक्त ड्रेस या गर्म वस्त्रों की उपलब्धता भी अपर्याप्त है।
• खुले परिसर में सर्द हवाओं का प्रभाव: विद्यालय परिसर चारों ओर से खुला होने के कारण बालिकाओं को सीधी ठंडी हवाओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ गया है।
• स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें: कहीं-कहीं बालिकाओं में खांसी, सर्दी-जुकाम एवं श्वसन संबंधी विकारों की शिकायतें प्रारंभ हो चुकी हैं। हाल ही में सीतापुर जिले के KGBV में इसी कारण कई बालिकाएँ प्रभावित हुईं।
• सुविधाओं की कमी: प्रदेश के किसी भी विद्यालय में जिला स्तर पर पर्याप्त हीटर, जलाने की लकड़ी उपलब्ध नहीं हैं, जिनसे एक कमरे में 30-35 बालिकाओं को जाड़े से बचाया जा सके। ऊपर से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण हीटर का उपयोग भी कठिन है।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि—
1. इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
2. माननीय मुख्यमंत्री जी के आदेशों की अवहेलना करने वाले संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए।
3. भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए स्पष्ट एवं समान दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ।
4. कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
5. परिषदीय विद्यालयों की भांति 14 जनवरी तक समस्त कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालयों में भी अवकाश घोषित किये जाने की कृपा चाहें।
आशा है कि माननीय मुख्यमंत्री जी इस अत्यंत गंभीर विषय पर शीघ्र संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्यवाही करेंगे।
भवदीय,
(अतुल कुमार बंसल)
राष्ट्रीय अध्यक्ष
कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय शिक्षक
शिक्षणेत्तर यूनियन आल इन्डिया
Email-nationalkgbvassociation@gmail.com

8 months ago | [YT] | 7

ATUL BANSAL MEDIA

महानिदेशक स्कूल शिक्षा से विभिन्न मांगों को लेकर केजीबीवी यूनियन आल इंडिया ने किया मुलाक़ात

लखनऊ। कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालयों के कर्मचारियों को प्राथमिक विद्यालय, उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात अध्यापकों सहित शिक्षा मित्र, अनुदेशक, अनुचर, रसोइयाँ, की भांति कैशलेश चिकित्सीय सुविधा, मिनिमम वेतनमान का निर्धारण, विषय विसंगति मामले को लेकर निकाले गये कर्मचारियों की सवेतन वापसी, प्रेरणा पोर्टल से ली जा रही हाजिरी व रात-दिन जिओ टैंगिंग से सेल्फी को स्थगित किये जाने, कर्मचारियों के रिटायरमेंट की आयु सीमा 65 वर्ष किये जाने, बेसिक शिक्षा विभाग के समस्त देय अवकाश लागू किये जाने, सर्विस के दौरान अप्रिय घटना घटित होने पर परिवार वालों को 50 लाख सहायता धनराशि व अनुकम्पा नौकरी दिये जाने व रसोईयाँ, चपरासी व चौकीदार को पीआरडी जवानों के समकक्ष 15 हजार वेतनमान दिये जाने को लेकर कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय यूनियन आल इन्डिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल बंसल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल महानिदेशक स्कूल शिक्षा व राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा से मुलाक़ात कर केजीबीवी के कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत कराया। कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय यूनियन आल इन्डिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल बंसल ने बताया कि केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित समग्र शिक्षा अभियान योजना के भारत के 27 राज्यों व 3 केन्द्र शासित प्रदेशों में सबसे ज्यादा 746 बालिका विद्यालय उत्तर प्रदेश में संचालित है विभाग व सरकार द्वारा ध्यान न देने के कारण 20 वर्षों से अल्प मानदेय पर नौकरी कर रहे कर्मचारियों वार्डन, फुलटाइम टीचर्स, पार्टटाइम टीचर्स, उर्दू टीचर्स, लेखाकार, रसोईयाँ, चपरासी व चौकीदार को आर0टी0ई0एक्ट0 की धारा 23 की उपधारा 3 के तहत राज्य सरकार को स्थायीकरण करने का पूरा अधिकार है। प्रदेश सरकार ने कस्तूरबा विद्यालय को छोड़कर सभी विभागों को कैसलेश चिकित्सा की सुविधा दी है महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने कहा कि हम शीघ्र ही सारी समस्याओं को निपटाने का प्रयास करेंगे मुलाक़ात करने वालो में विनोद मिश्रा, राजरानी, राजपाल सिंह मौजूद रहे इसके पहले टीम ने बेसिक शिक्षा मंत्री सन्दीप सिंह से मिलकर अपनी माँगे रखी प्रदेश अध्यक्ष सैयद्दह यासमीन की निर्देशन में इसके पहले टीम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री सन्दीप सिंह से मिलकर केजीबीवी में व्याप्त समस्याओं ने निराकरण किये जाने का अनुरोध किया है।

• आजकी मुलाक़ात में SPD मैडम को सारी समस्याओं को विस्तार से अवगत कराया गया है कैसलेश चिकित्सा तो मिलकर रहेगी हमारे सभी कर्मी को, उसके बाद मिनिमम मानदेय दिये जाने व 2014 में पार्ट टाइम का घटाये गये मानदेय के बारे में बताया गया, वार्डन व फुल टाइम शिक्षिका को 24 घन्टे की ड्यूटी से मुक्ति के लिये हरियाणा और मध्य प्रदेश का नियम बताया गया ये सब कुछ संभव हुआ तो सिर्फ बहन यासमीन की वजह से उनके प्रखर प्रेरणा से अब टीम हर 15 दिन अधिकारीयों मंत्रियों से मुलाक़ात करके समस्याओं के निपटान के बारे में पूछेगी इसके लिये जल्दी ही एक कुशल टीम का निर्माण किया जायेगा

* अतुल कुमार बंसल
राष्ट्रीय अध्यक्ष
केजीबीवी यूनियन अल्ल इंडिया

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11 months ago | [YT] | 4

ATUL BANSAL MEDIA

తమిళనాడు రాష్ట్రంలోని కస్తూర్బా గాంధీ బాలికా విద్యాలయాలలో పనిచేస్తున్న మహిళా పిటిటి ఉద్యోగుల నుండి రాత్రి 9 గంటల డ్యూటీని తీసుకోవడం ఆపండి.
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Stop the 9 pm duty being taken from female PTT employees working in Kasturba Gandhi Balika Vidyalayas in the state of Tamil Nadu

1 year ago | [YT] | 2

ATUL BANSAL MEDIA

KGMU के महान डाक्टरों ने रचा एक अनोखा इतिहास......
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लखनऊ: KGMU ने फिर साबित कर दिया कि क्यों उसे उत्तर भारत का
सबसे बड़ा मेडिकल सेंटर कहा जाता है।
लखनऊ के गोमतीनगर निवासी मासूम कार्तिक के सिर में लोहे की छड़ आर-पार घुस गई थी। हालत इतनी नाज़ुक थी कि परिवार ने सारी उम्मीदें छोड़ दी थीं। घर पर सभी लोग बहुत दुखी हो गये
सब लोग उसे लेकर KGMU के न्यूरोसर्जरी विभाग के पास पहुंचे जहाँ कुशल डाक्टरों की टीम ने अपनी काबिलियत और हिम्मत से कमाल कर दिखाया। इस मुश्किल घड़ी में ऑपरेशन की सारी व्यवस्था का जिम्मा उठाया डॉ. K.K. सिंह ने। अहम भूमिका में ऑपरेशन टीम में डॉ. अंकुर बजाज, डॉ. सौरभ रैना, डॉ. जैसन गोलमी और डॉ. अंकिन बसु शामिल रहे। टीम ने घंटों तक लगातार ऑपरेशन कर बच्चे की ज़िंदगी बचा ली।
आपको बहुत नमन सच में तभी पूरा देश आप जैसा भगवान् पर विश्वास करता है.
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1 year ago | [YT] | 0

ATUL BANSAL MEDIA

*परिवार कल्याण महानिदेशालय ने जारी किया प्रमोशन लिस्ट
*हेल्थ वर्कर 6 महीने की ट्रेनिंग के बाद बनेंगी हेल्थ सुपरवाईजर जौनपुर जिले से 13 महिलाओं का हुआ प्रमोशन
लखनऊ। परिवार कल्याण महानिदेशालय उत्तर प्रदेश शासन ने उत्तर प्रदेश चिकित्सा स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण विभाग स्वास्थ्य कार्यकर्ता अराजपत्रित सेवानियमावाली 2018 में स्वास्थ्य कार्यकर्ता पदोन्नति स्वास्थ्य पर्यवेक्षक महिला को 6 माह के ट्रेनिंग के लिये पीएचऍनआई प्रशिक्षण केन्द्र राजकीय हेल्थ स्कूल शिवपुर वाराणसी में जौनपुर जिले की कुशमावती, सर्वेश राय, विश्वकान्ती देवी, अरुण कुमारी राय, मीरा देवी, अनित्ता देवी, राजकुमारी, सुमनलता, रेखा सोनकर, सीता देवी, अर्चना देवी, अभिलाषा देवी, सीजा कुमारी, सहित बलिया जिले से आशा कुमारी, पूनम यादव, सुर्यावती, राधिका देवी, आभा मिश्रा, इंदु देवी, इंदु सिंह, देवन्ती देवी, फूलमती देवी, कुमारी प्रियंका, कुमारी उर्मिला, बिन्दुलता, मीरा, पूनम कुमारी, पूनम देवी, आजमगढ़ जिले से अनिशा, शीतल राव, रीना मिश्रा, वन्दना तिवारी, निर्मल देवी, वाराणसी जिले से गीता देवी, बसन्ती मिश्रा, शैल कुमारी, मंजू कुमारी, पूनम सिंह, चन्द्रा अभिरानी, सीमा कुमारी, सुमनलता, संध्या, अनिता देवी, नीतू भार्गव, मंशा सिंह, महराजगंज जिले से 12, मीरजापुर जिले से 9, बाँदा जिले से 13, भदोही जिले से 10, चन्दौली जिले से 10 व मऊ जिले से 10 स्वास्थ्य कार्यकर्ता को पदोन्नति देते हुए स्वास्थ्य पर्यवेक्षक बनाया जायेगा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी बलिया, आजमगढ़, वाराणसी, महराजगंज, मिर्जापुर, बाँदा, जौनपुर, भदोही, मऊ व चन्दौली जिले को शीघ्र प्रमोशन व ट्रेनिंग के लिये चयनित हेल्थ वर्कर को योगदान कराये जाने को निर्देश जारी किये गये हैं।

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‪@BansalMedia88‬

1 year ago | [YT] | 2