🏠 वास्तु ज्ञान: घर में हनुमान जी का चित्र कहाँ और कैसे लगायें? 🙏 श्रीराम भक्त हनुमान साक्षात एवं जाग्रत देव हैं। उनकी भक्ति संकटों का नाश कर जीवन में शांति और सुख लाती है। विद्वानों का मत है कि हनुमान भक्त जीवन में कभी हारता नहीं, उसकी हार भी अंत में जीत में बदल जाती है। जिस घर में बजरंगबली का चित्र सही स्थान पर होता है, वहां मंगल, शनि, पितृ और भूत-प्रेत आदि का दोष नहीं रहता। लेकिन, वास्तु के अनुसार हनुमान जी का चित्र लगाने के कुछ कड़े नियम हैं। आइए जानते हैं: 🔴 सबसे महत्वपूर्ण नियम: सही दिशा वास्तु के अनुसार, हनुमान जी का चित्र हमेशा दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए लगाना चाहिए। यह चित्र बैठी मुद्रा में और लाल रंग का हो तो सर्वोत्तम है। 👉 क्यों? हनुमान जी ने अपना सर्वाधिक प्रभाव दक्षिण दिशा में ही दिखाया है (लंका दक्षिण में थी)। इस दिशा में चित्र लगाने से वहां से आने वाली हर नकारात्मक शक्ति लौट जाती है और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है। 🚫 यहाँ भूलकर भी न लगायें शयनकक्ष (Bedroom): शास्त्रों के अनुसार हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं। इसलिए उनका चित्र शयनकक्ष में बिल्कुल न रखें। इसे घर के मंदिर या किसी अन्य पवित्र स्थान पर ही स्थापित करें। 🛡️ संकटों और वास्तु दोष के लिए उपाय नकारात्मक ऊर्जा से बचाव: यदि घर पर ऊपरी बाधा या नकारात्मक शक्तियों का शक हो, तो मुख्य द्वार के ऊपर पंचमुखी हनुमान जी या शक्ति प्रदर्शन मुद्रा वाला चित्र लगायें। बुरी शक्तियां प्रवेश नहीं करेंगी। पंचमुखी हनुमान: जिस घर में पंचमुखी हनुमान जी होते हैं, वहां उन्नति की बाधाएं दूर होती हैं और धन-संपत्ति बढ़ती है। जलस्रोत दोष: यदि घर में गलत दिशा में जल स्रोत (Water source) हो, तो उस दोष को दूर करने के लिए पंचमुखी हनुमान का चित्र ऐसे लगाएं कि उनका मुख उस जल स्रोत की ओर देखते हुए दक्षिण-पश्चिम दिशा की तरफ हो। 🛋️ बैठक कक्ष (Living Room) में कौन सा चित्र? बैठक कक्ष में आप इनमें से कोई एक चित्र लगा सकते हैं: श्रीराम दरबार: जहां हनुमान जी प्रभु श्रीराम के चरणों में बैठे हों। पंचमुखी हनुमान चित्र। पर्वत उठाते हुए चित्र। श्रीराम भजन करते हुए चित्र। ✨ विभिन्न चित्रों का महत्व और लाभ ✨ ⛰️ पर्वत उठाते हुए हनुमान (संजीवन बूटी): यह चित्र घर के सदस्यों में साहस, बल, विश्वास और जिम्मेदारी का विकास करता है। आप कठिन परिस्थितियों से घबराएंगे नहीं। 🚀 उड़ते हुए हनुमान: यह चित्र उन्नति, तरक्की और सफलता का सूचक है। यह आगे बढ़ने के प्रति उत्साह का संचार करता है। 🎶 श्रीराम भजन करते हुए हनुमान: यह चित्र घर में भक्ति और अटूट विश्वास का संचार करता है, जो जीवन की सफलता का आधार है। हनुमान जी की भक्ति में पवित्रता और उत्तम चरित्र बहुत जरूरी है। इन नियमों का पालन करें और बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त करें। 🚩 जय श्री राम || जय हनुमान 🚩 इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने मित्रों और परिवार के साथ शेयर अवश्य करें!
🕉️ बाटुक भैरव: माँ काली की करुणा से प्रकट दिव्य बाल रक्षक 🕉️
बाटुक भैरव को माँ काली का पुत्र माना जाता है। यह स्वरूप माँ काली की उस करुणामयी शक्ति का प्रतीक है, जो प्रेम, संरक्षण और मार्गदर्शन के रूप में प्रकट होती है। बाटुक भैरव का बाल रूप यह संदेश देता है कि दिव्य शक्ति कोमलता और सरलता के साथ भी प्रकट हो सकती है।
✨ स्वरूप और आध्यात्मिक अर्थ
बाटुक भैरव का बालक स्वरूप पवित्रता, निश्चलता और अनुशासन का प्रतीक है। उनका यह रूप दर्शाता है कि ईश्वर भक्तों के लिए सहज, सुलभ और अपनत्व से भरा होता है।
बाल स्वरूप → सरलता और निष्कपट भाव
भैरव तत्त्व → संरक्षण और जागरूकता
मातृ कृपा → माँ काली का वात्सल्य
🌺 माँ काली से संबंध
माँ काली शक्ति की अधिष्ठात्री हैं और बाटुक भैरव उसी शक्ति का सौम्य, संतुलित और रक्षक स्वरूप हैं। यह संबंध सिखाता है कि सशक्तता के साथ करुणा और प्रेम भी आवश्यक हैं।
📿 उपासना का महत्व
बाटुक भैरव की भक्ति को परंपराओं में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और मानसिक स्थिरता से जोड़ा गया है। उनकी साधना— ✔️ भय और असमंजस से उबरने में सहायक ✔️ आत्मबल और अनुशासन को प्रोत्साहित करने वाली ✔️ परिवार और बच्चों के लिए मंगलकामना से जुड़ी
सरल मन, श्रद्धा और नियमित स्मरण ही उनकी उपासना का मूल है।
🕯️ पूजा की सरल विधि (सामान्य जानकारी)
स्वच्छ स्थान पर दीपक प्रज्वलन
फल, मिश्री या दूध का भोग
शांत मन से नाम स्मरण
अष्टमी या शनिवार को विशेष ध्यान
(यह जानकारी सांस्कृतिक व आध्यात्मिक परंपराओं पर आधारित है।)
🌼 प्रेरणात्मक संदेश
बाटुक भैरव हमें यह सिखाते हैं कि—
सच्ची शक्ति डर में नहीं, बल्कि करुणा, अनुशासन और विश्वास में निहित होती है।
माँ काली की कृपा जब बाटुक भैरव के रूप में प्रकट होती है, तो वह भक्तों को भयमुक्त होकर जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
🙏 जय माँ काली | जय बाटुक भैरव 🙏
📌 यह पोस्ट धार्मिक-सांस्कृतिक जानकारी और सामान्य आध्यात्मिक विश्वासों पर आधारित है। किसी प्रकार का दावा, भय या भ्रामक आशय नहीं।
🙏 देवी अन्नपूर्णा — माँ जो भूख नहीं, विश्वास मिटाती हैं 🙏
यह केवल एक दिव्य चित्र नहीं है, यह जीवन का सत्य है। इस छवि में विराजमान हैं देवी अन्नपूर्णा — वह माँ, जिनकी करुणा से सृष्टि चलती है, जिनके अन्न से जीवन टिकता है। उनके हाथों में अन्न का पात्र और करछुल यह स्मरण कराते हैं कि अन्न केवल भोजन नहीं, ईश्वर का प्रसाद है।
उनके सामने विनम्र भाव से खड़े हैं भगवान शिव — वैराग्य, तप और संन्यास के प्रतीक। यह दृश्य हमें बहुत गहराई से सिखाता है कि चाहे कोई कितना ही महान क्यों न हो, जीवन का आधार फिर भी माँ का अन्न और करुणा ही है। शिव भी माँ अन्नपूर्णा के बिना अधूरे हैं — यही शक्ति और चेतना का संतुलन है।
इस चित्र में आसपास का वातावरण, सेवक, अर्पण और दिव्यता यह संदेश देते हैं कि भोजन कराना केवल दान नहीं, बल्कि साधना है। जब हम किसी भूखे को भोजन देते हैं, तब हम अन्नपूर्णा तत्त्व की पूजा कर रहे होते हैं।
आज के समय में, जब सब कुछ होते हुए भी मन खाली है, यह छवि हमें याद दिलाती है — ➡️ संतुलन अन्न से आता है ➡️ करुणा सेवा से आती है ➡️ और ईश्वर रसोई से भी प्रकट होते हैं
🌾 माँ अन्नपूर्णा केवल अन्न नहीं देतीं, वे जीवन को थामे रखती हैं। 🌾
भगवान शिव की पाँच पुत्रियाँ – शिव पुराण में वर्णित अद्भुत कथा जब भी भगवान शिव के परिवार की चर्चा होती है, तो सर्वप्रथम श्री गणेश और कार्तिकेय जी का नाम लिया जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि शिव पुराण में भगवान शिव और माता पार्वती की पाँच पुत्रियों का भी उल्लेख मिलता है। आज हम आपको उसी दिव्य और रहस्यमयी कथा से परिचित कराने जा रहे हैं।
शिव पुराण के अनुसार, एक समय भगवान शिव और माता पार्वती एक सरोवर के तट पर ध्यान मग्न थे। उसी समय भगवान शिव के मुख पर एक मंद मुस्कान प्रकट हुई। उस दिव्य मुस्कान से पाँच मोती निकलकर सरोवर में जा गिरे। इन पाँच मोतियों से पाँच कन्याओं का जन्म हुआ, किंतु ये कन्याएँ मनुष्य रूप में नहीं बल्कि नाग रूप में उत्पन्न हुईं। पुत्रियों के साथ भगवान शिव का वात्सल्य ध्यान में लीन होने के कारण माता पार्वती को इस घटना का ज्ञान नहीं था, परंतु महादेव अपनी संतानों के जन्म से भली-भांति परिचित थे। भगवान शिव अपनी अन्य संतानों की भाँति इन पाँच नाग कन्याओं से भी अत्यंत प्रेम करते थे और प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उनके साथ खेलने सरोवर जाया करते थे। एक दिन माता पार्वती को आश्चर्य हुआ कि भगवान शिव प्रतिदिन इतनी भोर में कहाँ जाते हैं। सत्य जानने की इच्छा से वे भगवान शिव के पीछे-पीछे चल पड़ीं। सरोवर पहुँचकर उन्होंने देखा कि महादेव उन पाँच नाग कन्याओं पर पिता की भाँति अपार स्नेह लुटा रहे हैं। पत्नी-भाव से पूर्ण माता पार्वती के मन में यह भय उत्पन्न हुआ कि कहीं ये नाग कन्याएँ महादेव को हानि न पहुँचा दें। इसी आशंका के कारण माता पार्वती ने उन कन्याओं का अंत करने का विचार किया। तभी भगवान शिव ने उनकी मंशा को समझकर उन्हें रोक लिया और सम्पूर्ण सत्य से अवगत कराया। यह जानकर कि वे स्वयं उन कन्याओं की माता हैं, माता पार्वती का भ्रम दूर हो गया।
शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव की इन पाँच नाग कन्याओं के नाम हैं: जया, विषहर, शामिलबारी, देव और दोतली। भगवान शिव ने अपनी इन पुत्रियों को एक विशेष वरदान भी प्रदान किया। इस वरदान के अनुसार, जो भी भक्त भगवान शिव की पूजा के साथ-साथ इन नाग कन्याओं की भी श्रद्धा से पूजा करेगा— उसके परिवार को सर्पदंश का भय नहीं रहेगा घर में धन-धान्य और समृद्धि की कभी कमी नहीं होगी
यदि आपको यह कथा पसंद आई हो, तो इसे अवश्य शेयर करें और ऐसी ही और भी पावन कथाओं के लिए हमारे साथ जुड़े रहें। हर हर महादेव 🔱
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यह स्रोत हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और विभिन्न संस्कारों से संबंधित महत्वपूर्ण दिशानिर्देशों और नियमों का एक संग्रह है। इसमें दैनिक प्रार्थनाओं, हवन, अभिषेक और विशिष्ट देवताओं की पूजा के दौरान अपनाई जाने वाली पारंपरिक विधियों का संक्षिप्त विवरण दिया गया है। यह दस्तावेज़ भक्तों को अनुष्ठानों के दौरान की जाने वाली सामान्य त्रुटियों से बचने और सही धार्मिक आचरण का पालन करने में मदद करता है। इसमें वास्तु शास्त्र के प्रतीकों और विशेष शुभ तिथियों के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है। इन नियमों का पालन करने का मुख्य उद्देश्य धार्मिक कार्यों को शुद्धता और श्रद्धा के साथ संपन्न करना है। अंततः, यह पारंपरिक ज्ञान को सहेजने और उसे सही ढंग से लागू करने के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करता है।
Shikha “Aashi” krishnan
🏠 वास्तु ज्ञान: घर में हनुमान जी का चित्र कहाँ और कैसे लगायें? 🙏
श्रीराम भक्त हनुमान साक्षात एवं जाग्रत देव हैं। उनकी भक्ति संकटों का नाश कर जीवन में शांति और सुख लाती है। विद्वानों का मत है कि हनुमान भक्त जीवन में कभी हारता नहीं, उसकी हार भी अंत में जीत में बदल जाती है।
जिस घर में बजरंगबली का चित्र सही स्थान पर होता है, वहां मंगल, शनि, पितृ और भूत-प्रेत आदि का दोष नहीं रहता। लेकिन, वास्तु के अनुसार हनुमान जी का चित्र लगाने के कुछ कड़े नियम हैं। आइए जानते हैं:
🔴 सबसे महत्वपूर्ण नियम: सही दिशा
वास्तु के अनुसार, हनुमान जी का चित्र हमेशा दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए लगाना चाहिए। यह चित्र बैठी मुद्रा में और लाल रंग का हो तो सर्वोत्तम है।
👉 क्यों? हनुमान जी ने अपना सर्वाधिक प्रभाव दक्षिण दिशा में ही दिखाया है (लंका दक्षिण में थी)। इस दिशा में चित्र लगाने से वहां से आने वाली हर नकारात्मक शक्ति लौट जाती है और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
🚫 यहाँ भूलकर भी न लगायें
शयनकक्ष (Bedroom): शास्त्रों के अनुसार हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं। इसलिए उनका चित्र शयनकक्ष में बिल्कुल न रखें। इसे घर के मंदिर या किसी अन्य पवित्र स्थान पर ही स्थापित करें।
🛡️ संकटों और वास्तु दोष के लिए उपाय
नकारात्मक ऊर्जा से बचाव: यदि घर पर ऊपरी बाधा या नकारात्मक शक्तियों का शक हो, तो मुख्य द्वार के ऊपर पंचमुखी हनुमान जी या शक्ति प्रदर्शन मुद्रा वाला चित्र लगायें। बुरी शक्तियां प्रवेश नहीं करेंगी।
पंचमुखी हनुमान: जिस घर में पंचमुखी हनुमान जी होते हैं, वहां उन्नति की बाधाएं दूर होती हैं और धन-संपत्ति बढ़ती है।
जलस्रोत दोष: यदि घर में गलत दिशा में जल स्रोत (Water source) हो, तो उस दोष को दूर करने के लिए पंचमुखी हनुमान का चित्र ऐसे लगाएं कि उनका मुख उस जल स्रोत की ओर देखते हुए दक्षिण-पश्चिम दिशा की तरफ हो।
🛋️ बैठक कक्ष (Living Room) में कौन सा चित्र?
बैठक कक्ष में आप इनमें से कोई एक चित्र लगा सकते हैं:
श्रीराम दरबार: जहां हनुमान जी प्रभु श्रीराम के चरणों में बैठे हों।
पंचमुखी हनुमान चित्र।
पर्वत उठाते हुए चित्र।
श्रीराम भजन करते हुए चित्र।
✨ विभिन्न चित्रों का महत्व और लाभ ✨
⛰️ पर्वत उठाते हुए हनुमान (संजीवन बूटी): यह चित्र घर के सदस्यों में साहस, बल, विश्वास और जिम्मेदारी का विकास करता है। आप कठिन परिस्थितियों से घबराएंगे नहीं।
🚀 उड़ते हुए हनुमान: यह चित्र उन्नति, तरक्की और सफलता का सूचक है। यह आगे बढ़ने के प्रति उत्साह का संचार करता है।
🎶 श्रीराम भजन करते हुए हनुमान: यह चित्र घर में भक्ति और अटूट विश्वास का संचार करता है, जो जीवन की सफलता का आधार है।
हनुमान जी की भक्ति में पवित्रता और उत्तम चरित्र बहुत जरूरी है। इन नियमों का पालन करें और बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त करें।
🚩 जय श्री राम || जय हनुमान 🚩
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6 days ago | [YT] | 1
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Shikha “Aashi” krishnan
🕉️ बाटुक भैरव: माँ काली की करुणा से प्रकट दिव्य बाल रक्षक 🕉️
बाटुक भैरव को माँ काली का पुत्र माना जाता है। यह स्वरूप माँ काली की उस करुणामयी शक्ति का प्रतीक है, जो प्रेम, संरक्षण और मार्गदर्शन के रूप में प्रकट होती है। बाटुक भैरव का बाल रूप यह संदेश देता है कि दिव्य शक्ति कोमलता और सरलता के साथ भी प्रकट हो सकती है।
✨ स्वरूप और आध्यात्मिक अर्थ
बाटुक भैरव का बालक स्वरूप पवित्रता, निश्चलता और अनुशासन का प्रतीक है। उनका यह रूप दर्शाता है कि ईश्वर भक्तों के लिए सहज, सुलभ और अपनत्व से भरा होता है।
बाल स्वरूप → सरलता और निष्कपट भाव
भैरव तत्त्व → संरक्षण और जागरूकता
मातृ कृपा → माँ काली का वात्सल्य
🌺 माँ काली से संबंध
माँ काली शक्ति की अधिष्ठात्री हैं और बाटुक भैरव उसी शक्ति का सौम्य, संतुलित और रक्षक स्वरूप हैं। यह संबंध सिखाता है कि सशक्तता के साथ करुणा और प्रेम भी आवश्यक हैं।
📿 उपासना का महत्व
बाटुक भैरव की भक्ति को परंपराओं में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और मानसिक स्थिरता से जोड़ा गया है। उनकी साधना—
✔️ भय और असमंजस से उबरने में सहायक
✔️ आत्मबल और अनुशासन को प्रोत्साहित करने वाली
✔️ परिवार और बच्चों के लिए मंगलकामना से जुड़ी
सरल मन, श्रद्धा और नियमित स्मरण ही उनकी उपासना का मूल है।
🕯️ पूजा की सरल विधि (सामान्य जानकारी)
स्वच्छ स्थान पर दीपक प्रज्वलन
फल, मिश्री या दूध का भोग
शांत मन से नाम स्मरण
अष्टमी या शनिवार को विशेष ध्यान
(यह जानकारी सांस्कृतिक व आध्यात्मिक परंपराओं पर आधारित है।)
🌼 प्रेरणात्मक संदेश
बाटुक भैरव हमें यह सिखाते हैं कि—
सच्ची शक्ति डर में नहीं, बल्कि करुणा, अनुशासन और विश्वास में निहित होती है।
माँ काली की कृपा जब बाटुक भैरव के रूप में प्रकट होती है, तो वह भक्तों को भयमुक्त होकर जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
🙏 जय माँ काली | जय बाटुक भैरव 🙏
📌 यह पोस्ट धार्मिक-सांस्कृतिक जानकारी और सामान्य आध्यात्मिक विश्वासों पर आधारित है। किसी प्रकार का दावा, भय या भ्रामक आशय नहीं।
1 week ago | [YT] | 2
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Shikha “Aashi” krishnan
🚩🙏🏻🌼 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🌺🙏🏻🚩
2 weeks ago | [YT] | 2
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Shikha “Aashi” krishnan
“शिव के 12 पावन धाम – हर धाम से मिलता है आध्यात्मिक शांति और आशीर्वाद।” 🕉️🙏
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#ShivaTemples #12Jyotirlinga #SpiritualJourney #LordShiva #DivineBlessings #BhaktiVibes #HinduPilgrimage #FaithAndDevotion #SacredPlaces #ShivBhakti
2 weeks ago | [YT] | 1
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Shikha “Aashi” krishnan
🙏 देवी अन्नपूर्णा — माँ जो भूख नहीं, विश्वास मिटाती हैं 🙏
यह केवल एक दिव्य चित्र नहीं है, यह जीवन का सत्य है।
इस छवि में विराजमान हैं देवी अन्नपूर्णा — वह माँ, जिनकी करुणा से सृष्टि चलती है, जिनके अन्न से जीवन टिकता है। उनके हाथों में अन्न का पात्र और करछुल यह स्मरण कराते हैं कि अन्न केवल भोजन नहीं, ईश्वर का प्रसाद है।
उनके सामने विनम्र भाव से खड़े हैं भगवान शिव — वैराग्य, तप और संन्यास के प्रतीक। यह दृश्य हमें बहुत गहराई से सिखाता है कि चाहे कोई कितना ही महान क्यों न हो, जीवन का आधार फिर भी माँ का अन्न और करुणा ही है।
शिव भी माँ अन्नपूर्णा के बिना अधूरे हैं — यही शक्ति और चेतना का संतुलन है।
इस चित्र में आसपास का वातावरण, सेवक, अर्पण और दिव्यता यह संदेश देते हैं कि भोजन कराना केवल दान नहीं, बल्कि साधना है।
जब हम किसी भूखे को भोजन देते हैं, तब हम अन्नपूर्णा तत्त्व की पूजा कर रहे होते हैं।
आज के समय में, जब सब कुछ होते हुए भी मन खाली है, यह छवि हमें याद दिलाती है —
➡️ संतुलन अन्न से आता है
➡️ करुणा सेवा से आती है
➡️ और ईश्वर रसोई से भी प्रकट होते हैं
🌾 माँ अन्नपूर्णा केवल अन्न नहीं देतीं, वे जीवन को थामे रखती हैं। 🌾
🙏 जय माँ अन्नपूर्णा 🙏
#DeviAnnapurna #अन्नपूर्णा_माता #AnnapurnaTattva #अन्न_ही_ब्रह्म #SanatanDharma #DivineMother #SevaHiSadhna
2 weeks ago | [YT] | 1
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Shikha “Aashi” krishnan
भगवान शिव की पाँच पुत्रियाँ – शिव पुराण में वर्णित अद्भुत कथा
जब भी भगवान शिव के परिवार की चर्चा होती है, तो सर्वप्रथम श्री गणेश और कार्तिकेय जी का नाम लिया जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि शिव पुराण में भगवान शिव और माता पार्वती की पाँच पुत्रियों का भी उल्लेख मिलता है। आज हम आपको उसी दिव्य और रहस्यमयी कथा से परिचित कराने जा रहे हैं।
शिव पुराण के अनुसार, एक समय भगवान शिव और माता पार्वती एक सरोवर के तट पर ध्यान मग्न थे। उसी समय भगवान शिव के मुख पर एक मंद मुस्कान प्रकट हुई। उस दिव्य मुस्कान से पाँच मोती निकलकर सरोवर में जा गिरे। इन पाँच मोतियों से पाँच कन्याओं का जन्म हुआ, किंतु ये कन्याएँ मनुष्य रूप में नहीं बल्कि नाग रूप में उत्पन्न हुईं। पुत्रियों के साथ भगवान शिव का वात्सल्य
ध्यान में लीन होने के कारण माता पार्वती को इस घटना का ज्ञान नहीं था, परंतु महादेव अपनी संतानों के जन्म से भली-भांति परिचित थे। भगवान शिव अपनी अन्य संतानों की भाँति इन पाँच नाग कन्याओं से भी अत्यंत प्रेम करते थे और प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उनके साथ खेलने सरोवर जाया करते थे। एक दिन माता पार्वती को आश्चर्य हुआ कि भगवान शिव प्रतिदिन इतनी भोर में कहाँ जाते हैं। सत्य जानने की इच्छा से वे भगवान शिव के पीछे-पीछे चल पड़ीं। सरोवर पहुँचकर उन्होंने देखा कि महादेव उन पाँच नाग कन्याओं पर पिता की भाँति अपार स्नेह लुटा रहे हैं। पत्नी-भाव से पूर्ण माता पार्वती के मन में यह भय उत्पन्न हुआ कि कहीं ये नाग कन्याएँ महादेव को हानि न पहुँचा दें। इसी आशंका के कारण माता पार्वती ने उन कन्याओं का अंत करने का विचार किया। तभी भगवान शिव ने उनकी मंशा को समझकर उन्हें रोक लिया और सम्पूर्ण सत्य से अवगत कराया। यह जानकर कि वे स्वयं उन कन्याओं की माता हैं, माता पार्वती का भ्रम दूर हो गया।
शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव की इन पाँच नाग कन्याओं के नाम हैं:
जया, विषहर, शामिलबारी, देव और दोतली।
भगवान शिव ने अपनी इन पुत्रियों को एक विशेष वरदान भी प्रदान किया।
इस वरदान के अनुसार, जो भी भक्त भगवान शिव की पूजा के साथ-साथ इन नाग कन्याओं की भी श्रद्धा से पूजा करेगा—
उसके परिवार को सर्पदंश का भय नहीं रहेगा
घर में धन-धान्य और समृद्धि की कभी कमी नहीं होगी
यदि आपको यह कथा पसंद आई हो, तो इसे अवश्य शेयर करें और ऐसी ही और भी पावन कथाओं के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।
हर हर महादेव 🔱
2 weeks ago | [YT] | 1
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Shikha “Aashi” krishnan
A lovely picture of radha krishna ♥️
2 weeks ago | [YT] | 0
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Shikha “Aashi” krishnan
हनुमान जी का परिवार 🙏🙏
2 weeks ago | [YT] | 0
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Shikha “Aashi” krishnan
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2 weeks ago | [YT] | 0
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Shikha “Aashi” krishnan
यह स्रोत हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और विभिन्न संस्कारों से संबंधित महत्वपूर्ण दिशानिर्देशों और नियमों का एक संग्रह है। इसमें दैनिक प्रार्थनाओं, हवन, अभिषेक और विशिष्ट देवताओं की पूजा के दौरान अपनाई जाने वाली पारंपरिक विधियों का संक्षिप्त विवरण दिया गया है। यह दस्तावेज़ भक्तों को अनुष्ठानों के दौरान की जाने वाली सामान्य त्रुटियों से बचने और सही धार्मिक आचरण का पालन करने में मदद करता है। इसमें वास्तु शास्त्र के प्रतीकों और विशेष शुभ तिथियों के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है। इन नियमों का पालन करने का मुख्य उद्देश्य धार्मिक कार्यों को शुद्धता और श्रद्धा के साथ संपन्न करना है। अंततः, यह पारंपरिक ज्ञान को सहेजने और उसे सही ढंग से लागू करने के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करता है।
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3 weeks ago | [YT] | 0
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