"कविग्राम" कवि-सम्मेलन की सबसे पुष्ट और सार्थक सामग्री का संग्रह है। हमारा लक्ष्य है - मंचीय कविता के सबसे अनमोल ख़ज़ाने को जनता तक पहुंचाना। इस चैनल पर प्रसारित की जाने वाली सामग्री को एकत्रित करने में हमने अनेक वर्ष तक प्रयास किये हैं। यह सामग्री जनता की धरोहर है, जो बदली हुई तकनीक के कारण पुरानी वीडियो कैसेट्स में बंद थी। कविग्राम इस धरोहर को आप तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

This channel is bound to provide exclusive videos of renowned poets of India. All kavi sammelan lovers & poetry lovers are suppose to subscribe this channel to keep in touch with hindi poets and kavi sammelans. We ensure our subscribers that we are going to provide you full humor & entertainment along with moral & social messages.


Kavi Gram

"महात्मा गाँधी भी हमारे नगर में पाँव डाल गए थे। अभी टिड्डी-दल की तरह जनता का उनके नाम पर उमड़ने का समय तो न आया था, पर जिन चार-पाँच सौ लोगों ने उन्हें देखा और उनका व्याख्यान सुना था वह उनकी सादगी, सौम्यता, संत कोटि की नैतिकता और किसी प्रकार के अन्याय के विरुद्ध दृढ़ता से उनके खड़े होने की क्षमता की चर्चा करते थे। थोड़े ही दिनों में उनके यश सौरभ से सारा नगर गमक उठा था। इत्र चुल्लू दो चुल्लू नहीं मलना होता। किसी किताब में उन दिनों करियावाड़ी पाग बाँधे, कुर्सी पर बैठे उनकी तस्वीर की भी याद है, उनके साथ कस्तूरबा गांधी भी थी। पहले पहल उनके विषय में सुनकर मैंने उनको कोई बड़ा कवि समझा था। शायद इसलिए कि बड़े के नाम पर घर में केवल कवियों की चर्चा होती थी।अब सोचता हूँ, मैं बहुत ग़लत नहीं था। उनकी सारी राजनीति प्रतीकात्मक कविता थी। आजकल तो उनका किया-धरा सब कुछ कल्पना की कोटि में चला गया-सा प्रतीत होता है।"



'क्या भूलूँ क्या याद करूँ' से

- Harivansh Rai Bacchan

3 months ago | [YT] | 6

Kavi Gram

हास्य के सूपर-स्टार काका हाथरसी को उनके जन्मदिन और पुण्यतिथि पर कविग्राम का नमन 🙏

4 months ago (edited) | [YT] | 4

Kavi Gram

तू मन अनमना न कर अपना, इसमें कुछ दोष नहीं तेरा
धरती के काग़ज़ पर मेरी, तस्वीर अधूरी रहनी थी

रेती पर लिखे नाम जैसा, मुझको दो घड़ी उभरना था
मलयानिल के बहकाने पर, बस एक प्रभात निखरना था
गूँगे के मनोभाव जैसे, वाणी स्वीकार न कर पाए
ऐसे ही मेरा हृदय-कुसुम, असमर्पित सूख बिखरना था

जैसे कोई प्यासा मरता, जल के अभाव में विष पी ले
मेरे जीवन में भी कोई, ऐसी मजबूरी रहनी थी

इच्छाओं के उगते बिरुवे, सब के सब सफल नहीं होते
हर एक लहर के जूड़े में, अरुणारे कमल नहीं होते
माटी का अंतर नहीं मगर, अंतर रेखाओं का तो है
हर एक दीप के हँसने को, शीशे के महल नहीं होते

दर्पण में परछाई जैसे, दीखे तो पर अनछुई रहे
सारे सुख-वैभव से यूँ ही, मेरी भी दूरी रहनी थी

मैंने शायद गत जन्मों में, अधबने नीड़ तोड़े होंगे
चातक का स्वर सुनने वाले, बादल वापस मोड़े होंगे
ऐसा अपराध किया होगा, जिसकी कुछ क्षमा नहीं होती
तितली के पर नोचे होंगे, हिरनों के दृग फोड़े होंगे

अनगिनती क़र्ज़ चुकाने थे, इसलिए ज़िंदगी भर मेरे
तन को बेचैन विचरना था, मन में कस्तूरी रहनी थी
तू मन अनमना न कर अपना, इसमें कुछ दोष नहीं तेरा

- भारत भूषण

9 months ago | [YT] | 7

Kavi Gram

ये देश आपका आभारी है सिंह साहब!

#ManmohanSingh

1 year ago | [YT] | 49

Kavi Gram

मिरी वफ़ाओं का नश्शा उतारने वाला
कहाँ गया मुझे हँस हँस के हारने वाला

हमारी जान गई जाए देखना ये है
कहीं नज़र में न आ जाए मारने वाला

बस एक प्यार की बाज़ी है बे-ग़रज़ बाज़ी
न कोई जीतने वाला न कोई हारने वाला

भरे मकाँ का भी अपना नशा है क्या जाने
शराब-ख़ाने में रातें गुज़ारने वाला

मैं उस का दिन भी ज़माने में बाँट कर रख दूँ
वो मेरी रातों को छुप कर गुज़ारने वाला

'वसीम' हम भी बिखरने का हौसला करते
हमें भी होता जो कोई सँवारने वाला

- वसीम बरेलवी

#urdushayari #shayari #waseembarelvi #gazal #kavigram

1 year ago | [YT] | 8

Kavi Gram

तो क्या हुआ, अगर जीवन में थोड़ा-सा संत्रास लिखा है
जिसने जितनी पीड़ा झेली, उतना ही इतिहास लिखा है

जिस काया में गर्भ विराजे, उसकी रंगत खो जाती है
अन्न उपजना होता है, तो धरती छलनी हो जाती है
जो डाली फलती है, उसको बोझा भी ढोना पड़ता है
भोर अगर नम होती है, तो रातों को रोना पड़ता है
पत्ता-पत्ता झरना सीखा, तब जाकर मधुमास लिखा है
जिसने जितनी पीड़ा झेली, उतना ही इतिहास लिखा है

फूल लदी डालों से जो तूफान भिड़े, वो महक उठे हैं
साजिंदे की उंगली से जो साज छिड़े, वो चहक उठे हैं
जिस राघव ने घर छोड़ा था, उसने पूरा युग जीता है
जिस रानी ने सुख मांगा था, उसका अंतर्मन रीता है
कैकेयी ने तो ख़ुद अपने ही जीवन में वनवास लिखा है
जिसने जितनी पीड़ा झेली, उतना ही इतिहास लिखा है

खोने को तो पांचाली के पाँच सुतों ने जीवन खोया
लेकिन जो रण में जूझा था, युग उसके ही शव पर रोया
काया वज्र बनानी है, तो तय मानो, लोहा पीना है
उत्सव के हर इक कारण को एकाकी जीवन जीना है
शबरी ने जीवन भर आँसू भोगे, तब उल्लास लिखा है
जिसने जितनी पीड़ा झेली, उतना ही इतिहास लिखा है

- चिराग़ जैन

1 year ago | [YT] | 16

Kavi Gram

अलविदा 🙏

कोई मिलता नहीं ख़ुदा की तरह
फिरता रहता हूँ मैं दुआ की तरह

ग़म तआक़ुब में हैं सज़ा की तरह
तू छुपा ले मुझे ख़ता की तरह

है मरीज़ों में तज़्किरा मेरा
आज़माई हुई दवा की तरह

हो रहीं हैं शहादतें मुझ में
और मैं चुप हूँ कर्बला की तरह

जिस की ख़ातिर चराग़ बनता हूँ
घूरता है वही हवा की तरह

वक़्त के गुम्बदों में रहता हूँ
एक गूँजी हुई सदा की तरह

- फ़हमी बदायूनी

#urdushayari

1 year ago | [YT] | 22

Kavi Gram

शौर्य का इतिहास लिखना था हमें अपने लहू से
इसलिए हम प्रेम की गाथा अधूरी छोड़ आए

उत्सवों की आंख गीली, प्रेम का त्योहार रूठा
चाँद की चूड़ी दिलाना फिर उसे इस बार छूटा
हम कलेजे को कलेजे से लगाकर रो न पाए
मज़हबों की साज़िशों ने प्यार का संसार लूटा
पंखुरी से होंठ, उलझी लट, नए मेहंदी-महावर
काम जाने और भी कितने ज़रूरी छोड़ आए

गांव का पनघट, कहीं आँगन तरसता छोड़ आए
हम किसी की आँख में सावन बरसता छोड़ आए
छोड़ आए हम बुढ़ापे को दिलासे के सहारे
अनसुनी किलकारियां, यौवन लरजता छोड़ आए
थी बसन्ती रंग से रँगनी हमें ये ज़िंदगानी
हम प्रणय की सेज पर सपने सिंदूरी छोड़ आए

मां! तुम्हारी आंख का तारा, सितारा बन गया है
मृत्यु का अभिमान, जीवन का दुलारा बन गया है
भारती की आरती जिससे उतारी जा सकेगी
अब पिता के ख़ून का क़तरा अँगारा बन गया है
एक अम्बर में नहीं दो सूर्य शोभित हो सकेंगे
इसलिए धरती-गगन के बीच दूरी छोड़ आए

Manisha Shukla

#Kavisammelan #Poem #ManishaShukla #HindiPoetry #Poetry

1 year ago | [YT] | 52

Kavi Gram

सो जाते हैं फ़ुटपाथ पे अख़बार बिछा कर
मज़दूर कभी नींद की गोली नहीं खाते

- मुनव्वर राना

#MunawwarRana #Kavigram #Mushaira

1 year ago | [YT] | 19

Kavi Gram

राब्ता है अभी हवाओं से
जी रहा हूँ तिरी दुआओं से

ज़िंदगी बोल क्या इरादा है
मौत महँगी नहीं दवाओं से

तू मिरी लग़्ज़िशों पे तंज़ न कर
मेरी पहचान है ख़ताओं से

इस को सक़्ल-ए-ज़मीन कहते हैं
लौट आया बशर ख़लाओं से

दिल ने आँखों में भर दिए आँसू
ले के मायूसियाँ घटाओं से

जितने ख़ाना-ख़राब हैं सब को
बद-दुआएँ मिली हैं माओं से

भीक दे वर्ना छीन ले आ कर
कासा-ए-दीद हम गदाओं से

ऐ ख़ुदा अब तो बाल-ओ-पर दे दे
जिस्म छुपते नहीं क़बाओं से

रंज-ओ-ग़म हों कि हसरत-ओ-अरमाँ
मुतमइन हूँ तिरी अताओं से

कोशिशें छोड़ दूँ सभी 'नुसरत'
काम निकलें अगर दुआओं से

- नुसरत सिद्दीक़ी

#Poetry #Hindi #Urdu #Gazal #Urdulover #उर्दू #urdupoetry #kavigram #poem

1 year ago | [YT] | 38