मध्यकाल में जिन्हें भगवान नाम से प्रचारित किया गया था उनमें मुख्य रूप से भगवान विष्णु, भगवान राम, भगवान शिव और भगवान कृष्ण है और क्योंकि पौराणिक कथाएं यह बौद्ध इतिहास की नकल और विकृतिकरण ही है, इसलिए ही भगवान विष्णु यह बुद्ध के राजकुमार रहते हुए किए गए उनके गुणों और इतिहास का गुणगान है, भगवान राम यह बौद्धों की दशरथ जातक कथा के साथ ही बुद्ध के गृह त्याग और फिर बुद्धत्व प्राप्त करके वापिस कपिलवस्तु लौटने की घटना का गुणगान है, भगवान शिव यह बुद्ध के वन में रहते हुए किए गए कठोर तब के साथ ही बुद्ध के सिंह रूप और अन्य गुणों का गुणगान है, तो भगवान कृष्ण यह असल में बौद्ध सम्राट कनिष्क को ही कहा गया था, मगर कुछ पौराणिक कथाओं में बुद्ध के इतिहास को भी कृष्ण के नाम से बताया गया था जैसे कि बुद्ध और उनके छोटे भाई नंद के बीच हुए ऐतिहासिक संवाद को ही महाभारत में कृष्ण और अर्जुन के बीच में हुए संवाद के रूप में पेश किया गया था.
इन चार मुख्य भगवानों के अलावा भी कई सारे भगवान यह बुद्ध के गुणों और उनके इतिहास की नकल और विकृतिकरण ही है, क्योंकि बुद्ध ने स्वयं प्रयत्न से अपने अंदर इतने सारे गुणों का विकास कर लिया था कि उन सभी गुणों को किसी एक नाम के साथ वर्णित करना अतिशयोक्ति सा प्रतीत होता था, इसलिए ही उन्हें अलग-अलग नाम रूपों में वर्णित किया गया था.
इस तरह से मध्यकाल में ब्राह्मणों द्वारा षडयंत्र पूर्वक भगवा, भगवत् और भगवान शब्द का ब्राह्मणीकरण करने की वजह से अनजाने में ही मूल बौद्ध भारतीयों का भी ब्राह्मणीकरण हो गया था. ब्राह्मणीकरण होने के बावजूद आज भी जिस भगवान को मूल भारतीय अपने मन में बसाए हुए हैं असल में वह भगवान बुद्ध ही है और जो प्रचलित कहावत कही जाती है कि कण-कण में भगवान है असल में वह भी बुद्ध के लिए ही कही जाती है क्योंकि भारत भूमि को आप जहां पर भी खोदो वहां से बुद्ध ही निकलते हैं.
भारत के कण-कण में और भारतीयों के मन-मन में जो भगवान है असल में वह भगवान बुद्ध ही है.
#भगवान History is Changing Part - 2 भगवा शब्द जो कि बुद्ध के लिए इस्तेमाल होता था समय के साथ उनके वस्त्र के रंग के लिए इस्तेमाल होने लगा और कालांतर में भगवा शब्द एक रंग का पर्यायवाची बन गया. इस तरह से भगवा से भगवत् और फिर भगवत् से भगवान यह शब्द बुद्ध के लिए ही प्रयोग किया जाता था.
मध्यकाल में बौद्ध इतिहास और बुद्ध का नामोनिशान मिटाने की प्रक्रिया के तहत ब्राह्मणों ने भगवा भगवत् और भगवान इन तीनों शब्दों के अर्थ और इतिहास को ही बदल डाला था.
ब्राह्मणों ने भगवा शब्द को अपना कर उसे ब्राह्मणवादी संस्कृति का केंद्र बिंदु बना लिया और इसलिए ही मध्यकाल में भारतीय समाज जो की बुद्ध के प्रति अपने प्रेम के कारण भगवा रंग का सम्मान करता था षड्यंत्रपूर्वक ब्राह्मणवादी संस्कृति के साथ जुड़ गया और फिर धीरे-धीरे बुद्ध से अलग होता चला गया और एक समय ऐसा आया था कि ब्राह्मणों ने बुद्ध भूमि भारत से ही बुद्ध का नाम मिटाने में सफलता हासिल कर ली थी.
भागवत संप्रदाय का भागवत यह नाम भी बुद्ध के विशेषण भगवत् से ही लिया गया था. भगवत् को जो मानता है वह भागवत, ऐसा भागवत शब्द का सही अर्थ होता है और यही कारण है कि शंकराचार्य भागवत संप्रदाय को अवैदिक मानते थे. इस अवैदिक भागवत संप्रदाय का भी मध्यकाल में ब्राह्मणों द्वारा ब्राह्मणीकरण कर दिया गया था. इस तरह से भगवा शब्द के साथ ही भगवत् इस शब्द का भी ब्राह्मणों द्वारा ब्रह्माणीकरण कर दिया या गया था........
भारत देश में एक कहावत बहुत ही ज्यादा प्रचलित है और वह यह है कि कण-कण में भगवान है. #भारत के संदर्भ में सिर्फ कण-कण में ही भगवान नहीं है बल्कि भारतीयों के मन-मन में भी भगवान ही है और यही कारण है कि जब भी किसी पर दुःख या विपत्ति आती है तो वह सबसे पहले हे भगवान कहकर भगवान को ही याद करता है.
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि भारत के कण-कण में और भारतीयों के मन-मन में जो भगवान है आखिर वह कौन है ?.
भगवान कौन है ? और भगवान किसे कहा जाता है ? इस बात को ठीक तरह से समझने के लिए हमें प्राचीन भारत के इतिहास को बहुत ही बारीकी से समझना होगा. भगवान यह प्रचलित रूप है तो इस शब्द की मूल संज्ञा भगवत् है और क्योंकि संस्कृत यह पाली के बाद की भाषा है, इसलिए ही संस्कृत के शब्द भगवत् का मूल पाली रूप भगवा है और प्राचीन भारत में भगवा तो बुद्ध को ही कहा जाता था.
पालि साहित्य में बुद्ध के लिए बार-बार इस्तेमाल होने वाला एक शब्द भगवा है. बुद्ध के लिए भगवा यह शब्द मूल त्रिपिटक में 8758 बार प्रयोग किया गया है. अगर हम त्रिपिटक कथा और अट्ठकथा की सभी किताबों को एक साथ देखें तो बुद्ध के लिए भगवा शब्द का जिक्र 17942 बार हुआ है. भगवा इस शब्द का अर्थ सर्वोच्च गुणों से संपन्न होता है और यह शब्द बुद्ध का पर्यायवाची शब्द था ........
If someone disappoint you again and again, thank them for being consistent and walk away smiling. - Bhagwan Buddha
अगर कोई आपको बार-बार निराश करता है, तो उसे लगातार ऐसा करने के लिए धन्यवाद दें और मुस्कुराते हुए वहाँ से चले जाएँ. - भगवान बुद्ध ✍️Amit Matey✍️ एक सत्यशोधक #buddha#buddha_teachings
#buddhism The best thing about the worst time in your life is that you get to see the True colour of everyone. - Bhagwan Buddha
आपकी ज़िंदगी के सबसे बुरे समय की सबसे अच्छी बात यह है कि आपको हर किसी का असली रंग देखने को मिलता है. - भगवान बुद्ध ✍️Amit Matey ✍️ एक सत्यशोधक #buddha#buddha_teachings
चीनी बौद्ध यात्री व्हेनसांग ने अपनी यात्रा विवरण में लिख रखा है कि उज्जैनी नगर से थोड़ी दूर पर एक स्तूप है और उस स्थान पर सम्राट अशोक ने नर्क बनवाया था. बौद्ध इतिहास में नर्क यातना स्थान को कहा जाता था. साथ ही बुद्ध की शिक्षाओं में नर्क दुखद स्थिति को भी कहा गया है जो कि इस गाथा से स्पष्ट हो जाता है जिसमें बुद्ध कहते हैं कि - असत्यवादी नर्क में जाता है यानी हीं दुखद स्थिति में जाता है. साथ ही बुद्ध अपने एक और उपदेश में कहते हैं कि पर स्त्री का सेवन करने वाला मनुष्य चार स्थानों को प्राप्त करता है जिसमें से एक नर्क यानी दुख भी है.
सम्राट अशोक के इतिहास के साथ ही व्हेनसांग द्वारा लिखित इस इतिहास से भी यह स्पष्ट हो जाती है कि प्राचीन काल में पापियों को उनके कर्म के अनुसार दी जाने वाली यातना के स्थान को ही नर्क कहा जाता था. साथ ही बुद्ध के उपदेशों में नर्क यह दुखद स्थिति को भी कहा गया है.
मगर मध्यकाल में बौद्ध इतिहास की नकल और विकृतिकरण करके ब्राह्मणों द्वारा जब पौराणिक कथाएं लिखी गई थी, तब उन पौराणिक कथाओं में स्वर्ग ऊपर आसमान में बादलों के पास बताया गया हैं तो नर्क पृथ्वी के नीचे पाताल लोक में स्थित बताया गया है. इस तरह से ब्राह्मणों ने मध्यकाल में पौराणिक कथाएं लिखकर भारत देश के मूल बौद्ध भारतीयों को ही बौद्ध इतिहास से भ्रमित कर रखा है.
अब तक देखें गए सभी ऐतिहासिक उदाहरणों और बुद्ध के उपदेशों से यह बात बिल्कुल ही स्पष्ट हो जाती है कि स्वर्ग यह बौद्ध भारत के साथ ही सुखद स्थिति को कहा जाता है तो नर्क यह यातना स्थान के साथ ही दुखद स्थिति को ही कहा जाता है.
बौद्ध धर्म के वजह से ही #भारत देश को पूरे विश्व में स्वर्ग कहा जाता था साथ ही बौद्ध धर्म में स्वर्ग यह सुखद अवस्था के लिए भी प्रयोग किया जाता है.
बुद्ध ने स्वर्ग को मन की अवस्था के रूप में परिभाषित किया है जो इसी जीवन में अनुभव की जा सकती है. इसलिए ही बौद्ध धर्म में स्वर्ग की अवधारणा को सुखावती कहा जाता है और इसी स्थिति को बुद्ध के तुषित (तावंतिस) स्वर्ग के अवतरण की घटना के तौर पर बौद्ध ग्रंथों में अत्यधिक विस्तार से वर्णित किया गया है. इस तरह से प्राचीन काल में बौद्ध धर्म की वजह से ही भारत भूमि को स्वर्ग कहा जाता था साथ ही स्वर्ग या बौद्ध धर्म की सुखावती अवस्था को भी कहा जाता था.
यह तो हो गया स्वर्ग शब्द का सही इतिहास अब नर्क का इतिहास क्या है यह भी जान लेते हैं.
देवानाम पिय अशोकराजस जब जम्बुदीप के सम्राट बने तब वे एक बार जम्बुदीप की यात्रा पर निकले. उन्होंने लौह चक्रवाल में दो पर्वतों के मध्य में पापियों को दी जाने वाली यातना का स्थान देखा. सम्राट अशोक द्वारा बंधुओं और अमात्यों (मंत्रियों) से पूछने पर उनके द्वारा बताया गया कि यह यमराज का पापियों को दी जाने वाली यातना का स्थान है. तब सम्राट अशोक ने भी मानवाधिप पापियों के यातना के लिए ऐसा यातना स्थान निर्माण करने का निश्चय किया. सम्राट अशोक ने अपने अमात्यों से पूछा कि मैं ऐसा यातना स्थान किससे बनवाऊ और उस स्थान का मुखिया किसे बनाऊ. तब मंत्रियों में जवाब दिया कि ऐसे यातना स्थान का निर्माण तो केवल अती चांडाल मनुष्य ही कर सकता है. मंत्रियों का जवाब सुनकर सम्राट अशोक ने उन्हें अती चांडाल मनुष्य को खोजने का आदेश दिया. तब अमात्यों ने ऐसे अती चांडाल मनुष्य को खोज कर सम्राट अशोक के सामने पेश किया. उस अती चांडाल मनुष्य को सम्राट अशोक ने गुप्त रूप से आज्ञा दी की तु ऐसा यातना स्थान बना कि जहां भांति-भांति की यातनाएं पापियों को दी जा सके और उस यातना स्थान का मैं तुझे मुखिया बनाता हूं.
सम्राट अशोक द्वारा बनाए गए इसी यातना स्थान को प्राचीन भारत में नर्क कहा जाता था.....
#स्वर्ग और #नर्क History is Changing Part - 1 अर्हत बौद्ध शाविका (भिक्खुनी) को देवी, अर्हत बौद्ध शावक (भिक्खु) को देव और इन देव और देवियों के शास्ता बुद्ध होने की वजह से ही उन्हें #महादेव कहा जाता था.
कालांतर में सम्राट अशोक ने बौद्ध संघ को राजाश्रय देकर अर्हत बौद्ध शावकों के दिशा निर्देशन में बौद्ध धर्म के सिद्धांतों के आधार पर अपना शासन चलाया था और संपूर्ण एशिया में बौद्ध धर्म के प्रसार के लिए अर्हत बौद्ध शावकों को भेजा था, जिन्हें देव भी कहा जाता था और क्योंकि प्राचीन काल में #जम्बुदीप यह देव (अर्हत बौद्ध भिक्खु) प्रधान देश था इसलिए इसे देवलोक भी कहा जाता था और इसी #देवलोक को ही स्वर्ग कहा जाता है.
बौद्ध धर्म यह दुखों से मुक्ति का मार्ग था इसलिए ही भारत में हर तरफ खुशहाली सुख और शांति थी और स्वर्ग की परिकल्पना में भी हर तरफ खुशहाली सुख और शांति ही बताई जाती है.
वर्तमान में यह सवाल किया जाता है कि भारत का स्वर्ग किसे कहा जाता है ? -तो इस सवाल का जवाब यह है कि भारत का स्वर्ग काश्मीर को कहते हैं. मगर जब प्राचीन समय में यह सवाल किया जाता था की धरती का स्वर्ग किसे कहते हैं ? -तो इस सवाल के जवाब में धरती का स्वर्ग बौद्ध भारत को ही कहा जाता था.
ऐतिहासिक तौर पर पूरे विश्व में प्राचीन भारत की पहचान सोने की चिड़िया के साथ ही स्वर्ग भी था. इसलिए ही एशियाई देशों में जैसे कि चीन जापान और कोरिया की डिक्शनरी में भारत को स्वर्ग ही कहा गया है.......
DNA Jung_e_Aazadi
#भगवान
History is Changing
Part - 3
मध्यकाल में जिन्हें भगवान नाम से प्रचारित किया गया था उनमें मुख्य रूप से भगवान विष्णु, भगवान राम, भगवान शिव और भगवान कृष्ण है और क्योंकि पौराणिक कथाएं यह बौद्ध इतिहास की नकल और विकृतिकरण ही है, इसलिए ही भगवान विष्णु यह बुद्ध के राजकुमार रहते हुए किए गए उनके गुणों और इतिहास का गुणगान है, भगवान राम यह बौद्धों की दशरथ जातक कथा के साथ ही बुद्ध के गृह त्याग और फिर बुद्धत्व प्राप्त करके वापिस कपिलवस्तु लौटने की घटना का गुणगान है, भगवान शिव यह बुद्ध के वन में रहते हुए किए गए कठोर तब के साथ ही बुद्ध के सिंह रूप और अन्य गुणों का गुणगान है, तो भगवान कृष्ण यह असल में बौद्ध सम्राट कनिष्क को ही कहा गया था, मगर कुछ पौराणिक कथाओं में बुद्ध के इतिहास को भी कृष्ण के नाम से बताया गया था जैसे कि बुद्ध और उनके छोटे भाई नंद के बीच हुए ऐतिहासिक संवाद को ही महाभारत में कृष्ण और अर्जुन के बीच में हुए संवाद के रूप में पेश किया गया था.
इन चार मुख्य भगवानों के अलावा भी कई सारे भगवान यह बुद्ध के गुणों और उनके इतिहास की नकल और विकृतिकरण ही है, क्योंकि बुद्ध ने स्वयं प्रयत्न से अपने अंदर इतने सारे गुणों का विकास कर लिया था कि उन सभी गुणों को किसी एक नाम के साथ वर्णित करना अतिशयोक्ति सा प्रतीत होता था, इसलिए ही उन्हें अलग-अलग नाम रूपों में वर्णित किया गया था.
इस तरह से मध्यकाल में ब्राह्मणों द्वारा षडयंत्र पूर्वक भगवा, भगवत् और भगवान शब्द का ब्राह्मणीकरण करने की वजह से अनजाने में ही मूल बौद्ध भारतीयों का भी ब्राह्मणीकरण हो गया था. ब्राह्मणीकरण होने के बावजूद आज भी जिस भगवान को मूल भारतीय अपने मन में बसाए हुए हैं असल में वह भगवान बुद्ध ही है और जो प्रचलित कहावत कही जाती है कि कण-कण में भगवान है असल में वह भी बुद्ध के लिए ही कही जाती है क्योंकि भारत भूमि को आप जहां पर भी खोदो वहां से बुद्ध ही निकलते हैं.
भारत के कण-कण में और भारतीयों के मन-मन में जो भगवान है असल में वह भगवान बुद्ध ही है.
✍️Amit Matey✍️
एक सत्यशोधक
#buddhism #hindu_mythologu #history #buddha
1 day ago | [YT] | 61
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DNA Jung_e_Aazadi
#भगवान
History is Changing
Part - 2
भगवा शब्द जो कि बुद्ध के लिए इस्तेमाल होता था समय के साथ उनके वस्त्र के रंग के लिए इस्तेमाल होने लगा और कालांतर में भगवा शब्द एक रंग का पर्यायवाची बन गया. इस तरह से भगवा से भगवत् और फिर भगवत् से भगवान यह शब्द बुद्ध के लिए ही प्रयोग किया जाता था.
मध्यकाल में बौद्ध इतिहास और बुद्ध का नामोनिशान मिटाने की प्रक्रिया के तहत ब्राह्मणों ने भगवा भगवत् और भगवान इन तीनों शब्दों के अर्थ और इतिहास को ही बदल डाला था.
ब्राह्मणों ने भगवा शब्द को अपना कर उसे ब्राह्मणवादी संस्कृति का केंद्र बिंदु बना लिया और इसलिए ही मध्यकाल में भारतीय समाज जो की बुद्ध के प्रति अपने प्रेम के कारण भगवा रंग का सम्मान करता था षड्यंत्रपूर्वक ब्राह्मणवादी संस्कृति के साथ जुड़ गया और फिर धीरे-धीरे बुद्ध से अलग होता चला गया और एक समय ऐसा आया था कि ब्राह्मणों ने बुद्ध भूमि भारत से ही बुद्ध का नाम मिटाने में सफलता हासिल कर ली थी.
भागवत संप्रदाय का भागवत यह नाम भी बुद्ध के विशेषण भगवत् से ही लिया गया था. भगवत् को जो मानता है वह भागवत, ऐसा भागवत शब्द का सही अर्थ होता है और यही कारण है कि शंकराचार्य भागवत संप्रदाय को अवैदिक मानते थे. इस अवैदिक भागवत संप्रदाय का भी मध्यकाल में ब्राह्मणों द्वारा ब्राह्मणीकरण कर दिया गया था. इस तरह से भगवा शब्द के साथ ही भगवत् इस शब्द का भी ब्राह्मणों द्वारा ब्रह्माणीकरण कर दिया या गया था........
✍️Amit Matey✍️
एक सत्यशोधक
#bhagwan #buddha #buddhism #history #bhagwat
3 days ago | [YT] | 149
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DNA Jung_e_Aazadi
#भगवान
History is Changing
Part - 1
भारत देश में एक कहावत बहुत ही ज्यादा प्रचलित है और वह यह है कि कण-कण में भगवान है. #भारत के संदर्भ में सिर्फ कण-कण में ही भगवान नहीं है बल्कि भारतीयों के मन-मन में भी भगवान ही है और यही कारण है कि जब भी किसी पर दुःख या विपत्ति आती है तो वह सबसे पहले हे भगवान कहकर भगवान को ही याद करता है.
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि भारत के कण-कण में और भारतीयों के मन-मन में जो भगवान है आखिर वह कौन है ?.
भगवान कौन है ? और भगवान किसे कहा जाता है ? इस बात को ठीक तरह से समझने के लिए हमें प्राचीन भारत के इतिहास को बहुत ही बारीकी से समझना होगा. भगवान यह प्रचलित रूप है तो इस शब्द की मूल संज्ञा भगवत् है और क्योंकि संस्कृत यह पाली के बाद की भाषा है, इसलिए ही संस्कृत के शब्द भगवत् का मूल पाली रूप भगवा है और प्राचीन भारत में भगवा तो बुद्ध को ही कहा जाता था.
पालि साहित्य में बुद्ध के लिए बार-बार इस्तेमाल होने वाला एक शब्द भगवा है. बुद्ध के लिए भगवा यह शब्द मूल त्रिपिटक में 8758 बार प्रयोग किया गया है. अगर हम त्रिपिटक कथा और अट्ठकथा की सभी किताबों को एक साथ देखें तो बुद्ध के लिए भगवा शब्द का जिक्र 17942 बार हुआ है. भगवा इस शब्द का अर्थ सर्वोच्च गुणों से संपन्न होता है और यह शब्द बुद्ध का पर्यायवाची शब्द था ........
✍️Amit Matey✍️
एक सत्यशोधक
#buddha #buddhism #bhagwan #buddh #bharat
3 days ago | [YT] | 63
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DNA Jung_e_Aazadi
#buddhism
If someone disappoint you again and again, thank them for being consistent and walk away smiling.
- Bhagwan Buddha
अगर कोई आपको बार-बार निराश करता है, तो उसे लगातार ऐसा करने के लिए धन्यवाद दें और मुस्कुराते हुए वहाँ से चले जाएँ.
- भगवान बुद्ध
✍️Amit Matey✍️
एक सत्यशोधक
#buddha #buddha_teachings
1 week ago | [YT] | 109
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DNA Jung_e_Aazadi
#buddhism
The best thing about the worst time in your life is that you get to see the True colour of everyone.
- Bhagwan Buddha
आपकी ज़िंदगी के सबसे बुरे समय की सबसे अच्छी बात यह है कि आपको हर किसी का असली रंग देखने को मिलता है.
- भगवान बुद्ध
✍️Amit Matey ✍️
एक सत्यशोधक
#buddha #buddha_teachings
1 week ago | [YT] | 117
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DNA Jung_e_Aazadi
#स्वर्ग और #नर्क
History is Changing
Part - 3
चीनी बौद्ध यात्री व्हेनसांग ने अपनी यात्रा विवरण में लिख रखा है कि उज्जैनी नगर से थोड़ी दूर पर एक स्तूप है और उस स्थान पर सम्राट अशोक ने नर्क बनवाया था. बौद्ध इतिहास में नर्क यातना स्थान को कहा जाता था. साथ ही बुद्ध की शिक्षाओं में नर्क दुखद स्थिति को भी कहा गया है जो कि इस गाथा से स्पष्ट हो जाता है जिसमें बुद्ध कहते हैं कि - असत्यवादी नर्क में जाता है यानी हीं दुखद स्थिति में जाता है. साथ ही बुद्ध अपने एक और उपदेश में कहते हैं कि पर स्त्री का सेवन करने वाला मनुष्य चार स्थानों को प्राप्त करता है जिसमें से एक नर्क यानी दुख भी है.
सम्राट अशोक के इतिहास के साथ ही व्हेनसांग द्वारा लिखित इस इतिहास से भी यह स्पष्ट हो जाती है कि प्राचीन काल में पापियों को उनके कर्म के अनुसार दी जाने वाली यातना के स्थान को ही नर्क कहा जाता था. साथ ही बुद्ध के उपदेशों में नर्क यह दुखद स्थिति को भी कहा गया है.
मगर मध्यकाल में बौद्ध इतिहास की नकल और विकृतिकरण करके ब्राह्मणों द्वारा जब पौराणिक कथाएं लिखी गई थी, तब उन पौराणिक कथाओं में स्वर्ग ऊपर आसमान में बादलों के पास बताया गया हैं तो नर्क पृथ्वी के नीचे पाताल लोक में स्थित बताया गया है. इस तरह से ब्राह्मणों ने मध्यकाल में पौराणिक कथाएं लिखकर भारत देश के मूल बौद्ध भारतीयों को ही बौद्ध इतिहास से भ्रमित कर रखा है.
अब तक देखें गए सभी ऐतिहासिक उदाहरणों और बुद्ध के उपदेशों से यह बात बिल्कुल ही स्पष्ट हो जाती है कि स्वर्ग यह बौद्ध भारत के साथ ही सुखद स्थिति को कहा जाता है तो नर्क यह यातना स्थान के साथ ही दुखद स्थिति को ही कहा जाता है.
स्वर्ग और नर्क यह बौद्ध संकल्पना हीं है.
✍️Amit Matey✍️
एक सत्यशोधक
#buddhism #ancient_history #buddha
1 week ago | [YT] | 75
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DNA Jung_e_Aazadi
#स्वर्ग और #नर्क
History is Changing
Part - 2
बौद्ध धर्म के वजह से ही #भारत देश को पूरे विश्व में स्वर्ग कहा जाता था साथ ही बौद्ध धर्म में स्वर्ग यह सुखद अवस्था के लिए भी प्रयोग किया जाता है.
बुद्ध ने स्वर्ग को मन की अवस्था के रूप में परिभाषित किया है जो इसी जीवन में अनुभव की जा सकती है. इसलिए ही बौद्ध धर्म में स्वर्ग की अवधारणा को सुखावती कहा जाता है और इसी स्थिति को बुद्ध के तुषित (तावंतिस) स्वर्ग के अवतरण की घटना के तौर पर बौद्ध ग्रंथों में अत्यधिक विस्तार से वर्णित किया गया है. इस तरह से प्राचीन काल में बौद्ध धर्म की वजह से ही भारत भूमि को स्वर्ग कहा जाता था साथ ही स्वर्ग या बौद्ध धर्म की सुखावती अवस्था को भी कहा जाता था.
यह तो हो गया स्वर्ग शब्द का सही इतिहास अब नर्क का इतिहास क्या है यह भी जान लेते हैं.
देवानाम पिय अशोकराजस जब जम्बुदीप के सम्राट बने तब वे एक बार जम्बुदीप की यात्रा पर निकले. उन्होंने लौह चक्रवाल में दो पर्वतों के मध्य में पापियों को दी जाने वाली यातना का स्थान देखा. सम्राट अशोक द्वारा बंधुओं और अमात्यों (मंत्रियों) से पूछने पर उनके द्वारा बताया गया कि यह यमराज का पापियों को दी जाने वाली यातना का स्थान है. तब सम्राट अशोक ने भी मानवाधिप पापियों के यातना के लिए ऐसा यातना स्थान निर्माण करने का निश्चय किया. सम्राट अशोक ने अपने अमात्यों से पूछा कि मैं ऐसा यातना स्थान किससे बनवाऊ और उस स्थान का मुखिया किसे बनाऊ. तब मंत्रियों में जवाब दिया कि ऐसे यातना स्थान का निर्माण तो केवल अती चांडाल मनुष्य ही कर सकता है. मंत्रियों का जवाब सुनकर सम्राट अशोक ने उन्हें अती चांडाल मनुष्य को खोजने का आदेश दिया. तब अमात्यों ने ऐसे अती चांडाल मनुष्य को खोज कर सम्राट अशोक के सामने पेश किया. उस अती चांडाल मनुष्य को सम्राट अशोक ने गुप्त रूप से आज्ञा दी की तु ऐसा यातना स्थान बना कि जहां भांति-भांति की यातनाएं पापियों को दी जा सके और उस यातना स्थान का मैं तुझे मुखिया बनाता हूं.
सम्राट अशोक द्वारा बनाए गए इसी यातना स्थान को प्राचीन भारत में नर्क कहा जाता था.....
✍️Amit Matey✍️
एक सत्यशोधक
#buddhism #buddha
1 week ago | [YT] | 45
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DNA Jung_e_Aazadi
#स्वर्ग और #नर्क
History is Changing
Part - 1
अर्हत बौद्ध शाविका (भिक्खुनी) को देवी, अर्हत बौद्ध शावक (भिक्खु) को देव और इन देव और देवियों के शास्ता बुद्ध होने की वजह से ही उन्हें #महादेव कहा जाता था.
कालांतर में सम्राट अशोक ने बौद्ध संघ को राजाश्रय देकर अर्हत बौद्ध शावकों के दिशा निर्देशन में बौद्ध धर्म के सिद्धांतों के आधार पर अपना शासन चलाया था और संपूर्ण एशिया में बौद्ध धर्म के प्रसार के लिए अर्हत बौद्ध शावकों को भेजा था, जिन्हें देव भी कहा जाता था और क्योंकि प्राचीन काल में #जम्बुदीप यह देव (अर्हत बौद्ध भिक्खु) प्रधान देश था इसलिए इसे देवलोक भी कहा जाता था और इसी #देवलोक को ही स्वर्ग कहा जाता है.
बौद्ध धर्म यह दुखों से मुक्ति का मार्ग था इसलिए ही भारत में हर तरफ खुशहाली सुख और शांति थी और स्वर्ग की परिकल्पना में भी हर तरफ खुशहाली सुख और शांति ही बताई जाती है.
वर्तमान में यह सवाल किया जाता है कि भारत का स्वर्ग किसे कहा जाता है ?
-तो इस सवाल का जवाब यह है कि भारत का स्वर्ग काश्मीर को कहते हैं. मगर जब प्राचीन समय में यह सवाल किया जाता था की धरती का स्वर्ग किसे कहते हैं ?
-तो इस सवाल के जवाब में धरती का स्वर्ग बौद्ध भारत को ही कहा जाता था.
ऐतिहासिक तौर पर पूरे विश्व में प्राचीन भारत की पहचान सोने की चिड़िया के साथ ही स्वर्ग भी था. इसलिए ही एशियाई देशों में जैसे कि चीन जापान और कोरिया की डिक्शनरी में भारत को स्वर्ग ही कहा गया है.......
✍️Amit Matey✍️
एक सत्यशोधक
#buddhism #buddha
1 week ago | [YT] | 113
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DNA Jung_e_Aazadi
#buddha
Your life does not get better by chance.
It gets better by change.
- Bhagwan Buddha
आपकी जिंदगी अचानक बेहतर नहीं होती.
यह बदलाव से बेहतर होती है.
- भगवान बुद्ध
#buddhism #buddha_teachings
2 weeks ago | [YT] | 69
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DNA Jung_e_Aazadi
#buddha
The happiness of your life depends upon the quality of your thoughts.
- Bhagwan Buddha
आपके जीवन की खुशी आपके विचारों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है.
- भगवान बुद्ध
#buddha_teachings #buddhism
2 weeks ago | [YT] | 71
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