माँ दुर्गा की नव शक्तियों का दूसरा स्वरुप देवी ब्रह्मचारिणी का हैं। यहां ब्रह्म शब्द का अर्थ तपस्या हैं। ब्रह्मचारिणी अर्थात तप की चारिणी-तप का आचरण करने वाली। कहा भी हैं-वेदस्तत्वं तपो ब्रह्म-वेद,तत्व और तप ब्रह्म शब्द के अर्थ हैं।
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। जय माता दी
अर्थ - मनुष्य की आयु एक सौ वर्ष तक ही सीमित रहती है और उसका आधा भाग रात्रि के रूप (नीद लेने में) व्यतीत हो जाता है | बचे हुए आधे भाग का आधा (25 वर्ष) बचपन और वृद्धावस्था में व्यतीत हो जाते हैं और बाकी बचेहुए वर्ष बीमारियों, वियोग , दुःख तथा सेवा आदि में व्यतीत हो जाते हैं | यह् जीवन जल में उठी हुई तरंगों के समान अत्यन्त चञ्चल है | अतः प्राणियों को सुख और शान्ति कहां प्राप्त होती है ?
Monu Tiwari
माँ दुर्गा की नव शक्तियों का दूसरा स्वरुप देवी ब्रह्मचारिणी का हैं। यहां ब्रह्म शब्द का अर्थ तपस्या हैं। ब्रह्मचारिणी अर्थात तप की चारिणी-तप का आचरण करने वाली। कहा भी हैं-वेदस्तत्वं तपो ब्रह्म-वेद,तत्व और तप ब्रह्म शब्द के अर्थ हैं।
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
जय माता दी
3 years ago | [YT] | 0
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Monu Tiwari
जीवन मे सुख तभी मिलेगा जब आपके पास सत्य का मार्ग हो ।।
3 years ago | [YT] | 9
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Monu Tiwari
आयुर्वर्षशतं नृणां परिमितं रात्रौ तदर्थं गतं
तस्यार्धस्य परस्य चार्धमपरं बालत्व वृद्धत्वयो |
शेषं व्याधि वियोग दुःख सहितं सेवादिभिर्नीयते
जीवे वारितरङ्ग चञ्चलतरे सौख्यं कुतः प्राणिनाम् ||
अर्थ - मनुष्य की आयु एक सौ वर्ष तक ही सीमित रहती है और
उसका आधा भाग रात्रि के रूप (नीद लेने में) व्यतीत हो जाता है | बचे
हुए आधे भाग का आधा (25 वर्ष) बचपन और वृद्धावस्था में व्यतीत हो
जाते हैं और बाकी बचेहुए वर्ष बीमारियों, वियोग , दुःख तथा सेवा आदि में
व्यतीत हो जाते हैं | यह् जीवन जल में उठी हुई तरंगों के समान अत्यन्त
चञ्चल है | अतः प्राणियों को सुख और शान्ति कहां प्राप्त होती है ?
3 years ago | [YT] | 8
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