अक्षय जीवन आयुर्वेदिक चिकित्सालय, महाविद्यालय एवं शोध संस्थान
(सम्बध्द आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड उ०प्र० लखनऊ )
रामपुरा किरवाहा जालौन 285125
अक्षय जीवन फार्मेसी रामपुरा किरवाहा जालौन उ०प्र० 285125
सम्पर्क सूत्र :-9235590169 ,9453021169


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अश्वगंधा का वैज्ञानिक नाम क्या है

5 months ago | [YT] | 5

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Let's play

5 months ago | [YT] | 0

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1 year ago | [YT] | 3

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Nursing&pharmacist batch 2020-22

3 years ago | [YT] | 20

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Welcome back dr sanjay in ajamc campus

3 years ago | [YT] | 22

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आयुर्वेदिक फर्मासीस्ट और उपचारीका प्रथम और अन्तिम बर्ष के सभी छात्रो की प्रयोगात्मक परीक्षा 06/12/2022 को प्रातः 10 बजे से होगा।सभी छात्र तत्काल कालेज से सम्पर्क करके अपनी शुल्क आदि की nodues करा ले।
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3 years ago | [YT] | 8

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अच्छे व्यक्तिगत और सामाजिक व्यवहार को क्या कहते हैं जो हित आयु (समाज के लिए लाभकारी जीवन) और सुखा आयु (व्यक्तिगत सुख देने वाला जीवन) देता है?

3 years ago | [YT] | 11

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योग सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक मनुष्य के मेरुदंड के नीचे एक ऊर्जा संग्रहीत होती है। जो सांप के साढ़े 3 कुंडली मारकर बैठे हुए रूप से मिलती है।
ध्यान और आसन से, यह ऊर्जा मेरु के नीचे से होकर मस्तिष्क तक 7 चक्रों से होकर गुजरती है। कुण्डलिनी शक्ति आपके जीवन को बदल सकती है।ल्
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3 years ago | [YT] | 11

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गुडूची
Tinospora cordifolia
Family- Menispermaccae
पर्याय -अमृता, छिन्नरुहा, चक्रांगी, , कुण्डलिनी, तन्त्रिका, चक्रलक्षणिका, वयस्था, मण्डली, देवनिर्मिता ।
वानस्पतिक वर्णन - यह बहुवर्षायु, मांसल, आरोही झाड़ीदार लता है। यह नीम आदि वृक्षों पर कुण्डलाकार चढ़ती है।
रसपंचक--
रस - तिक्त, कटु, कषाय
गुण- गुरु, स्निग्ध
विपाक -मधुर
वीर्य - उष्ण
दोषकर्म–त्रिदोषशामक
प्रयोज्य अंग -काण्ड, पत्र, मूल ।
मात्रा---
गुडूची चूर्ण - 1-3 ग्राम
गुडूची सत्त्व - 1-2 ग्राम
क्वाथ -100 मिली.
विशेष प्रयोग (धन्वन्तरीनिघण्टु गुडूच्यादिवर्ग)-
गुडूची घृत के अनुपान ( के हे गुड़ के अनुपान के साथ सेवन करने से विवन्ध को, मिश्री के साथ लेने से वायु साथ देने से पित्त को, शहद के साथ कफ को, एरण्ड तैल के साथ उग्र वातरक्त को तथा शुण्ठी के साथ आमवात को दूर करती हैl
उपयोग---
अम्लपित्त- गुडूची मधुर-विपाक एवं मृदुगुण से पित्त की तीक्ष्णता का शमन करती है।
अग्निमांद्य- अग्नि को प्रदीप्त करके आम और पक्वाशयगत क्लेद और कफ का शमन करती हैं,l
दाह-छर्दि- दाह और कण्डू का शमन करती है, गुडूची क्वाथ को मधु के साथ लेने पर अम्लपित्त का शमन करती है। यह अम्लपित्तज छर्दि में उपयुक्त है।
संग्रहणी- तिक्त, कटु, उष्णवीर्य से पक्वाशयस्थ द्रवांश को दूर करके ग्राही कर्म होता है जिससे अतिसार, प्रवाहिका और ग्रहणी में इसका प्रयोग करते हैंl
वातरक्त– गुडूची वातरक्त में श्रेष्ठ है।
ज्वर- तिक्तरस प्रधान होने से सभी प्रकार से ज्वर में गुडूची का प्रयोग करते हैं।
धातुकर्म – धातुवर्धन, रसायन ।
गुडूची अपने मधुर विपाक से धातु का वर्धन करके रसायन कर्म करती है। धात्वग्नि का दीपन करके धातुओं को समावस्था में रखती है। जिससे रस का रक्तधातु में परिवर्तन होता है।
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3 years ago (edited) | [YT] | 10

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अश्वगंधा (Ashwagandha) क्षुप

इसके सेवन नियमित रूप से 3 से 4 माह तक करने से शरीर में घोड़े जैसा बल और साहस पैदा होता है ।

Latin Name Withania Somnifera

Family - Solanceae

पर्याय - कंबुकाष्ठा, असगंध, रक्तगंधा, असगंध Refrence श्लोक - भावप्रकाश निघण्टु

गन्धान्ता वाजिनामादिरश्वगन्धा हयाह्वया । वराहकर्णी वरदा बलदा कुष्ठगन्धिनी ॥ अश्वगन्धाऽनिल श्लेष्मश्वित्रशोथक्षयापहा । बल्या रसायनी तिक्ता कषायोष्णाऽतिशुक्रला ॥

रस- कटुतिक्तकषाय

वीर्य - उष्ण

विपाक कटु

- उपयोग अंग मूल

गुण-स्निग्ध, लघु

उत्पति स्थान - भारत में पश्चिम, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश.

दोष कर्म- कफ वात शामक

कल्प- अश्वगंधा चूर्ण, अश्वगंधारिष्ट

मात्रा - चूर्ण - 3-6 ग्रा; क्षार 1-2 ग्रा.

उपयोग - मूत्राघात, शोथ, उदर विकर, सप्त धातु वर्धक, ओज वृद्धिकर, कार्श्य, वंध्यत्व, निद्रा, रसायन, वाजीकरण. Refrence -

भावप्रकाश निघण्टु

द्रव्य गुण विज्ञान
#ayurvedawithashwagandha #ajamc_campus

3 years ago (edited) | [YT] | 10