संतमत सत्संग सब सन्तन की बड़ीवलिहारी सदाचारी बनिये,साथ ही साथ शिष्टाचारी और शुच्याचारी भी बनिये।ये सब भक्ति के अंग हैं।जिस तरह बच्चे के शरीर के सभी अंग छोटे होते हैं।बच्चा बढ़ता है,तो उसके शारीर के सभी अंग साथ साथ बढ़ते हैं।उसी तरह श्री सद्गुरु महाराज के द्वारा बताये गये ढंग से जो नित्य नियमित रूप से साधन करेगा, वह भक्ति के अंगों के साथ बढ़ते बढ़ते एक दिन पूर्णता को प्राप्त कर लेगा।
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