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"स्कूलों और बुक सेलर्स के गठजोड़ ने शिक्षा को व्यापार बना दिया है, जिससे आम आदमी की कमर टूट रही है।" — सांसद इकरा हसन

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5 hours ago | [YT] | 7

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साहस और संकल्प की मिसाल: आनंदीबाई जोशी और विश्व की पहली महिला चिकित्सक
@naian


इतिहास केवल तारीखों का संग्रह नहीं है, बल्कि उन संघर्षों की गाथा है जिन्होंने समाज की बेड़ियाँ तोड़ीं। 19वीं सदी के उस दौर में, जब महिलाओं के लिए घर की दहलीज लांघना भी चुनौती थी, कुछ वीरांगनाओं ने सात समंदर पार जाकर चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में परचम लहराया।



डॉ. आनंदीबाई गोपाल जोशी, भारत की पहली महिला डॉक्टर
आनंदीबाई जोशी का जीवन किसी प्रेरणादायी चलचित्र से कम नहीं है। 31 मार्च, 1865 को कल्याण (महाराष्ट्र) में जन्मी आनंदीबाई का विवाह मात्र 9 वर्ष की आयु में उनसे 20 साल बड़े गोपालराव से कर दिया गया था।



प्रेरणा का आधार
14 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने 10 दिन के नवजात शिशु को खो दिया क्योंकि उस समय उचित चिकित्सा उपलब्ध नहीं थी। इस व्यक्तिगत त्रासदी ने उन्हें डॉक्टर बनने के संकल्प से भर दिया।



अदम्य साहस
समाज के कड़े विरोध और रूढ़ियों को दरकिनार कर, वे 1883 में अमेरिका गईं। 1886 में, मात्र 21 वर्ष की आयु में, उन्होंने 'वुमन्स मेडिकल कॉलेज ऑफ पेंसिल्वेनिया' से MD की डिग्री प्राप्त की।



विरासत
भारत लौटने पर उनका भव्य स्वागत हुआ और उन्हें कोल्हापुर के अल्बर्ट एडवर्ड अस्पताल में महिला वार्ड की प्रभारी चिकित्सक नियुक्त किया गया। दुर्भाग्यवश, तपेदिक (TB) के कारण 26 फरवरी, 1887 को मात्र 22 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन वे आने वाली पीढ़ियों के लिए मशाल जला गईं।




इतिहास की वह ऐतिहासिक तस्वीर: तीन महाद्वीपों का संगम
1885-1886 के आसपास पेंसिल्वेनिया के मेडिकल कॉलेज की एक तस्वीर आज भी दुनिया को प्रेरित करती है। इस तस्वीर में एशिया और मध्य पूर्व की वे तीन महिलाएं थीं, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर चिकित्सा के क्षेत्र में पितृसत्ता की दीवारों को ढहा दिया।



नामदेशउपलब्धि
डॉ. आनंदीबाई जोशीभारतपश्चिमी चिकित्सा में डिग्री पाने वाली पहली भारतीय महिला (1886)।
डॉ. केई ओकामीजापानपश्चिमी चिकित्सा की डिग्री लेने वाली पहली जापानी महिला (1889)। उन्होंने स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में ख्याति प्राप्त की।


डॉ. तबत एम. इस्तांबुलीसीरियासीरिया की पहली महिला डॉक्टर, जिन्होंने उसी संस्थान से स्नातक कर अरब जगत में इतिहास रचा।



ये तीन महिलाएं केवल डॉक्टर नहीं थीं; ये उस विश्वास का प्रतीक थीं कि इच्छाशक्ति के आगे कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। आनंदीबाई जोशी ने सिखाया कि अपनी पीड़ा को समाज की सेवा का माध्यम कैसे बनाया जाता है। आज चिकित्सा के क्षेत्र में जो लाखों महिलाएं सेवा दे रही हैं, उनकी नींव इन तीन महानायिकाओं के बलिदान और अटूट साहस पर टिकी है।



उनके शब्द...
"मैं एक हिंदू महिला के रूप में अपनी पूरी क्षमता के साथ अपने देशवासियों की सेवा करना चाहती हूँ।" डॉ. आनंदीबाई जोशी

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3 days ago | [YT] | 55

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रैपर बादशाह ने रचाई दूसरी शादी,  पंजाबी एक्ट्रेस ईशा रिखी बनीं हमसफर!

मशहूर भारतीय रैपर और सिंगर बादशाह (Badshah) एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। खबरों के अनुसार, पहली पत्नी जैस्मीन से तलाक के लगभग 6 साल बाद बादशाह ने पंजाबी एक्ट्रेस ईशा रिखी (Isha Rikhi) के साथ दूसरी बार शादी कर ली है। दोनों ने परिवार और बेहद करीबी दोस्तों की मौजूदगी में एक निजी समारोह में सात फेरे लिए।  ईशा की मां, पूनम रिखी ने इंस्टाग्राम पर शादी की तस्वीरें और वीडियो साझा किए हैं, जिसमें जोड़ा पारंपरिक परिधानों में 'वरमाला' और 'फेरे' की रस्में निभाते नजर आ रहा है। 
बताया जा रहा है कि बादशाह और ईशा पिछले लगभग 4 साल से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। बादशाह की पहली शादी 2012 में जैस्मीन से हुई थी, जिनसे उनकी एक बेटी (जेसेमी ग्रेस) भी है। साल 2020 में दोनों का आधिकारिक रूप से तलाक हो गया था। फिलहाल सोशल मीडिया पर फैंस इस नए जोड़े को जमकर बधाइयां दे रहे हैं और उनकी सादगी की तारीफ कर रहे हैं।

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4 days ago | [YT] | 8

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Breaking: 13 साल का दर्द खत्म: हरीश राणा को इच्छा मृत्यु के बाद मिली अंतिम मुक्ति || एमबीएम न्यूज की वेबसाइट पर पढ़े विस्तृत समाचार...
पिछले 13 वर्षों से कोमा में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हरीश राणा का आखिरकार निधन हो गया। सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति मिलने के बाद उन्हें दिल्ली के एम्स में शिफ्ट किया गया था, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनकी इच्छा मृत्यु की प्रक्रिया पूरी की गई।
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5 days ago | [YT] | 23

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धर्मांतरण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हिंदू, सिख और बौद्ध के अलावा अन्य धर्म अपनाने वालों को नहीं मिलेगा अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा

देश की सर्वोच्च अदालत ने अनुसूचित जाति (SC) के दर्जे और धार्मिक धर्मांतरण को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट की है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया फैसले में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपनाता है और उसका पालन करता है, तो वह अनुसूचित जाति समुदाय का सदस्य होने का अधिकार खो देता है।

संविधान के प्रावधानों का हवाला
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के अनुसार, अनुसूचित जाति का दर्जा केवल उन व्यक्तियों को दिया जा सकता है जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को मानते हैं। कोर्ट ने कहा कि इन तीन धर्मों के अलावा किसी अन्य धर्म में परिवर्तन करने पर व्यक्ति की अनुसूचित जाति की पहचान कानूनी रूप से तुरंत समाप्त हो जाती है।

पवित्र आदेश का पालन
अदालत ने कहा कि 1950 के आदेश की धारा 3 के तहत प्रतिबंध पूरी तरह से स्पष्ट और अनिवार्य है।

तत्काल प्रभाव
किसी अन्य धर्म (जैसे ईसाई या इस्लाम) में धर्मांतरण के साथ ही SC श्रेणी के तहत मिलने वाले सभी संवैधानिक लाभ, आरक्षण और सुरक्षात्मक अधिकार समाप्त हो जाते हैं।

SC/ST एक्ट का संरक्षण नहीं
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि ईसाई धर्म अपनाने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि ईसाई धर्म में जातिगत भेदभाव को मान्यता नहीं दी गई है।

मामले की पृष्ठभूमि
यह फैसला आंध्र प्रदेश के एक पादरी द्वारा दायर अपील पर आया, जिसने जातिगत अपमान का आरोप लगाते हुए SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था। हालांकि, यह पाया गया कि वह व्यक्ति एक दशक से अधिक समय से पादरी के रूप में काम कर रहा था और ईसाई धर्म का सक्रिय पालन कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि धर्मांतरण के बाद वह व्यक्ति SC दर्जे का हकदार नहीं रह गया था।

यह फैसला उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी नजीर है जो धर्मांतरण के बाद भी आरक्षण या विशेष कानूनों का लाभ उठाना चाहते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक पहचान और SC का दर्जा कानूनन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

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5 days ago | [YT] | 10

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ताजा बर्फबारी से दिव्य बना केदारनाथ मंदिर, सफेद चादर में लिपटा धाम
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1 week ago | [YT] | 19

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अब अंडे पर भी होगी 'एक्सपायरी डेट', देशभर के उपभोक्ताओं की सेहत के लिए बड़ा कदम
@nR


भारत में करोड़ों लोगों की डाइट का अहम हिस्सा बन चुके अंडों को लेकर एक क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है। खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं की सेहत को प्राथमिकता देते हुए अब अंडों की ताजगी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 'लेबलिंग' अनिवार्य की जा रही है। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश से 1 अप्रैल से होने जा रही है, जिसे भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर एक मानक के रूप में देखा जा रहा है।



क्या है नया नियम?
अब तक बाजार में अंडे बिना किसी तारीख या निशान के खुले बिकते थे, जिससे उपभोक्ताओं को उनकी ताजगी का पता नहीं चल पाता था। नए नियम के तहत अब हर एकल अंडे (Single Egg) पर दो महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज होना अनिवार्य होगा:

. उत्पादन की तारीख (Date of Laying): वह दिन जब अंडा दिया गया।
. एक्सपायरी डेट (Expiry Date): वह तारीख जिसके बाद अंडा खाने योग्य नहीं रहेगा।



उपभोक्ताओं को कैसे होगा फायदा?
अक्सर कोल्ड स्टोरेज में हफ्तों पुराने अंडे बाजार में खपा दिए जाते हैं, जिससे 'फूड पॉइजनिंग' का खतरा रहता है। अब ग्राहक एक्सपायरी चेक कर सकेंगे। जिम जाने वालों और बच्चों के लिए अंडा प्रोटीन का मुख्य स्रोत है। इस पारदर्शिता से उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ रुक सकेगा। अब ग्राहक सिर्फ रेट नहीं, बल्कि गुणवत्ता और तारीख के आधार पर खरीदारी करेंगे।



व्यापारियों के लिए निर्देश
सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिना लेबल वाले अंडे बेचने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पोल्ट्री फार्म मालिकों और विक्रेताओं को आधुनिक तकनीक अपनाने और 1 अप्रैल से पहले सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दे दिए गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस कदम की सराहना की है, क्योंकि यह 'ईट राइट इंडिया' (Eat Right India) अभियान को मजबूती प्रदान करता है।




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1 week ago | [YT] | 15

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EXCLUSIVE : हिमाचल से जुड़ा ‘हरीश राणा' केस, कांगड़ा की वादियों से गाजियाबाद तक 13 साल का संघर्ष || एमबीएम न्यूज़ नेटवर्क की वेबसाइट पर पढ़े विस्तृत समाचार...

देशभर में चर्चा में आए हरीश राणा इच्छामृत्यु मामले की जड़ें हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से जुड़ी हैं। जानकारी के अनुसार हरीश राणा के पिता अशोक राणा मूल रूप से जयसिंहपुर उपमंडल की सरी पंचायत के पलेटा गांव के रहने वाले हैं। गांव के लोगों के अनुसार हरीश बचपन से ही मेधावी और खेलों में सक्रिय रहा करता था। वर्ष 2013 में पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हुए हादसे के बाद वह पर्सिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट में चला गया। करीब 13 साल तक चले संघर्ष के बाद 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उसे पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी। यह मामला अब इच्छामृत्यु और मानवीय गरिमा पर राष्ट्रीय बहस का महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।

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1 week ago (edited) | [YT] | 24

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हिमाचल में स्कूलों के लिए सख्त निर्देश: कक्षा-1 में दाखिले के लिए 30 सितंबर तक 6 वर्ष की आयु अनिवार्य!
हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए स्कूलों में दाखिले की उम्र को लेकर बड़ी स्पष्टता जारी की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत अब कक्षा-1 में प्रवेश के लिए बच्चे की आयु 30 सितंबर तक 6 वर्ष पूर्ण होना अनिवार्य है। शिक्षा सचिव द्वारा जारी इन ताजा आदेशों ने अभिभावकों और निजी स्कूल प्रबंधनों के बीच चल रहे संशय को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
हर अभिभावक के लिए जानना है जरूरी
यह नियम प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा। कोई भी स्कूल इन नियमों की अनदेखी नहीं कर सकेगा। यदि बच्चा शैक्षणिक वर्ष की 30 सितंबर तक निर्धारित आयु (कक्षा-1 के लिए 6 साल, नर्सरी/बाल वाटिका के लिए 3 साल+) पूरी करता है, तो उसे प्रवेश दिया जाएगा। यदि बच्चा वर्तमान सत्र (2026-27) में बाल वाटिका-II या III में पढ़ रहा है और 30 सितंबर 2026 तक 6 वर्ष की आयु पूरी कर लेता है, तो वह अगली कक्षा (कक्षा-1) के लिए पात्र माना जाएगा। नियमों के अनुसार, दाखिला अभिभावकों या संरक्षकों की सहमति के अधीन होगा। यदि बच्चा मानदंड पूरा करता है और अभिभावक सहमत हैं, तो स्कूल प्रवेश से इनकार नहीं कर सकते।
नियम तोड़ने पर होगी कड़ी कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ RTE HP Rules, 2025 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी अभिभावक को स्कूल दाखिले से मना करता है, तो वे संबंधित जिले के उप-निदेशक (प्रारंभिक शिक्षा) के पास अपील दायर कर सकते हैं, जिनका निर्णय अंतिम और सभी स्कूलों के लिए बाध्यकारी होगा। @naina
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2 weeks ago | [YT] | 12

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नीना गुप्ता की साड़ी का ‘मटेरियल’ देख हैरान हुआ देश: 66 की उम्र में प्रेग्नेंसी की अफ़वाहों पर अभिनेत्री का मजेदार जवाब



मुंबई: बॉलीवुड की बिंदास अदाकारा नीना गुप्ता अक्सर अपनी एक्टिंग और बेबाकी के लिए जानी जाती हैं, लेकिन इस बार उनके 'अभिनय' से ज्यादा उनकी 'साड़ी के कपड़े' ने सुर्खियां बटोर लीं। दरअसल, हाल ही में एक इवेंट के दौरान कैमरों ने कुछ ऐसी तस्वीरें कैद कीं, जिन्हें देखकर इंटरनेट के 'डॉक्टरों' और 'जासूसों' ने यह घोषणा कर दी कि नीना गुप्ता 66 साल की उम्र में मां बनने वाली हैं।



सोशल मीडिया पर जैसे ही यह खबर आग की तरह फैली कि नीना प्रेग्नेंट हैं, अभिनेत्री को खुद मैदान में उतरना पड़ा। नीना ने हंसते हुए इन अफ़वाहों की हवा निकाल दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिसे दुनिया 'बेबी बंप' समझ रही है, वह असल में उनकी साड़ी का मोटा मटेरियल है।

अपनी सफाई में नीना ने चुटकी लेते हुए कहा, "मैं प्रेग्नेंट नहीं हूँ, ये सिर्फ साड़ी के मोटे कपड़े का कमाल है।" इतना ही नहीं, उन्होंने भारतीयों की 'सोच' पर व्यंग्य करते हुए कहा कि वे इस बात से खुश हैं कि लोग ऐसी खबरें देख रहे हैं। उनके मुताबिक, अगर 66 साल की उम्र में प्रेग्नेंसी की खबर पर लोग यकीन कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि हमारा देश वाकई 'तरक्की' कर रहा है और लोग अब रूढ़ियों से ऊपर उठकर कुछ भी मुमकिन मान रहे हैं!



तो साहब, अगली बार किसी फंक्शन में जाने से पहले अपनी साड़ी या सूट का मटेरियल चेक कर लीजिएगा, वरना सोशल मीडिया आपको बधाई संदेश भेजने में एक पल की भी देरी नहीं करेगा।

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2 weeks ago | [YT] | 11