The Spiritual Talks

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Hare krishna


The Spiritual Talks

गोपियों द्वारा श्री कृष्ण के विरह में गाया हुआ वेदनापूर्ण गीत

https://youtu.be/7bY83YhJGiw?si=SKQCZ...

गोपियों द्वारा 'गोपी गीत' गाने का मुख्य कारण श्रीकृष्ण के प्रति अगाध प्रेम, वियोग की पीड़ा और उनके अहंकार का शमन था। शरद पूर्णिमा की रात्रि में रासलीला के दौरान जब गोपियों के मन में यह अहंकार आ गया कि कृष्ण केवल उन्हीं के हैं, तब श्रीकृष्ण अंतर्ध्यान हो गए। अपनी इस भूल का अहसास होने पर गोपियों ने पूर्ण समर्पण और विरह वेदना में विह्वल होकर यमुना तट पर 19 श्लोकों में गोपी गीत गाया।

गोपी गीत गाने के मुख्य कारण और प्रसंग

अहंकार का शमन: रासलीला में भगवान के साथ रहते हुए गोपियों के मन में श्रेष्ठता का सूक्ष्म अहंकार आ गया था, जिसे दूर करने के लिए श्री कृष्ण छिप गए।

विरह की पीड़ा (वियोग): प्रियतम कृष्ण के अचानक छिप जाने पर उनके वियोग का असहनीय दुःख हुआ, जिसे व्यक्त करने का एकमात्र साधन गान बन गया।

पूर्ण शरणागति: अपनी भूल स्वीकार कर भगवान के चरणों में पूरी तरह समर्पित होने और उन्हें वापस बुलाने के लिए प्रार्थना की गई।

लीलाओं का स्मरण: गोपियों ने संकट के समय कृष्ण द्वारा ब्रजवासियों की रक्षा करने की पुरानी घटनाओं को याद करते हुए उनकी महिमा का गुणगान किया।

व्यक्ति केवल दो ही जगह  जा सकता है, एक है संसार और दूसरा है आध्यात्म या भगवान. जैसे ही भगवान से हटकर गोपियों का मन अपने ही भाग्य पर चला गया यहाँ भगवान बता रहे है कि जैसे ही भक्त मुझसे मन हटाता है वैसे ही मै चला जाता हूँ।

गोपी गीत बड़ा ही विलक्षण ,आलौकिक है जो नित्य इस गोपी गीत  पाठ करता है भगवान श्री कृष्ण जी में उसका प्रेम होता है और उसे उनकी अनुभूति होती है. 

जयति तेऽधिकं जन्मना व्रजः
श्रयत इन्दिरा शश्वदत्र हि ।
दयित दृश्यतां दिक्षु तावका
स्त्वयि धृतासवस्त्वां विचिन्वते ॥1॥

शरदुदाशये साधुजातसत्स-
रसिजोदरश्रीमुषा दृशा ।
सुरतनाथ तेऽशुल्कदासिका
वरद निघ्नतो नेह किं वधः ॥2॥

विषजलाप्ययाद्व्यालराक्षसा-
द्वर्षमारुताद्वैद्युतानलात् ।
वृषमयात्मजाद्विश्वतोभया
दृषभ ते वयं रक्षिता मुहुः ॥3॥

न खलु गोपिकानन्दनो भवा-
नखिलदेहिनामन्तरात्मदृक् ।
विखनसार्थितो विश्वगुप्तये
सख उदेयिवान्सात्वतां कुले ॥4॥

विरचिताभयं वृष्णिधुर्य ते
चरणमीयुषां संसृतेर्भयात् ।
करसरोरुहं कान्त कामदं
शिरसि धेहि नः श्रीकरग्रहम् ॥5॥

व्रजजनार्तिहन्वीर योषितां
निजजनस्मयध्वंसनस्मित ।
भज सखे भवत्किंकरीः स्म नो
जलरुहाननं चारु दर्शय ॥6॥

प्रणतदेहिनांपापकर्शनं
तृणचरानुगं श्रीनिकेतनम् ।
फणिफणार्पितं ते पदांबुजं
कृणु कुचेषु नः कृन्धि हृच्छयम् ॥7॥

मधुरया गिरा वल्गुवाक्यया
बुधमनोज्ञया पुष्करेक्षण ।
विधिकरीरिमा वीर मुह्यती-
रधरसीधुनाऽऽप्याययस्व नः ॥8॥

तव कथामृतं तप्तजीवनं
कविभिरीडितं कल्मषापहम् ।
श्रवणमङ्गलं श्रीमदाततं
भुवि गृणन्ति ते भूरिदा जनाः ॥9॥

प्रहसितं प्रिय प्रेमवीक्षणं
विहरणं च ते ध्यानमङ्गलम् ।
रहसि संविदो या हृदिस्पृशः
कुहक नो मनः क्षोभयन्ति हि ॥10॥


चलसि यद्व्रजाच्चारयन्पशून्
नलिनसुन्दरं नाथ ते पदम् ।
शिलतृणाङ्कुरैः सीदतीति नः
कलिलतां मनः कान्त गच्छति ॥11॥

दिनपरिक्षये नीलकुन्तलै-
र्वनरुहाननं बिभ्रदावृतम् ।
घनरजस्वलं दर्शयन्मुहु-
र्मनसि नः स्मरं वीर यच्छसि ॥12॥

प्रणतकामदं पद्मजार्चितं
धरणिमण्डनं ध्येयमापदि ।
चरणपङ्कजं शंतमं च ते
रमण नः स्तनेष्वर्पयाधिहन् ॥13॥

सुरतवर्धनं शोकनाशनं
स्वरितवेणुना सुष्ठु चुम्बितम् ।
इतररागविस्मारणं नृणां
वितर वीर नस्तेऽधरामृतम् ॥14॥

अटति यद्भवानह्नि काननं
त्रुटिर्युगायते त्वामपश्यताम् ।
कुटिलकुन्तलं श्रीमुखं च ते
जड उदीक्षतां पक्ष्मकृद्दृशाम् ॥15॥

पतिसुतान्वयभ्रातृबान्धवा-
नतिविलङ्घ्य तेऽन्त्यच्युतागताः ।
गतिविदस्तवोद्गीतमोहिताः
कितव योषितः कस्त्यजेन्निशि ॥16॥


रहसि संविदं हृच्छयोदयं
प्रहसिताननं प्रेमवीक्षणम् ।
बृहदुरः श्रियो वीक्ष्य धाम ते
मुहुरतिस्पृहा मुह्यते मनः ॥17॥

व्रजवनौकसां व्यक्तिरङ्ग ते
वृजिनहन्त्र्यलं विश्वमङ्गलम् ।
त्यज मनाक् च नस्त्वत्स्पृहात्मनां
स्वजनहृद्रुजां यन्निषूदनम् ॥18॥

यत्ते सुजातचरणाम्बुरुहं स्तनेष
भीताः शनैः प्रिय दधीमहि कर्कशेषु ।
तेनाटवीमटसि तद्व्यथते न किंस्वित्कू
र्पादिभिर्भ्रमति धीर्भवदायुषां नः ॥19॥

इति श्रीमद्भागवत महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां
दशमस्कन्धे पूर्वार्धे रासक्रीडायां गोपीगीतं
नामैकत्रिंशोऽध्यायः ॥

Read full gopi geet with hindi meaning

the-spiritualtalks.com/gopi-geet-hindi-lyrics-%E0%…

3 weeks ago | [YT] | 60

The Spiritual Talks

Shrimad Bhagavad Geeta chapter 7 with hindi meaning

https://youtu.be/FrGpv4flmUg?si=ENmKy...



Listen krishna updesh

#krishnavani #krishnaupdesh #gitagyan #geeta #gita #gyan #geetagyan

3 weeks ago (edited) | [YT] | 18

The Spiritual Talks

जय जय राम कृष्ण हरि
हरि नाम संकीर्तन

Jai Jai Ram Krishna Hari
Hari naam sankirtan

जय श्री राम जय श्री कृष्ण जय श्री हरि

https://youtu.be/rBDr19ZN8FY

11 months ago | [YT] | 10

The Spiritual Talks

Krishnaya vasudevaya haraye paramatmane pranatah klesh nashaya govindaya namo namah

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने | प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः 

 हे कृष्ण हे वासुदेव के पुत्र!  आप हरि परमात्मा है, शरणागत के क्लेशों को हरने वाले हे गोविन्द आपको मैं बारम्बार प्रणाम करता हूं।

इसके जाप से आंतरिक मानसिक सहमति का अनुभव होता है और तनाव , विषाद से छुटकारा होता हैं।

इस मंत्र के जाप से रोगों से मुक्ति मिलती है। कार्यों में और जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं

सफलता, सम्मान , सुख समृद्धि तथा भगवान कृष्ण की कृपा की प्राप्ति होती है।

https://youtu.be/epeywDixOac?si=LqQzK...

1 year ago | [YT] | 17

The Spiritual Talks

Happy Rakshabandhan ❤️

May Krishna protect every one from all the dangers and troubles ❤️🙏

youtube.com/shorts/jH_akdBAUt...

#happyrakshabandhan #rakshabandhan #rakhi #rakshispecial #krishna #krishnalove

1 year ago (edited) | [YT] | 16

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कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने | प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः ||

हे कृष्ण हे वासुदेव के पुत्र!  आप हरि परमात्मा है, शरणागत के क्लेशों को हरने वाले हे गोविन्द आपको मैं बारम्बार प्रणाम करता हूं।

https://youtu.be/UVGk2Fzuctg

1 year ago | [YT] | 15

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कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
(द्वितीय अध्याय, श्लोक 47)

इस श्लोक का अर्थ है: कर्म पर ही तुम्हारा अधिकार है, लेकिन कर्म के फलों में कभी नहीं... इसलिए कर्म को फल के लिए मत करो और न ही काम करने में तुम्हारी आसक्ति हो।

1 year ago | [YT] | 11

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Ram se bada Ram ka naam
राम से बड़ा राम का नाम 🙏🙏💗💗
कलियुग में राम नाम ही कल्याण का अंतिम उपाय है ।
https://youtu.be/ofEEoyUh3S4

2 years ago | [YT] | 40

The Spiritual Talks

तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे बलिहार लल्ला जी❤❤🙏🙏
https://youtu.be/1728bPhVXkA

2 years ago | [YT] | 46