गोरखपुर जिले के सीएमओ डॉ राजेश झा ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण डेटा बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं की नीव हैं। इनके जरिये गैप एनालिसिस कर उच्च स्तरीय सेवाएं दे पाना संभव होता है। यह बातें उन्होंने जिले के स्वास्थ्य महकमे के डेटा वेलीडेशन कमेटी की मासिक बैठक के दौरान कहीं। बैठक का आयोजन सीएमओ कार्यालय के प्रेरणा श्री सभागार में शनिवार को हुआ। मासिक बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीएमओ डॉ झा ने ई-कवच पर रिपोर्टिंग और आभा आईडी पर विशेष जोर दिया।
सीएमओ ने कहा कि डेटा सम्बन्धी कार्यों में सुधार के कारण यूपी हेल्थ डैशबोर्ड रैंकिंग में जिले की स्थिति बेहतर बनी हुई है। गोरखपुर जिला टॉप फाइव में बना हुआ है। इसे स्थिर रखने के लिए डेटा की सटीकता पर जोर देना होगा। जहां कहीं भी डेटा सम्बन्धी गैप दिखे उसे दूर करना होगा। प्रत्येक ब्लॉक पर इसकी सघन निगरानी की जानी चाहिए और इस सम्बन्ध में बैठकें भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आभा आईडी का सृजन और उसकी रिपोर्टिंग शासन की प्राथमिकता में है। यह प्रत्येक ब्लॉक की भी प्राथमिकता होनी चाहिए।
डॉ झा ने कहा कि स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में ई-कवच पर रिपोर्टिंग की अहम भूमिका रही है। सही रिपोर्टिंग के जरिये हम छूटे हुए क्षेत्रों और वंचित लाभार्थी समूहो पर फोकस कर पाते हैं। यह रिपोर्टिंग सही से हो इसके लिए आशा स्तर से लेकर जिला स्तर तक सतर्कता बरतनी होगी। डेटा एक टीम भावना का काम है और इसके लिए सभी को समन्वय बना कर काम करना होगा।
इस अवसर पर एसीएमओ आरसीएच डॉ एके चौधरी, डिप्टी सीएमओ डॉ राजेश, डॉ अश्विनी चौरसिया, डीपीएम पंकज आनंद, डीडीएम पवन कुमार और एचएमआईएस सहयोगी मनीष त्रिपाठी सहित सभी ब्लॉकों के ब्लॉक स्तरीय अधिकारी भी मौजूद रहे।
गोरखपुर जिले के सीएमओ डॉ राजेश झा ने स्वास्थ्य महकमे के जिला स्तरीय और ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि बदलते मौसम के साथ हीट रिलेटेड बीमारियों से बचाव और उपचार के इंतजाम कर लिए जाएं। उन्होंने कहा है कि इन बीमारियों के बारे में समुदाय में व्यापक प्रचार प्रसार करवाने की आवश्यकता है। साथ ही शासन से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुसार हीट रिलेटेड बीमारियों की सर्विलांस और आवश्यकतानुसार कार्रवाई भी की जानी है।
सीएमओ डॉ झा ने बताया कि मौसम विभाग की ओर से तापमान बढ़ने के संकेत मिले हैं। बदलते मौसम के साथ ही हीट रिलेटेड बीमारियों के मामले सामने आने लगते हैं। इसे देखते हुए सभी अधिकारियों से अग्रिम तैयारी करने को कहा गया है। निर्देश दिया गया है कि जनसामान्य में हीट रिलेडेट दिक्कतों पर अपनाएं जाने वाले सामान्य प्रोटोकॉल का व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए। लोगों को बताया जाए कि अधिक दिक्कत होने पर मरीज को 108 नंबर एम्बुलेंस की सहायता से ही नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाना है। प्रशिक्षित चिकित्सक के पास ही उपचार के लिए जाना है। किसी भी अप्रशिक्षित व्यक्ति या झोलाछाप के चक्कर में न पड़ें।
सीएमओ ने बताया कि जिले के सभी इमर्जेंसी वार्ड में हीट स्ट्रोक व अन्य मौसमी बीमारियों के उपचार की सभी आवश्यक दवाएं रखने का निर्देश दिया गया है। विभागीय उच्चाधिकारी समय-समय पर इमर्जेंसी वार्ड का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी आवश्यक दवाएं और उपकरण क्रियाशील रहें। साथ ही अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ता लोगों को समझाएंगे कि बदलते मौसम में किस प्रकार का खानपान और दिनचर्या अपनाना है ताकि इस बीमारियों से बचाव हो सके। लोगों को घर से बाहर निकलने के समय में बदलाव करना होगा, खानपान संतुलित रखना होगा, अधिकाधिक पानी और तरल पदार्थों का सेवन करना होगा और ताजे फलों आदि के सेवन पर विशेष जोर देना होगा। इसके साथ ही सभी आवश्यक परामर्श और प्रोटोकॉल की जानकारी जन-जन तक पहुंचाना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता में शामिल है।
गोरखपुर जिले में 15 अतिरिक्त नये ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (बीपीएचयू) खोले बनाए जाएंगे। इन बीपीएचयू से समुदाय को गुणवत्तापूर्ण सेवा मिलेगी। सीएमओ डॉ राजेश झा ने बृहस्पतिवार को सहजनवां सीएचसी का दौरा कर वहां बीपीएचयू के लिए संभावित स्थान का मुआयना किया। उन्होंने पहले से क्रियाशील पाली बीपीएचयू का निरीक्षण भी किया। इस दौरान वहां के चेयरमैन प्रभाकर दूबे ने भी मौके पर पहुंच कर सीएमओ के साथ स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की। जिले में पहले से चार बीपीएचयू स्थापित और क्रियाशील हैं।
सीएमओ डॉ झा ने बताया कि जिले में प्रत्येक बीपीएचयू 2500 वर्गमीटर का बनेगा। यह तीन भागों में होगा-बीपीएमयू, एचएमआईएस और पैथालॉजी पार्ट। बीपीएमयू में एनएचएम के ब्लॉक स्तरीय अधिकारी एक साथ बैठेंगे, वहीं एचएमआईएस विंग के जरिये बीमारियों की निगरानी व रिपोर्टिंग होगी। बीपीएचयू के पैथालॉजिकल पार्ट में 73 से अधिक जांचों, सैम्पल ट्रांसपोर्ट और ब्लॉक क्षेत्र में हो रही जांचों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का काम होगा। डॉ झा ने बताया कि पाली, शिवपुर, उसवा बाबू और चौरीचौरा सीएचसी पर बीपीएचयू क्रियाशील है। शेष ब्लॉक स्तरीय पंद्रह इकाइयों में इसकी स्थापना के लिए स्थान चिन्हित किया जा रहा है। बीपीएचयू के जरिये गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा देने की राह और भी आसान होगी।
सीएमओ ने पाली सीएचसी पर उपस्थिति पंजिका भी चेक की। इस दौरान उन्होंने एक अनुपस्थित चिकित्सा अधिकारी सहित कुछ अन्य अनुपस्थित कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगने का आदेश दिया। सीएचसी पर पाली के चेयरमैन से चर्चा के दौरान सीएमओ ने बीपीएचयू जाने का रास्ता ठीक करवाने का अनुरोध किया।
गोरखपुर महानगर के पुर्दिलपुर नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर भी सिटी पॉलीक्लिनिक का संचालन होगा। इसे शुरू करने की तैयारियों को देखने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने रविवार को केन्द्र का दौरा किया। उन्होंने प्रत्येक कक्ष और तैयारियों को देखा तथा आईईसी आदि की विस्तृत समीक्षा की। इस पॉलीक्लिनिक पर निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा प्रतिदिन सेवाएं दी जाएंगी।
सीएमओ ने बताया कि सिटी पॉलीक्लिनिक के संचालन के उद्देश्य से ही पुर्दिलपुर नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को बड़े भवन में शिफ्ट कर दिया है। वहां पर एक सप्ताह के भीतर पॉलीक्लिनिक की तैयारियां पूरी करने का प्रयास है। यह नया क्लिनिक शुरू होने के बाद हमारे पास विशेषज्ञ सेवाओं वाले दो अस्पताल नगरीय क्षेत्र में क्रियाशील हो जाएंगे।
सीएमओ डॉ झा ने बताया कि गोरखपुर शहर में तीन सिटी पॉलीक्लिनिक का संचालन निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सकों की मदद से किया जाना है। इनमें से पहली पॉलीक्लिनिक बसंतपुर में संचालित हो रही है। होली के बाद पुर्दिलपुर में भी क्लिनिक शुरू करने की तैयारी है। इसके संचालन के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों का इम्पैनलमेंट भी हो रहा है। इस केन्द्र पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, मेडिसिन विशेषज्ञ, ईएनटी और नेत्र रोग विशेषज्ञ आदि सेवाएं देंगे।
सिटी पॉलीक्लिनिक पर जो विशेषज्ञ चिकित्सक सेवाएं देंगे उन्हें पांच हजार रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान किया जाएगा। इन चिकित्सकों को टेलीकंसल्टेशन के जरिए भी परामर्श देना होगा। किसी भी चिकित्सक की इंगेजमेंट उसकी आवश्यकतानुसार किया जाएगा। ये विशेषज्ञ सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक सेवाएं देंगे। इनकी सेवाओं से लोगों को विशेष लाभ होगा और वह जिला अस्पताल तथा बीआरडी मेडिकल कॉलेज की भीड़भाड़ में इलाज करवाने से बच सकेंगे। इन क्लिनिक के लिए भी डिजिटल पर्चे की व्यवस्था होगी और यहां से रेफरल भी ऑनलाइन पर्चों के जरिए किए जाएंगे। पुर्दिलपुर में भी ब्लड सैम्पल ट्रांसपोर्ट की सुविधा को सुदृढ़ किया जाएगा।
गोरखपुर जिले के पिपराइच सीएचसी स्थित फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) पर स्टेमी केयर नेटवर्क सोमवार से सक्रिय हो गया। वहां सीने में दर्द की शिकायत के साथ पहुंचीं 90 वर्षीय बुजुर्ग का तय प्रोटोकॉल के साथ उपचार किया गया। डायग्नोसिस के दौरान मामला स्टेमी का न निकलने के बाद उन्हें इलाज कर वापस घर भेज दिया गया। इससे पहले सीएमओ डॉ राजेश झा ने पिपराइच एफआरयू का दौरा कर स्टेमी कार्नर का निरीक्षण किया और सभी को निर्धारित प्रोटोकॉल के बारे में पुनः ब्रीफ किया।
सीएमओ डॉ राजेश झा ने निर्देश दिया कि स्टेमी कार्नर पर सभी जीवनरक्षक दवाएं, इंजेक्शन, इसीजी और स्टॉफ उपलब्ध होने चाहिए। अगर कोई भी मरीज सीने में दर्द या घबराहट अथवा हर्ट अटैक के अन्य लक्षणों के साथ आता है तो दस मिनट के भीतर उसकी इसीजी कर लें। इसीजी रिपोर्ट को स्टेमी केयर नेटवर्क के वाट्स एप ग्रुप में डाल दें। इसके बाद बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बने हब के विशेषज्ञों के दिशा-निर्देशन में आवश्यक उपचार करें। वहां के ह्रदय रोग विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार स्टेमी का मामला होने पर उनके निर्देश पर ही इंजेक्शन लगा कर मरीज को एम्बुलेंस से हब पर रेफर कर दें। हब को ग्रुप के जरिये ही मरीज की सभी जानकारियां पहले से भेज दें। अगर हब के विशेषज्ञों के अनुसार मामला स्टेमी का न हो तब भी आवश्यक उपचार देना सुनिश्चित करें।
डॉ झा ने बताया कि एक घंटे के भीतर मरीज को दो बार इजीसी होनी है और सभी प्रकार का उपचार हब पर बैठे ह्रदय रोग विशेषज्ञ की निगरानी में ही होगा। उन्होंने बताया कि जिले की सभी एफआरयू पर यह सुविधा उपलब्ध होने जा रही है। इससे हर्ट अटैक के मरीजों का घर के पास ही त्वरित प्राथमिक उपचार हो सकेगा और उनकी जान बचाई जा सकेगी। त्वरित प्राथमिक उपचार की कार्रवाई से ज्यादातर मामलों में एंजियोप्लास्टी की आवश्यकता भी नहीं रहेगी।
सीएमओ ने बताया कि उनके निरीक्षण के थोड़ी देर बाद ही पिपराइच की मोहम्मदाबाद गांव की 90 वर्षीय बुजुर्ग पार्वती को स्टेमी कार्नर पर एडमिट किया गया। उनका निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार हब की निगरानी में डायग्नोसिस एवं उपचार किया गया। इस अवसर पर अधीक्षक डॉ मणि शेखर, चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रशांत श्रीवास्तव, फार्मासिस्ट जयविजय पांडेय, एचईओ संजय सिंह सहित सीएचसी स्टॉफ प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।
सीएमओ डॉ झा ने पिपराइच सीएचसी की ओटी और स्टर्लाइजेशन की व्यवस्था को देखा। उन्होंने निर्देश दिया कि ओटी को संक्रमण मुक्त रखने के सभी उपाय किए जाएं। साथ ही मरीजों को उच्च गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सेवा प्रदान किया जाए।
गोरखपुर और बस्ती मंडल में हर्ट अटैक के मरीजों के जीवन के बचाने की राह अब आसान हो जाएगी। इसके लिए स्टेमी नेटवर्क काम करेगा, जिसके तहत नजदीकी अस्पतालों पर प्राथमिक चिकित्सा देकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बने हब में मरीज को एम्बुलेंस की सहायता से समय से पहुंचाया जाएगा। इन मरीजों का प्राथमिकता के साथ इलाज होगा। इसके लिए ह्रदय सेतु कार्यक्रम के तहत दोनों मंडलों के चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को शनिवार को प्रशिक्षित किया गया। ये प्रशिक्षित ट्रेनर्स अपने एफआरयू के सभी स्टॉफ को प्रशिक्षित करेंगे और संबंधित अस्पताल हर्ट अटैक के मरीजों के लिए वरदान साबित होगा।
महानिदेशक प्रशिक्षक डॉ रंजना खरे, एडी हेल्थ डॉ जयंत कुमार, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ राम कुमार जायसवाल, सीएमओ डॉ राजेश झा, जेडी ट्रेनिंग डॉ कमलेश यादव और कॉलेज के ह्रदय रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ अजहर की मौजूदगी में प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन हुआ। दोनों मंडलों के एफआरयू के चिकित्सा अधिकारी, स्टॉफ नर्स और फार्मासिस्ट प्रशिक्षित किये गये हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य हर्ट अटैक के मामलों की शीघ्र पहचान, प्रबंधन और उचित उपचार देना है।
प्रशिक्षण के जरिये बताया गया कि हर्ट अटैक के मामलों में गोल्डेन ऑवर में ही प्राथमिक हस्तक्षेप किया जाना चाहिए। मरीज को यथाशीघ्र अस्पताल पहुंचाना है। वहां पर इसीजी करने के बाद स्टेमी नेटवर्क वाट्स एप ग्रुप में मरीज की रिपोर्ट डाल दी जाएगी। हब से मिले निर्देशों के अनुसार थम्ब्रोलिसिस की प्रक्रिया पूरी कर मरीज सरकारी एम्बुलेंस की सहायता से हब पर भेजे जाएंगे। मरीज की पूरी डिटेल वाट्स एप ग्रुप के जरिये हब पर पहले से पहुंच जाएगी। इस तरह प्राथमिकता के साथ इलाज मिलने से मरीज की जान बचाना आसान होगा।
कार्यक्रम के आयोजन में डिप्टी सीएमओ डॉ अश्वनी चौरसिया और डॉ एसके मिश्रा ने विशेष सहयोग दिया। इस दौरान सीपीआर के बारे में भी सभी को प्रशिक्षित किया गया और बताया गया कि लोगों को हर्ट अटैक के मामलों में गोल्डेन ऑवर के बारे में विशेष तौर पर जागरूक करना है।
सीएमओ डॉ राजेश झा की पहल पर नये टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए विभागीय कर्मचारी भी उत्साहित हैं। इसी कड़ी में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एसटीएस अमित नारायण मिश्रा ने अपनी मां विजेश्वरी देवी की पुण्यतिथि पर बृहस्पतिवार को दो टीबी मरीजों को गोद लिया। श्री मिश्र अभी तक 16 टीबी मरीजों को गोद ले चुके हैं। उनमें से दस मरीज ठीक भी हो चुके हैं
गोरखपुर जिले में बाल स्वास्थ्य पोषण माह की शुरूआत हो गई है। इसके तहत एक माह के दौरान तक 5.82 लाख बच्चों को विटामिन ए की दवा पिलाई जाएगी। अभियान का शुभारंभ महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव, सीएमओ डॉ राजेश झा और जिला महिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ जय कुमार ने सोमवार को जिला महिला अस्पताल से बच्चों को दवा पिला कर किया। एक माह के इस अभियान में नियमित टीकाकरण सत्र स्थल पर ही बच्चों को विटामिन ए की दवा पिलाई जाएगी।
इस अवसर पर महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव ने बताया कि नौ माह से पांच साल तक के बच्चों को कुल नौ बार विटामिन ए की खुराक लेना अनिवार्य है। इसकी पहली खुराक नौ से बारह माह की उम्र में एमआर टीके के प्रथम डोज के साथ आधा चम्मच दी जाती है। दूसरी खुराक सोलह से चौबीस माह की उम्र के बीच एक पूरा चम्मच एमआर टीके के दूसरी डोज के साथ दी जाती है । साथ ही दो वर्ष से पांच वर्ष की उम्र तक के बच्चों को हर छह माह पर पूरा चम्मच दवा पिलाना अनिवार्य है। एक पूरा चम्मच दो मिलीलीटर का होता है, जबकि आधा चम्मच एक मिलीलीटर का होता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने इस अवसर पर बताया कि विटामिन ए की खुराक बच्चों को कुपोषण, मिजल्स, डायरिया और रतौंधी से बचाती है । यह बच्चे के विकास में मददगार है। इसके सेवन से निमोनिया और डायरिया का खतरा कम हो जाता है। शरीर में विटामिन ए की कमी से रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है। आंख कमजोर होने की आशंका होती है। इसकी कमी से बच्चे के शरीर बढ़ने में भी रुकावट आ सकती है। बच्चे को कमजोरी महसूस होती है। मीजल्स होने की स्थिति में यह दवा मृत्यु दर और जटिलता को कम करती है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ नंदलाल कुशवाहा ने बताया कि प्रत्येक बुधवार और शनिवार को नियमित टीकाकरण और छाया एकीकृत ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता व पोषण दिवस के सत्र स्थल पर बच्चों को विटामिन ए की खुराक दी जाएगी । आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ऐसे बच्चों को उनके अभिभावकों के साथ सत्र स्थल पर लेकर आएंगी। हर छह माह पर बच्चों को दवा पिलाई जा सके, इसी वजह से यह अभियान प्रत्येक छह माह के अंतराल पर चलाया जाता है।
इस अवसर एसीएमओ आरसीएच डॉ एके चौधरी, डीडीएचईआईओ सुनीता पटेल, सहायक शोध अधिकारी अजीत सिंह, उपेंद्र त्रिपाठी सहित सभी सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधिगण और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।
सीएमओ ने बताया कि नौ माह से एक वर्ष तक के 66000, एक वर्ष से दो वर्ष तक के एक लाख पचीस हजार और दो वर्ष से पांच वर्ष तक के तीन लाख इक्यानवे हजार बच्चों को इस साल एक माह में दवा पिलाने का लक्ष्य है। यह अभियान चौबीस जनवरी तक चलेगा।
प्रदेश का पहला सिटी पॉलीक्लिनिक रविवार से बसंतपुर नगरीय स्वास्थ्य केन्द्र में शुरू हो गया। इस केन्द्र पर प्रतिदिन दो विशेषज्ञ चिकित्सक सेवाएं देंगे। गोरखपुर ग्रामीण विधायक विपिन सिंह और एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक सेवानिवृत्त मेजर जनरल डॉ विभा दत्ता ने पॉलीक्लिनिक का शुभारंभ किया। इस अवसर पर शिविर लगा कर राजकीय दृष्टिबाधित इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों के आंखों की जांच भी हुई। कॉलेज के प्रधानाचार्य लक्ष्मीशंकर जायसवाल ने बतौर विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
उद्घाटन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए गोरखपुर ग्रामीण विधायक विपिन सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। इसी कड़ी में शुरू हो रहा सिटी पॉलीक्लिनिक जनस्वास्थ्य को बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके जरिए लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं अपने घर के नजदीक मिल सकेंगी।
एम्स की कार्यकारी निदेशक सेवानिवृत्त मेजर जनरल डॉ विभाग दत्ता ने कहा कि सिटी पॉलीक्लिनिक लोगों को अनावश्यक उच्च चिकित्सा केन्द्रों पर जाने से बचाएगा। इससे उच्चतम संस्थानों पर वहीं मरीज जाएंगे जिन्हें अति विशेषज्ञ चिकित्सकीय सुविधाओं की आवश्यकता होगी। लोग भीड़ से बचेंगे और संस्थानों पर भी उन्हीं लाभार्थियों को सेवा देने का भार होगा, जिनकी चिकित्सा सामुदायिक चिकित्सा इकाइयों पर नहीं हो पाती है।
राजकीय दृष्टिबाधित इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य लक्ष्मीशंकर जायसवाल ने कहा कि सिटी पॉलीक्लिनिक के उद्घाटन के ऐतिहासिक अवसर पर दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए विशेष शिविर एक अभिनव पहल है। इस क्लिनिक का लाभ समुदाय के साथ-साथ विद्यार्थियों को भी मिलेगा और इसके लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग बधाई के पात्र हैं। उन्होंने राज आई हॉस्पिटल की मदद से लगे विशेष नेत्र जांच शिविर की भी सराहना की।
सीएमओ डॉ राजेश झा ने बताया कि सिटी पॉलीक्लिनिक में सोमवार से शनिवार तक प्रतिदिन स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेष के साथ अलग-अलग दिवसों पर बाल रोग विशेषज्ञ, चर्म रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन और आर्थो सर्जन की सेवाएं फिलहाल शुरू की जा रही हैं। यहां न केवल विशेषज्ञ सेवाएं दी जाएंगी, बल्कि सैम्पल ट्रांसपोर्ट सिस्टम के जरिए बड़ी और महत्वपूर्ण पैथालॉजिकल जांचें भी उपलब्ध होंगी। इस सुविधा से लोग बेवजह जिला अस्पताल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एम्स गोरखपुर जाने से बचेंगे।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि ने सिटी पॉलीक्लिनिक के तैयार होने में योगदान देने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगी संस्थाओं को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया।
कार्यक्रम में एसीएमओ स्थानीय पार्षद अवधेश अग्रहरी, आरसीएच डॉ एके चौधरी, एसीएमओ डॉ विनय पांडेय, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ मेघा पांडेय, डिवीजनल कार्यक्रम प्रबंधक अरविंद पांडेय, डीडीएचईआईओ सुनीता पटेल, मंडलीय अर्बन कोआर्डिनेटर डॉ प्रीति सिंह, डीपीएम पंकज आनंद, जिला अर्बन कोआर्डिनेटर सुरेश सिंह चौहान, एआरओ एसएन शुक्ला सहित बसंतपुर नगरीय स्वास्थ्य केन्द्र के सभी कर्मी, सहयोगी संस्थाओं यूपीटीएसयू, जपाइगो और पीएसआई इंडिया के प्रतिनिधिगण प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।
गोरखपुर जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने बृहस्पतिवार को सीएमओ कार्यालय के प्रेरणा श्री सभागार में नगरीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान डिजिटल प्रेसक्रिप्शन और सैम्पल ट्रांसपोर्ट को सुदृढ़ करने के बारे में विस्तार से चर्चा हुई। सीएमओ ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह विभिन्न माध्यमों से समुदाय के बीच नगरीय स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में प्रचार-प्रसार करें। साथ ही नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से जो भी मरीज जिला अस्पताल रेफर किए जाएं, उन्हें ऑनलाइन पर्चे ही बना कर दिए जाएं।
सीएमओ डॉ झा ने नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की ओपीडी सेवा, लैब टेस्ट, दस केन्द्रों की सैम्पल ट्रांसपोर्ट सेवा, मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों, परिवार नियोजन कार्यक्रम और और ई-कवच पोर्टल पर फिडिंग के बारे में बिंदुवार समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश होनी चाहिए कि सामान्य बीमारी का मरीज सीधे जिला अस्पताल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एम्स गोरखपुर न जाए। उसे समस्त दवाएं और सेवाएं घर के नजदीक मिलनी चाहिए। इसमें जनजागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका है। लोगों को पता होना चाहिए कि नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और नगरीय आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर कौन-कौन सी सेवाएं, जांच, दवाएं और इलाज उपलब्ध हैं।
डॉ झा ने लोगों के बीच यह भी प्रचारित करने को कहा कि महानगर के दस नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों से बड़ी और महत्वपूर्ण पैथालॉजिकल जांचों के सैम्पल लेकर जिला अस्पताल स्थित लैब से जांच कराई जा रही है। इन लैब से रिपोर्ट भी शाम तक लाभार्थी के मोबाइल नंबर पर आ जाती है। इस प्रचार प्रसार से लोगों का पैथालॉजिकल जांच पर खर्च होने वाला पैसा बच सकेगा। यह सेवा फिलहाल बसंतपुर, गोरखनाथ, नथमलपुर, हुमायूंपुर, इलाहीबाग, शिवपुर सहबाजगंज, शाहपुर, झरना टोला, छोटे काजीपुर और दीवान बाजार में उपलब्ध है।
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गोरखपुर जिले के सीएमओ डॉ राजेश झा ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण डेटा बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं की नीव हैं। इनके जरिये गैप एनालिसिस कर उच्च स्तरीय सेवाएं दे पाना संभव होता है। यह बातें उन्होंने जिले के स्वास्थ्य महकमे के डेटा वेलीडेशन कमेटी की मासिक बैठक के दौरान कहीं। बैठक का आयोजन सीएमओ कार्यालय के प्रेरणा श्री सभागार में शनिवार को हुआ। मासिक बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीएमओ डॉ झा ने ई-कवच पर रिपोर्टिंग और आभा आईडी पर विशेष जोर दिया।
सीएमओ ने कहा कि डेटा सम्बन्धी कार्यों में सुधार के कारण यूपी हेल्थ डैशबोर्ड रैंकिंग में जिले की स्थिति बेहतर बनी हुई है। गोरखपुर जिला टॉप फाइव में बना हुआ है। इसे स्थिर रखने के लिए डेटा की सटीकता पर जोर देना होगा। जहां कहीं भी डेटा सम्बन्धी गैप दिखे उसे दूर करना होगा। प्रत्येक ब्लॉक पर इसकी सघन निगरानी की जानी चाहिए और इस सम्बन्ध में बैठकें भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आभा आईडी का सृजन और उसकी रिपोर्टिंग शासन की प्राथमिकता में है। यह प्रत्येक ब्लॉक की भी प्राथमिकता होनी चाहिए।
डॉ झा ने कहा कि स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में ई-कवच पर रिपोर्टिंग की अहम भूमिका रही है। सही रिपोर्टिंग के जरिये हम छूटे हुए क्षेत्रों और वंचित लाभार्थी समूहो पर फोकस कर पाते हैं। यह रिपोर्टिंग सही से हो इसके लिए आशा स्तर से लेकर जिला स्तर तक सतर्कता बरतनी होगी। डेटा एक टीम भावना का काम है और इसके लिए सभी को समन्वय बना कर काम करना होगा।
इस अवसर पर एसीएमओ आरसीएच डॉ एके चौधरी, डिप्टी सीएमओ डॉ राजेश, डॉ अश्विनी चौरसिया, डीपीएम पंकज आनंद, डीडीएम पवन कुमार और एचएमआईएस सहयोगी मनीष त्रिपाठी सहित सभी ब्लॉकों के ब्लॉक स्तरीय अधिकारी भी मौजूद रहे।
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2 days ago | [YT] | 5
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गोरखपुर जिले के सीएमओ डॉ राजेश झा ने स्वास्थ्य महकमे के जिला स्तरीय और ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि बदलते मौसम के साथ हीट रिलेटेड बीमारियों से बचाव और उपचार के इंतजाम कर लिए जाएं। उन्होंने कहा है कि इन बीमारियों के बारे में समुदाय में व्यापक प्रचार प्रसार करवाने की आवश्यकता है। साथ ही शासन से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुसार हीट रिलेटेड बीमारियों की सर्विलांस और आवश्यकतानुसार कार्रवाई भी की जानी है।
सीएमओ डॉ झा ने बताया कि मौसम विभाग की ओर से तापमान बढ़ने के संकेत मिले हैं। बदलते मौसम के साथ ही हीट रिलेटेड बीमारियों के मामले सामने आने लगते हैं। इसे देखते हुए सभी अधिकारियों से अग्रिम तैयारी करने को कहा गया है। निर्देश दिया गया है कि जनसामान्य में हीट रिलेडेट दिक्कतों पर अपनाएं जाने वाले सामान्य प्रोटोकॉल का व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए। लोगों को बताया जाए कि अधिक दिक्कत होने पर मरीज को 108 नंबर एम्बुलेंस की सहायता से ही नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाना है। प्रशिक्षित चिकित्सक के पास ही उपचार के लिए जाना है। किसी भी अप्रशिक्षित व्यक्ति या झोलाछाप के चक्कर में न पड़ें।
सीएमओ ने बताया कि जिले के सभी इमर्जेंसी वार्ड में हीट स्ट्रोक व अन्य मौसमी बीमारियों के उपचार की सभी आवश्यक दवाएं रखने का निर्देश दिया गया है। विभागीय उच्चाधिकारी समय-समय पर इमर्जेंसी वार्ड का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी आवश्यक दवाएं और उपकरण क्रियाशील रहें। साथ ही अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ता लोगों को समझाएंगे कि बदलते मौसम में किस प्रकार का खानपान और दिनचर्या अपनाना है ताकि इस बीमारियों से बचाव हो सके। लोगों को घर से बाहर निकलने के समय में बदलाव करना होगा, खानपान संतुलित रखना होगा, अधिकाधिक पानी और तरल पदार्थों का सेवन करना होगा और ताजे फलों आदि के सेवन पर विशेष जोर देना होगा। इसके साथ ही सभी आवश्यक परामर्श और प्रोटोकॉल की जानकारी जन-जन तक पहुंचाना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता में शामिल है।
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3 days ago | [YT] | 1
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गोरखपुर जिले में 15 अतिरिक्त नये ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (बीपीएचयू) खोले बनाए जाएंगे। इन बीपीएचयू से समुदाय को गुणवत्तापूर्ण सेवा मिलेगी। सीएमओ डॉ राजेश झा ने बृहस्पतिवार को सहजनवां सीएचसी का दौरा कर वहां बीपीएचयू के लिए संभावित स्थान का मुआयना किया। उन्होंने पहले से क्रियाशील पाली बीपीएचयू का निरीक्षण भी किया। इस दौरान वहां के चेयरमैन प्रभाकर दूबे ने भी मौके पर पहुंच कर सीएमओ के साथ स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की। जिले में पहले से चार बीपीएचयू स्थापित और क्रियाशील हैं।
सीएमओ डॉ झा ने बताया कि जिले में प्रत्येक बीपीएचयू 2500 वर्गमीटर का बनेगा। यह तीन भागों में होगा-बीपीएमयू, एचएमआईएस और पैथालॉजी पार्ट। बीपीएमयू में एनएचएम के ब्लॉक स्तरीय अधिकारी एक साथ बैठेंगे, वहीं एचएमआईएस विंग के जरिये बीमारियों की निगरानी व रिपोर्टिंग होगी। बीपीएचयू के पैथालॉजिकल पार्ट में 73 से अधिक जांचों, सैम्पल ट्रांसपोर्ट और ब्लॉक क्षेत्र में हो रही जांचों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का काम होगा। डॉ झा ने बताया कि पाली, शिवपुर, उसवा बाबू और चौरीचौरा सीएचसी पर बीपीएचयू क्रियाशील है। शेष ब्लॉक स्तरीय पंद्रह इकाइयों में इसकी स्थापना के लिए स्थान चिन्हित किया जा रहा है। बीपीएचयू के जरिये गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा देने की राह और भी आसान होगी।
सीएमओ ने पाली सीएचसी पर उपस्थिति पंजिका भी चेक की। इस दौरान उन्होंने एक अनुपस्थित चिकित्सा अधिकारी सहित कुछ अन्य अनुपस्थित कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगने का आदेश दिया। सीएचसी पर पाली के चेयरमैन से चर्चा के दौरान सीएमओ ने बीपीएचयू जाने का रास्ता ठीक करवाने का अनुरोध किया।
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4 days ago | [YT] | 2
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गोरखपुर महानगर के पुर्दिलपुर नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर भी सिटी पॉलीक्लिनिक का संचालन होगा। इसे शुरू करने की तैयारियों को देखने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने रविवार को केन्द्र का दौरा किया। उन्होंने प्रत्येक कक्ष और तैयारियों को देखा तथा आईईसी आदि की विस्तृत समीक्षा की। इस पॉलीक्लिनिक पर निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा प्रतिदिन सेवाएं दी जाएंगी।
सीएमओ ने बताया कि सिटी पॉलीक्लिनिक के संचालन के उद्देश्य से ही पुर्दिलपुर नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को बड़े भवन में शिफ्ट कर दिया है। वहां पर एक सप्ताह के भीतर पॉलीक्लिनिक की तैयारियां पूरी करने का प्रयास है। यह नया क्लिनिक शुरू होने के बाद हमारे पास विशेषज्ञ सेवाओं वाले दो अस्पताल नगरीय क्षेत्र में क्रियाशील हो जाएंगे।
सीएमओ डॉ झा ने बताया कि गोरखपुर शहर में तीन सिटी पॉलीक्लिनिक का संचालन निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सकों की मदद से किया जाना है। इनमें से पहली पॉलीक्लिनिक बसंतपुर में संचालित हो रही है। होली के बाद पुर्दिलपुर में भी क्लिनिक शुरू करने की तैयारी है। इसके संचालन के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों का इम्पैनलमेंट भी हो रहा है। इस केन्द्र पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, मेडिसिन विशेषज्ञ, ईएनटी और नेत्र रोग विशेषज्ञ आदि सेवाएं देंगे।
सिटी पॉलीक्लिनिक पर जो विशेषज्ञ चिकित्सक सेवाएं देंगे उन्हें पांच हजार रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान किया जाएगा। इन चिकित्सकों को टेलीकंसल्टेशन के जरिए भी परामर्श देना होगा। किसी भी चिकित्सक की इंगेजमेंट उसकी आवश्यकतानुसार किया जाएगा। ये विशेषज्ञ सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक सेवाएं देंगे। इनकी सेवाओं से लोगों को विशेष लाभ होगा और वह जिला अस्पताल तथा बीआरडी मेडिकल कॉलेज की भीड़भाड़ में इलाज करवाने से बच सकेंगे। इन क्लिनिक के लिए भी डिजिटल पर्चे की व्यवस्था होगी और यहां से रेफरल भी ऑनलाइन पर्चों के जरिए किए जाएंगे। पुर्दिलपुर में भी ब्लड सैम्पल ट्रांसपोर्ट की सुविधा को सुदृढ़ किया जाएगा।
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1 week ago | [YT] | 2
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गोरखपुर जिले के पिपराइच सीएचसी स्थित फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) पर स्टेमी केयर नेटवर्क सोमवार से सक्रिय हो गया। वहां सीने में दर्द की शिकायत के साथ पहुंचीं 90 वर्षीय बुजुर्ग का तय प्रोटोकॉल के साथ उपचार किया गया। डायग्नोसिस के दौरान मामला स्टेमी का न निकलने के बाद उन्हें इलाज कर वापस घर भेज दिया गया। इससे पहले सीएमओ डॉ राजेश झा ने पिपराइच एफआरयू का दौरा कर स्टेमी कार्नर का निरीक्षण किया और सभी को निर्धारित प्रोटोकॉल के बारे में पुनः ब्रीफ किया।
सीएमओ डॉ राजेश झा ने निर्देश दिया कि स्टेमी कार्नर पर सभी जीवनरक्षक दवाएं, इंजेक्शन, इसीजी और स्टॉफ उपलब्ध होने चाहिए। अगर कोई भी मरीज सीने में दर्द या घबराहट अथवा हर्ट अटैक के अन्य लक्षणों के साथ आता है तो दस मिनट के भीतर उसकी इसीजी कर लें। इसीजी रिपोर्ट को स्टेमी केयर नेटवर्क के वाट्स एप ग्रुप में डाल दें। इसके बाद बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बने हब के विशेषज्ञों के दिशा-निर्देशन में आवश्यक उपचार करें। वहां के ह्रदय रोग विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार स्टेमी का मामला होने पर उनके निर्देश पर ही इंजेक्शन लगा कर मरीज को एम्बुलेंस से हब पर रेफर कर दें। हब को ग्रुप के जरिये ही मरीज की सभी जानकारियां पहले से भेज दें। अगर हब के विशेषज्ञों के अनुसार मामला स्टेमी का न हो तब भी आवश्यक उपचार देना सुनिश्चित करें।
डॉ झा ने बताया कि एक घंटे के भीतर मरीज को दो बार इजीसी होनी है और सभी प्रकार का उपचार हब पर बैठे ह्रदय रोग विशेषज्ञ की निगरानी में ही होगा। उन्होंने बताया कि जिले की सभी एफआरयू पर यह सुविधा उपलब्ध होने जा रही है। इससे हर्ट अटैक के मरीजों का घर के पास ही त्वरित प्राथमिक उपचार हो सकेगा और उनकी जान बचाई जा सकेगी। त्वरित प्राथमिक उपचार की कार्रवाई से ज्यादातर मामलों में एंजियोप्लास्टी की आवश्यकता भी नहीं रहेगी।
सीएमओ ने बताया कि उनके निरीक्षण के थोड़ी देर बाद ही पिपराइच की मोहम्मदाबाद गांव की 90 वर्षीय बुजुर्ग पार्वती को स्टेमी कार्नर पर एडमिट किया गया। उनका निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार हब की निगरानी में डायग्नोसिस एवं उपचार किया गया। इस अवसर पर अधीक्षक डॉ मणि शेखर, चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रशांत श्रीवास्तव, फार्मासिस्ट जयविजय पांडेय, एचईओ संजय सिंह सहित सीएचसी स्टॉफ प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।
सीएमओ डॉ झा ने पिपराइच सीएचसी की ओटी और स्टर्लाइजेशन की व्यवस्था को देखा। उन्होंने निर्देश दिया कि ओटी को संक्रमण मुक्त रखने के सभी उपाय किए जाएं। साथ ही मरीजों को उच्च गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सेवा प्रदान किया जाए।
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2 weeks ago | [YT] | 1
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गोरखपुर और बस्ती मंडल में हर्ट अटैक के मरीजों के जीवन के बचाने की राह अब आसान हो जाएगी। इसके लिए स्टेमी नेटवर्क काम करेगा, जिसके तहत नजदीकी अस्पतालों पर प्राथमिक चिकित्सा देकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बने हब में मरीज को एम्बुलेंस की सहायता से समय से पहुंचाया जाएगा। इन मरीजों का प्राथमिकता के साथ इलाज होगा। इसके लिए ह्रदय सेतु कार्यक्रम के तहत दोनों मंडलों के चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को शनिवार को प्रशिक्षित किया गया। ये प्रशिक्षित ट्रेनर्स अपने एफआरयू के सभी स्टॉफ को प्रशिक्षित करेंगे और संबंधित अस्पताल हर्ट अटैक के मरीजों के लिए वरदान साबित होगा।
महानिदेशक प्रशिक्षक डॉ रंजना खरे, एडी हेल्थ डॉ जयंत कुमार, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ राम कुमार जायसवाल, सीएमओ डॉ राजेश झा, जेडी ट्रेनिंग डॉ कमलेश यादव और कॉलेज के ह्रदय रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ अजहर की मौजूदगी में प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन हुआ। दोनों मंडलों के एफआरयू के चिकित्सा अधिकारी, स्टॉफ नर्स और फार्मासिस्ट प्रशिक्षित किये गये हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य हर्ट अटैक के मामलों की शीघ्र पहचान, प्रबंधन और उचित उपचार देना है।
प्रशिक्षण के जरिये बताया गया कि हर्ट अटैक के मामलों में गोल्डेन ऑवर में ही प्राथमिक हस्तक्षेप किया जाना चाहिए। मरीज को यथाशीघ्र अस्पताल पहुंचाना है। वहां पर इसीजी करने के बाद स्टेमी नेटवर्क वाट्स एप ग्रुप में मरीज की रिपोर्ट डाल दी जाएगी। हब से मिले निर्देशों के अनुसार थम्ब्रोलिसिस की प्रक्रिया पूरी कर मरीज सरकारी एम्बुलेंस की सहायता से हब पर भेजे जाएंगे। मरीज की पूरी डिटेल वाट्स एप ग्रुप के जरिये हब पर पहले से पहुंच जाएगी। इस तरह प्राथमिकता के साथ इलाज मिलने से मरीज की जान बचाना आसान होगा।
कार्यक्रम के आयोजन में डिप्टी सीएमओ डॉ अश्वनी चौरसिया और डॉ एसके मिश्रा ने विशेष सहयोग दिया। इस दौरान सीपीआर के बारे में भी सभी को प्रशिक्षित किया गया और बताया गया कि लोगों को हर्ट अटैक के मामलों में गोल्डेन ऑवर के बारे में विशेष तौर पर जागरूक करना है।
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2 weeks ago | [YT] | 4
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सीएमओ डॉ राजेश झा की पहल पर नये टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए विभागीय कर्मचारी भी उत्साहित हैं। इसी कड़ी में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एसटीएस अमित नारायण मिश्रा ने अपनी मां विजेश्वरी देवी की पुण्यतिथि पर बृहस्पतिवार को दो टीबी मरीजों को गोद लिया। श्री मिश्र अभी तक 16 टीबी मरीजों को गोद ले चुके हैं। उनमें से दस मरीज ठीक भी हो चुके हैं
#NikshayMitra #TBFreeIndia #EndTB #TBElimination #TBMuktBharat #SupportTBPatients
2 weeks ago | [YT] | 1
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गोरखपुर जिले में बाल स्वास्थ्य पोषण माह की शुरूआत हो गई है। इसके तहत एक माह के दौरान तक 5.82 लाख बच्चों को विटामिन ए की दवा पिलाई जाएगी। अभियान का शुभारंभ महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव, सीएमओ डॉ राजेश झा और जिला महिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ जय कुमार ने सोमवार को जिला महिला अस्पताल से बच्चों को दवा पिला कर किया। एक माह के इस अभियान में नियमित टीकाकरण सत्र स्थल पर ही बच्चों को विटामिन ए की दवा पिलाई जाएगी।
इस अवसर पर महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव ने बताया कि नौ माह से पांच साल तक के बच्चों को कुल नौ बार विटामिन ए की खुराक लेना अनिवार्य है। इसकी पहली खुराक नौ से बारह माह की उम्र में एमआर टीके के प्रथम डोज के साथ आधा चम्मच दी जाती है। दूसरी खुराक सोलह से चौबीस माह की उम्र के बीच एक पूरा चम्मच एमआर टीके के दूसरी डोज के साथ दी जाती है । साथ ही दो वर्ष से पांच वर्ष की उम्र तक के बच्चों को हर छह माह पर पूरा चम्मच दवा पिलाना अनिवार्य है। एक पूरा चम्मच दो मिलीलीटर का होता है, जबकि आधा चम्मच एक मिलीलीटर का होता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने इस अवसर पर बताया कि विटामिन ए की खुराक बच्चों को कुपोषण, मिजल्स, डायरिया और रतौंधी से बचाती है । यह बच्चे के विकास में मददगार है। इसके सेवन से निमोनिया और डायरिया का खतरा कम हो जाता है। शरीर में विटामिन ए की कमी से रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है। आंख कमजोर होने की आशंका होती है। इसकी कमी से बच्चे के शरीर बढ़ने में भी रुकावट आ सकती है। बच्चे को कमजोरी महसूस होती है। मीजल्स होने की स्थिति में यह दवा मृत्यु दर और जटिलता को कम करती है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ नंदलाल कुशवाहा ने बताया कि प्रत्येक बुधवार और शनिवार को नियमित टीकाकरण और छाया एकीकृत ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता व पोषण दिवस के सत्र स्थल पर बच्चों को विटामिन ए की खुराक दी जाएगी । आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ऐसे बच्चों को उनके अभिभावकों के साथ सत्र स्थल पर लेकर आएंगी। हर छह माह पर बच्चों को दवा पिलाई जा सके, इसी वजह से यह अभियान प्रत्येक छह माह के अंतराल पर चलाया जाता है।
इस अवसर एसीएमओ आरसीएच डॉ एके चौधरी, डीडीएचईआईओ सुनीता पटेल, सहायक शोध अधिकारी अजीत सिंह, उपेंद्र त्रिपाठी सहित सभी सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधिगण और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।
सीएमओ ने बताया कि नौ माह से एक वर्ष तक के 66000, एक वर्ष से दो वर्ष तक के एक लाख पचीस हजार और दो वर्ष से पांच वर्ष तक के तीन लाख इक्यानवे हजार बच्चों को इस साल एक माह में दवा पिलाने का लक्ष्य है। यह अभियान चौबीस जनवरी तक चलेगा।
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1 month ago | [YT] | 2
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प्रदेश का पहला सिटी पॉलीक्लिनिक रविवार से बसंतपुर नगरीय स्वास्थ्य केन्द्र में शुरू हो गया। इस केन्द्र पर प्रतिदिन दो विशेषज्ञ चिकित्सक सेवाएं देंगे। गोरखपुर ग्रामीण विधायक विपिन सिंह और एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक सेवानिवृत्त मेजर जनरल डॉ विभा दत्ता ने पॉलीक्लिनिक का शुभारंभ किया। इस अवसर पर शिविर लगा कर राजकीय दृष्टिबाधित इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों के आंखों की जांच भी हुई। कॉलेज के प्रधानाचार्य लक्ष्मीशंकर जायसवाल ने बतौर विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
उद्घाटन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए गोरखपुर ग्रामीण विधायक विपिन सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। इसी कड़ी में शुरू हो रहा सिटी पॉलीक्लिनिक जनस्वास्थ्य को बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके जरिए लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं अपने घर के नजदीक मिल सकेंगी।
एम्स की कार्यकारी निदेशक सेवानिवृत्त मेजर जनरल डॉ विभाग दत्ता ने कहा कि सिटी पॉलीक्लिनिक लोगों को अनावश्यक उच्च चिकित्सा केन्द्रों पर जाने से बचाएगा। इससे उच्चतम संस्थानों पर वहीं मरीज जाएंगे जिन्हें अति विशेषज्ञ चिकित्सकीय सुविधाओं की आवश्यकता होगी। लोग भीड़ से बचेंगे और संस्थानों पर भी उन्हीं लाभार्थियों को सेवा देने का भार होगा, जिनकी चिकित्सा सामुदायिक चिकित्सा इकाइयों पर नहीं हो पाती है।
राजकीय दृष्टिबाधित इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य लक्ष्मीशंकर जायसवाल ने कहा कि सिटी पॉलीक्लिनिक के उद्घाटन के ऐतिहासिक अवसर पर दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए विशेष शिविर एक अभिनव पहल है। इस क्लिनिक का लाभ समुदाय के साथ-साथ विद्यार्थियों को भी मिलेगा और इसके लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग बधाई के पात्र हैं। उन्होंने राज आई हॉस्पिटल की मदद से लगे विशेष नेत्र जांच शिविर की भी सराहना की।
सीएमओ डॉ राजेश झा ने बताया कि सिटी पॉलीक्लिनिक में सोमवार से शनिवार तक प्रतिदिन स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेष के साथ अलग-अलग दिवसों पर बाल रोग विशेषज्ञ, चर्म रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन और आर्थो सर्जन की सेवाएं फिलहाल शुरू की जा रही हैं। यहां न केवल विशेषज्ञ सेवाएं दी जाएंगी, बल्कि सैम्पल ट्रांसपोर्ट सिस्टम के जरिए बड़ी और महत्वपूर्ण पैथालॉजिकल जांचें भी उपलब्ध होंगी। इस सुविधा से लोग बेवजह जिला अस्पताल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एम्स गोरखपुर जाने से बचेंगे।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि ने सिटी पॉलीक्लिनिक के तैयार होने में योगदान देने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगी संस्थाओं को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया।
कार्यक्रम में एसीएमओ स्थानीय पार्षद अवधेश अग्रहरी, आरसीएच डॉ एके चौधरी, एसीएमओ डॉ विनय पांडेय, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ मेघा पांडेय, डिवीजनल कार्यक्रम प्रबंधक अरविंद पांडेय, डीडीएचईआईओ सुनीता पटेल, मंडलीय अर्बन कोआर्डिनेटर डॉ प्रीति सिंह, डीपीएम पंकज आनंद, जिला अर्बन कोआर्डिनेटर सुरेश सिंह चौहान, एआरओ एसएन शुक्ला सहित बसंतपुर नगरीय स्वास्थ्य केन्द्र के सभी कर्मी, सहयोगी संस्थाओं यूपीटीएसयू, जपाइगो और पीएसआई इंडिया के प्रतिनिधिगण प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।
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1 month ago | [YT] | 1
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गोरखपुर जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने बृहस्पतिवार को सीएमओ कार्यालय के प्रेरणा श्री सभागार में नगरीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान डिजिटल प्रेसक्रिप्शन और सैम्पल ट्रांसपोर्ट को सुदृढ़ करने के बारे में विस्तार से चर्चा हुई। सीएमओ ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह विभिन्न माध्यमों से समुदाय के बीच नगरीय स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में प्रचार-प्रसार करें। साथ ही नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से जो भी मरीज जिला अस्पताल रेफर किए जाएं, उन्हें ऑनलाइन पर्चे ही बना कर दिए जाएं।
सीएमओ डॉ झा ने नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की ओपीडी सेवा, लैब टेस्ट, दस केन्द्रों की सैम्पल ट्रांसपोर्ट सेवा, मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों, परिवार नियोजन कार्यक्रम और और ई-कवच पोर्टल पर फिडिंग के बारे में बिंदुवार समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश होनी चाहिए कि सामान्य बीमारी का मरीज सीधे जिला अस्पताल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एम्स गोरखपुर न जाए। उसे समस्त दवाएं और सेवाएं घर के नजदीक मिलनी चाहिए। इसमें जनजागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका है। लोगों को पता होना चाहिए कि नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और नगरीय आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर कौन-कौन सी सेवाएं, जांच, दवाएं और इलाज उपलब्ध हैं।
डॉ झा ने लोगों के बीच यह भी प्रचारित करने को कहा कि महानगर के दस नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों से बड़ी और महत्वपूर्ण पैथालॉजिकल जांचों के सैम्पल लेकर जिला अस्पताल स्थित लैब से जांच कराई जा रही है। इन लैब से रिपोर्ट भी शाम तक लाभार्थी के मोबाइल नंबर पर आ जाती है। इस प्रचार प्रसार से लोगों का पैथालॉजिकल जांच पर खर्च होने वाला पैसा बच सकेगा। यह सेवा फिलहाल बसंतपुर, गोरखनाथ, नथमलपुर, हुमायूंपुर, इलाहीबाग, शिवपुर सहबाजगंज, शाहपुर, झरना टोला, छोटे काजीपुर और दीवान बाजार में उपलब्ध है।
इस अवसर पर नगरीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ विनय पांडेय और समन्वयक सुरेश सिंह चौहान सहित सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधिगण, चिकित्सा अधिकारी और अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी मौजूद रहे।
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1 month ago | [YT] | 2
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