गोरखपुर में मातृ मृत्यु दर में कमी लाने और सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित मातृ सेवा कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में शनिवार को एक महत्वपूर्ण क्षमता संवर्धन कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्वास्थ्य विभाग की पहल एवं एम्स गोरखपुर के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के करीब दो दर्जन निजी अस्पतालों के चिकित्सकों, स्टाफ नर्सेज एवं इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर्स ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को प्रसव कक्ष में प्रसव से पूर्व, प्रसव के दौरान तथा प्रसव के बाद उत्पन्न होने वाली संभावित जटिलताओं और जोखिमों की समय रहते पहचान एवं उनके प्रभावी प्रबंधन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों, आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई तथा गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण प्रदान किया।
एम्स गोरखपुर के विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ-साथ वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. उमा सिंह ने वर्चुअल माध्यम से प्रतिभागियों को रेफरल के उचित प्रोटोकॉल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की समय पर पहचान और उन्हें सही स्वास्थ्य संस्थान में निर्धारित प्रक्रिया के तहत संदर्भित करना सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. शिखा सेठ तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए।
इस अवसर पर डॉ. विभा दत्ता ने कहा कि मातृ सेवा पहल मातृ मृत्यु दर को कम करने की दिशा में एक प्रभावी और दूरदर्शी प्रयास है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्वास्थ्य विभाग और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के संयुक्त प्रयासों से इस कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि एम्स गोरखपुर इस महत्वपूर्ण पहल को सफल बनाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करता रहेगा।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. शिखा सेठ ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान निजी अस्पतालों के चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ को हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग भी प्रदान की गई है। इससे वे प्रसव संबंधी जोखिमों की समय पर पहचान कर सकेंगे तथा उचित प्रबंधन के साथ आवश्यकता पड़ने पर प्रसूता को सही तरीके से उच्च स्वास्थ्य केंद्रों पर संदर्भित कर सकेंगे।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने कहा कि जिले में मातृ सेवा कार्यक्रम के तहत जिला एवं ब्लॉक स्तर पर सतत मॉनिटरिंग की जा रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के माध्यम से अब तक 400 से अधिक सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित कराए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में प्रसव होते हैं, इसलिए उन्हें इस पहल से जोड़ना आवश्यक था।
कार्यक्रम में डिप्टी सीएमओ डॉ. अनिल सिंह, तकनीकी सहयोगी डॉ. डब्ल्यू. पांडेय, श्रद्धा सहित स्वास्थ्य विभाग एवं एम्स गोरखपुर के अन्य अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री बृजेश पाठक शनिवार को गोरखपुर दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं तथा जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
अपने दौरे की शुरुआत में उप मुख्यमंत्री ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों से सीधे संवाद कर उपचार एवं अन्य सुविधाओं के संबंध में फीडबैक प्राप्त किया। मरीजों से बातचीत के दौरान उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि उन्हें समय पर उपचार, दवाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं।
निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री ने इमर्जेंसी वार्ड का भी अवलोकन किया। वार्ड में उमस और गर्मी की स्थिति को देखते हुए उन्होंने यथाशीघ्र एयर कंडीशनर लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ बेहतर और आरामदायक वातावरण उपलब्ध कराना भी स्वास्थ्य संस्थानों की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अस्पतालों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि मरीजों और उनके परिजनों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
श्री पाठक ने चिकित्सकों के रिक्त पदों के सापेक्ष वॉक-इन इंटरव्यू के माध्यम से भर्ती की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की उपलब्धता से मरीजों को बेहतर और समयबद्ध उपचार मिल सकेगा।
दौरे के दौरान उप मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अपर निदेशक स्वास्थ्य (एडी हेल्थ), मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा बैठक भी की। बैठक में विभिन्न चिकित्सा इकाइयों की कार्यप्रणाली, उपलब्ध संसाधनों और स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति पर चर्चा की गई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे चिकित्सा इकाइयों का नियमित निरीक्षण करें और निरीक्षण रिपोर्ट उन्हें भी उपलब्ध कराएं, ताकि व्यवस्थाओं की सतत निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
बैठक के दौरान उप मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे अभिनव प्रयासों और जनहित में संचालित विभिन्न पहलों की सराहना की।
दौरे के दौरान श्री पाठक ने "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के अंतर्गत जिला अस्पताल परिसर में पौधरोपण भी किया। इस अवसर पर गोरखपुर के सदर सांसद रवि किशन शुक्ल भी उनके साथ उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त उप मुख्यमंत्री एक निजी मीडिया संस्थान द्वारा आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में भी शामिल हुए।
विश्व जनसंख्या सप्ताह के अवसर पर इटावा के सैफई स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में जनसंख्या स्थिरीकरण और परिवार कल्याण विषय पर बुधवार को एक जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। स्त्री एवं प्रसूति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में चिकित्सकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लेकर जनसंख्या नियोजन और परिवार नियोजन के महत्व के बारे में चर्चा की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजय सिंह ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या आज पूरे विश्व के सामने एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बीच जनसंख्या में लगातार वृद्धि होने से स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यदि जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार को नियंत्रित नहीं किया गया तो आने वाले समय में संसाधनों पर दबाव और अधिक बढ़ेगा, जिससे विकास की गति प्रभावित हो सकती है।
डॉ. सिंह ने कहा कि जनसंख्या नियोजन केवल सरकारी योजनाओं के माध्यम से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय और जागरूक भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने परिवार नियोजन को स्वस्थ परिवार और सशक्त समाज की आधारशिला बताते हुए कहा कि छोटे परिवार का सिद्धांत आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना पहले था। उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में परिवार नियोजन की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
गोष्ठी में स्त्री एवं प्रसूति विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कल्पना कुमारी ने जनसंख्या नियंत्रण, परिवार नियोजन के आधुनिक एवं सुरक्षित साधनों तथा प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परिवार नियोजन के आधुनिक विकल्प न केवल दंपति को बेहतर निर्णय लेने में सहायता करते हैं, बल्कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में भी प्रभावी भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम का संचालन परिवार नियोजन नोडल अधिकारी डॉ. प्रगति द्विवेदी ने किया।
उत्तर प्रदेश में टीबी उन्मूलन की दिशा में हो रही प्रगति की समीक्षा और आगामी रणनीति तय करने के उद्देश्य से मंगलवार को एम्स गोरखपुर में तकनीकी संगोष्ठी-टेक्निकल कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्य स्वास्थ्य विभाग, राज्य क्षय रोग कार्यालय, चिकित्सकों, निजी स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिनिधियों, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों तथा सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित 60 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
संगोष्ठी में पद्मश्री डॉ. राजेंद्र प्रसाद, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी-केजीएमयू लखनऊ के श्वसन रोग विभागाध्यक्ष डॉ सूर्यकांत और गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा सहित देश भर के वरिष्ठ विशेषज्ञ, चिकित्सक, शोधकर्ता और विकास सहयोगी शामिल हुए। विशेषज्ञों ने उत्तर प्रदेश में टीबी उन्मूलन अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ विभा दत्ता ने कहा कि एम्स गोरखपुर टीबी के खिलाफ लड़ाई में राज्य सरकार के साथ पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थान अपनी उन्नत चिकित्सीय सेवाओं, अनुसंधान क्षमता और विशेषज्ञता के माध्यम से रोग की शीघ्र पहचान, बेहतर उपचार तथा रोगियों के बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने में निरंतर सहयोग देता रहेगा।
संगोष्ठी के दौरान निदान, उपचार, निजी क्षेत्र की सहभागिता और सामुदायिक जनभागीदारी जैसे चार प्रमुख विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में विशेषज्ञों ने विभिन्न चुनौतियों और संभावित समाधानों पर विस्तार से चर्चा की। समूह चर्चाओं से प्राप्त सुझावों और अनुशंसाओं को समापन सत्र में प्रस्तुत किया गया।
मुख्य अतिथि एवं प्रदेश सरकार के चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने अपने वर्चुअल सम्बोधन में कहा कि “नवाचार, प्रौद्योगिकी, साझेदारी और जनभागीदारी उत्तर प्रदेश की टीबी उन्मूलन यात्रा के मूल आधार हैं।” उन्होंने कहा कि अब समय केवल लक्षण आधारित जांच तक सीमित रहने का नहीं है, बल्कि जोखिम आधारित और जनसंख्या आधारित सक्रिय सर्विलांस को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने शीघ्र पहचान, शीघ्र निदान, समय पर उपचार और सतत निगरानी को टीबी उन्मूलन की सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने यह भी कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्य नहीं, बल्कि पूरे समाज और विकास से जुड़ा साझा लक्ष्य है।
राज्य क्षय रोग अधिकारी एवं संयुक्त निदेशक-टीबी डॉ. ऋषि कुमार सक्सेना ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश के टीबी उन्मूलन अभियान का नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने बताया कि 24 मार्च 2026 से शुरू हुए 100-दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0 ने राज्य में टीबी नियंत्रण कार्यक्रम को नई गति प्रदान की है।
गोरखपुर जनपद में संचालित "डेंगू मुक्त हॉस्टल अभियान" की कड़ी में जिला अस्पताल परिसर में विशेष डेंगू मुक्ति अभियान चलाया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा और प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान में अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्रों में मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए व्यापक साफ-सफाई और जागरूकता गतिविधियां संचालित की गईं।
अभियान के दौरान परिसर में ठहरे हुए पानी की पहचान कर उसकी सफाई कराई गई तथा संभावित मच्छर प्रजनन स्थलों पर एंटी लार्वल दवा का छिड़काव किया गया। साथ ही कर्मचारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को डेंगू से बचाव के उपायों की जानकारी भी दी गई। अभियान में जिला चिकित्सालय के कर्मचारियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने कहा कि बारिश के बाद विभिन्न स्थानों पर ठहरे हुए साफ पानी में डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर के पनपने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में नियमित साफ-सफाई, जलभराव की रोकथाम और जनजागरूकता डेंगू नियंत्रण के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपने घरों और आसपास के क्षेत्रों में पानी जमा न होने देने की अपील की।
जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि छतों, कूलरों, गमलों, टंकियों तथा आवासीय क्षेत्रों के आसपास जमा पानी की नियमित सफाई करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सप्ताह में कम से कम एक बार पानी के पात्रों को खाली कर साफ करने से डेंगू के मच्छरों के प्रजनन को रोका जा सकता है।
इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बी.के. सुमन, वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. राजेश, क्वालिटी मैनेजर डॉ. मुकुल सहित नगर निगम, मलेरिया विभाग एवं फाइलेरिया विभाग की टीम के सदस्य उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि डेंगू मुक्त हॉस्टल अभियान के साथ-साथ विभिन्न सरकारी परिसरों में भी मच्छर रोधी गतिविधियां लगातार संचालित की जा रही हैं, ताकि जनपद को डेंगू और अन्य मच्छर जनित रोगों से सुरक्षित रखा जा सके।
गोरखपुर में मच्छर जनित रोगों पर प्रभावी नियंत्रण और युवाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से जनपद में संचालित “डेंगू मुक्त हॉस्टल अभियान” के तहत बुधवार को पंडित दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्रावासों में विशेष साफ-सफाई एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह अभियान गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा के दिशा-निर्देशों के अनुसार चलाया जा रहा है।
जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि नगर निगम, मलेरिया विभाग एवं फाइलेरिया विभाग की संयुक्त टीम द्वारा विश्वविद्यालय परिसर के छात्रावासों में मच्छररोधी गतिविधियां संचालित की गईं। अभियान के दौरान ठहरे हुए पानी वाले स्थानों की पहचान कर उसकी सफाई कराई गई तथा मच्छरों के लार्वा को नष्ट करने के लिए एंटी लार्वल दवा का छिड़काव भी किया गया।
उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत अलकनन्दा गर्ल्स हॉस्टल, संत कबीर हॉस्टल, राम प्रताप शुक्ला हॉस्टल तथा गौतम बुद्ध हॉस्टल को विशेष रूप से कवर किया गया। इस दौरान छात्र-छात्राओं को मलेरिया, फाइलेरिया और विशेष रूप से डेंगू से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि घरों एवं छात्रावासों के आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें तथा साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। अभियान को सफल बनाने में विभिन्न छात्रावासों के वार्डेन का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने बताया कि “डेंगू मुक्त हॉस्टल अभियान” पूरे जुलाई माह में जनपद के विभिन्न शैक्षणिक एवं आवासीय संस्थानों में चलाया जाएगा। इससे पहले यह अभियान बीआरडी मेडिकल कॉलेज के छात्रावासों में भी संचालित किया जा चुका है। अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं में डेंगू और अन्य मच्छरजनित रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा छात्रावास परिसरों को मच्छरमुक्त एवं स्वच्छ बनाना है।
डॉ. झा ने कहा कि डेंगू की रोकथाम में साफ-सफाई सबसे प्रभावी उपाय है। यदि समुदाय और संस्थान मिलकर नियमित स्वच्छता बनाए रखें तथा जलभराव को रोकें, तो डेंगू सहित अन्य मच्छरजनित रोगों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने सभी शिक्षण संस्थानों से अभियान में सक्रिय सहयोग करने की अपील की।
गोरखपुर जिले में चल रहे सघन पल्स पोलियो अभियान घर-घर भ्रमण कार्यक्रम की प्रगति का जायजा लेने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने बुधवार को क्षेत्र भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की टीम के साथ बेलघाट क्षेत्र की ढेकू नाथ एवं चउतरा ग्राम सभाओं में अभियान का निरीक्षण किया। सीएमओ ने घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने वाली टीमों के कार्यों का अवलोकन किया तथा अभियान को सफल बनाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।
सीएमओ डॉ ने बताया कि पल्स पोलियो अभियान बच्चों को आजीवन दिव्यांगता से बचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं है। उन्होंने टीमों को निर्देशित किया कि क्षेत्र का शत-प्रतिशत भ्रमण सुनिश्चित करें तथा कोई भी पात्र बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे।
डॉ. झा ने बताया कि सघन पल्स पोलियो कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनपद, प्रदेश एवं देश के पांच वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो की दो बूंद पिलाकर उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखना है। भारत, वर्ष 2011 से पोलियो मुक्त है और इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए प्रत्येक बच्चे तक पोलियो की खुराक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।
सीएमओ ने बताया कि गोरखपुर जनपद में अभियान के सफल संचालन के लिए कुल 1848 टीमें तैनात की गई हैं, जिनमें घर-घर भ्रमण करने वाली टीमें, ट्रांजिट टीमें तथा मोबाइल टीमें शामिल हैं। जनपद में पांच वर्ष तक के 6,38,065 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष 1 जुलाई तक 4,52,474 बच्चों को पोलियो की दो बूंद पिलाई जा चुकी है।
डॉ झा ने बताया कि घर-घर भ्रमण करने वाली टीमें 3 जुलाई तक अभियान संचालित करेंगी तथा इस दौरान छूटे हुए बच्चों को चिन्हित कर उन्हें पोलियो की खुराक दी जाएगी। इसके अतिरिक्त शेष छूटे बच्चों को कवर करने के लिए 6 जुलाई को बी-टीम गतिविधि संचालित की जाएगी, जिससे कोई भी बच्चा पोलियो की दवा से वंचित न रह सके।
निरीक्षण के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ. विनय शंकर एवं उनकी टीम भी उपस्थित रही।
गोरखपुर के सांसद रवि किशन ने सोमवार को स्वास्थ्य क्षेत्र की दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन कर उन्हें जनता को समर्पित किया। सांसद निधि से गोरखपुर रेलवे अस्पताल में निर्मित 13 बेड के अत्याधुनिक आईसीयू वार्ड तथा एम्स गोरखपुर में बनाए गए 15 बेड के आधुनिक निजी वार्ड का शुभारंभ किया गया।
रेलवे अस्पताल में स्थापित नए आईसीयू वार्ड से गंभीर मरीजों को स्थानीय स्तर पर उन्नत जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध हो सकेगा, जिससे अन्य शहरों में रेफर होने की आवश्यकता कम होगी। वहीं एम्स गोरखपुर के निजी वार्ड में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और बेहतर सुविधाओं से युक्त मरीज कक्ष उपलब्ध कराए गए हैं।
एम्स प्रशासन के अनुसार निजी वार्ड का संचालन चरणबद्ध ढंग से शुरू किया जाएगा और बाद में इसकी पूरी 15 बेड क्षमता का उपयोग किया जाएगा। वार्ड का शुल्क एम्स नई दिल्ली की स्वीकृत दरों के अनुरूप रखा गया है।
इस अवसर पर सांसद रवि किशन ने कहा कि पूर्वांचल के लोगों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि रेलवे अस्पताल का नया आईसीयू और एम्स का निजी वार्ड क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाएगा।
गोरखपुर जिले में कैंसर की रोकथाम, समय से पहचान और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा एवं एम्स गोरखपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ शिखा सेठ ने जिले के पांच ब्लॉकों के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) का अभिमुखीकरण किया। वर्चुअल माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में सहजनवां, कैम्पियरगंज, बांसगांव, पिपराइच और सरदारनगर ब्लॉकों के सीएचओ को कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान तथा मरीजों को समय पर उपचार व्यवस्था से जोड़ने के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।
अभिमुखीकरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ शिखा सेठ ने महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर और स्तन कैंसर के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन दोनों प्रकार के कैंसर की प्रारंभिक अवस्था में पहचान हो जाने पर उपचार अधिक प्रभावी होता है और मरीज को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है। उन्होंने सीएचओ को सर्वाइकल कैंसर एवं स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षणों, जोखिम कारकों तथा समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के उपायों के बारे में भी जानकारी दी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने सीएचओ को ओरल कैंसर की पहचान और उसके प्रमुख लक्षणों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सर्वाइकल कैंसर, स्तन कैंसर और ओरल कैंसर के मामलों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर पर प्रारंभिक स्क्रीनिंग और पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे मरीजों को समय रहते चिकित्सकों के पास संदर्भित किया जाना चाहिए, ताकि उनका शीघ्र उपचार शुरू हो सके।
डॉ झा ने कहा कि कैंसर की समय पर पहचान, समय से संदर्भन और सही समय पर उपचार उपलब्ध कराने से कैंसर से होने वाली मृत्यु के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने सभी सीएचओ से अपेक्षा की कि वे अपने कार्यक्षेत्र में लोगों को कैंसर के प्रति जागरूक करें तथा संदिग्ध लक्षण मिलने पर मरीजों को तत्काल स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ें।
कार्यक्रम में डिप्टी सीएमओ डॉ राजेश कुमार, डीसीपीएम रिपुंजय पांडेय, सहयोगी संस्था जपाइगो तथा यूपीटीएसयू के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने कैंसर नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए सामुदायिक स्तर पर प्रभावी कार्ययोजना के महत्व पर बल दिया।
गोरखपुर जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने मंगलवार को पिपराइच स्थित सेंट्रल ड्रग वेयर हाउस का निरीक्षण किया। उन्होंने वेयर हाउस में दवाओं के गुणवत्तापूर्ण रखरखाव और ट्रांसपोर्टेशन को लेकर सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया ।
सीएमओ ने स्वास्थ्य विभाग के अभियंता को निर्देश दिया कि वेयर हाउस में बिजली पानी की मुकम्मल व्यवस्था रखी जाए। उन्होंने वेयरहाउस को जोड़ने वाली सड़क बनाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की भी पहल की। सीएमओ ने बताया कि गोरखपुर के सेंट्रल ड्रग वेयर हाउस में 319 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। वेयर हाउस से जिला स्तरीय अस्पताल माह में दो बार, सीएचसी-पीएचसी माह में एक बार और उपकेंद्र स्तरीय अस्पताल तीन माह में एक बार दवा ले जाते हैं। निरीक्षण के दौरान सीएमओ को बताया गया कि फरवरी माह में वेयर हाउस से बावन बार दवा मंगायी गयी है।
Sehat Samachar Gorakhpur
गोरखपुर में मातृ मृत्यु दर में कमी लाने और सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित मातृ सेवा कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में शनिवार को एक महत्वपूर्ण क्षमता संवर्धन कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्वास्थ्य विभाग की पहल एवं एम्स गोरखपुर के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के करीब दो दर्जन निजी अस्पतालों के चिकित्सकों, स्टाफ नर्सेज एवं इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर्स ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को प्रसव कक्ष में प्रसव से पूर्व, प्रसव के दौरान तथा प्रसव के बाद उत्पन्न होने वाली संभावित जटिलताओं और जोखिमों की समय रहते पहचान एवं उनके प्रभावी प्रबंधन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों, आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई तथा गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण प्रदान किया।
एम्स गोरखपुर के विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ-साथ वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. उमा सिंह ने वर्चुअल माध्यम से प्रतिभागियों को रेफरल के उचित प्रोटोकॉल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की समय पर पहचान और उन्हें सही स्वास्थ्य संस्थान में निर्धारित प्रक्रिया के तहत संदर्भित करना सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. शिखा सेठ तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए।
इस अवसर पर डॉ. विभा दत्ता ने कहा कि मातृ सेवा पहल मातृ मृत्यु दर को कम करने की दिशा में एक प्रभावी और दूरदर्शी प्रयास है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्वास्थ्य विभाग और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के संयुक्त प्रयासों से इस कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि एम्स गोरखपुर इस महत्वपूर्ण पहल को सफल बनाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करता रहेगा।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. शिखा सेठ ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान निजी अस्पतालों के चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ को हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग भी प्रदान की गई है। इससे वे प्रसव संबंधी जोखिमों की समय पर पहचान कर सकेंगे तथा उचित प्रबंधन के साथ आवश्यकता पड़ने पर प्रसूता को सही तरीके से उच्च स्वास्थ्य केंद्रों पर संदर्भित कर सकेंगे।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने कहा कि जिले में मातृ सेवा कार्यक्रम के तहत जिला एवं ब्लॉक स्तर पर सतत मॉनिटरिंग की जा रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के माध्यम से अब तक 400 से अधिक सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित कराए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में प्रसव होते हैं, इसलिए उन्हें इस पहल से जोड़ना आवश्यक था।
कार्यक्रम में डिप्टी सीएमओ डॉ. अनिल सिंह, तकनीकी सहयोगी डॉ. डब्ल्यू. पांडेय, श्रद्धा सहित स्वास्थ्य विभाग एवं एम्स गोरखपुर के अन्य अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
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अपने दौरे की शुरुआत में उप मुख्यमंत्री ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों से सीधे संवाद कर उपचार एवं अन्य सुविधाओं के संबंध में फीडबैक प्राप्त किया। मरीजों से बातचीत के दौरान उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि उन्हें समय पर उपचार, दवाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं।
निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री ने इमर्जेंसी वार्ड का भी अवलोकन किया। वार्ड में उमस और गर्मी की स्थिति को देखते हुए उन्होंने यथाशीघ्र एयर कंडीशनर लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ बेहतर और आरामदायक वातावरण उपलब्ध कराना भी स्वास्थ्य संस्थानों की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अस्पतालों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि मरीजों और उनके परिजनों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
श्री पाठक ने चिकित्सकों के रिक्त पदों के सापेक्ष वॉक-इन इंटरव्यू के माध्यम से भर्ती की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की उपलब्धता से मरीजों को बेहतर और समयबद्ध उपचार मिल सकेगा।
दौरे के दौरान उप मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अपर निदेशक स्वास्थ्य (एडी हेल्थ), मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा बैठक भी की। बैठक में विभिन्न चिकित्सा इकाइयों की कार्यप्रणाली, उपलब्ध संसाधनों और स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति पर चर्चा की गई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे चिकित्सा इकाइयों का नियमित निरीक्षण करें और निरीक्षण रिपोर्ट उन्हें भी उपलब्ध कराएं, ताकि व्यवस्थाओं की सतत निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
बैठक के दौरान उप मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे अभिनव प्रयासों और जनहित में संचालित विभिन्न पहलों की सराहना की।
दौरे के दौरान श्री पाठक ने "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के अंतर्गत जिला अस्पताल परिसर में पौधरोपण भी किया। इस अवसर पर गोरखपुर के सदर सांसद रवि किशन शुक्ल भी उनके साथ उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त उप मुख्यमंत्री एक निजी मीडिया संस्थान द्वारा आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में भी शामिल हुए।
#HealthFacilityInspection #HealthInspection #QualityAssurance #HealthcareQuality
3 days ago | [YT] | 2
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विश्व जनसंख्या सप्ताह के अवसर पर इटावा के सैफई स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में जनसंख्या स्थिरीकरण और परिवार कल्याण विषय पर बुधवार को एक जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। स्त्री एवं प्रसूति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में चिकित्सकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लेकर जनसंख्या नियोजन और परिवार नियोजन के महत्व के बारे में चर्चा की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजय सिंह ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या आज पूरे विश्व के सामने एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बीच जनसंख्या में लगातार वृद्धि होने से स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यदि जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार को नियंत्रित नहीं किया गया तो आने वाले समय में संसाधनों पर दबाव और अधिक बढ़ेगा, जिससे विकास की गति प्रभावित हो सकती है।
डॉ. सिंह ने कहा कि जनसंख्या नियोजन केवल सरकारी योजनाओं के माध्यम से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय और जागरूक भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने परिवार नियोजन को स्वस्थ परिवार और सशक्त समाज की आधारशिला बताते हुए कहा कि छोटे परिवार का सिद्धांत आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना पहले था। उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में परिवार नियोजन की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
गोष्ठी में स्त्री एवं प्रसूति विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कल्पना कुमारी ने जनसंख्या नियंत्रण, परिवार नियोजन के आधुनिक एवं सुरक्षित साधनों तथा प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परिवार नियोजन के आधुनिक विकल्प न केवल दंपति को बेहतर निर्णय लेने में सहायता करते हैं, बल्कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में भी प्रभावी भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम का संचालन परिवार नियोजन नोडल अधिकारी डॉ. प्रगति द्विवेदी ने किया।
#WorldPopulationWeek #PopulationWeek #PopulationAwareness #PopulationStabilizatio #FamilyPlanning #HealthyFamily #SmallFamilyHappyFamily
6 days ago | [YT] | 0
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उत्तर प्रदेश में टीबी उन्मूलन की दिशा में हो रही प्रगति की समीक्षा और आगामी रणनीति तय करने के उद्देश्य से मंगलवार को एम्स गोरखपुर में तकनीकी संगोष्ठी-टेक्निकल कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्य स्वास्थ्य विभाग, राज्य क्षय रोग कार्यालय, चिकित्सकों, निजी स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिनिधियों, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों तथा सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित 60 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
संगोष्ठी में पद्मश्री डॉ. राजेंद्र प्रसाद, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी-केजीएमयू लखनऊ के श्वसन रोग विभागाध्यक्ष डॉ सूर्यकांत और गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा सहित देश भर के वरिष्ठ विशेषज्ञ, चिकित्सक, शोधकर्ता और विकास सहयोगी शामिल हुए। विशेषज्ञों ने उत्तर प्रदेश में टीबी उन्मूलन अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ विभा दत्ता ने कहा कि एम्स गोरखपुर टीबी के खिलाफ लड़ाई में राज्य सरकार के साथ पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थान अपनी उन्नत चिकित्सीय सेवाओं, अनुसंधान क्षमता और विशेषज्ञता के माध्यम से रोग की शीघ्र पहचान, बेहतर उपचार तथा रोगियों के बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने में निरंतर सहयोग देता रहेगा।
संगोष्ठी के दौरान निदान, उपचार, निजी क्षेत्र की सहभागिता और सामुदायिक जनभागीदारी जैसे चार प्रमुख विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में विशेषज्ञों ने विभिन्न चुनौतियों और संभावित समाधानों पर विस्तार से चर्चा की। समूह चर्चाओं से प्राप्त सुझावों और अनुशंसाओं को समापन सत्र में प्रस्तुत किया गया।
मुख्य अतिथि एवं प्रदेश सरकार के चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने अपने वर्चुअल सम्बोधन में कहा कि “नवाचार, प्रौद्योगिकी, साझेदारी और जनभागीदारी उत्तर प्रदेश की टीबी उन्मूलन यात्रा के मूल आधार हैं।” उन्होंने कहा कि अब समय केवल लक्षण आधारित जांच तक सीमित रहने का नहीं है, बल्कि जोखिम आधारित और जनसंख्या आधारित सक्रिय सर्विलांस को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने शीघ्र पहचान, शीघ्र निदान, समय पर उपचार और सतत निगरानी को टीबी उन्मूलन की सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने यह भी कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्य नहीं, बल्कि पूरे समाज और विकास से जुड़ा साझा लक्ष्य है।
राज्य क्षय रोग अधिकारी एवं संयुक्त निदेशक-टीबी डॉ. ऋषि कुमार सक्सेना ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश के टीबी उन्मूलन अभियान का नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने बताया कि 24 मार्च 2026 से शुरू हुए 100-दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0 ने राज्य में टीबी नियंत्रण कार्यक्रम को नई गति प्रदान की है।
#TBFreeIndia #EndTB #TBElimination #TBMuktBharat #TBFreeUP
1 week ago | [YT] | 1
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गोरखपुर जनपद में संचालित "डेंगू मुक्त हॉस्टल अभियान" की कड़ी में जिला अस्पताल परिसर में विशेष डेंगू मुक्ति अभियान चलाया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा और प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान में अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्रों में मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए व्यापक साफ-सफाई और जागरूकता गतिविधियां संचालित की गईं।
अभियान के दौरान परिसर में ठहरे हुए पानी की पहचान कर उसकी सफाई कराई गई तथा संभावित मच्छर प्रजनन स्थलों पर एंटी लार्वल दवा का छिड़काव किया गया। साथ ही कर्मचारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को डेंगू से बचाव के उपायों की जानकारी भी दी गई। अभियान में जिला चिकित्सालय के कर्मचारियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने कहा कि बारिश के बाद विभिन्न स्थानों पर ठहरे हुए साफ पानी में डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर के पनपने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में नियमित साफ-सफाई, जलभराव की रोकथाम और जनजागरूकता डेंगू नियंत्रण के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपने घरों और आसपास के क्षेत्रों में पानी जमा न होने देने की अपील की।
जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि छतों, कूलरों, गमलों, टंकियों तथा आवासीय क्षेत्रों के आसपास जमा पानी की नियमित सफाई करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सप्ताह में कम से कम एक बार पानी के पात्रों को खाली कर साफ करने से डेंगू के मच्छरों के प्रजनन को रोका जा सकता है।
इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बी.के. सुमन, वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. राजेश, क्वालिटी मैनेजर डॉ. मुकुल सहित नगर निगम, मलेरिया विभाग एवं फाइलेरिया विभाग की टीम के सदस्य उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि डेंगू मुक्त हॉस्टल अभियान के साथ-साथ विभिन्न सरकारी परिसरों में भी मच्छर रोधी गतिविधियां लगातार संचालित की जा रही हैं, ताकि जनपद को डेंगू और अन्य मच्छर जनित रोगों से सुरक्षित रखा जा सके।
#StopDengue #FightDengue #DengueFreeIndia #BeatDengue #PreventDengue #DengueAwareness
1 week ago | [YT] | 1
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गोरखपुर में मच्छर जनित रोगों पर प्रभावी नियंत्रण और युवाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से जनपद में संचालित “डेंगू मुक्त हॉस्टल अभियान” के तहत बुधवार को पंडित दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्रावासों में विशेष साफ-सफाई एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह अभियान गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा के दिशा-निर्देशों के अनुसार चलाया जा रहा है।
जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि नगर निगम, मलेरिया विभाग एवं फाइलेरिया विभाग की संयुक्त टीम द्वारा विश्वविद्यालय परिसर के छात्रावासों में मच्छररोधी गतिविधियां संचालित की गईं। अभियान के दौरान ठहरे हुए पानी वाले स्थानों की पहचान कर उसकी सफाई कराई गई तथा मच्छरों के लार्वा को नष्ट करने के लिए एंटी लार्वल दवा का छिड़काव भी किया गया।
उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत अलकनन्दा गर्ल्स हॉस्टल, संत कबीर हॉस्टल, राम प्रताप शुक्ला हॉस्टल तथा गौतम बुद्ध हॉस्टल को विशेष रूप से कवर किया गया। इस दौरान छात्र-छात्राओं को मलेरिया, फाइलेरिया और विशेष रूप से डेंगू से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि घरों एवं छात्रावासों के आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें तथा साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। अभियान को सफल बनाने में विभिन्न छात्रावासों के वार्डेन का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने बताया कि “डेंगू मुक्त हॉस्टल अभियान” पूरे जुलाई माह में जनपद के विभिन्न शैक्षणिक एवं आवासीय संस्थानों में चलाया जाएगा। इससे पहले यह अभियान बीआरडी मेडिकल कॉलेज के छात्रावासों में भी संचालित किया जा चुका है। अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं में डेंगू और अन्य मच्छरजनित रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा छात्रावास परिसरों को मच्छरमुक्त एवं स्वच्छ बनाना है।
डॉ. झा ने कहा कि डेंगू की रोकथाम में साफ-सफाई सबसे प्रभावी उपाय है। यदि समुदाय और संस्थान मिलकर नियमित स्वच्छता बनाए रखें तथा जलभराव को रोकें, तो डेंगू सहित अन्य मच्छरजनित रोगों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने सभी शिक्षण संस्थानों से अभियान में सक्रिय सहयोग करने की अपील की।
#StopDengue #FightDengue #DengueFreeIndia #BeatDengue #PreventDengue #DengueAwareness
1 week ago | [YT] | 0
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गोरखपुर जिले में चल रहे सघन पल्स पोलियो अभियान घर-घर भ्रमण कार्यक्रम की प्रगति का जायजा लेने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने बुधवार को क्षेत्र भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की टीम के साथ बेलघाट क्षेत्र की ढेकू नाथ एवं चउतरा ग्राम सभाओं में अभियान का निरीक्षण किया। सीएमओ ने घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने वाली टीमों के कार्यों का अवलोकन किया तथा अभियान को सफल बनाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।
सीएमओ डॉ ने बताया कि पल्स पोलियो अभियान बच्चों को आजीवन दिव्यांगता से बचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं है। उन्होंने टीमों को निर्देशित किया कि क्षेत्र का शत-प्रतिशत भ्रमण सुनिश्चित करें तथा कोई भी पात्र बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे।
डॉ. झा ने बताया कि सघन पल्स पोलियो कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनपद, प्रदेश एवं देश के पांच वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो की दो बूंद पिलाकर उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखना है। भारत, वर्ष 2011 से पोलियो मुक्त है और इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए प्रत्येक बच्चे तक पोलियो की खुराक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।
सीएमओ ने बताया कि गोरखपुर जनपद में अभियान के सफल संचालन के लिए कुल 1848 टीमें तैनात की गई हैं, जिनमें घर-घर भ्रमण करने वाली टीमें, ट्रांजिट टीमें तथा मोबाइल टीमें शामिल हैं। जनपद में पांच वर्ष तक के 6,38,065 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष 1 जुलाई तक 4,52,474 बच्चों को पोलियो की दो बूंद पिलाई जा चुकी है।
डॉ झा ने बताया कि घर-घर भ्रमण करने वाली टीमें 3 जुलाई तक अभियान संचालित करेंगी तथा इस दौरान छूटे हुए बच्चों को चिन्हित कर उन्हें पोलियो की खुराक दी जाएगी। इसके अतिरिक्त शेष छूटे बच्चों को कवर करने के लिए 6 जुलाई को बी-टीम गतिविधि संचालित की जाएगी, जिससे कोई भी बच्चा पोलियो की दवा से वंचित न रह सके।
निरीक्षण के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ. विनय शंकर एवं उनकी टीम भी उपस्थित रही।
#PulsePolioCampaign #PolioFreeIndia #EndPolio #TwoDropsLifeLongProtection #DoBoondZindagiKi #PulsePolio #PolioVaccination #ImmunizationForAll
2 weeks ago | [YT] | 2
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गोरखपुर के सांसद रवि किशन ने सोमवार को स्वास्थ्य क्षेत्र की दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन कर उन्हें जनता को समर्पित किया। सांसद निधि से गोरखपुर रेलवे अस्पताल में निर्मित 13 बेड के अत्याधुनिक आईसीयू वार्ड तथा एम्स गोरखपुर में बनाए गए 15 बेड के आधुनिक निजी वार्ड का शुभारंभ किया गया।
रेलवे अस्पताल में स्थापित नए आईसीयू वार्ड से गंभीर मरीजों को स्थानीय स्तर पर उन्नत जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध हो सकेगा, जिससे अन्य शहरों में रेफर होने की आवश्यकता कम होगी। वहीं एम्स गोरखपुर के निजी वार्ड में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और बेहतर सुविधाओं से युक्त मरीज कक्ष उपलब्ध कराए गए हैं।
एम्स प्रशासन के अनुसार निजी वार्ड का संचालन चरणबद्ध ढंग से शुरू किया जाएगा और बाद में इसकी पूरी 15 बेड क्षमता का उपयोग किया जाएगा। वार्ड का शुल्क एम्स नई दिल्ली की स्वीकृत दरों के अनुरूप रखा गया है।
इस अवसर पर सांसद रवि किशन ने कहा कि पूर्वांचल के लोगों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि रेलवे अस्पताल का नया आईसीयू और एम्स का निजी वार्ड क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाएगा।
#SystemStrengthening #HealthSystemStrengthening#ServiceDeliveryStrengthening
3 weeks ago | [YT] | 0
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गोरखपुर जिले में कैंसर की रोकथाम, समय से पहचान और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा एवं एम्स गोरखपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ शिखा सेठ ने जिले के पांच ब्लॉकों के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) का अभिमुखीकरण किया। वर्चुअल माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में सहजनवां, कैम्पियरगंज, बांसगांव, पिपराइच और सरदारनगर ब्लॉकों के सीएचओ को कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान तथा मरीजों को समय पर उपचार व्यवस्था से जोड़ने के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।
अभिमुखीकरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ शिखा सेठ ने महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर और स्तन कैंसर के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन दोनों प्रकार के कैंसर की प्रारंभिक अवस्था में पहचान हो जाने पर उपचार अधिक प्रभावी होता है और मरीज को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है। उन्होंने सीएचओ को सर्वाइकल कैंसर एवं स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षणों, जोखिम कारकों तथा समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के उपायों के बारे में भी जानकारी दी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने सीएचओ को ओरल कैंसर की पहचान और उसके प्रमुख लक्षणों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सर्वाइकल कैंसर, स्तन कैंसर और ओरल कैंसर के मामलों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर पर प्रारंभिक स्क्रीनिंग और पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे मरीजों को समय रहते चिकित्सकों के पास संदर्भित किया जाना चाहिए, ताकि उनका शीघ्र उपचार शुरू हो सके।
डॉ झा ने कहा कि कैंसर की समय पर पहचान, समय से संदर्भन और सही समय पर उपचार उपलब्ध कराने से कैंसर से होने वाली मृत्यु के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने सभी सीएचओ से अपेक्षा की कि वे अपने कार्यक्षेत्र में लोगों को कैंसर के प्रति जागरूक करें तथा संदिग्ध लक्षण मिलने पर मरीजों को तत्काल स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ें।
कार्यक्रम में डिप्टी सीएमओ डॉ राजेश कुमार, डीसीपीएम रिपुंजय पांडेय, सहयोगी संस्था जपाइगो तथा यूपीटीएसयू के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने कैंसर नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए सामुदायिक स्तर पर प्रभावी कार्ययोजना के महत्व पर बल दिया।
#CancerPrevention #EarlyDetectionSavesLives #ScreeningAwareness #RegularHealthChecku #BreastCancerAwareness #CervicalCancerPreventio #OralCancerAwareness
3 weeks ago | [YT] | 1
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गोरखपुर जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने मंगलवार को पिपराइच स्थित सेंट्रल ड्रग वेयर हाउस का निरीक्षण किया। उन्होंने वेयर हाउस में दवाओं के गुणवत्तापूर्ण रखरखाव और ट्रांसपोर्टेशन को लेकर सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया ।
सीएमओ ने स्वास्थ्य विभाग के अभियंता को निर्देश दिया कि वेयर हाउस में बिजली पानी की मुकम्मल व्यवस्था रखी जाए। उन्होंने वेयरहाउस को जोड़ने वाली सड़क बनाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की भी पहल की। सीएमओ ने बताया कि गोरखपुर के सेंट्रल ड्रग वेयर हाउस में 319 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। वेयर हाउस से जिला स्तरीय अस्पताल माह में दो बार, सीएचसी-पीएचसी माह में एक बार और उपकेंद्र स्तरीय अस्पताल तीन माह में एक बार दवा ले जाते हैं। निरीक्षण के दौरान सीएमओ को बताया गया कि फरवरी माह में वेयर हाउस से बावन बार दवा मंगायी गयी है।
#DrugWarehouseInspection #MedicineStorage #DrugSafety #PharmaceuticalManagement #HealthDepartment #DrugQualityCheck #MedicineStockReview #ColdChainMaintenance #EssentialMedicines #DrugSupplyManagement
4 months ago | [YT] | 1
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