अनंत शेषावतार, गोप वृन्देश, यादवेंद्र श्री बलभद्र महाप्रभु के प्राकट्य महा महोत्सव (भलभद्र जयंती) की जय श्री राधे। अनंत शेष भगवान हर युग में भगवत ध्वजा फहराने के लिए जीवों के आचार्य के रूप में प्रकट होते हैं, त्रेता में भगवान लक्ष्मण रूप में, द्वापर में बलभद्र रूप में तो कलयुग में दो आंशिक आचार्य रूप : श्री रामानुजाचार्य एवं गौरांग लीला में नित्यानंद प्रभु के रूप में प्रकट हो जीव के परमात्मा से मिलन का मार्ग प्रशस्त करते हैं। हल, मूसल, गदा आदि से जिनकी भुजाएं सुशोभित हैं वे अनंत बल के अधिष्ठान श्री दाऊ जी महाराज मंगल करें।
गगन मे लहराता पचरंगा ध्वज, चंद्र पताका एवं छत्र चंवर से सुशोभायमान ठाकुर मर्दनसिंह जी की प्रतिमा मानो जीवंत हो उठी। भगवती की महती कृपा करुणा से आज यदुवंश गौरव ठाकुर मर्दनसिंह जी का जयंती उत्सव कार्यक्रम निर्विघ्न रूप से सफल हुआ जिसमे प्रदेश के साथ साथ देशभर से गणमान्य लोगो की समुपस्थिति रही जिनमे श्री यदुवंश कुलगुरु गर्गाचार्य श्री श्री भारद्वाजनंद गिरी जी महाराज, काशी मे प्राचीन जलाभिषेक परंपरा का निर्वहन कराने वाली श्री चंद्रवंशी गोप सेवा समिति के श्री लाल जी चंद्रवंशी आदि की विशेष उपस्थिति तथा हज़ारों की संख्या मे आस्तिक सनातनी सर्व हिंदू समाज एवं क्षेत्रीय यदुवंशियों ने पल को ऐतिहासिक बना दिया। ठाकुर मर्दनसिंह जन्मोत्सव समिति एवं यादव समाज विदिशा के इस ऐतिहासिक प्रकल्प से समूचे भारत का यदुवंश गौरांवित है एवं प्रेरणा लेता है कि इसी दिव्य भाव से सभी संकल्पबद्ध हो अग्रसर होंगे। जय जय भवानी, नर्मदे हर।
बंदूक थामे यह प्रतिमा है उस गुमनाम यदुवंशी योद्धा की जिसने आज ही के दिन अंग्रेजो से संघर्ष करते हुए देश और सनातन धर्म की अक्षुण्णता हेतु वीरगति प्राप्त की थी। वीर केसरी अमातुर बलप्पा का जन्म कर्नाटक के बेलगांव जिले में एक कन्नड़ सरदार यादव/Golla परिवार में हुआ था जिनके पूर्वज कित्तूर महाराजा के विश्वासपात्र सामंत थे। कन्नड़ Golla/Gawali यादवों की हणबर शाखा से संबंधित इतिहास अनुसार इस कुटुंब की निकासी महाराष्ट्र क्षेत्र से है जो द्वापर में भगवान श्री कृष्ण संग मथुरा से द्वारका आए थे।
🇮🇳1857 की क्रांति से 33 वर्ष पूर्व 1824 में कन्नड़ क्षेत्र से स्वतंत्रता की अग्नि प्रस्फुटित हुई जिसमें कित्तूर की वीरांगना महारानी चेन्नम्मा ने मल्लेच्छ अंग्रेजो के समक्ष समर्पण के बजाए संघर्ष करना स्वीकार किया। महारानी चेन्नम्मा के संग उनके प्रमुख सरदार श्री अमातुर बलप्पा, संगोली रायन्ना, गुरु सिद्दप्पा आदि सभी अंग्रेजो से युद्ध के लिए संकल्पद्ध हुए। 23 अक्टूबर 1824 को कित्तूर और अंग्रेजो की सेना प्रथम बार आमने सामने हुई जिसमें परास्त होता जान अंग्रेजो ने वीरांगना महारानी चेन्नम्मा को मारने के लिए षडयंत्र रचा किंतु सतर्क वीर बलप्पा ने अंग्रेज प्रमुख Thackeray को युद्धभूमि में ढेर कर दिया जिससे भयभीत अंग्रेज दल वापस लौट गया और इस प्रकार प्रथम संघर्ष में कर्नाटक अपनी स्वाधीनता स्थापित रखने में सफल हुआ।
⚔️पराजय से खिन्न अंग्रेजो ने 3दिसंबर 1824 को पुनः भारी थल बल के साथ कित्तूर दुर्ग पर आक्रमण किया। शुरुआती दौर में पुनः कन्नड़ सेना भारी पड़ी किंतु सत्ता लोलुपता में मदान्ध कुछ लालची लोगों ने अंग्रेजो के समक्ष गोपनीय रणनीतियां प्रकट कर दी और 4 दिसंबर को पुनः अंग्रेजो ने नेतृत्वकर्ता महारानी चेन्नम्मा को लक्ष्य किया किन्तु वीर बलप्पा कहां चूकने वाले थे, अपने प्राणों को दांव पर लगा महारानी की सुरक्षा के लिए बीच में आ डटे और सैंकड़ों गोलियों की बौछार अपने शरीर पर ले वीरगति को प्राप्त हो गए। महारानी चेन्नम्मा ने मानो अपने नेत्र खो दिए और अंततोगत्वा षडयंत्र पूर्वक कन्नड़ हिन्दू सेना परास्त हो गई। महारानी चेन्नम्मा को कैद कर लिया गया और 1829 में इन्होंने कैदावस्था में अंतिम श्वास ली। ---------------------------------------- कन्नड़ इतिहास में वीर केसरी के नाम से प्रख्यात यादव समाज के राजनायक श्री अमातुर बलप्पा को इतिहास में वह उचित स्थान न मिल सका जिसके वे हकदार हैं। #Rani_Chennamma #kittoor#कर्नाटक#स्वतंत्रता #AmaturBalappa#4December#Yadava#Golla#Gawali#Ahir
यदुकुल रीत⚔️
श्रीजी की प्राकट्यस्थली कीर्ति मन्दिर बरसाना
1 month ago |[YT] | 21
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यदुकुल रीत⚔️
अनंत शेषावतार, गोप वृन्देश, यादवेंद्र श्री बलभद्र महाप्रभु के प्राकट्य महा महोत्सव (भलभद्र जयंती) की जय श्री राधे। अनंत शेष भगवान हर युग में भगवत ध्वजा फहराने के लिए जीवों के आचार्य के रूप में प्रकट होते हैं, त्रेता में भगवान लक्ष्मण रूप में, द्वापर में बलभद्र रूप में तो कलयुग में दो आंशिक आचार्य रूप : श्री रामानुजाचार्य एवं गौरांग लीला में नित्यानंद प्रभु के रूप में प्रकट हो जीव के परमात्मा से मिलन का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
हल, मूसल, गदा आदि से जिनकी भुजाएं सुशोभित हैं वे अनंत बल के अधिष्ठान श्री दाऊ जी महाराज मंगल करें।
1 month ago |[YT] | 39
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यदुकुल रीत⚔️
ठा. श्रीराधा गोविंद देव बिहारी जू प्राकट्योत्सव
1 month ago |[YT] | 6
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यदुकुल रीत⚔️
गगन मे लहराता पचरंगा ध्वज, चंद्र पताका एवं छत्र चंवर से सुशोभायमान ठाकुर मर्दनसिंह जी की प्रतिमा मानो जीवंत हो उठी। भगवती की महती कृपा करुणा से आज यदुवंश गौरव ठाकुर मर्दनसिंह जी का जयंती उत्सव कार्यक्रम निर्विघ्न रूप से सफल हुआ जिसमे प्रदेश के साथ साथ देशभर से गणमान्य लोगो की समुपस्थिति रही जिनमे श्री यदुवंश कुलगुरु गर्गाचार्य श्री श्री भारद्वाजनंद गिरी जी महाराज, काशी मे प्राचीन जलाभिषेक परंपरा का निर्वहन कराने वाली श्री चंद्रवंशी गोप सेवा समिति के श्री लाल जी चंद्रवंशी आदि की विशेष उपस्थिति तथा हज़ारों की संख्या मे आस्तिक सनातनी सर्व हिंदू समाज एवं क्षेत्रीय यदुवंशियों ने पल को ऐतिहासिक बना दिया।
ठाकुर मर्दनसिंह जन्मोत्सव समिति एवं यादव समाज विदिशा के इस ऐतिहासिक प्रकल्प से समूचे भारत का यदुवंश गौरांवित है एवं प्रेरणा लेता है कि इसी दिव्य भाव से सभी संकल्पबद्ध हो अग्रसर होंगे।
जय जय भवानी, नर्मदे हर।
1 month ago |[YT] | 43
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यदुकुल रीत⚔️
हर हर।
2 months ago |[YT] | 53
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यदुकुल रीत⚔️
मैसूर के बाद दूसरी समृद्ध यादव रियासत तथा तमिल क्षेत्र की 5वि समृद्ध रियासत है Ettayapuram।
5 months ago |[YT] | 97
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यदुकुल रीत⚔️
7 months ago |[YT] | 77
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यदुकुल रीत⚔️
https://youtu.be/prQQN791W18?si=_JDIx...
9 months ago |[YT] | 119
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यदुकुल रीत⚔️
2026 में संभावित प्रतिमा।
9 months ago (edited) |[YT] | 102
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यदुकुल रीत⚔️
बंदूक थामे यह प्रतिमा है उस गुमनाम यदुवंशी योद्धा की जिसने आज ही के दिन अंग्रेजो से संघर्ष करते हुए देश और सनातन धर्म की अक्षुण्णता हेतु वीरगति प्राप्त की थी।
वीर केसरी अमातुर बलप्पा का जन्म कर्नाटक के बेलगांव जिले में एक कन्नड़ सरदार यादव/Golla परिवार में हुआ था जिनके पूर्वज कित्तूर महाराजा के विश्वासपात्र सामंत थे। कन्नड़ Golla/Gawali यादवों की हणबर शाखा से संबंधित इतिहास अनुसार इस कुटुंब की निकासी महाराष्ट्र क्षेत्र से है जो द्वापर में भगवान श्री कृष्ण संग मथुरा से द्वारका आए थे।
🇮🇳1857 की क्रांति से 33 वर्ष पूर्व 1824 में कन्नड़ क्षेत्र से स्वतंत्रता की अग्नि प्रस्फुटित हुई जिसमें कित्तूर की वीरांगना महारानी चेन्नम्मा ने मल्लेच्छ अंग्रेजो के समक्ष समर्पण के बजाए संघर्ष करना स्वीकार किया। महारानी चेन्नम्मा के संग उनके प्रमुख सरदार श्री अमातुर बलप्पा, संगोली रायन्ना, गुरु सिद्दप्पा आदि सभी अंग्रेजो से युद्ध के लिए संकल्पद्ध हुए।
23 अक्टूबर 1824 को कित्तूर और अंग्रेजो की सेना प्रथम बार आमने सामने हुई जिसमें परास्त होता जान अंग्रेजो ने वीरांगना महारानी चेन्नम्मा को मारने के लिए षडयंत्र रचा किंतु सतर्क वीर बलप्पा ने अंग्रेज प्रमुख Thackeray को युद्धभूमि में ढेर कर दिया जिससे भयभीत अंग्रेज दल वापस लौट गया और इस प्रकार प्रथम संघर्ष में कर्नाटक अपनी स्वाधीनता स्थापित रखने में सफल हुआ।
⚔️पराजय से खिन्न अंग्रेजो ने 3दिसंबर 1824 को पुनः भारी थल बल के साथ कित्तूर दुर्ग पर आक्रमण किया। शुरुआती दौर में पुनः कन्नड़ सेना भारी पड़ी किंतु सत्ता लोलुपता में मदान्ध कुछ लालची लोगों ने अंग्रेजो के समक्ष गोपनीय रणनीतियां प्रकट कर दी और 4 दिसंबर को पुनः अंग्रेजो ने नेतृत्वकर्ता महारानी चेन्नम्मा को लक्ष्य किया किन्तु वीर बलप्पा कहां चूकने वाले थे, अपने प्राणों को दांव पर लगा महारानी की सुरक्षा के लिए बीच में आ डटे और सैंकड़ों गोलियों की बौछार अपने शरीर पर ले वीरगति को प्राप्त हो गए।
महारानी चेन्नम्मा ने मानो अपने नेत्र खो दिए और अंततोगत्वा षडयंत्र पूर्वक कन्नड़ हिन्दू सेना परास्त हो गई।
महारानी चेन्नम्मा को कैद कर लिया गया और 1829 में इन्होंने कैदावस्था में अंतिम श्वास ली।
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कन्नड़ इतिहास में वीर केसरी के नाम से प्रख्यात यादव समाज के राजनायक श्री अमातुर बलप्पा को इतिहास में वह उचित स्थान न मिल सका जिसके वे हकदार हैं।
#Rani_Chennamma
#kittoor #कर्नाटक #स्वतंत्रता
#AmaturBalappa #4December #Yadava #Golla #Gawali #Ahir
10 months ago |[YT] | 86
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