जगत जननी (Jagat Janani) का अर्थ है "पूरे जगत (संसार) की जननी यानी माता।" हिंदू धर्म और आध्यात्मिकता में यह शब्द परम शक्ति, देवी दुर्गा या आदि शक्ति के लिए प्रयुक्त किया जाता है।
यहाँ 'जगत जननी' के स्वरूप और महत्व को आसान शब्दों में समझाया गया है:
1. सृष्टि की रचयिता (The Creator)
शास्त्रों के अनुसार, माँ जगत जननी ही इस संपूर्ण ब्रह्मांड की मूल शक्ति हैं। उन्हीं से ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) को अपनी शक्तियाँ प्राप्त होती हैं। वे केवल जन्म देने वाली माँ नहीं हैं, बल्कि वे ही इस संसार का आधार हैं।
2. ममता और संरक्षण का प्रतीक
जैसे एक माँ अपने बच्चे की रक्षा करती है, वैसे ही जगत जननी अपने भक्तों और समस्त जीवों का पालन-पोषण करती हैं। जब भी संसार पर कोई संकट आता है या अधर्म बढ़ता है, वे भक्तों की पुकार पर विभिन्न रूपों (जैसे माँ दुर्गा, काली या लक्ष्मी) में प्रकट होकर बुराई का नाश करती हैं।
3. 'शक्ति' का स्वरूप
'जगत जननी' को आदि शक्ति भी कहा जाता है। विज्ञान की भाषा में जिसे हम 'Energy' कहते हैं, अध्यात्म में उसे ही 'शक्ति' या 'देवी' कहा गया है। उनके बिना संसार जड़ (निर्जीव) है; जय माता दी
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